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बुल्ली-सुल्ली नीलामी: निडर औरतें बनाम बेखौफ़ ट्रोल
- Author, दिव्या आर्य
- पदनाम, संवाददाता
'बुल्ली बाई' और 'सुल्ली डील्स' मोबाइल ऐप्स पर नीलामी से कई महीने पहले ही, सानिया सैय्यद के लिए मुसलमान और औरत होने की दोहरी पहचान की वजह से सोशल मीडिया पर सेक्शुअल हैरेसमेंट शुरू हो गया था. ये बदस्तूर एक साल से जारी है.
जनवरी 2022 में 'बुल्ली बाई' और जुलाई 2021 में 'सुल्ली डील्स' नाम से बनाए गए मोबाइल ऐप्स पर सानिया समेत दर्जनों मुसलमान औरतों की सहमति के बिना उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल कर उनकी नीलामी की गई. अब इस मामले की व्यापक निंदा होने के बाद चार लोग गिरफ्तार किए गए हैं.
लेकिन सानिया की नीलामी इससे पहले भी हुई थी. उन्होंने बताया, "सुल्ली-बुल्ली तो बाद में हुआ. नवंबर 2020 में कुछ अकाउंट्स थे जो टारगेटिड तरीके से मेरे चेहरे को नंगी तस्वीरों पर मॉर्फ कर ट्विटर पर डालने लगे. मेरे जैसे नाम की मेरी पत्रकार दोस्त की तस्वीर के साथ ट्विटर पर पोल किया और पूछा 'अपने हरम के लिए कौन-सी सानिया पसंद करोगे?' उस पर सौ लोगों ने वोट भी दिए थे. फिर वो डायरेक्ट मेसेज पर ग्रुप्स बनाकर, उनमें हमारे साथ यौन संबंध बनाने, गंदी हरकतें करने पर डिस्कशन करने लगे."
मुंबई में टीवी धारावाहिकों के लिए स्क्रीनप्ले लिखनेवालीं सानिया ट्विटर पर मुखर हैं. वो अपनी राय रखने से झिझकती नहीं और बताती हैं कि उसके लिए दक्षिणपंथी विचारधारा रखनेवाले उन्हें सेक्शुअली हैरेस करते हैं.
बीबीसी के साथ फ़ोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कहा, "मैं ऐसी बहुत सी गंदी ट्रोलिंग को नज़रअंदाज़ करती रही थी पर जब कुछ अकाउंट्स को रिपोर्ट किया उसके बाद तो जैसे बदले की भावना से ये पीछे ही पड़ गए. मैं और सानिया इन अकाउंट्स को रिपोर्ट करते, अकाउंट्स सस्पेंड होते, पर फिर नए बन जाते और एक साल से ज़्यादा हो गया है पर ये सिलसिला रुकता ही नहीं."
आवाज़ उठाने की कीमत
मई 2020 में जिस दिन पाकिस्तान में ईद मनाई गई, तब भारत में एक यूट्यूब चैनल पर पाकिस्तानी मुसलमान औरतों की तस्वीरों का इस्तेमाल कर नकली नीलामी की गई. अब एक या दो औरतों को नहीं एक बड़े समूह को टारगेट किया गया.
सानिया कहती हैं, "मुझे याद है, हमारे यहां यानी भारत में उसके अगले दिन ईद थी और हम सब डरे हुए थे कि त्यौहार के लिए तैयार होकर खींची तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालेंगे तो कहीं यहां की मुसलमान औरतों की नीलामी में उनका इस्तेमाल ना हो जाए."
उस चैनल को भी रिपोर्ट किया गया, वो भी सस्पेंड हुआ लेकिन मुसलमान औरतों के निशाना बनाने की फिर एक पहल हुई.
जुलाई 2020 में 'सुल्ली डील्स' नाम से ऐप बनाया गया और उस पर हुई नकली नीलामी में सानिया और उनकी दोस्त सानिया समेत दर्जनों मुसलमान औरतों की बोली लगी.
अलग-अलग प्रोफ़ेशन से आनेवाली इन महिलाओं में कई ऐसी भी थीं जो सोशल मीडिया पर ना अपनी राय रखती थीं और ना ही इनकी कोई ख़ास फॉलोइंग थी. सानिया के मुताबिक़ उन्हें बस इसलिए शामिल किया गया क्योंकि वो मुसलमान थीं.
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाए कि एक ऐप पर मुसलमान औरतों की झूठी या मनगढ़ंत नीलामी हुई तो इससे क्या फ़र्क पड़ता है?
