खरगोन हिंसा: शिवराज सिंह चौहान क्या बुलडोज़र को चुनावी रथ बनाने की कोशिश कर रहे हैं

    • Author, विनीत खरे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

मध्य प्रदेश में खरगोन ज़िले में रामनवमी के दौरान हुई हिंसा, उसके बाद कुछ लोगों के घरों और दुकानों पर पड़ोसी राज्य यूपी की तर्ज़ पर बुलडोज़र चलवाने का फ़ैसला देश में चर्चा और बहस का मुद्दा बना हुआ है.

दंगे कैसे शुरू हुए, राज्य सरकार ने क्या सही किया, क्या ग़लत किया, ऐसे सवालों को निष्पक्ष तरीक़े से समझना जितना ज़रूरी है उतना ही कठिन भी. सभी पक्षों के बयानों को ग़ौर से देखने पर आप शायद किसी निष्कर्ष पर पहुँच सकें. पहले कुछ बयानों पर नज़र डाल लीजिए--

  • "जिन घरों से पत्थर आए हैं, उन घरों को पत्थर का ढेर बनाएंगे."- नरोत्तम मिश्रा, गृह मंत्री, मध्य प्रदेश
  • "सरकार को विंडिक्टिव (बदला लेने वाला) नहीं होना चाहिए. मैं इस कार्रवाई का समर्थन नहीं करता."-अरुण गुर्टू, पूर्व आपीएस अधिकारी
  • "भारतीय क़ानून में घर तोड़ना कोई सज़ा नहीं है और ये बात मध्य प्रदेश ही नहीं, सभी प्रदेशों पर लागू होती है." - अजय गुप्ता, वरिष्ठ वकील
  • "आप उन लोगों के घर चले जाइए जिनके घर जले हैं. उन लोगों के बीच में इतना आक्रोश है, इस कार्रवाई से उनको लगता है कि प्रशासन कुछ कर रहा है, प्रशासन हमारे साथ है."- अनुग्रह पी, खरगोन की ज़िलाधिकारी

इसी तरह खरगोन में रामनवमी के जुलूस में शामिल लोग कहते हैं कि उन पर अकारण हमला किया गया जबकि प्रत्यक्षदर्शी ये भी कहते हैं कि जुलूस में आपत्तिजनक गाने बजाए गए और भड़काऊ नारे लगाए गए.

रामनवमी के दिन की घटना

नरेंद्र वर्मा खरगोन ज़िले के आनंद नगर में रहते हैं और ठेले पर फल बेचते हैं. 10 अप्रैल को वह भी रामनवमी के मौके पर निकलने वाली शोभा यात्रा में शामिल थे. इसी शोभा यात्रा के दौरान हिंसा हुई थी जिसके बाद खरगोन में कर्फ़्यू लगा दिया गया.

नरेंद्र वर्मा के मुताबिक, इस यात्रा के दौरान डीजे पर भगवान के "सिंपल गाने चल रहे थे, न कि कोई ऐसा गाना जो विवादित हो."

उनके मुताबिक, अचानक यात्रा पर पत्थर फेंके जाने लगे. माहौल ख़राब होता देख उन्होंने घर का रुख़ किया लेकिन जाते वक़्त उनके चेहरे पर किसी ने पेट्रोल बम मार दिया.

नरेंद्र वर्मा ने फ़ोन पर बताया, "जिसने (मुझ पर पेट्रोल बम) मारा, उसका नाम नहीं मालूम. वो लोग पत्थर चला रहे थे. उनके हाथों में तलवार वगैरह थी. (वो) पेट्रोल बम, पत्थर फेंक रहे थे."

नरेंद्र वर्मा के मुँह पर कपड़ा लपेटकर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें कई घंटे रखा गया और उनके मुंह पर छह-सात टाँके लगे.

इस यात्रा में मौजूद भाजपा युवा मोर्चा के रवि वर्मा के मुताबिक, यात्रा में भगवान की झांकियां थी, साथ में "जो राम को लाए हैं, हम उनको लाएँगे..." जैसे गाने बज रहे थे, "न कि उकसाने वाला" गाना.

