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रेलवे ग्रुप 'डी' की परीक्षा एक बार में करवाने को तैयार हो सकता है: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव
- Author, सरोज सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
रेलवे भर्ती परीक्षा पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज बड़ा एलान किया है.
बीबीसी को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को कहा है कि रेलवे ग्रुप 'सी'- लेवल 1 की परीक्षा एक बार में कराने को तैयार है, बशर्तें कमेटी ऐसी सिफ़ारिश करती है तो. आम भाषा में छात्र इसी परीक्षा को ग्रुप 'डी' की परीक्षा कह रहे हैं. उत्तर प्रदेश और बिहार में रेलवे भर्ती परीक्षा से नाराज़ छात्र रेलवे से यही माँग कर रहे थे.
उनकी दो अहम माँगें हैं-
पहली माँग, RRB NTPC परीक्षा में 20 गुना रिज़ल्ट जारी किया जाए और दूसरी माँग, ग्रुप 'डी' की परीक्षा दो के बजाए एक चरण में हो. अब छात्रों की दूसरी माँग पर रेल मंत्री ने नरमी के संकेत दिए हैं.
ग्रुप 'सी'- लेवल 1 की परीक्षा
दरअसल छात्रों की नाराज़गी की वजह से फ़िलहाल रेलवे ने ग्रुप 'सी'- लेवल 1 की परीक्षा की तारीख़ आगे बढ़ा दी है. पहले ये परीक्षा 23 फ़रवरी, 2022 को होने वाली थी और वो भी दो चरण में.
ग्रुप 'सी'- लेवल 1 की परीक्षा के लिए साल 2019 में रेलवे ने एक लाख नौकरियों के लिए अर्जी मांगी थी. इसके लिए क़रीब सवा करोड़ छात्रों ने आवेदन किया था.
रेलवे का तर्क था कि बहुत ज़्यादा संख्या में आवेदन आने के चलते उन्होंने इस परीक्षा को दो चरणों में कराने का फ़ैसला लिया था. इससे छात्र काफ़ी नाराज़ थे और कई ट्रेनों में आग लगा दी थी और रेल पटरी जाम कर दी थी.
छात्रों का तर्क था कि ये बहुत कम सैलरी वाली पोस्ट हैं. रेलवे की ये भर्ती परीक्षा चार साल बाद निकली है और उसमें भी आवेदन देने और परीक्षा होने के बीच दो साल का वक़्त ग़ुजर चुका है. छात्रों का कहना है कि दो साल पहले, परीक्षा दो चरण में होगी, ये बात बता दी गई होती तो तैयारी के लिए छात्रों को वक़्त मिलता.
RRB-NTPC परीक्षा
छात्रों की दूसरी नाराज़गी RRB-NTPC परीक्षा को लेकर थी, जिसमें वो चाहते हैं कि कुल वैकेंसी का 20 गुना रिज़ल्ट पहले चरण में घोषित किया जाए और एक छात्र का एक रिज़ल्ट हो.
जबकि सरकार का दावा है कि 20 गुना रिज़ल्ट तो उन्होंने निकाला है, लेकिन एक छात्र के लिए एक रिज़ल्ट नहीं है, बल्कि एक रोल नबंर के लिए एक रिज़ल्ट निकाला गया है.
RRB-NTPC यानी 'रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड नॉन टेक्निकल पॉपुलर कैटेगरी' परीक्षा में अलग-अलग पे-ग्रेड पर, क़रीब 35 हज़ार नौकरियों के लिए वैकेंसी निकली थी.
छात्रों की नाराज़गी को दूर करने के लिए रेलवे ने 26 जनवरी को पाँच सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो आरआरबी-एनटीपीसी (RRB-NTPC) और लेवल 1 की परीक्षा में पास हुए और फ़ेल हुए छात्रों से बात कर, अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगी.
कमेटी को 4 मार्च तक का समय दिया गया है.
बीबीसी से बातचीत में रेल मंत्री ने कहा कि पिछले पाँच दिनों में एक लाख छात्रों ने कमेटी को अपने सुझाव दिए हैं. छात्र इस कमेटी को 16 फ़रवरी तक अपने सुझाव भेज सकते हैं.
छात्रों ने क्यों किया था प्रदर्शन?
आरआरबी-एनटीपीसी परीक्षा को दो स्तरीय करने के मनमाने फ़ैसले के ख़िलाफ़ बिहार और उत्तर प्रदेश के छात्रों ने बीते महीने की 24 तारीख़ से बड़े स्तर पर उग्र प्रदर्शन किया.
दरअसल रेलवे ने साल 2019 में ऐन चुनाव (लोकसभा चुनाव) के वक़्त एनटीपीसी के माध्यम से 35,308 पोस्टों के लिए और ग्रुप डी के लिए लगभग एक लाख तीन हज़ार पोस्टों के लिए आवेदन मंगाया. फ़रवरी-मार्च में छात्रों ने फ़ॉर्म भरा. अप्रैल-मई में नई सरकार बन गई. जुलाई तक परीक्षा लेने की संभावित तारीख़ दी गई थी. लेकिन साल 2019 में परीक्षा नहीं ली गई.
ग्रुप सी, लेवल-1 की परीक्षा के लिए भी साल 2019 में क़रीब एक लाख नौकरियों के लिए आवेदन मांगे गए थे. क़रीब 1 करोड़ 15 लाख आवेदनों की वजह से फ़िलहाल इसके लिए एक भी चरण की परीक्षा नहीं हो पाई है.
रेलवे का कहना है कि कम पद पर, बहुत अधिक आवेदन आने से उनकी दिक़्क़त बढ़ गई. इस समस्या से निपटने के लिए रेलवे ने इस कैटेगरी की परीक्षा को दो चरणों में करवाने का फ़ैसला किया है.
25 जनवरी को प्रदर्शन के दूसरे दिन बिहार के आरा-सासाराम पैसेंजर ट्रेन की कई बोगियों की खिड़कियों को तोड़ने और आग लगाने की घटना हुई. इस दौरान छात्र पूरी तरह बेकाबू हो गए और उन्होंने स्टेशन परिसर में जमकर हंगामा किया. छात्रों के उग्र प्रदर्शन के कई वीडियो सामने आए और उस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर बल प्रयोग किया.
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