न तो ये नीलामी सचमुच में हो रही थी, ना इसमें इन औरतों की अश्लील तस्वीरें थीं और ना ही किसी को शारीरिक नुक़सान पहुंचा. इस पर इतनी बात ना होती तो इस घटना की जानकारी भी सीमित ही रहती. इसे मज़ाक या गैर-ज़रूरी मानकर टाला क्यों नहीं जा सकता था?
सानिया कहती हैं, "ना बोलना तो कोई रास्ता है ही नहीं. इसलिए औरतों ने बोलना शुरू किया और कुछ एफ़आईआर भी हुए."
तहकीकात में देरी क्यों?
सानिया की दोस्त सानिया के अलावा, कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम की संयोजक हसीबा अमीन, पायलट हना मोहसिन ख़ान, कवयित्री नबिया ख़ान ने भी दिल्ली में एफ़आईआर दर्ज करवाई है.
लेकिन उनकी आवाज़ खामोशी रही. उनकी शिकायत पर महीनों तक पुलिस कार्रवाई नहीं हुई और आज तक महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इसका संज्ञान तक नहीं लिया.
मैंने दिल्ली पुलिस के पीआरओ से इस मामले में देरी की वजह पूछी तो उन्होंने इसकी वजह ऐप के एक अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म 'गिटहब', पर होस्ट किए जाना बताया.
डीसीपी चिनमॉय बिसवाल ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म हमारी तहकीकात से पूरी तरह कोऑपरेट करे इसके लिए हमें एसएलएटी नाम की अंतरराष्ट्रीय ट्रीटी के ज़रिए उन्हें संपर्क करना होता है ताकि सारा डेटा हमें मिल सके. अभी हमें इसकी अनुमति मिल गई है और हम आगे की कार्रवाई कर रहे हैं."
'बुल्ली' मामले में कुछ ही दिनों में कार्रवाई और 'सुल्ली' में इतने लंबे वक्त के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया की सफाई देना नाकाफ़ी लगता है. क्या इसकी वजह 'बुल्ली' मामले में ज़्यादा ऊंचे स्वर में हुई निंदा माना जाए?
डीसीपी बिस्वाल ऐसा नहीं मानते. उन्होंने कहा, "हम विरोध या सोशल मीडिया पर निंदा की वजह से काम नहीं करते, हमारी ज़िम्मेदारी है मुजरिम तक पहुंचना है और उसकी हम पूरी कोशिश कर रहे हैं. कुछ केस में हमें सफलता जल्दी मिलती है और कुछ में समय लगता है, उम्मीद है सुल्ली केस में भी हम जल्दी आगे बढ़ पाएंगे."
लेकिन कार्रवाई की धीमी रफ्तार से हालात और बुरे हो गए. सानिया बताती हैं, "कार्रवाई ना होने का नतीजा ये हुआ कि लोग और बेखौफ़ हो गए और अब वो सीधा हमारी टाइमलाइन पर आकर, हमारे दोस्तों को टैग कर, हमें बलात्कार की धमकियां देने लगे."
"ऐसे में आप क्या करेंगे, आप थक कर चुप हो जाते हैं, आपको बार-बार बताया जा रहा है कि आपकी पहचान की वजह से कुछ लोग आपसे घृणा करते हैं और उनके ख़िलाफ़ कुछ नहीं होता. आप बस दुआ करते हैं कि आप रिऐक्ट नहीं करेंगे तो शायद ये सब रुक जाएगा. पर कुछ रुकता नहीं है."
तुमने ही कुछ किया होगा
जनवरी 2022 में जब दोनों सानिया की तस्वीर 'सुल्ली' के बाद 'बुल्ली' ऐप में इस्तेमाल हुई तो पत्रकार सानिया अहमद ने ट्वीट किया, "दो साल से लगातार हैरेसमेंट और धमकियां झेलने के बाद आख़िरकार मुझे लगता है कि इस बार अपनी तस्वीर देखकर मुझे कुछ महसूस नहीं हुआ. ना सदमा. ना डर, कुछ नहीं. मुझे कुछ भी महसूस नहीं हो रहा."
ऐसे ही ठंडे पड़ने का अहसास पत्रकार कुरातुलैन रहबर को कश्मीर में हुआ. 'सुल्ली' वाली घटना के बाद उन्होंने कई औरतों का इंटरव्यू कर लेख लिखा था और अब इस बार उनकी तस्वीर इस नई सूची में शामिल थी.