रवि वर्मा के मुताबिक, तालाब चौक मस्जिद के ऊपर से पत्थरबाज़ी शुरू हुई और दूसरे इलाकों जैसे गौशाला मार्ग, संजय नगर और इंदिरानगर इलाकों में फैल गई और उनके मुताबिक ये सब 'सुनियोजित' था.

लेकिन इसके बरअक्स एक स्थानीय मुस्लिम युवक ने बीबीसी से बातचीत में खुद को घटना का चश्मदीद बताया, उन्होंने कहा कि शोभा यात्रा में मौजूद लोग "आपत्तिजनक" नारे लगा रहे थे और डीजे पर "विवादित" गाने बज रहे थे.

अपना नाम न छापने का अनुरोध करते हुए उन्होंने बताया, "आपत्तिजनक नारों" में "हिंदुस्तान में रहना होगा, तो जय श्रीराम कहना होगा" जैसे नारे लग रहे थे.

उन्होंने बताया कि नारों और गानों के जवाब में मुसलमानों की ओर से "अल्लाह-उ-अक़बर के नारे" लगे. उनका दावा है, "पत्थर पहले जुलूस की ओर से फेंके गए" जिसके बाद भगदड़ मच गई.

उस दिन की हिंसा में कई लोगों को चोटें आईं जिनमें ज़िले के एसपी सिद्धार्थ चौधरी भी शामिल हैं जिनके पाँव में गोली लगी जो आर-पार हो गई.

अस्पताल से फ़ोन पर बातचीत में उन्होंने बताया कि उनकी तबीयत पहले से बेहतर है.

राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के मुताबिक, इस मामले में 92 लोग पुलिस हिरासत में हैं जिनमें 90-95 प्रतिशत मुसलमान हैं. हालांकि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरफ़्तार लोगों की संख्या 148 तक पहुंच गई है.

इस घटना में 20 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे जिसमें छह पुलिसकर्मी शामिल हैं.

दंगा, राजनीति और टाइमिंग

खरगोन में हिंसा किन परिस्थितियों में हुई, क्या ऐसा हुआ कि हिंसा काबू के बाहर हो गई, इसे लेकर पुलिस जाँच चल रही है, लेकिन इसे सामाजिक और राजनीतिक, दोनों पहलुओं पर चर्चा हो रही है. ये सब ऐसे वक्त में हो रहा है जब प्रदेश में चुनाव नज़दीक आ रहे हैं.

रामनवमी के दिन हिंसा की ख़बरें मध्य प्रदेश के बाहर गुजरात, गोवा, झारखंड और पश्चिम बंगाल से भी आईं लेकिन खरगोन में हिंसा के बाद जिस तरह स्थानीय प्रशासन ने कथित अवैध निर्माण के खिलाफ़ बुलडोज़र चलाए, उस पर सवालों की झड़ी लग गई है.

अख़बार 'द हिंदू' ने अपने संपादकीय में लिखा है- मध्य प्रदेश में 'दंगाई' घोषित किए गए लोगों की जायदाद का विध्वंस मुसलमानों को निशाना बनाने वाले एजेंडे का हिस्सा है.

लेकिन राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा कहते हैं कि खरगोन में कार्रवाई करते वक्त कोई धार्मिक भेदभाव नहीं किया गया.

वो कहते हैं, "ये मुसलमान वाली बात आप करते हैं, ओवैसी करते हैं, दिग्विजय सिंह करते हैं. हम दंगाइयों की बात करते हैं. हम हिंदू मुसलमान की बात नहीं करते. जो दंगाई हैं उन पर कार्रवाई होगी. हिंदू मुसलमान की बात वो करें जिन्हें राजनीति करनी है उस चीज़ पर... जिन्होंने दंगा किया है, वो किसी भी जाति के हो, ढहाया जाएगा."

सवाल ये भी उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का बुलडोज़र क्या राजनीतिक संदेश दे रहा है?

बुलडोज़र किसके घर पर चला?

खरगोन की डीएम अनुग्रह पी के मुताबिक प्रशासन की ओर से सरकारी ज़मीन पर बने दो या तीन घर और करीब 15 'गैरकानूनी' दुकानों को गिराया गया है.

गिराई गई दुकानों में नदीम शेख की तीन दुकानें थीं.

