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यूक्रेन के राजदूत के मुग़ल-राजपूतों वाले बयान पर ओवैसी की आपत्ति
यूक्रेन पर रूस के हमले के बीच भारत में यूक्रेन के राजदूत इगोर पोलिखा का एक बयान सुर्खियों में है.
मंगलवार को इगोर पोलिखा ने यूक्रेन में रूसी हमले की तुलना मध्यकालीन भारत में राजपूतों के ख़िलाफ़ मुग़लों के कथित जनसंहार से किया है.
यूक्रेन के खारकीएव शहर में रूसी हमले में एक भारतीय छात्र की मौत के बाद मंगलवार को पोलिखा नई दिल्ली स्थित भारतीय विदेश मंत्रालय पहुंचे थे.
उन्होंने इसी दौरान पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही थी. उन्होंने कहा था कि वह दुनिया के सभी प्रभावी नेताओं से, जिनमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं, ये आग्रह करते हैं कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन को रोकें.
मीडिया से बात करते हुए यूक्रेनी राजदूत ने कहा था, ''रूस का हमला, मुग़लों ने राजपूतों का जिस तरह से जनसंहार किया था, वैसा ही है. मैं दुनिया के सभी प्रभावी नेताओं से अपील करता हूँ कि पुतिन के ख़िलाफ़ सभी संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए, हमला रोकें. मैं मोदी जी से भी अपील करता हूँ.''
यूक्रेन के राजदूत की मुग़लों वाली टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ''मान्यवर भारत के मध्यकालीन इतिहास का आधा-अधूरा ज्ञान अपने पास ही रखें. इसमें इस्लामोफ़ोबिया की बू आती है. जो चल है, उसे ग़लत तरीक़े से पेश मत कीजिए. मैं हैरान हूँ कि नरेंद्र मोदी का ध्यान ख़ींचने के लिए उन्हें मुग़लों के इस्तेमाल का आइडिया कहाँ से आया?''
स्वीडन में पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट रिसर्च के प्रोफ़ेसर अशोक स्वाइन ने यूक्रेन के राजदूत की मुग़लों वाली टिप्पणी पर अपने ट्वीट में लिखा है, ''अच्छा होता कि वह दक्षिणपंथी हिन्दुओं वाली भाषा का इस्तेमाल नहीं करते.''
हालाँकि यूक्रेन के राजदूत ने जो बयान दिया है, उस बारे में जानकारों की राय अलग रही है.
भारत के जाने-माने इतिहासकार हरबंस मुखिया ने बीबीसी हिन्दी से कहा था, ''मध्यकालीन भारत का एक दिलचस्प तथ्य यह है कि मुग़ल बादशाहों में या उसके पहले सल्तनतों से राजपूतों की 300 साल तक लड़ाइयां चलती रहीं. जब मुग़ल आए तो उन्होंने राजपूतों को अपने साथ मिला लिया. अकबर के सबसे बड़े विश्वासपात्र राजा मान सिंह थे.''
''औरंगज़ेब के ज़माने में जो सबसे ऊंचे मनसबदार थे वो महाराजा जसवंत सिंह और महाराजा जय सिंह थे. मराठे भी भरे हुए थे. उस ज़माने में इसे हिंदू बनाम मुस्लिम कभी नहीं देखा गया. मुगलों में और राजपूतों में लड़ाइयां हुई हैं, मुगलों में और सिखों में हुईं, मुगलों और मराठों में हुई, मुगलों और जाटों में हुई हैं. इन लड़ाइयों में ख़ून-ख़राबा हुआ लेकिन पूरे 550 सालों में जिसको जेम्स मिल ने मुस्लिम शासनकाल कहा था उसमें एक भी सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ था.''
इस पहले जिस दिन रूस ने यूक्रेन पर हमले की घोषणा की थी, उस दिन दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए यूक्रेन के राजदूत ने कहा था, ''भारत की कूटनीति कौटिल्य, चाणक्य के ज़माने से है. तब यूरोप में कोई सभ्यता भी नहीं थीं. भारत सालों से वैश्विक ताक़त रहा है. भारत गुटनिरपेक्ष आंदोलन का अगुआ रहा है.''
भारत यूक्रेन पर रूसी हमले के मामले में किसी का पक्ष नहीं ले रहा है. अमेरिका के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के ख़िलाफ़ जितने प्रस्ताव लाए गए, उनकी वोटिंग से भारत बाहर रहा है.
हालांकि भारत हिंसा तत्काल बंद करने की अपील कर रहा है. भारत ने यह भी कहा है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान होना चाहिए. हालाँकि भारत ने रूस की निंदा नहीं की है.
यूक्रेन में अब भी बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं. भारत ने यूक्रेन में मानवीय मदद भी भेजना शुरू किया है. यूक्रेन के राजदूत ने भारत के इस फ़ैसले का स्वागत किया है. पोलिखा ने यूक्रेन में एक भारतीय छात्र की मौत पर दुख जताया है.
इससे पहले यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद वहाँ फँसे कुछ भारतीय मेडिकल छात्रों ने आरोप लगाया था कि पोलैंड से सटे यूक्रेनी चेकपोस्ट पर उनसे दुर्व्यवहार किया गया था.
अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के अनुसार, भारतीय छात्रों ने कहा था कि उन्हें लगभग बंधकों जैसी स्थिति में रखा गया और जमा देने वाली ठंड में भी खाना और पानी तक के लिए तरसना पड़ा.
छात्रों का आरोप है कि उनके साथ ये बर्ताव इसलिए किया गया क्योंकि भारत ने यूक्रेन पर रूसी हमले के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र में पेश किए गए प्रस्ताव पर वोटिंग से दूरी बनाई. छात्रों ने ऐसे वीडियो भी शेयर किए हैं जिनमें सैनिकों को हवा में गोलियां चलाते और छात्रों को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग करते देखा गया है.
एक अन्य वीडियो क्लिप में एक यूक्रेनी गार्ड एक भारतीय लड़की को दूर धकेलता दिखता है. ये लड़की सैनिक के पैरों में गिरकर उनसे सीमा पार करने देने की गुहार लगा रही है. कुछ छात्रों का कहना है कि यूक्रेन के लोग भी अब उनके विरोधी हो गए हैं.
(कॉपीः रजनीश कुमार)
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