फ़ोन पर बातचीत में उन्होंने बताया, "मैं मुसलमान ही नहीं, कश्मीरी भी हूं, ऐसी साइबर हिंसा के लिए मैं न्याय किससे मांगूं? मुझे नहीं लगा कि मैं पुलिस के पास जा सकती हूं जो आए दिन मेरी पहचान के दस्तावेज़ मांगते रहते हैं. वो पूछते हैं कि मैं कभी पाकिस्तान गई थी या नहीं, वो मेरे परिवार और पड़ोसियों से मेरे बारे में तहकीकात करते रहते हैं."
कश्मीर में महिला पत्रकारों की संख्या बहुत कम है और खतरों को देखते हुए कई परिवार पत्रकारिता के काम में बेटियों को नहीं भेजना चाहते. ऐसे में सेक्शुअल हैरेसमेंट की बात करना और मुश्किल हो जाता है.
कुरातुलैन ने कहा, "पहले तो मैं खुद से ही सवाल करने लगी कि मैंने ऐसा क्या किया कि ऐसी ऐप पर मेरी तस्वीर आई. फिर लोग भी हम औरतों से ही पूछते हैं कि हमने ही कुछ किया होगा."
आख़िर उन्हें हिम्मत मिली पत्रकार संघ और दूसरे संगठनों से. नेटवर्क फ़ॉर वुमेन इन मीडिया, इंडिया, जर्नलिस्ट फ़ेडरेशन ऑफ़ कश्मीर और रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने ऐप की निंदा करते और कार्रवाई की मांग करने वाले बयान जारी किए.
नेटवर्क फ़ॉर वुमेन इन मीडिया, इंडिया, जर्नलिस्ट फ़ेडरेशन ऑफ़ कश्मीर और रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने ऐप की निंदा करते और कार्रवाई की मांग करने वाले बयान जारी किए.
और सामने आईं कई नाराज़ मुसलमान औरतें. इनमें 'बुल्ली' की नीलामी में सानिया जैसी कई औरतें थीं जिनकी तस्वीरों को 'सुल्ली' ऐप के वक्त भी इस्तेमाल किया गया था. पर कई नाम नए थे और आगे बढ़कर बोलने को तैयार थे.
इनमें जानीमानी रेडियो जॉकी सायमा, पत्रकार और लेखक राणा अय्यूब, इतिहासकार राणा सफ़वी और सामाजिक कार्यकर्ता खालिदा परवीन शामिल थीं. इनमें से कई की उम्र 60 पार कर चुकी है पर इन्हें भी इस सेक्शुअल हैरेसमेंट के लिए चिन्हित किया गया.
ऑनलाइन बयान, ऑफ़लाइन हिंसा
'बुल्ली' की लिस्ट में आनेवाली पत्रकार इस्मत आरा उन पहली औरतों में से थीं जिन्होंने ट्विटर पर इसके बारे में लिखना शुरू किया और फिर पुलिस में शिकायत दर्ज की.
उनके मुताबिक़, "ये एक सामूहिक गुस्सा था जो उबल पड़ा. उन दक्षिणपंथी ट्रोल्स के निशाने पर 60-70 साल की बुज़ुर्ग औरतें भी हैं. हम अब नहीं बोलेंगे तो ये सब आम हो जाएगा और सड़क पर निकलकर पत्रकारिता करना और मुश्किल हो जाएगा."
साइबर-बुलींग और धर्म के आधार पर निशाना बनाए जाने की इन शिकायतों के पीछे डर है कि इंटरनेट से निकलकर ये धमकियां सड़क पर हिंसा का रूप भी ले सकती हैं.
मुंबई की सानिया सैय्यद यति नरसिंहानंद के हाल के बयान का उदाहरण देती हैं जिसमें उन्होंने कहा कि "मुसलमान औरतें इस्लाम की सेवा में किसी के भी नीचे बिछ जाती हैं" या जामिया मिलिया इस्लामिया में शूटिंग करनेवाले राम भक्त गोपाल का एक हिंदू महापंचायत में दिया बयान जिसमें वो मुसलमान औरतों को अगवा करने का आह्वान कर रहे हैं.
राम भक्त गोपाल को नफरत फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. पर एक महीने में ही ज़मानत दे दी गई.
सानिया के मुताबिक, "असल ज़िंदगी में ऐसे नफरत भरे बयान देनेवाले जब तक खुले घूमते रहेंगे ऑनलाइन दुनिया में मुसलमान औरतों को हैरेस करनेवालों को शह मिलती रहेगी".
