You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
देवघर रोप-वे हादसा: फँसे लोगों ने प्यास बुझाने के लिए मूत्र जमा किया था- प्रेस रिव्यू
हिन्दी अख़बार दैनिक भास्कर के रांची संस्करण में आज पहले पन्ने की लीड ख़बर देवघर के त्रिकूट पहाड़ पर स्थित रोप-वे हादसा है.
अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, रेस्क्यू ऑपरेशन तीसरे दिन, 45 घंटे बाद ख़त्म हो गया.
बचे हुए 15 लोगों में से 14 को सेना के जवानों ने सकुशल निकाल लिया, पर देवघर की शोभा देवी को नहीं बचा पाए.
अचानक रस्सी के छूट जाने से वो नीचे गिर गईं. तीन दिन के रेस्क्यू ऑपरेशन में 48 लोगों को सुरक्षित निकाला गया जबकि रेस्क्यू के दौरान दो लोगों की मौत हुई. मंगलवार को सुबह छह बजे सेना ने रेस्क्यू शुरू किया था. हेलिकॉप्टर से अंतिम ऑपरेशन एक बजे ख़त्म किया गया.
अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, सोमवार की शाम पाँच बजे से शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन 45 घंटे तक चलाया गया. मंगलवार को तीसरे दिन सात घंटे के क़रीब ऑपरेशन चला.
एयरफ़ोर्स के 60, सेना के 48 और आईटीबीपी के 48 जवानों ने हेलिकॉप्टर से 1500 फीट ऊंचाई पर पहुँचकर रोप-वे की तीन ट्रॉलियों में फंसे 15 को निकाल लिया. ऊंचाई और तेज हवा होने की वजह से यह सबसे मुश्किल रेस्क्यू हुआ.
रेस्क्यू के दौरान एक जवान के पैर में चोट लग गई. 45 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन में कुल 12 लोग घायल हुए जबकि तीन लोगों की मौत हुई.
पहले दिन ट्रॉली के पहाड़ से टकरा जाने से एक की मौत हुई थी जबकि सोमवार को एक व्यक्ति रेस्क्यू के दौरान गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई. इससे पहले सोमवार को सेना को रेस्क्यू करने में ख़ासी दिक्क़त आई, जिसके कारण सेना ने रणनीति बना फिर से बचाव कार्य शुरू किया.
तपती दोपहरी में प्यास बुझाने को मूत्र जमा किया
दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, एक रात और एक दिन तीन बाई चार फीट की ट्रॉली में लगभग 1000 फीट की ऊंचाई में फँसने वालों की मनोदशा ऐसी थी कि जब उन्हें सोमवार दोपहर तक पानी नहीं मिला तो उन्होंने अपने मूत्र तक बॉटल में जमा कर दिए. ट्रॉली में फंसे विनय कुमार ने बताया कि जब सोमवार को दोपहर तक पानी नहीं मिला तो लगा कि अब प्यास से ही मर जाएंगे.
इसलिए उन्होंने अपने मूत्र को बॉटल में जमा कर लिया. इसी तरह उनके परिवार के अन्य लोगों ने भी जमा किए. हालांकि थोड़ी देर में पानी पहुँच गया. वहीं देवघर के झोसामढ़ी के छठी लाल, जिन्हें सबसे अंत में रेस्क्यू किया गया, ने बताया कि पहली रात जो बीती थी वही सबसे भयानक थी. उनका पूरा परिवार फँसा हुआ था.
उन्होंने कहा, ''कुछ पता नहीं चल रहा था कि क्या होगा. मेरे दो पोते थे, जिनको लेकर मैं चिंतित था. लेकिन मंगलवार को जब मैंने अपने पोतो को रेस्क्यू करते देखा तो मुझे राहत मिली. हालांकि मेरी आंखों के सामने मेरी पत्नी गिर गईं, जिसका अफसोस है. मेरी तरह अन्य लोग भी थे उन्होंने काफ़ी प्रोत्साहित किया. हम सभी एक-दूसरे को हौसला बढ़ा रहे थे. यही वजह कि हम इतनी विकट परिस्थिति में अपना हौसला बनाए रखे.
