उत्तर प्रदेश चुनाव: मुज़फ़्फ़रनगर में जब महिलाओं ने बीबीसी टीम को रोका और बोलीं...

    • Author, वात्सल्य राय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुज़फ़्फ़रनगर

"सुनो, एक सिलेंडर वाली बात है. कितना महंगा सिलेंडर कर रखा है सरकार ने."

रीना की ढेरों शिकायतों में से एक शिकवा ये भी था. उनके साथ ही बैठी गीता के पास भी था समस्याओं और शिकायतों का पिटारा.

माइक उनकी तरफ घूमा तो वो बोलीं, "बस ये सोचकर वोट देने जाएंगे कि हम जिसे वोट देंगे. वो हमारा साथ देवे और एक तो हमारी गली को अच्छा कर देवे."

ये दोनों महिलाएं काकड़ा गांव की रहने वाली हैं. ये गांव पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले में है और 'पर्दा' अब भी यहां चलन में है. गांव की गलियों में, सड़कों पर महिलाएं ख़ूब दिखती हैं.

कई महिलाएं रोज़मर्रा के काम करती भी नज़र आती हैं लेकिन गांवों में अधिकांश महिलाओं के लिए घूंघट या बुर्का पहनावे का ज़रूरी हिस्सा नज़र आता है.

कई बार, कुछ महिलाएं राजनीतिक विमर्श या कैमरे पर अपनी बात कहने में भी संकोच करती हैं या मना कर देती हैं.

ऐसा तब है कि जब कांग्रेस 40 फ़ीसदी टिकट महिलाओं को देने की दिशा में जुटी हुई है.

बीजेपी अपने साथ आई अपर्णा यादव, अदिति सिंह और कांग्रेस की पोस्टर गर्ल रही प्रियंका मौर्य जैसी नेताओं को आगे कर 'सुरक्षा और सम्मान' के मोर्चे पर ख़ुद को अव्वल बताने की कोशिश में है.

दूसरी पार्टियां भी महिलाओं को लेकर कई दावे कर रही हैं.

'नेताओं के नाम महिलाओं का संदेश'

बीबीसी की टीम वोटरों का मूड भांपने के लिए इस गांव पहुंची. गांव के लोगों से बातचीत का सीधा प्रसारण किया गया. उस वक़्त कोशिश थी कि अगर कुछ महिलाएं आएं तो उन्हें भी अपनी बात रखने का मौका मिल सकता है. लेकिन, ऐसा हो नहीं सका.

गांव के बुज़ुर्ग और युवाओं से बात करने के बाद जब बीबीसी टीम लौटने लगी तभी एक युवक संदेश लेकर आया, "गांव की कुछ महिलाएं अपनी बात कहना चाहती हैं. क्या आप उनसे बात कर सकते हैं? वो सब एक घर में जमा हैं."

बीबीसी टीम जब पहुंची तो कई महिलाएं इंतज़ार में थीं. उनमें सबसे बुज़ुर्ग 90 साल की विरमो देवी थीं.

विरमो देवी सिर्फ़ ये बता सकीं कि वो 'वोट देने जाएंगी.'

वहीं, उनसे उम्र में कुछ साल छोटी विद्या ने साफ़ कहा, "जो हमें ख़ुश रखेगा, हम उसे ख़ुश रखेंगे (वोट देंगे) ."

कुछ महिलाएं कैमरे पर बोलने में हिचकीं भी, लेकिन ज़्यादातर ने अपनी बात को प्रभावी तरीके से रखने की कोशिश की.

'चूल्हे का सहारा'

अनीता ने बात हंसते हुए की, लेकिन उन्होंने अपना 'बड़ा दर्द' बयान किया.

वो बोलीं, "चूल्हे पर रोटी बना रहे हैं. एक हज़ार का सिलेंडर हो रहा है. क्या करूं मैं? मेरा पति इतना कमाते ही नहीं. बीमार हैं वे. कुछ करते नहीं."

