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गुजरात की केमिकल कंपनी में धमाका और हिंदू-मुस्लिम दोस्ती की मिसाल
- Author, रॉक्सी गागडेकर छारा
- पदनाम, बीबीसी गुजराती
"हमारे लिए दोस्ती पहले है, धर्म बाद में. हम हिंदू और मुस्लिम होने में विश्वास नहीं करते, हमारे लिए हमारी दोस्ती सबसे पहले है."
ये कहना है क़ासिम ख़ान का जो इन दिनों गुजरात के पंचमहल के घोघंबा में गुजरात फ्लोरोकेमिकल्स कंपनी (जीएफ़एल) में हुए विस्फ़ोट में घायल दोस्त अमित कुमार की सेवा कर रहे हैं.
25 साल के अमित कुमार का इलाज हलोल बस स्टैंड के सामने मौजूद सर्जिकल अस्पताल में चल रहा है.
बीती 16 दिसंबर को घोघंबा में जीएफ़एल कंपनी में आग लगने के हादसे में सात लोगों की मौत हो गई और 15 अन्य घायल हो गए. सभी 15 घायलों का इलाज सर्जिकल अस्पताल में चल रहा है.
अस्पताल के बर्न्स वार्ड में इन मजदूरों के चेहरे पर भयानक हादसे का खौफ़ आज भी देखा जा सकता है. ऐसा लगता है कि यह घाव उसके शरीर के साथ-साथ उसके दिमाग़ में हमेशा रहेंगे.
हालांकि, अस्पताल में इलाज करा रहे घायल मज़दूरों के बीच एक ऐसा मामला है जिसने लोगों का दिल जीत लिया है.
ये मामला एक हिंदू और एक मुस्लिम युवा की दोस्ती का है. एक दूसरे को 'भाई' कहकर संबोधित करते हुए क़ासिम ख़ान और अमित कुमार सांप्रदायिक सद्भाव के जीवंत उदाहरण हैं.
दोस्ती की शुरुआत कैसे हुई?
अमित और कासिम दोनों मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फ़र्रुख़ाबाद ज़िले के रहने वाले हैं. अमित कुमार के पड़ोस में एक मुस्लिम परिवार रहता था और क़ासिम इसी मुस्लिम परिवार के दामाद हैं.
क़ासिम का अपनी ससुराल में आना-जाना लगा रहता था और इसी दौरान उनकी जान पहचान अमित से हुई. कम वक्त में दोनों अच्छे दोस्त बन गए.
नौकरी की तलाश क़ासिम को 2020 में गुजरात ले आयी और घोघंबा की जीएफ़एल कंपनी में उन्हें नौकरी मिल गई. उधर अमित को भी काम की तलाश थी, सो क़ासिम के चलते वे भी नवंबर, 2021 से यहां नौकरी करने लगे.
यहां दोनों एक साथ काम करते हैं और एक ही कमरे में रहते हैं और साथ में ही खाना खाते हैं.
क़ासिम ख़ान ने बीबीसी को बताया, "हमारे लिए दोस्ती पहले है, धर्म बाद में. हम हिंदू और मुस्लिम होने में विश्वास नहीं करते, हमारे लिए हमारी दोस्ती सबसे पहले है."
वहीं अमित कुमार ने बताया, "गांव में आज भी हमारा परिवार एकदूसरे के साथ रहता है. हमारे घरों में ज़रूरत पड़ने पर एक दूसरे के घर से आटा और सब्जी जैसी चीज़ों का लेनदेन चलता है. हमें कभी नहीं लगा कि हम लोग एकदूसरे से अलग हैं."
हादसे में कैसे बचे अमित कुमार?
काम के दिन की तरह 16 दिसंबर को भी अमित कुमार सुबह 8 बजे प्लांट में काम करने पहुंच गए थे, जहां बाद में आग लग गयी.
