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अमर जवान ज्योतिः विपक्ष और मोदी सरकार आमने-सामने, क्या है विवाद?
दिल्ली में इंडिया गेट पर पाँच दशकों से जल रही 'अमर जवान ज्योति' को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार इतिहास को बदलने की कोशिश कर रही है. वहीं केंद्र सरकार ने विपक्ष के आरोप को बेबुनियाद बताया है.
अमर जवान ज्योति पर मचे हंगामे के बीच ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर बताया है कि इंडिया गेट पर अब नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति लगाई जाएगी.
प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर लिखा है, "नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में, इंडिया गेट पर ग्रेनाइट की बनी उनकी भव्य मूर्ति प्रतिष्ठित की जाएगी. ये प्रयास उनके लिए भारत की कृतज्ञता का एक प्रतीक होगा."
उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा कि जब तक उनकी मूर्ति पूरी नहीं होती, तब तक उस जगह पर एक होलोग्राम से बनी मूर्ति रहेगी, जिसका अनावरण 23 जनवरी को नेताजी की जयंती पर प्रधानमंत्री करेंगे.
प्रधानमंत्री ने अपनी पोस्ट में जिस तस्वीर को पोस्ट किया है, उसमें नेताजी की मूर्ति इंडिया गेट के पास बनी एक छतरी के नीचे लगी दिखती है. इंडिया गेट पर स्थित इस छतरी के नीचे पहले कुछ नहीं था.
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अमर जवान ज्योति- कांग्रेस की आपत्ति
प्रधानमंत्री मोदी की इस घोषणा से पहले विपक्ष और मोदी सरकार के बीच इंडिया गेट पर 70 के दशक से जल रही अमर जवान ज्योति को लेकर टकराव की स्थिति पैदा हो गई है.
शुक्रवार को ऐसी ख़बरें आईं कि केंद्र सरकार ने अमर जवान ज्योति की लौ को पास ही में स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक की ज्योति के साथ मिलाने का फ़ैसला किया है.
इस ख़बर ने देखते-देखते सियासी रंग ले लिया क्योंकि अमर जवान ज्योति की स्थापना कांग्रेस सरकार के समय हुई थी जबकि राष्ट्रीय समर स्मारक का निर्माण मोदी सरकार
कांग्रेस ने इसे लेकर मोदी सरकार पर सीधा हमला बोला और इसे बीजेपी की एक साज़िश क़रार दिया.
पार्टी ने एक ट्वीट कर लिखा- "अमर जवान ज्योति को बुझाना, उन वीरों के साहस और बलिदान का अपमान है, जिन्होंने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के दो टुकड़े किए थे. वीरता के इतिहास को मिटाने की भाजपाई साजिश को कोई देशभक्त बर्दाश्त नहीं करेगा. शहीदों के अपमान का मोदी सरकार का ये रवैया बहुत घृणित है."
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर इसकी आलोचना की और साथ ही कहा कि इसे दोबारा जलाया जाएगा.
राहुल गांधी ने ट्वीट में लिखा- "बहुत दुख की बात है कि हमारे वीर जवानों के लिए जो अमर ज्योति जलती थी, उसे आज बुझा दिया जाएगा.कुछ लोग देशप्रेम व बलिदान नहीं समझ सकते. कोई बात नहीं…हम अपने सैनिकों के लिए अमर जवान ज्योति एक बार फिर जलाएँगे!"
वहीं कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि अमर जवान ज्योति को बुझाना इतिहास को मिटाने जैसा है.
मनीष तिवारी ने लिखा- "अमर जवान ज्योति उन 3,483 बहादुर सैनिकों का सम्मान करती है जिन्होंने पाकिस्तान को दो हिस्सों में बाँटकर बँटवारे के बाद दक्षिण एशिया का नक्शा फिर से बनाया. ये विडंबना है कि बांग्लादेश की आज़ादी के 50वें वर्ष में सरकार जी-जान से स्वाधीनता के बाद के भारतीय इतिहास के इस शानदार दौर को मिटाने में जुटी है. अमर जवान ज्योति हमारी राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा है. एक अरब लोग इसे पूजते हुए बड़े हुए हैं. भारत में दो ज्योतियाँ क्यों नहीं हो सकतीं? अमर जवान ज्योति और राष्ट्रीय समर स्मारक."