मुज़फ़्फ़रनगर में घरेलू गैस के एक सिलेंडर की क़ीमत नौ सौ रुपये से कुछ ज़्यादा है, लेकिन अनीता के मुताबिक़ उन्हें इस रक़म की व्यवस्था करने में दिक्क़त हो रही है.

हालांकि, चुनाव से जुड़े सवाल पर वो कहती हैं, "वोट तो हम जिसे देते हैं, उसे ही देंगे. "

'कोई सहारा नहीं देता'

गीता की शिकायत है कि चुनाव के बाद कोई नेता या कोई पार्टी वोटरों का हाल पूछने नहीं आती.

वो कहती हैं, "बीमारी तो है ही. इतनी कमाई भी नहीं जितने दुख हैं घर में. सहारा तो कोई देता नहीं जिसको भी वोट दे दो."

रीना स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं. उनका आरोप है कि सरकार व्यवसाय करने के लिए जो रक़म दे रही है, वो उन्हें नहीं मिल रही है. संबंधित लोग इसमें 'अड़ंगा लगा रहे हैं.'

रीना कहती हैं, "हमारे साथ जो दीदियां जुड़ी हुई हैं, उन्हें पैसे की ज़रूरत है. अब अगर सरकार हमें पैसा देगी तो हम सरकार को पैसा अपनी ज़िम्मेदारी पर देंगे भी, लेंगे भी."

वो कहती हैं, " अगर सरकार पैसा देती है तो उसमें ज़्यादा खींचातानी न करे. या तो सरकार किसी संस्था से किसी महिला को जोड़े ना, अगर जोड़े तो सही गाइडलाइन रखे."

पूजा ने श्रमिक कार्ड से जुड़ी दिक्क़त बताई. उनका दावा है कि वो कार्ड बनवा चुकी हैं, लेकिन 'सरकार से मिलने वाली मदद उन तक नहीं पहुंच रही है.'

'24 साल से टूटी सड़क'

कई महिलाओं ने गांव की मुख्य सड़क की बदहाली का मुद्दा उठाया.

गीता ने कहा, "24 साल से (सड़क) ऐसी की ऐसी ही पड़ी है. इतना बुरा हाल है कि कोई आ जा भी नहीं सकता."

उर्मिला ने कहा, "वोट उसे देंगे जो बनवाएगा सड़क. "

'पार्टी अच्छी बस वादे झूठे'

गांव की ही रहने वाली संगीता ने एक ही सांस में सरकार की तारीफ़ और आलोचना दोनों की.

गांव की सड़क के मुद्दे पर बात की शुरुआत करते हुए संगीता ने कहा, "सड़क तो प्रधान बनवाएगा. प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री तो बनवाने नहीं आने के. कुल मिलाकर बीजेपी पार्टी तो अच्छी है बस महंगाई ज़्यादा कर दी."

संगीता ने इसके बाद बीजेपी पर 'झूठे वादे करने' का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, "वादे भी झूट्ठे ही करे हैं. जैसे आंगनवाड़ी का पैसा बढ़ा दिया और आज तक मिलता नहीं. वादे भी झूट्ठे ही हैं बस सिर्फ़ एक ये है कि धरम का मुद्दा है कि राम मंदिर बनवा देंगे. जनता इसीलिए पिच्छे भाग रही."

अनीता नाम की एक और महिला ने भी सड़क से लेकर महंगाई के मुद्दे से जुड़ी शिकायत रखी.

उन्होंने कहा, "एक तो भैया ये खरंजा नहीं बनता."

उन्होंने आगे कहा, "पेट्रोल बहुत महंगा, सिलेंडर बहुत महंगा. इतनी कमाई कहां है, किसी की? आदमी वैसे ही भूखा मर जाएगा. कमाई नहीं है, पैसा कहां से आएगा? "

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)