इस्मत ने अपनी शिकायत में 'सुनियोजित कॉन्सपिरेसी' शब्द का इस्तेमाल किया.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "एक या दो मुसलमान औरतों को निशाना बनानेवालों ने मुसलमान औरतों के ख़िलाफ़ साज़िश के तहत व्यवस्थित तरीके से लिस्ट बनाकर, नामों का चयन कर ये करना शुरू कर दिया है और इसे ऐसे अपराध के तौर पर देखना ज़रूरी है."
एक के बाद एक कई औरतें इस बारे में ट्विटर पर लिखने लगीं. वो एकदूसरे को जानती थीं और एकदूसरे से हौसला ले रही थीं.
हालांकि दोनों सूचियों में से कुछ ही नाम सामने आए हैं. मुझे कई औरतों ने बताया कि ऐप्स पर 15-16 साल की बच्चियों की तस्वीरें भी डाली गई हैं. हालांकि उनके सामने ना आने की सूरत में इसकी पुष्टि करना मुश्किल है.
गिरफ्तारियां
डर, हताशा और गुस्से के इस माहौल में 'बुल्ली' ऐप के वाकये के बाद जब मुसलमान औरतें सामने आईं और मुंबई पुलिस में शिकायतें दर्ज हुईं तो आख़िरकार गिरफ्तारियां भी होने लगीं.
शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस मुद्दे को खूब उठाया. मुंबई पुलिस ने 18 से 21 साल की उम्र के तीन लोगों को इस नीलामी के पीछे होने के आरोप में गिरफ्तार किया. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने भी असम से एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर उसे 'मास्टरमाइंड' बताया है. ये सारी गिरफ्तारियां 'बुल्ली' ऐप के मामले में हुई हैं.
कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम की कनवीनर हसीबा अमीन ने 'सुल्ली' ऐप के वक्त दिल्ली पुलिस में एफ़आईआर दर्ज करवाई थी.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "ऐसे काम करनेवालों को रोकने की राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है, वरना ऐसी गिरफ्तारियां पहली बार में भी हो सकती थीं. नीलामी की प्रक्रिया आपको इंसान से एक चीज़ बनाकर छोड़ देती है, जिसे मर्द आपस में बांट रहे हैं. आज भी हमारे स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर मौजूद हैं और हमें वस्तु की तरह महसूस कराते रहते हैं."
मुंबई पुलिस के शिव सेना की सरकार के तहत और दिल्ली पुलिस के केंद्र की बीजेपी सरकार के तहत काम करने पर उठ रहे सवाल भी मैंने दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता के सामने रखे.
डीसीपी चिनमॉय बिसवाल ने कहा, "राजनीतिक इच्छाशक्ति का आरोप बेबुनियाद है, छह महीने में सत्ता बदली नहीं है और हमने 'बुल्ली' मामले में मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया है. जो आज निंदा कर रहे हैं वो कल तारीफ करेंगे."
'सुल्ली' की सूची में एक और नाम, नबिया ख़ान के मुताबिक़ पांच महीने बाद भी उन्हें अब तक उनकी शिकायत पर हुई एफ़आईआर की कॉपी तक दिल्ली पुलिस ने नहीं दी.
सानिया सैय्य्द के मुताबिक़ कार्रवाई ना होने का असर ये रहा कि 'सुल्ली' के बाद कई मुसलमान औरतों ने ट्विटर छोड़ दिया.
कोलंबिया विश्वविद्यालय में पढ़ रहीं, पूर्व पत्रकार हिबा बेग की तस्वीर दोनों नीलामियों में इस्तेमाल हुई. उन्होंने कहा कि 'सुल्ली' के बाद अब वो ज़्यादा मुखर नहीं हैं, खुद को सेंसर करती हैं फिर भी 'बुल्ली' में उनकी तस्वीर आने से वो असुरक्षित महसूस करती हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद भी एक ट्विटर हैंडल ने ये दावा किया है कि तीनों बेकसूर हैं और वो इन नीलामियों के पीछे है.
सानिया अहमद ने ट्वीट किया है कि ये ट्विटर हैंडल उन्हें फिर से हैरेस कर रहा है और "बुल्ली बाई 2.0" की धमकी दे रहा है.
सानिया सैय्यद कहती हैं, "इन्हें पता है ये छूट जाएंगे या इनके ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं होगी, और फिर हमें मुसलमान और औरत होने की वजह से टारगेट किया जाएगा. देश का जो माहौल है मुझे ताज्जुब नहीं होगा कि कुछ महीने बाद एक और नीलामी के ऐप की ख़बर आए."
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