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पीयूष जैनः छापेमारी में क्या मिला, क्या मिल सकती है राहत?
- Author, अनंत झणाणे
- पदनाम, लखनऊ से बीबीसी हिंदी के लिए
कन्नौज के इत्र व्यापारी पीयूष जैन के मामले में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों ही खुलकर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और इस राजनीतिक बयानबाज़ी से इसकी जाँच से जुड़े तथ्य बिल्कुल उलझे नज़र आने लगे हैं.
समाजवादी पार्टी ने बुधवार को ट्वीट किया कि "योगी जी, पूरे प्रदेश से झूठ बोलकर आख़िर आपने अपनों को बचा लिया!"
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ट्वीट में पार्टी ने एक अखबार में छपी ख़बर शेयर की जिसमें यह लिखा है कि कारोबारी पीयूष जैन से मिली नक़दी को डीजीजीआई (महानिदेशालय जीएसटी इंटेलिजेंस) अहमदाबाद ने टर्नओवर की रक़म माना है. इसमें यह भी दावा है कि कोर्ट में दाख़िल दस्तावेज़ों से इस बात की पुष्टि हुई है.
रिपोर्ट में विशेषज्ञों का हवाला देते हुए लिखा गया है, "जान-बूझ कर या अनजाने में अफ़सरों ने केस को कमज़ोर कर दिया है और ऐसे में पीयूष सिर्फ़ पेनल्टी की रक़म अदा कर ज़मानत हासिल कर सकते हैं. इसमें आयकर विभाग भी ब्लैक मनी की कार्रवाई नहीं कर पायेगा."
रिपोर्ट में यह भी कहती है, "पूछताछ में पीयूष ने स्वीकार किया कि 177 करोड़ की नक़दी पर कर नहीं अदा किया है और इसमें 31 करोड़ टैक्स चोरी की बात की गई है. टैक्स पेनल्टी और ब्याज मिला कर यह रक़म 52 करोड़ बैठती है."
इस रिपोर्ट को सपा की सहयोगी पार्टी आरएलडी ने भी ट्वीट कर सवाल पूछा है.
आरएलडी ने एक ट्वीट में लिखा है- "कानपुर में एक कारोबारी के घर पर मिले 177 करोड़ कैश को टर्नओवर बनाकर मामले को अब रफ़ा दफ़ा किया जा रहा है. प्रधानमंत्री जी कल इसी बरामदगी को लेकर विपक्षी पार्टियों को चोर बता रहे थे. आख़िर इतना ढिंढोरा पीटने के बाद अब किसको बचाने की कोशिश की जा रही है? कुछ हिस्सा तो नहीं लिया?"
इन ट्वीट्स के बाद अटकलें चल पड़ी हैं कि क्या वाक़ई में पीयूष जैन मात्र टैक्स भर कर इस मामले में राहत पा जायेंगे?
गिरफ़्तारी किस आधार पर हुई
बीबीसी ने पीयूष जैन की गिरफ़्तारी की स्वीकृति के आदेश को देखा है. इसके मुताबिक़ पीयूष जैन ने 25 दिसंबर को अपने बयान में इस बात को स्वीकार किया है कि उन्होंने तीन कंपनियों के माध्यम से जीएसटी की चोरी की है. इन कंपनियों का नाम ओडोकेम इंडस्ट्रीज़, ओडोसिन्थ इंक और फ़्लोरा नैचुरल है और इनके ज़रिये पीयूष जैन और उनके परिवार वाले ग़ैरकानूनी ढंग से परफ़्यूम के कंपाउंड्स की सप्लाई का धंधा चलाते हैं.
आदेश में यह भी लिखा है कि पीयूष जैन ने यह क़बूला है कि कानपुर के घर से बरामद और ज़ब्त की गई 177 करोड़ 45 लाख रुपये की राशि इन तीन कंपनियों के माध्यम से चलाए जा रहे ग़ैरकानूनी सप्लाई के धंधे से जुड़ी हुई है जिससे पीयूष जैन और उनके भाई अंबरीश जैन को ग़ैरकानूनी फ़ायदा पहुंचा है.