नदीम बताते हैं कि वे 11 अप्रैल, सोमवार को दिन के करीब 12 बजे खरगोन के चांदनी चौक इलाके के अपने घर में सपरिवार सो रहे थे कि तभी प्रशासन के लोग, जेसीबी बुलडोज़रों के एक दस्ते के साथ अचानक उनकी दुकानों को ढहाने लगे.

उन्होंने बीबीसी को उस वक्त की वीडियो भेजी जिसमें एक जेसीबी दुकानों को ढहाता दिख रहा है. साथ ही, सुरक्षाकर्मी और सड़क पर ढेर सारी गाड़ियां दिख रही हैं. उनका गत्ते के बक्सों का कारोबार है.

अब अपना घर छोड़कर रिश्तेदार के साथ रह रहे नदीम ने फ़ोन पर बताया, "रमज़ान चल रहा है. हम तो घर में सो रहे थे. ये पूरी टीम आ गई, शटर खोला और हमको बाहर कर दिया. बच्चे नंगे पैर घर से बाहर भागे. वहाँ जाने में डर लग रहा है अभी तो."

वो इनकार करते हैं कि दंगे में उनकी कोई भूमिका थी.

वो कहते हैं, "हम शिक्षित लोग हैं. मैंने एमबीए किया है, भाई ने बीएससी किया है. घर के सामने पुलिस चौकी लगती है, पुलिस वाले वर्षों से बैठते आ रहे हैं. हम उनको पूरा सहयोग देते हैं. जिस इलाके में हमारा घर है, वहाँ तो कोई विवाद भी नहीं हुआ था."

नदीम का घर इन दुकानों के पीछे था. उनके मुताबिक इन दुकानों को लेकर राजस्व विभाग के साथ कानूनी विवाद पिछले नौ-दस महीने से चल रहा था, और उनके पास दुकानों को गिराने से जुड़ा कोई नोटिस नहीं आया है.

नोटिस नहीं दिए जाने पर जब बीबीसी ने गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने पूछा तो उन्होंने कहा, "उनको नहीं मिला होगा, हमने दिया है." उनका कहना है कि घरों या दुकानों को गिराने में सभी कानूनी प्रक्रियाओं को पालन किया गया.

जब उनसे पूछा गया कि दुकानों को अवैध होने के कारण गिराया गया है या वे मकान उनके हैं जिन्हें सरकार दंगाई बता रही है, इस पर वो कहते हैं, "ये वो घर हैं जो नगरपालिका की नियम प्रक्रिया के तहत नहीं बने हैं और अतिक्रमण वाले भी हैं, और जहां कंबाइंड हो गए हैं, वो भी हैं (यानी कथित दंगाई जिन्होंने कथित अतिक्रमण किया हो)."

क़ानूनन सब कुछ कितना सही?

जब गृह मंत्री से पूछा गया कि क्या इस बात की जाँच की जा रही है कि भड़काऊ गाने बजाए गए और नारे लगाए गए, इसके जवाब में नरोत्तम मिश्रा पूछते हैं, "किसने कह दिया आपसे कि डीजे पर गाने चले? क्या गाना चला आपत्तिजनक? आरोप लगाने से नहीं होगा. विज़ुअल फुटेज है वहाँ. आप विजुअल फुटेज देखो."

इससे पहले मीडिया से बातचीत में नरोत्तम मिश्रा ने कहा था, "जिन घरों से पत्थर आए हैं, उन घरों को पत्थर का ढेर बनाएंगे."

घटना को लेकर अलग-अलग वीडियो शेयर हो रहे हैं. आरोप लग रहे हैं कि सरकार खुद ही गवाह, मुद्दई और मुंसिफ़ सबकी भूमिका निभा रही है और ये सवाल उठ रहे हैं कि कानूनी तौर पर ये कितना दुरुस्त है.

भोपाल में रहने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारी अरुण गुर्टू कहते हैं, "आपको (अतिक्रमण हटाने का) अधिकार ज़रूर है परंतु जो 15-20 साल से आपने कार्रवाई नहीं की और अचानक एक घटना हो गई तो उस आधार पर आपने तुरंत अपने अधिकार का उपयोग कर लिया, मेरे हिसाब से ये गलत मैसेज देता है. और सरकार को बड़ा दिल रखना चाहिए. सरकार को विंडिक्टिव (बदला लेने वाला) नहीं होना चाहिए."

