You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
पंजाब कांग्रेस: चन्नी ने कहा जीत चाहिए तो सीएम उम्मीदवार हो घोषित, सिद्धू बोले जनता करेगी तय
'मुझे 111 दिन तक मुख्यमंत्री बनने के योग्य मानने के लिए पंजाब के लोगों और कांग्रेस को मैं हाथ जोड़कर शुक्रिया कहना चाहता हूं.'
पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का ये बयान आठ जनवरी का है. उस दिन चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव की तारीख का एलान किया. पंजाब में 14 फरवरी को मतदान है और नतीजे 10 मार्च को आने हैं.
वोटरों को तय करना है कि अगली सरकार किस पार्टी की होगी. राजनीतिक विश्लेषक अगले मुख्यमंत्री के नाम की अटकलें भी लगा रहे हैं.
अगर कांग्रेस जीती तो पंजाब में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?
चन्नी कहते हैं, "111 दिन का काम पसंद आया? आप मुझे पूरा टाइम दो फिर देखो."
लेकिन, चन्नी का रास्ता इतना आसान नहीं है. सत्ताधारी कांग्रेस को चौतरफ़ा चुनौती मिल रही है.
कई सर्वे अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की उम्मीदों को दमदार बता रहे हैं.
वहीं, केजरीवाल भी मुफ़्त बिजली और 18 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को एक हज़ार रुपये महीने देने के वादे के साथ इन उम्मीदों को मजबूत करना चाहते हैं.
फिर, भारतीय जनता पार्टी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में हुई कथित चूक को लेकर उन पर लगातार हमलावर है.
सिद्धू की दावेदारी?
लेकिन, चन्नी को चुनौती सिर्फ़ दूसरे दलों से नहीं बल्कि कांग्रेस के अंदर भी मिल रही है.
कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की उम्मीदवारों के चयन के लिए गुरुवार को बैठक होनी है, उसके दो दिन पहले प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने आलाकमान के सामने 'गुगली' डाल दी.
बेशक वो क्रिकेट टीम में खेलते वक़्त बल्लेबाज़ी के लिए मशहूर रहे हैं लेकिन राजनीति में समर्थक दावा करते हैं कि वो विरोधियों के विकेट उड़ाने के महारथी हैं.
सिद्धू ने मंगलवार को दावा किया कि अगला सीएम आलाकमान नहीं बल्कि पंजाब के वोटर बनाएंगे.
सिद्धू ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया, "हर बंदा सीएम बनने पर तुला है. भाई सीएम बनाएंगे पंजाब के लोग. हाई कमान बनाएगा सीएम, आपको ये किसने बताया? पंजाब के लोगों ने एमएलए भी पांच साल पहले बनाए थे. एमएलए बनाने का फ़ैसला भी पंजाब के लोगों को करना है. पंजाब के लोगों ने एमएलए बनाने हैं और पंजाब के लोगों ने ही मुख्यमंत्री बनाना है."
सिद्धू के बयान के कई मतलब निकाले गए. कांग्रेस में माना जाता है कि बड़े फ़ैसले शीर्ष नेतृत्व ही लेता है. कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफ़े के बाद चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने का फ़ैसले में भी आलाकमान की मर्ज़ी ही मानी गई.
हालांकि, कैप्टन अमरिंदर सिंह की विदाई में सबसे बड़ी भूमिका सिद्धू की ही मानी जाती है. ये दावा किया जाता है कि पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम पद से हटाने के लिए अभियान चलाया.
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कुर्सी तो छोड़ दी लेकिन उन्होंने शर्त लगा दी कि सिद्धू को सीएम न बनाया जाए. माहौल ऐसा बना कि सिद्धू सीएम की कुर्सी तक नहीं पहुंच सके और चन्नी के नाम पर मुहर लग गई.
आने वाले चुनाव के लिए कांग्रेस ने अभी तक किसी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है. सुनील जाखड़ जैसे सीनियर नेता सामूहिक नेतृत्व में 'चुनाव लड़ने' की बात कर चुके हैं.
क्या कह रहे हैं चन्नी?
लेकिन, मुख्यमंत्री चन्नी की राय अलग है.
वो न तो 'सामूहिक नेतृत्व' की बात का समर्थन कर रहे हैं और न ही फ़ैसला चुनाव के बाद तक टालने का दांव उन्हें ठीक लग रहा है.
उनका दावा है कि पंजाब की राजनीति में ऐसे दांव कांग्रेस को कभी रास नहीं आए. वो दावा करते हैं कि जब भी कांग्रेस पार्टी मुख्यमंत्री के उम्मीदवार का नाम तय करके चुनाव मैदान में उतरी, उसे कामयाबी मिली और जब ऐसा नहीं हुआ तब हार झेलनी पड़ी.
मुख्यमंत्री चन्नी ने एक प्रो पंजाब से बात करते हुए कहा, "पिछली बार कैप्टन (अमरिंदर सिंह) को सीएम उम्मीदवार घोषित किया था तो जीत गए है. उससे पहले वाले चुनाव में किसी का नाम सीएम के पद के लिए नहीं घोषित किया था तो हार गए. मेरे ख़्याल से सीएम उम्मीदवार की घोषणा कर देनी चाहिए."
चन्नी मुख्यमंत्री हैं और अगर पार्टी सीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर किसी नेता के नाम का एलान नहीं करती तो उनकी स्वाभाविक दावेदारी हो सकती थी.
लेकिन सिद्धु के बयान के बाद स्थितियां बदल गई हैं. चन्नी ने इशारों में अपनी बात कह दी है कि वो चाहते हैं कि हाई कमान चुनाव को चुनाव के पहले ही इस मामले में फ़ैसला कर लेना चाहिए.
चन्नी ने कहा, "हर किसी की इच्छा होती है कि वो उम्मीदवार बने. हमारा कहना है कि जिसे पार्टी बनाएगी ठीक है. मैं किसी दौड़ में शामिल नहीं होता हूं. "
मुख्यमंत्री चन्नी ये दावा करने का मौका नहीं गंवाते हैं कि उन्होंने कम ही वक़्त में 'कई काम करके दिखाए हैं' और वो 'लोगों की पंसद बनकर उभरे हैं.'
उन्होंने एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, "टेस्ट मैच नहीं, मुझे ट्वेटीं-20 मैच में आखिरी दो ओवर मिले हैं. इतना ही खेल मिला है. उसमें जो चौके-छक्के बजे हैं, वो आपको भी पता है."
"मेरी बैटिंग हमेशा पब्लिक हित में रहती है. मैं इधर-उधर नहीं घुमाता हूं. मैं कुछ खेल नहीं करता. मैं अपनी चाल से चलता हूं. "
कई लोग ऐसे बयानों को पार्टी के अंदर और बाहर के विरोधियों के लिए चुनौती के तौर पर देख रहे हैं. हालांकि, चन्नी का कहना है कि उनकी दिलचस्पी लोगों की भलाई में है किसी को चुनौती देने में नहीं.
कॉपी - वात्सल्य राय
ये भी पढ़ें
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)