मनीष तिवारी ने केंद्र सरकार के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को 'शेखी' बताते हुए कहा कि इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति को बुझाना 'अपराध से कम नहीं'.
कांग्रेस के अलावा भी विपक्ष के कई नेताओं ने अमर जवान ज्योति विवाद पर मोदी सरकार की आलोचना की है.
राष्ट्रीय जनता दल के राज्य सभा सांसद और पार्टी प्रवक्ता मनोज कुमार झा ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा- "मैं मानता हूँ कि हिंदुस्तान के गौरवशाली इतिहास में आपका कोई योगदान नहीं रहा, इसकी वजह से एहसास-ए-कमतरी भी होता होगा, मगर इसका मतलब ये तो नहीं कि 50 वर्ष से जो लौ जल रही थी उसको बुझा देंगे?"
मनोज झा ने आगे कहा,"ऐसी सलाह आपको कौन देता है? आप कौन सी परंपराएँ छोड़ के जा रहे हैं, इतिहास कैसे आपको स्मरण करेगा? समकालीन की बात मत करें, वो ताली बजा देंगे, लेकिन इतिहास ताली नहीं बजाएगा. मैं आपको आगाह कर रहा हूँ, आग्रह कर रहा हूँ."
सरकार और बीजेपी क्या कह रही है?
केंद्र सरकार के शहरी विकास राज्य मंत्री कौशल किशोर अमर जवान ज्योति पर लिए गए फ़ैसले की पुष्टि करते हुए इसे एक उचित क़दम बताया है.
कौशल किशोर ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा,"इंडिया गेट पर जो अमर जवान ज्योति जलती थी, अब वहाँ (राष्ट्रीय समर स्मारक) जलेगी जहाँ देश के तमाम लोग, चाहे वो आज़ादी का आंदोलन हो, या देश की सुरक्षा के लिए युद्ध हुआ हो, वहाँ जब ज्योति जलेगी और जब देश के लोग आएँगे, और उनलोगों के नाम पढ़ेंगे, तो एक राष्ट्र भावना जागृत होगी और मैं समझता हूँ कि ये अच्छा क़दम है."
वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस मुद्दे पर सफ़ाई जारी करते हुए कई ट्वीट किए हैं जिसमें उन्होंने कहा है कि अमर जवान ज्योति को लेकर बहुत सारी ग़लत जानकारियाँ फैलाई जा रही हैं.
संबित पात्रा ने लिखा है, "अमर जवान ज्योति को बुझाया नहीं जा रहा है. उसे राष्ट्रीय समर स्मारक की ज्योति में मिला जा रहा है. ये बात अटपटी थी कि अमर जवान ज्योति 1971 और दूसरे युद्धों के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए लगी थी, मगर उनमें से किसी का नाम वहाँ नहीं लिखा था."
1971 और इसके पहले और बाद के सभी युद्धों के शहीदों के नाम राष्ट्रीय समर स्मारक पर लगे हैं. इसलिए उन्हें सच्ची श्रद्धाँजलि देने के लिए वहाँ ज्योति जलनी चाहिए.
पात्रा ने कहा कि ये विडंबना है कि जिन लोगों ने सात दशकों को तक राष्ट्रीय समर स्मारक नहीं बनाया, वो इसे लेकर हंगामा कर रहे हैं.
अमर जवान ज्योति की स्थापना दिसंबर 1971 में राजपथ पर इंडिया गेट के पास हुई थी और 26 जनवरी 1972 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसक उद्घाटन किया था.
राष्ट्रीय समर स्मारक का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फ़रवरी 2019 को की थी. ये स्मारक इंडिया गेट से लगभग 400 मीटर दूर है
ये दोनों ही स्थान इंडिया गेट परिसर में आते हैं. इंडिया गेट 1931 में उन भारतीय सैनिकों की याद में बनाया गया था जो ब्रिटिश शासनकाल में सेना के साथ जंग लड़ते हुए मारे गए थे.
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