भोपाल में वरिष्ठ वकील अजय गुप्ता कहते हैं कि भारतीय कानून में घर तोड़ना कोई सज़ा नहीं है, और ये बात मध्य प्रदेश सरकार के लिए नहीं सभी प्रदेश या पार्टियों के लिए लागू होती है.

वो कहते हैं, "हमारा कानून कहता है कि अगर कोई व्यक्ति अतिक्रमण कर भी रहा है, फिर भी उसे नोटिस दिया जाना चाहिए. ऐसा क्यों है कि सरकार ने पहले दंगाइयों की बात की और फिर जाकर घर तोड़ दिए?"

अजय गुप्ता कहते हैं, "अगर किसी ने अतिक्रमण किया है, तो आप उन्हें अतिक्रमण करने वाला बताइए. आप उन्हें दंगाई कहना चाहते हैं, फिर आप घर तोड़ कर उन्हें सज़ा देना चाहते हैं क्योंकि आपको लगता है कि वो दंगाई हैं."

वरिष्ठ वकील गुप्ता का कहना है, "जिस क्षण आप उन्हें नोटिस देंगे कि आपने अतिक्रमण किया है या फिर आपने कानून का उल्लंघन करके घर बनाया है तो हो सकता है कि ये व्यक्ति इसे अदालत में चुनौती दे, इसीलिए वो नोटिस नहीं देना चाहते."

इंदौर में वकील एहतशाम हाशमी कहते हैं, "पुलिस प्रशासन, सरकार जिस तरह से न्यायालय के काम में दखल दे रही है, खुद ही सज़ा देने का काम कर रही है, एक तरह से आपने ट्रायल का प्रोसेस ही खत्म कर दिया."

"आर्टिकल 21 कहता है कि बिना कानूनी कार्रवाई के सज़ा नहीं दी जाएगी. लेकिन आप आर्टिकल 21 का, सीआरपीसी का, आईपीसी का ख्याल नहीं कर रहे है. गैर-कानूनी इनक्रोचमेंट को भी ढहाना है तो आपको कानूनी नोटिस देना होगा. इनको भी अदालत जाने का वक्त मिलना चाहिए. ग़ैर-कानूनी तो बहुत सारी चीज़े हैं मध्य प्रदेश में."

खरगोन की डीएम अनुग्रह पी ने बीबीसी से कहा, "कार्रवाई करते वक्त सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया, यानी नोटिस भी दिए गए, अपील भी हुई और ये कार्रवाई ज़्यादातर दंगा प्रभावित इलाकों में हुई. अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया दोनो पक्षों के खिलाफ़ की गई है."

वो कहती हैं, "आप उन लोगों के घर चले जाइए जिनके घर जले हैं. उन लोगों के बीच में इतना आक्रोश है... तो इस कार्रवाई से उनको लगता है कि प्रशासन कुछ कर रहा है, प्रशासन हमारे साथ है."

कल के और आज के शिवराज

उत्तर प्रदेश में जिस तरह योगी आदित्यनाथ को बुलडोज़र के इस्तेमाल पर उन्हें 'बुलडोज़र बाबा' कहा जाने लगा है, उसी तर्ज़ पर शिवराज सिंह के समर्थक उन्हें 'बुलडोज़र मामा' कहने लगे हैं.

मार्च में भाजपा विधायक रमेश शर्मा ने 'बुलडोज़र मामा' के पोस्टर लगवाए और ट्वीट करके कहा था, "बेटी की सुरक्षा में जो बनेगा रोड़ा, मामा का बोलडोज़र बनेगा हथौड़ा."

पूर्व में शिवराज सिंह की छवि एक शांत राजनीतिज्ञ की रही है जो सबको साथ में लेकर चलने वाले नेता माने जाते रहे हैं. वो अपने आपको देश के बच्चों का मामा बताते थे और बच्चों को भांजा कहते थे.

भोपाल में वरिष्ठ पत्रकार रवि दुबे के मुताबिक, "शिवराज सिंह चौहान को अब लगता है कि उस छवि को लेकर वो बहुत आगे चल नहीं पाएँगे. और जो फार्मूला यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने लगाया जिसकी वजह से उनकी गूंज राष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दे रही है, उस फार्मूले को वो अपना रहे हैं."