हादसा कैसे हुआ?
दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, '' रोप-वे का संचालन करने वाली दामोदर रोपवेज एंड इन्फ्ऱा लिमिटेड के पूर्व कर्मचारियों ने चौंकाने वाली बातें बताईं. पूर्व कर्मचारियों ने कहा कि रोपवे चलाने का समय 10:22 बजे से शाम 4:20 बजे तक का है. लेकिन यह सुबह 9:00 बजे शुरू हो जाता है और शाम 6:00 बजे तक जारी रहता है. रोप-वे शुरू करने से पहले रोज डेढ़ घंटे तक मेंटेनेंस होना चाहिए. लेकिन कर्मचारियों की शिफ्ट सुबह 8:30 बजे शुरू होती है और नौ बजे रोप-वे शुरू हो जाता है.
भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व कर्मचारियों का कहना था कि इसके लिए मैनेजर विनीत सिन्हा ज़िम्मेदार हैं. वह हमेशा कहा करते थे कि दो साल कोरोना में रोप-वे बंद रहा. इसलिए आर्थिक नुक़सान की भरपाई करनी है. इसी भरपाई के दबाव में पहली बार रोप-वे को पूरी क्षमता के साथ चालू करा दिया गया जबकि उस दिन हवा भी तेज़ थी. हवा तेज़ रहने पर ट्रॉली की संख्या घटाने का मानक तय है लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
यही वजह है ज़्यादा दबाव की वजह से शॉफ्ट टूट गया और रस्सी खिसक गई. हालांकि सिम्फर से 17 फ़रवरी को रस्सी की जाँच करवाई थी. लेकिन बाकी मेंटेनेंस कंपनी को ही करना था. शॉफ्ट की जाँच भी कंपनी को करनी थी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. नतीजा यह रहा कि रस्सी तो ठीक रही और शॉफ्ट टूट गया. इसकी वजह से यह हादसा हुआ. यही नहीं, रेस्क्यू के दौरान कुछ ट्रॉलियों में पाँच तो कुछ में सात लोग पाए गए. वहीं ग्रामीणों का भी कहना है कि यहाँ ठीक ढंग से मेंटेनेंस होता ही नहीं है. उधर, मैनेजर फरार हैं.
पंजाब की भगवंत मान सरकार एक महीने में ही विवाद में घिरी
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बने मुश्किल से एक महीना हुआ है और राजनीतिक विवाद में फँसती दिख रही है.
अंग्रेज़ी अख़बार इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के अधिकारियों की बैठक दिल्ली में की थी और इसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री भगवंत मान नहीं थे.
विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि पंजाब की सरकार आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल के नियंत्रण में है. विपक्षी पार्टियों ने सवाल उठाया है कि अरविंद केजरीवाल किसी हैसियत से पंजाब के अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं.
सोमवार को अरविंद केजरीवाल ने नई दिल्ली में पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के शीर्ष के अधिकारियों के साथ बैठक की थी.
इसी को लेकर विवाद हो रहा है. इस बैठक में पंजाब के मुख्य सचिव और बिजली विभाग के सचिव भी मौजूद थे. इस बैठक के कारण विरोधियों के घेरने का मौक़ा मिल गया है. पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने से पहले ही विपक्षी पार्टियाँ कहती थीं कि अगर आप की सरकार बनी तो केजरीवाल दिल्ली से कंट्रोल करेंगे.
पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू ने ट्वीट कर कहा है, ''मुख्यमंत्री भगवंत मान की ग़ैरमौजूदगी में अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के आईएस अधिकारियों को समन किया. इससे पता चलता है कि असली मुख्यमंत्री कौन है. पंजाब की सरकार रिमोट कंट्रोल से चल रही है. यह भारत की संघीय व्यवस्था का खुलेआम उल्लंघन है और पंजाब के गौरव का अपमान है. दोनों के इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देना चाहिए.''
