पेट्रोल-डीजल के दाम चार महीने बाद बढ़े, सोशल मीडिया से लेकर संसद तक हंगामा

भारत में चार महीने बाद पेट्रोल-डीज़ल के दामों में बढ़ोतरी हुई है. हालांकि, इसकी उम्मीद पांच राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद से ही की जा रही थी. मंगलवार से बढ़े हुए दाम लागू होंगे. दाम बढ़ने के साथ ही सोशल मीडिया से लेकर संसद तक इसका असर दिखने लगा है.

मंगलवार से पेट्रोल और डीज़ल के दामों में 80 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है. वहीं, घरेलू गैस की कीमत भी 50 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ा दी गई है.

इसी महीने अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें 13 साल के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी, जिसके बाद भारतीय रुपये में भी गिरावट आई थी. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से ब्रेंट क्रूड की कीमत 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी. हालांकि, अब ये 118.59 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई है.

हंगामे से संसद की कार्यवाही रुकी

मंगलवार को राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने के एक घंटे बाद ही स्थगित हो गई. कांग्रेस, टीएमसी सहित सभी विपक्षी पार्टियों ने पेट्रोल-डीज़ल और एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ने को लेकर विरोध जताया.

टीएमसी सदस्य तख्तियां लेकर सदन के वेल में पहुंच गए. उधर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, लेफ्ट और शिवसेना के सांसद भी खड़े होकर नारेबाज़ी करते रहे. भारी हंगामे के बीच उपसभापति वेंकैया नायडू ने सांसदों को चेतावनी भी दी लेकिन नारेबाज़ी जारी रही. आखिरकार राज्यसभा की कार्यवाही 2 घंटे के लिए स्थगित कर दी गई.

वहीं, लोकसभा में भी विपक्ष ने पेट्रोल-डीज़ल के बढ़े दाम वापस लेने की मांग पर भारी हंगामा किया और बाद में सदन से वॉकआउट कर गया. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सदन में एनसीपी और कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा और सवाल किया कि जब रूस से "भारी छूट" पर तेल खरीदा जा रहा है तो कीमत बढ़ाने की क्या ज़रूरत है.

किसनेक्या कहा?

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ाकर मोदी सरकार जनता का 10,000 करोड़ रुपये अपनी जेब में डाल रही है. बहुत से लोग कह रहे हैं कि यूक्रेन-रूस संकट की वजह से कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक हम रूस से अपनी ज़रूरत का 1 प्रतिशत भी कच्चा तेल नहीं खरीदते."

राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित होने को लेकर खड़गे बोले, "हमारी पार्टी की ओर से 267 का नोटिस पहले ही दिया गया था, जिसे हम सदन में उठा रहे थे तब अध्यक्ष ने कार्यवाही एक घंटे के लिए स्थगित कर दी. जो भी आवश्यक चीज़ें हैं, उनकी क़ीमत बढ़ा दी गई है."

कांग्रेस नेता और सांसद राहुल गांधी ने तंज़ भरे अंदाज़ में ट्वीट किया, "गैस, डीज़ल और पेट्रोल के दामों पर लगा लॉकडाउन हट गया है. अब सरकार लगातार कीमतों का विकास करेगी. महंगाई की महामारी के बारे में प्रधानमंत्री जी से पूछिए, तो वो कहेंगे थाली बजाओ."

लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, "हमने कहा था कि विधानसभा चुनाव के बाद तेल की कीमतें तेज़ी से बढ़ेंगीं. हम सही साबित हुए. मोदी सरकार ग़रीबों को लूटने का मौका नहीं छोड़ती. हम आम जनता की खातिर लोकसभा के अंदर और बाहर इसके ख़िलाफ़ खड़े हैं."

समाजवादी पार्टी की सांसद और अभिनेत्री जया बच्चन ने भी बीजेपी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, "सरकार ऐसा ही करती है. अखिलेश यादव ने अपने चुनावी अभियान में लगातार कहा कि आप लोगों को सतर्क रहना चाहिए, चुनाव के बाद दाम बढ़ेंगे. मैं नहीं जानती इन्हें (बीजेपी) कौन सत्ता में लाया है."

4 नवंबर के बाद बढ़े दाम

पेट्रोल और डीजल के दामों में 137 दिनों के बाद बढ़ोतरी की गई है. मंगलवार से दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 96.21 रुपये हो गई है. जबकि डीजल 87.47 रुपये प्रति लीटर मिलेगा. पहले पेट्रोल के दाम 95.41 रुपये प्रति लीटर थे और डीजल की कीमत 86.67 रुपये प्रति लीटर थी.

जून 2017 से भारत में पेट्रोल की कीमतें रोज़ाना अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दामों के आधार पर तय होती हैं.

लेकिन 4 नवंबर, 2021 के बाद से भारत में पेट्रोल-डीज़ल के दाम स्थिर थे. उस समय नरेंद्र मोदी सरकार ने पेट्रोल पर पांच रुपये प्रति लीटर और डीज़ल पर 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज़ ड्यूटी घटाई थी. इसके बाद अधिकतर राज्य सरकारों ने भी स्थानीय सेल्स टैक्स या वैट घटा दिए थे.

टैक्स में कटौती से पहले भारत में पेट्रोल की कीमतें अपने रिकॉर्ड उच्चतम स्तर यानी 110.04 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल के दाम 98.42 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गए थे.

लेकिन पांच नवंबर को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बिकने वाले कच्चे तेल ब्रेंट क्रूड की कीमत 82.74 डॉलर प्रति बैरल थी. दिसंबर में ये दाम रिकॉर्ड स्तर तक गिरकर 68.87 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचे थे.

इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल के दाम बढ़ने शुरू हुए और इस माह ब्रेंट क्रूड 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा. हालांकि, मंगलवार को ब्रेंट क्रूड का दाम 118.59 डॉलर प्रति बैरल रहा.

भारत अपनी तेल ज़रूरत का 85 फ़ीसदी हिस्सा दूसरे देशों से ख़रीदता है. इसकी वजह से तेल के दाम बढ़ने का एशिया के जिन देशों पर सबसे ज़्यादा असर होता है उनमें भारत भी शीर्ष पर है.

आम लोगों की क्या राय है?

नेताओं से इतर पेट्रोल डीज़ल और घरेलू गैस की कीमत में इज़ाफे को लेकर सोशल मीडिया पर आम लोगों की भी मिली-जुली राय देखने को मिल रही है. कुछ लोग कह रहे हैं.

गुलविंदर सिंह नाम के एक ट्विटर यूज़र ने लिखा है, "जिस तरह से गैस सिलेंडर के दाम बढ़ रहे हैं, वैसे में जल्द ही फिर से चूल्हे पर खाना बनाया जाने लगेगा."

एक अन्य ट्विटर यूज़र ने तो जीडीपी का नया फ़ुल फ़ॉर्म ही बता दिया है- गैस, डीज़ल और पेट्रोल.

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