खरगोन हिंसा पर समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में शिवराज सिंह चौहान ने कड़े शब्दों में कहा, "जिन्होंने पत्थर चलाए हैं, संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया है, उनको दंडित तो किया ही जाएगा, लेकिन चाहे सार्वजनिक संपत्ति हो, चाहे निजी संपत्ति हो, जितना नुकसान हुआ है, उसकी वसूली भी उनसे की जाएगी."

मार्च में एक भाषण में शिवराज सिंह चौहान ने कहा था, "गुंडागर्दी करने वालों मध्य प्रदेश की धरती पर तुम्हारा अस्तित्व मिटा दिया जाएगा, कुचल दिए जाएँगे."

दिसंबर 2020 के एक भाषण में वो अपराधियों को ज़मीन में गाड़ देने की बात करते सुनाई देते हैं.

छवि बदलने की शिवराज की कोशिश?

सीएसडीएस के संजय कुमार के मुताबिक, मज़बूत प्रशासक और कट्टर हिंदुत्व वाली छवि ने उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की मदद की थी.

संजय कुमार कहते हैं, "एक धर्म-विशेष के लोगों पर बुलडोज़र का इस्तेमाल ये संदेश देता है कि प्रशासक मुसलमानों के खिलाफ़ कार्रवाई करने से नहीं डरता."

प्रदेश गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा उत्तर प्रदेश की तरह मध्य प्रदेश में बुलडोज़र के इस्तेमाल को दोहराने की बात से इनकार करते हैं.

वो कहते हैं, "योगी जी के यहां कोई दंगा नहीं हुआ. चुनाव वाली सोच हमारी नहीं रहती है. चुनाव हम सेवा, विकास के आधार पर लड़ते हैं."

संजय कुमार के मुताबिक, "योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में चतुराई से मुसलमानों को कानून व्यवस्था के साथ जिस तरह जोड़ने की कोशिश की, ऐसा ही मध्य प्रदेश में भी दिख रहा है, ऐसे वक्त जब पिछले कुछ सालों में मुसलमानों को एंटी नेशनल के तौर पर पेश किया गया है."

वो कहते हैं, "कई वोटरों को ये भी लगता है कि प्रशासकों को दंगाइयों या एंटी-सोशल लोगों से निपटने के लिए ऐसा ही कुछ तरीका अपनाना चाहिए क्योंकि कोर्ट मुकदमे में जितना समय लगता है उससे कोई फायदा नहीं होता और सरकारी संसाधन और वक्त बर्बाद होते हैं और तुरंत न्याय होना चाहिए."

संजय कुमार कहते हैं, "योगी आदित्यनाथ के सरकार चलाने का जो स्टाइल था, उससे बीजेपी को बहुत चुनावी फायदा हुआ क्योंकि जनता उसे पसंद कर रही थी और जनता को लगता था कि यही सही तरीका है सरकार चलाने का."

उनके मुताबिक ऐसे माहौल में शिवराज सिंह चौहान को लगने लगा है कि इतने लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने के बावजूद उनकी चर्चा नहीं है.

वो कहते हैं, "उनको लगने लगा है कि चर्चा होने के लिए किसी तरह आपको न्यूज़ में होना चाहिए. आप सुर्खियों में रहें. सुर्खियों में रहने के लिए ज़रूरी हो गया है कि आप हार्डलाइनर दिखें."

पत्रकार रवि दुबे के मुताबिक शिवराज सिंह चौहान के लिए राज्य में लीडरशिप रोल के लिए सबसे बड़ी चुनौती ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरफ़ से पेश होगी और पिछला विधानसभा चुनाव हारने के बाद शिवराज सिंह संगठन में किनारे हो गए हैं.

रवि दुबे के मुताबिक ऐसे में जब चुनाव को करीब डेढ़ साल बचा है, छोटी जगहों पर छोटी बातों पर होनी वाली हिंसा से ध्रुवीकरण बढ़ा है.

शिवराज सिंह की छवि पर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा कहते हैं, "शिवराज जी की छवि मज़बूत है. 20 साल से वो सरकार में हैं. सेवा और विकास के माध्यम से जीतते हैं हम. जिन लोगों को गलतफ़हमी है वो दूर कर लें."

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