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है, ''जैसी आशंका थी, केजरीवाल ने वही किया. केजरीवाल ने पंजाब को अपने नियंत्रण में रखा है.'' कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने ट्वीट में कहा है कि भगवंत मान महज़ रबर स्टांप हैं.
इकनॉमिक टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के दिल्ली दौरे से पहले ही अधिकारियों की बैठक हुई है. पंजाब के चुनाव अभियान में आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने पर 300 यूनिट बिजली मुफ़्त में देने की घोषणा की थी. पिछले एक महीने से पार्टी सत्ता में है लेकिन अभी तक यह वादा पूरा नहीं हुआ है. आप ने 1000 रुपए प्रति महीने प्रदेश की सभी महिलाओं को देने की घोषणा की थी और यह वादा भी ज़मीन पर नहीं उतर पाया है.
कहा जा रहा है कि इस मुद्दे पर सोमवार की बैठक में बात हुई थी. मान की मुलाक़ात मंगलवार को अरविंद केजरीवाल से हुई थी. उन्होंने इस मुलाक़ात के बाद उन्होंने ट्विटर पर लिखा था कि पंजाब के लोगों के लिए जल्द की ख़ुशख़बरी आने वाली है. अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, आप ने दिल्ली में बैठक की आलोचना का जवाब नहीं दिया है.
आप के प्रवक्ता मालविंदर सिंह कांग ने चंडीगढ़ में पत्रकारों से कहा, ''अरविंद केजरीवाल राष्ट्रीय समन्वयक हैं. हम हमेशा उनसे मार्गदर्शन लेते हैं. अगर पंजाब की बेहतरी के लिए कोई रचनात्मक अनौपचारिक बैठक होती है तो इसमें बुराई क्या है? विपक्ष को आलोचना के बदले समर्थन करना चाहिए.''
सहकारी संस्थाओं में चुनाव पारदर्शी तरीक़े से हो- अमित शाह
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि सहकारी संस्थाओं में चुनाव लोकतांत्रिक और पारदर्शी तरीक़े से होने चाहिए. अमित शाह ने सहकारी संस्थाओं में चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग की तर्ज़ पर एक निकाय बनाने का भी सुझाव दिया है. अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने इस ख़बर को प्रमुखता से जगह दी है. मोदी सरकार में सहकारिता मंत्रालय बनाया गया था और अमित शाह देश के पहले सहकारी मंत्री बनाए गए थे.
अमित शाह ने नई दिल्ली में सहकारी नीति पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ''देश के विकास में सहकारिता क्षेत्र का अहम योगदान है. सहकारिता के इस मज़बूत बेस पर हमें भव्य इमारत बनानी है और इसमें जो बाधाएं हैं, उन्हें सामंजस्य और नए प्रावधानों से दूर करना है. यह तभी हो सकता है, जब समग्रता के साथ आज की सभी ज़रूरतों को पूरा करने वाली नई सहकारी नीति बने.''
अमित शाह ने कहा, ''लाभ का एक समान वितरण शेयरधारकों तक पहुँचे और प्रबंधन पर खर्च भी न्यूनतम हो, ऐसा केवल सहकारिता के माध्यम से हो सकता है. सहकारिता ही एकमात्र ऐसा मॉडल है, जो देश के करोड़ों ग़रीबों को आर्थिक रूप से संपन्न बना सकता है. हमें सहकारिता आंदोलन को वर्तमान और भविष्य की चुनौतियां के लिए तैयार करना होगा, सहकारिता क्षेत्र को पारदर्शी बनाना होगा. हमें चुनाव में लोकतांत्रिक मूल्यों को स्वीकारना होगा तब जाकर संभावनाओं को सही मंच मिलेगा और जब तक संभावनाओं को मंच नहीं मिलता, कोई क्षेत्र प्रगति नहीं कर सकता.''
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)