हरिद्वार में यति नरसिंहानंद की गिरफ़्तारी के बाद आयोजित प्रतिकार सभा में क्या हुआ

    • Author, राजेश डोबरियाल,
    • पदनाम, हरिद्वार से बीबीसी हिंदी के लिए

धर्म संसद में आपत्तिजनक भाषण देने के मामले में गिरफ़्तार यूपी शिया वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिज़वी उर्फ़ जितेंद्र नारायण त्यागी और महिलाओं के ख़िलाफ़ अभद्र टिप्पणी के मामले में यति नरसिंहानंद की गिरफ़्तारी के विरोध में हरिद्वार के सर्वानंद घाट पर रविवार को प्रतिकार सभा हुई.

इसमें वक्ताओं ने मंच से हिंदू राष्ट्र बनाने का और दुनियाभर से 'इस्लामिक जिहादियों' के सफ़ाए का एलान बार-बार किया. हालांकि सभा में बहुत भीड़ नज़र नहीं आई और इससे उपजी हताशा आयोजक छुपा भी नहीं पाए. उन्होंने प्रतिकार सभा में शामिल न होने वाले हरिद्वार के अन्य संतों को 'कायर' तक कह डाला.

हालांकि देहरादून-हरिद्वार हाइवे से सटे सर्वानंद घाट से बाहर हरिद्वार में इस मामले को लेकर कोई चर्चा तक नहीं दिखी.

भड़काऊ भाषण

धर्म संसद में भड़काऊ भाषण देने के मामले में हरिद्वार पुलिस ने 13 जनवरी की रात जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ़ वसीम रिज़वी को हरिद्वार में प्रवेश करते ही गिरफ़्तार कर लिया था. इसके विरोध में ग़ाज़ियाबाद के डासना स्थित देवी मंदिर के यति नरसिंहानंद सर्वानंद घाट पर धरने पर बैठ गए थे.

यति नरसिंहानंद ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में रविवार को प्रतिकार सभा करने का एलान भी किया था लेकिन इससे पहले शनिवार रात को ही हरिद्वार पुलिस ने उन्हें महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में गिरफ़्तार कर लिया.

उनकी गिरफ़्तारी के बाद भी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रविवार को सर्वानंद घाट पर प्रतिकार सभा हुई. इसमें वक्ताओं ने बार-बार हिंदुओं को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए एकजुट होने का एलान किया और पूरी दुनिया से 'इस्लामिक जिहादियों' के सफ़ाए का संकल्प लिया.

यह चेतावनी भी बार-बार दी गई कि अगर हिंदू एकजुट नहीं होंगे तो 'इस्लामिक जिहादी' देवभूमि (उत्तराखंड) को इस्लामिक राष्ट्र बना देंगे.

संतों का ही प्रतिकार

प्रतिकार सभा में बोलने वाले वक्ता बेहद गुस्से से अपनी बात रख रहे थे और 'इस्लामिक जिहाद' को लेकर खौफ़ भी ज़ाहिर कर रहे थे, लेकिन मौके पर मौजूद चंद लोगों के अलावा यह गुस्सा और ख़ौफ़ कहीं और नहीं दिखा. प्रतिकार सभा के आयोजक तो इस बात से भी नाराज़ थे कि हरिद्वार में मौजूद संत ही उनके इस प्रतिकार में शामिल नहीं हुए.

धर्म संसद में भड़काऊ भाषण देने के मामले में अभियुक्त स्वामी आनंद स्वरूप ने तो हिंदुत्व की रक्षा के उनके अभियान में शामिल न होने वाले संतों को 'डरपोक' और 'नपुंसक' तक कह दिया.

वरिष्ठ पत्रकार रतन मणि डोभाल कहते हैं, "हरिद्वार में हुई धर्म संसद में जो विवादास्पद बयानबाज़ी हुई उसके बाद से उसमें शामिल हुए अन्य संत इस विवाद से दूरी बनाने लगे थे. प्रतिकार सभा को देखकर कहा जा सकता है कि हरिद्वार के बड़े संतों और अखाड़ों ने इस आयोजन का ही प्रतिकार कर दिया है."

'हरिद्वार का स्वभाव ऐसा नहीं'

रतनमणि डोभाल कहते हैं कि दरअसल हरिद्वार का स्वभाव ऐसा नहीं है जैसा कि इन विवादास्पद घटनाओं से दुनिया के सामने जा रहा है.

उन्होंने बताया, "हरिद्वार धर्म की नगरी है, हिंदुत्व से जुड़ा बड़ा स्थान है इसलिए बाहर से आकर लोग इस स्थान का ग़लत इस्तेमाल अपने स्वार्थों के लिए कर रहे हैं."

