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रूसी विदेश मंत्री से पहले अमेरिका के भारतीय मूल के अधिकारी का दौरा, क्या है मक़सद
अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (डिप्टी एनएसए) दलीप सिंह दो दिन के दौरे पर भारत आ रहे हैं.
भारतीय मूल के दलीप सिंह ने रूस के ख़िलाफ़ कड़े आर्थिक प्रतिबंध लागू करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. व्हाइट हाउस ने मंगलवार को बताया था कि दलीप सिंह 30 और 31 मार्च को भारत दौरे पर रहेंगे.
अमेरिका के शीर्ष अधिकारी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब यूक्रेन पर रूस के हमले के कारण कई पश्चिमी देशों ने रूस से संबंध तोड़ लिए हैं लेकिन भारत ने अपने रिश्ते बरक़रार रखे हैं.
कड़े वैश्विक आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद रूस के साथ भारत ने व्यापार भी जारी रखा हुआ है.
व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा काउंसिल की प्रवक्ता एमिली हॉर्न ने बताया कि यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस के 'अनुचित युद्ध' पर दलीप सिंह इसके परिणामों और विश्व अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव को लेकर अपने समकक्षों के साथ चर्चा करेंगे.
हॉर्न ने बताया कि बाइडन प्रशासन के अधिकारी इंडो-पैसिफ़िक इकोनॉमिक ढांचे के साथ-साथ आर्थिक संबंधों और रणनीतिक साझेदारी पर भी चर्चा करेंगे.
रूस के विदेश मंत्री भी आ रहे भारत
अमेरिका के शीर्ष अधिकारी के भारत दौरे के दौरान ही रूस के विदेश मंत्री भारत दौरा करने वाले हैं.
रूस और अमेरिका के इतने बड़े अधिकारियों के इस दौरे को भारत के लिहाज़ से काफ़ी महत्वपूर्ण समझा जा रहा है. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ शुक्रवार को भारत पहुंच सकते हैं लेकिन इसकी अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
माना जा रहा है कि लावरोफ़ अपने भारतीय समकक्ष एस. जयशंकर के साथ मुलाक़ात करेंगे.
अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि लेवरोफ़ के इस दौरे के दौरान यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध और तेल ख़रीद पर चर्चा होगी.
रिपोर्ट में बताया गया है कि लेवरोफ़ यूक्रेन के ख़िलाफ़ लड़ाई की जानकारी दे सकते हैं साथ ही भारत को तेल में डिस्काउंट देने पर भी चर्चा कर सकते हैं. वैश्विक प्रतिबंधों के बावजूद भारत रूस से तेल ख़रीद रहा है और वो चाहता है कि उसे तेल में डिस्काउंट भी दिया जाए.
इस सप्ताह रूस के केंद्रीय बैंक की एक टीम भारत का दौरा करने जा रही है जिसमें वो भारतीय और रूसी बैंकों के बीच भुगतान के तंत्र पर चर्चा करने जा रहे हैं. इसमें रुपये-रूबल लेनदेन को भी अंतिम रूप दिया जा सकता है.
रूस पर भारत के रुख़ से असंतुष्ट
लावरोफ़ के भारत दौरे को लेकर चर्चाएं तेज़ हैं. सोमवार को इंडो-पैसिफ़िक के यूरोपीय संघ के विशेष दूत गैब्रिएल विसेंटाइन भारत दौरे पर पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने लावरोफ़ के दौरे पर भी अपनी बात कही.
विसेंटाइन ने 'द हिंदू' से कहा था कि यूरोपीय संघ भारत के मतदान के दौरान उपस्थित न रहने से 'ख़ुश नहीं है.' उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ नई दिल्ली से नहीं कह सकते कि क्या करना है.
उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ 'ऐसे किसी भी काम का स्वागत नहीं करेगा जो रूस के ख़िलाफ़ अमेरिका के, उसके साझेदारों के और यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों को दरकिनार करने में मदद करे.'
दलीप सिंह कौन हैं
46 साल के डिप्टी एनएसए दलीप सिंह, दलीप सिंह सौंद के परपोते हैं जो कि अमेरिकी संसद में चुने जाने वाले पहले एशियाई-अमेरिकी थे.
दलीप सिंह ने एमबीए के साथ-साथ इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स में मास्टर ऑफ़ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन किया है. उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी और हार्वर्ड केनेडी स्कूल से पढ़ाई की है.
ओबामा प्रशासन के दौरान वो ट्रेज़री फ़ॉर इंटरनेशनल अफ़ेयर्स में डिप्टी असिस्टेंट सेक्रेटरी और ट्रेज़री फ़ॉर फ़ाइनैंशियल मार्केट्स में एक्टिंग असिस्टेंट सेक्रेटरी थे.
बाइडन प्रशासन में रूस के ख़िलाफ़ आर्थिक प्रतिबंधों को लागू करने में दलीप सिंह की अहम भूमिका रही है. इन प्रतिबंधों के कारण रूस की अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ा है.
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