आदेश में लिखा गया है कि जांच में उजागर हुए तथ्यों से साफ़ तौर पर पाया गया है कि पीयूष जैन ने जीएसटी की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन करते हुए 'जीएसटी टैक्स की चोरी की है, सही तरीके से टैक्स इनवॉइस नहीं जारी किये हैं, सही तरीके से अपने कारोबार से जुड़े एकाउंट्स और रिकॉर्ड नहीं रखे हैं, कंपनी में आने वाली सप्लाई और कंपनी से होने वाली सप्लाई की जानकारी नहीं दी है, टैक्स का सेल्फ़-असेसमेंट नहीं किया है और जीएसटी लागू होने वाले दर से टैक्स का भुगतान नहीं किया है.' जीएसटी की टैक्स चोरी की रकम 5 करोड़ से भी अधिक है. यह कृत्य जीएसटी एक्ट के तहत अपराध है जिसकी पांच साल तक सज़ा हो सकती है. जीएसटी एक्ट की धारा 132(5) के तहत यह संज्ञेय और ग़ैर ज़मानती अपराध है."
इन्ही तथ्यों और उनसे जुड़े अपराधों के आधार पर पीयूष जैन की गिरफ़्तारी के आदेश दिए गए. जैन को 26 दिसंबर को गिरफ़्तार कर लिया गया.
क्या मिल सकती है राहत?
डीजीजीआई के विशेष सरकारी अभियोजक अंबरीश टंडन का कहना है कि पीयूष जैन के मामले में क़ानून के हिसाब से करवाई की जाएगी और "ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि यह टैक्स देकर वो छूट जायेंगे. माननीय न्यायालय ने अपराध का संज्ञान ले लिया है और इनकी रिमांड को मंज़ूर कर दिया है."
अंबरीश टंडन ने इस पूरे मामले को विस्तार से समझाते हुए कहा, "हमारे एसआईओ ने अर्ज़ी दी थी कि ज़ब्त किया गया पैसा स्टेट बैंक में जमा करके इसकी प्रेसिडेंट ऑफ़ इंडिया के नाम पर एक एफ़डीआर बना दी जाए, यानी फ़िक्स्ड डिपॉज़िट रसीद. इसकी एफ़डीआर इश्यू हो गई. तो अब क्या प्रेसिडेंट ऑफ़ इंडिया के एकाउंट से 177 करोड़ निकाल कर 52 करोड़ जमा कर दिया जायेगा?
इन्होंने टैक्स लायबिलिटी 52 करोड़ की मान ली है, एफ़िडेविट दिया है कि हमने 52 करोड़ की टैक्स चोरी की है. अब 52 करोड़ तो इनसे लिए ही जायेंगे और साथ में 177 करोड़ जो ज़ब्त हुए हैं उसकी राष्ट्रपति के नाम की एफ़डीआर बन गई है, उसे अब बाद में देखा जायेगा. इन पर टैक्स लायबिलिटी और बढ़ेगी, उसे जीएसटी के प्रावधानों के तहत गिना जाएगा. अभी जाँच जारी है."
अंबरीश टंडन ने राजनीतिक आरोपों के बारे में कोई टिप्पणी करने से इनकार किया.
क्या कह रहे हैं पीयूष जैन के वकील?
पीयूष जैन के वकील सुधीर मालवीय डीजीजीआई के इन दावों को ग़लत बताते हैं.
सुधीर मालवीय ने कहा, "पीयूष जैन ने ऐसा कोई भी बयान नहीं दिया है. यह डीजीजीआई ने अपनी इन्क्वायरी में लिखा है और उसका जवाब मैं तब दूंगा जब मैं एक तारीख को ज़मानत की अर्ज़ी लेकर जाऊँगा. अभी उसी की तैयारी चल रही है. हम लोग अपना क़ानूनी पक्ष कोर्ट में लाने से पहले सार्वजनिक नहीं कर सकते.