पत्रकार एमएस नवाज़ भी कुछ ऐसी ही राय रखते हैं. उन्होंने बताया, "हरिद्वार के लोगों और संत समाज के बीच मैंने कभी असहज महसूस नहीं किया. हरिद्वार के लोग और संत आपका खुलकर स्वागत करते हैं, इसलिए यहां देश भर से लोग आते हैं, रहते हैं और हरिद्वार उनको अपना लेता है."

नवाज़ कहते हैं कि उन्होंने 2010 का कुंभ भी कवर किया है और यह अच्छी तरह जानते हुए भी कि वह मुसलमान हैं, किसी संत ने कभी उनसे अलग तरह का व्यवहार नहीं किया.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश है टार्गेट

प्रतिकार सभा के आयोजन में कई वक्ता पश्चिमी उत्तर प्रदेश के थे. गाज़ियाबाद, मुज़फ्फ़रनगर से आए हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोगों ने 'इस्लामिक जिहाद' के प्रति डराने की भरपूर कोशिश की और कहा कि अगर हिंदू नहीं जागे तो उन्हें भारत में ही जगह नहीं मिलेगी.

डोभाल कहते हैं कि ये लोग यति नरसिंहानंद गिरि के समर्थक थे और उनकी पूरी कोशिश उनके पक्ष में माहौल बनाने की थी. इनका टार्गेट यूपी चुनाव को लेकर ध्रुवीकरण करना है. दरअसल यह मामला धार्मिक नहीं, पूरी तरह राजनीतिक है.

वह कहते हैं, "किसान आंदोलन से उत्तर प्रदेश और ख़ासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक विभेद लगभग ख़त्म हो गया है और आरएसएस को डर है कि चुनाव में बीजेपी को इससे नुक़सान होगा. इसलिए हरिद्वार के नाम पर ध्रुवीकरण की कोशिश की जा रही है. हालांकि इसका असर कितना होगा, यह चुनाव परिणाम ही बताएंगे."

हरिद्वार के एक और पत्रकार ने नाम ज़ाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, "यति नरसिंहानंद पिछले दो साल से हरिद्वार में प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर अतिवादी बातें कर रहे हैं ताकि सांप्रदायिक उन्माद पैदा किया जा सके. अभी तक उन्हें ज़्यादा सफलता नहीं मिली क्योंकि मेन-स्ट्रीम मीडिया ने भी उन्हें तवज्जो नहीं दी."

"वसीम रिज़वी के ज़रिए हरिद्वार में आपत्तिजनक बयान दिलवाकर और धर्म संसद में भड़काऊ बयान देकर ये लोग सुर्ख़ियों में तो आ गए, लेकिन मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख़्ती के बाद दांव उल्टा पड़ गया."

कारोबार पर असर

इस सब बवाल से सर्वानंद घाट के पास दुकानें चलाने वाले लोगों को ज़्यादा कोई मतलब नहीं लगा. हालांकि इससे उनकी दुकानदारी पर विपरीत असर पड़ा है.

एक चाय की दुकान पर जब हमने दुकानदार से पूछा कि इतनी भीड़ से तो उनका फ़ायदा ही हो रहा होगा. तो उन्होंने तुरंत कहा, "न... कौन रुकता है जी, ऐसे बवाल में. लोग सीधे निकल जाते हैं. तीन दिन से तो हाथ पर हाथ धरे ही बैठे हैं."

ऐसी ही एक दुकान पर मिली दो स्थानीय महिलाओं ने महंत की गिरफ़्तारी के बारे में पूछने पर कहा, "चाहे कुछ भी हो, महिलाओं के प्रति ग़लत बात नहीं बोलनी चाहिए. भई वह मां हैं, बहन हैं, बेटी हैं. तुम तो संत हो, भगवा पहना है. तुम्हें क्या मतलब महिलाओं के बारे में ग़लत बात कहने से."

इन महिलाओं ने 16 जनवरी के सुबह के अख़बार में महिलाओं पर आपत्तिजनक बयान देने के मामले में महंत यति नरसिंहानंद की गिरफ़्तारी के बारे में पढ़ा था.

इंटरनेशनल मीडिया में चर्चा

प्रतिकार सभा को कवर करने बड़ी संख्या में स्थानीय पत्रकारों के साथ ही कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान भी पहुंचे थे. स्वामी आनंद स्वरूप ने इस पर भी टिप्पणी की.

उन्होंने कहा, "आज पूरी दुनिया में हमारी धर्म संसद की चर्चा हो रही है. ब्रिटेन की, अमरीका की संसद में धर्म संसद की बात हो रही है. दुनिया भर में धर्म संसद की बात हो रही है. लेकिन इन लोगों को देखो कि ये कवर तो कर रहे हैं, लेकिन ख़बरें क्या बना रहे हैं? कह रहे हैं कि आतताई नरसिंहानंद सरस्वती, अरे तुमलोग पत्रकार हो या क्या हो?"

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