अमित कुमार बताते हैं, "सुबह करीब 10 बजे विस्फ़ोट की आवाज़ सुनाई दी और कुछ दिखाई नहीं दिया. चारों तरफ़ धुआं था और लगातार बढ़ता जा रहा था."
अमित उस हादसे को याद करते हैं, "मुझे लगा था कि मैं शायद इससे कभी नहीं निकल पाऊंगा. लेकिन मैंने हिम्मत जुटाई और सीढ़ियों की तरफ़ बढ़ने की कोशिश की. कुछ क़दम चलने के बाद मैं गिर पड़ा."
इस बीच आग रफ़्तार पकड़ चुकी थी और अमित कुमार खड़े होने की स्थिति में भी नहीं थे. उन पलों के बारे में वो बताते हैं, "मेरा दम घुट रहा था और मैं डर गया था लेकिन मैं घिसटते हुए नीचे उतरा. मैंने देखा कि प्लांट का मुख्य दरवाजा थोड़ा खुला हुआ है. गेट देखकर मुझे राहत मिली और मैं उसी तरह घसीटते हुए बाहर निकला."
बाहर निकलते हुए अमित ने अपने शरीर को देखा और महसूस किया कि उनके कपड़े जल गए हैं और उनके हाथ और मुंह भी जले हुए हैं.
अमित ने कहा, "मैं अपनी स्थिति को देखते हुए बढ़ रहा था तभी मैंने क़ासिम की आवाज़ सुनी. वह मेरी तरफ़ भागता हुआ आया और उसने एक निजी वाहन से मुझे अस्पताल तक पहुंचाया."
अमित कुमार अकेले नहीं थे, जिन्हें प्लांट से बाहर निकलने में काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी. इस समय अस्पताल में इलाज करा रहे सभी लोगों ने इस तरह से अपनी जान बचाई.
पंचमहल के कैसे बड़ा धमाका हुआ?
पंचमहल ज़िले के हलोल में घोघंबा स्थित जीएफएल कंपनी के प्रवेश द्वार के पास स्थित एमपीपी-3 प्लांट में धमाका हुआ था.
16 दिसंबर की सुबह प्लांट में करीब 25 लोग काम कर रहे थे और सुबह 10 बजे बॉयलर में आग लग गई. इस आपदा में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है और 16 अन्य घायल हैं.
हालांकि दमकल विभाग की गाड़ियों ने कुछ ही घंटे में आग पर क़ाबू पा लिया था. आग पर क़ाबू पाने के तुरंत बाद दो शव निकाले गए, जबकि देर शाम तीन और शव मिले. हादसे के अगले दिन, दो अन्य शव कुछ घंटों के अंतराल पर मिले.
घटना के बाद ग्रामीणों द्वारा कंपनी पर पथराव करने की भी ख़बरें भी सामने आयी हैं.
हादसे के लिए कौन ज़िम्मेदार?
सात लोगों की जान लेने वाले इस हादसे के संबंध में अब तक ज़िलाधिकारी, प्रशासन या पुलिस के पास कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है.
बीबीसी ने इस मामले में जिलाधिकारी के साथ-साथ पुलिस अधीक्षक से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कई बार कोशिशों के बाद संपर्क नहीं हो सका. हालांकि, एक पुलिस अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा कि पुलिस एफ़एसएल रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई करेगी.
कंपनी ने क्या मदद की?
जीएफ़एल के अध्यक्ष जिग्नेश शाह ने बीबीसी को बताया, "हमें दुर्घटना पर खेद है. सभी आवश्यक सावधानी बरतने के बावजूद दुर्घटना हुई."
पीड़ितों को दी गई सहायता के बारे में उन्होंने बताया, "मृतकों के परिवारों को 20 लाख रुपये, स्थायी रूप से विकलांग हुए श्रमिकों को सात लाख रुपये दिए जाएंगे. इसके अलावा इन सबके इलाज का ख़र्च कंपनी वहन कर रही है."
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