यह ज़रूर है कि जब पीयूष जैन कस्टडी में थे, तब इन्होंने एक आवेदन दिया था कि जो पैसा हमसे बरामद दिखाया गया है, उसको आपने हमारे नाम से बैंक में जमा किया तो आप 52 करोड़ मेरे खाते से ले लीजिये. लेकिन जीएसटी ने अभी उसको अपनी फ़ाइल में सबमिट नहीं किया है. बैंक को एक अर्ज़ी दी है कि इस राशि को आरटीजीएस (ट्रांसफ़र) कर दिया जाए. लेकिन अभी वो नहीं हुआ है. हमने अभी कोई पेनल्टी जमा नहीं की है, सिर्फ़ लिख कर दिया था कि ये पैसा उसी रक़म से काट लिया जाए. उस पर अभी कुछ हुआ नहीं है."
क्या हुआ है बरामद?
डीजीजीआई के मुताबिक़ पीयूष जैन के कानपुर के घर और ठिकानों पर छापेमारी में 177 करोड़ 45 लाख नक़द बरामद हुआ है जिसे गिनने में डीजीजीआई को तीन दिन लग गए. कानपुर में पड़े छापों में कुछ दस्तावेज़ भी बरामद हुए हैं.
डीजीजीआई ने साथ ही बताया है कि जैन के कन्नौज के घर और फ़ैक्ट्री में हुई छापेमारी में 19 करोड़ कैश, 23 किलो सोना, परफ्यूम कंपाउंड बनाने में इस्तेमाल होने वाला ढेर सारा रसायन और 600 किलो चंदन बरामद हुआ है जिसकी क़ीमत 6 करोड़ रुपये आंकी गई है. पीयूष जैन के कन्नौज के घर में एक तहखाना भी मिला है.
उनके घर से बरामद 23 किलो सोने की जाँच डीआरआई (राजस्व ख़ुफ़िया निदेशालय) को सौंपी गई है क्योंकि सोने पर विदेशी निशान बने हुए हैं.
फ़िलहाल छापेमारी को रोक दिया गया है मगर अधिकारियों का कहना है कि आगे भी सबूतों के आधार पर बरामदगी के लिए छापेमारी हो सकती है.
नहीं थम रही है सियासी तूतू-मैंमैं
जाँच में अभी तक पीयूष जैन के किसी राजनीतिक रिश्ते की बात उजागर नहीं हुई है, लेकिन सपा-भाजपा में इसे लेकर ज़बर्दस्त सियासी जंग छिड़ चुकी है.
भाजपा ने 29 दिसंबर को एक नया वीडियो जारी किया जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ये सवाल पूछा, "अखिलेश जी 'इत्र वाले मित्र' के पास काले धन का पहाड़ आख़िर किसका है?"
अमित शाह ने भी उत्तर प्रदेश में भाजपा जनविश्वास यात्रा में सपा प्रमुख अखिलेश यादव को पीयूष जैन से जोड़ने की कोशिश करते हुए कहा, "सपा मुखिया के इत्र वाले मित्र के पास से रेड में ₹250 करोड़ रुपये. सपा मुखिया प्रदेश की जनता को बताएं कि कहाँ से आया ये पैसा?"
उधर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने चुनावी सफ़र पर प्रदेश में जहाँ भी जा रहे हैं अब सफ़ाई देने पर मजबूर हो रहे हैं. एक निजी न्यूज़ चैनल को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा की पीयूष जैन का समाजवादी पार्टी से कोई रिश्ता नहीं है.
सियासी जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे पीयूष जैन के ख़िलाफ़ जारी जाँच की परतें खुलती रहेंगी वैसे-वैसे सियासी हमला और धारदार होगा. पीयूष जैन अभी न्यायिक हिरासत में हैं.
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