हरनाज़ संधू: बॉडी शेमिंग को पीछे छोड़ कैसे बनीं मिस यूनिवर्स, मां ने बताई कहानी

हरनाज़ संधू

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21 साल बाद मिस यूनिवर्स का ताज भारत के नाम हुआ है और इसे लाने वाली हैं हरनाज़ संधू.

हरनाज़ संधू पंजाब के मोहाली की रहने वाली हैं. उनकी मां रविंदर कौर डॉक्टर हैं. उनका पैतृक गांव कोहाली गुरदासपुर ज़िले में है.

हरनाज़ संधू सौंदर्य प्रतियोगिताओं में 17 साल की उम्र से भाग ले रही हैं. इससे पहले 2021 में वो 'मिस दीवा 2021' का ख़िताब जीत चुकी हैं.

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2019 में उन्होंने फ़ेमिना मिस इंडिया पंजाब का ख़िताब जीता था और 2019 की फ़ेमिना मिस इंडिया प्रतियोगिता के शीर्ष-12 में उन्होंने जगह बनाई थी.

हरनाज़ की मां डॉक्टर रविंदर कौर से बीबीसी ने बात की. रविंदर कौर ने बताया कि कैसे हरनाज़ के इस सफ़र की शुरुआत हुई.

हरनाज़ संधू के माता-पिता
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पिता ने दी इजाज़त तो घर में हुआ भांगड़ा

रविंदर कौर ने बताया, "सौंदर्य प्रतियोगिताओं में जाने की शुरुआत 2017 में हुई थी जब हरनाज़ सेक्टर 42 के सरकारी कॉलेज पहुंची. वहां इनकी फ्रैशर पार्टी थी और उसमें वो सैकेंड रनरअप बनी थीं. उसके बाद हरनाज़ ने कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और आगे बढ़ती गई."

हरनाज़ अब भी कॉलेज में पढ़ती हैं. वो चंडीगढ़ में गवर्नमेंट कॉलेज सेक्टर 42 से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए कर रही हैं.

हरनाज़ संधु के पिता प्रीतम सिंह संधु अपनी खुशी ज़ाहिर करते हुए कहते हैं कि सुबह से इतनी बधाइयां आर रही हैं, मीडिया है, ये सब पहली बार देखा है और ये हरनाज़ की बदौलत ही है.

प्रीतम सिंह संधु बताते हैं कि जिस दिन उन्होंने इस क्षेत्र में जाने के लिए हामी भरी थी उस दिन बच्चों ने घर में भांगड़ा किया था.

उन्होंने कहा, "हरनाज़ ने सबसे पहले अपने भाई को बताया और फिर मां को. जाट परिवार होने के कारण उसे डर था कि कहीं मैं मना ना कर दूं. इसलिए मुझे बाद में बताया. मुझे भी लगा कि बच्चों पर भरोसा करके आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए. मेरी हां पर इन्होंने घर में दिन भर भांगड़ा किया था."

हरनाज़ संधू

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झेलनी पड़ी बॉडी शेमिंग

हरनाज़ के माता-पिता ने उनके बचपन के बारे में भी कई बातें साझा कीं.

उनकी मां ने बताया कि हरनाज़ छोटी उम्र से ही अच्छे व्यवहार वालीं और मृदु भाषी थीं. उन्हें इसके लिए स्कूल से सर्टिफिकेट भी मिले थे.

हरनाज़ ने भले ही कई सौदंर्य प्रतियोगिताएं जीती हैं लेकिन उन्हें भी अपने शरीर के कारण बॉडी शेमिंग का सामना करना पड़ा था.

हरनाज़ अपने कुछ इंटरव्यू में भी बता चुकी हैं कि बहुत पतले होने के कारण उन्हें लोग टोकते रहते थे.

उनकी मां रविंदर कौर भी बताती हैं कि हरनाज़ को बॉडी शेमिंग झेलनी पड़ी थी लेकिन परिवार ने हमेशा उनकी हिम्मत बढ़ाई.

रविंदर कौर ने बताया, "हरनाज़ बचपन में मोटी थी. हम उसे कद्दू कहकर बुलाते थे लेकिन बाद वो पतली हो गई. लोग उसे बोलते थे लेकिन मैंने उसे कहा कि इच्छाशक्ति मजबूत होनी चाहिए और किसी की फिक्र मत करो. ये तुम्हारा शरीर है और तुम्हें खुद से प्यार करना चाहिए. बॉडी शेमिंग हुई तो थी, वो कभी परेशान भी हो जाती थी लेकिन मैं उसे प्रोत्साहित करती थी."

रविंदर कौर अपने और हरनाज़ के रिश्ते को लेकर कहती हैं, "हरनाज़ और मेरा रिश्ता मां-बेटी से ज़्यादा दोस्तों का है. मैं खुद अपनी सीक्रेट्स उसे बताती हूं."

हरनाज़ संधू के माता-पिता
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परिवार ने क्या कहा

हरनाज़ को अपने माता-पिता के साथ परिवार दूसरे लोगों से भी सहयोग मिला. उनकी मां बताती हैं कि हरनाज़ के 'ताया और ताई ने भी बहुत सपोर्ट किया' है.

हरनाज़ की ताई लकविंदर कौर ने बीबीसी पंजाबी से कहा कि वो आज बहुत खुश हैं. उन्होंने बताया कि हरनाज़ यहां आती रही हैं और कहती थीं, "ताई, मैं आपकी मदद करूंगी. बताओ कैसे करना है."

हरनाज़ अपने पूरे परिवार में अकेली बेटी हैं.

उनके ताऊ जसविंदर सिंह ने कहा कि कुछ खुशियां ऐसी होती हैं जिन्हें बयां नहीं किया जा सकता.

उन्होंने कहा, "सुबह हमारी आंखों में खुशी के आंसू थे. हमारी बेटी ने वो कर दिखाया जो हमने कभी सोचा भी नहीं था."

उन्होंने कहा कि हरनाज़ 'आज जहां है, वहां अपनी मेहनत से पहुंची है.'

हरनाज़ संधू की अपने माता-पिता और भाई के साथ बचपन की तस्वीर

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जीत से पहले का माहौल

प्रीतम सिंह संधु बताते हैं कि हरनाज़ उधर प्रतियोगिता में हिस्सा ले रही थीं और इधर उनकी नींदें उड़ी हुई थीं. एक-एक पल बहुत मुश्किल से गुज़र रहा था.

उन्होंने बताया, "नतीजे से पहले पूरा परिवार टीवी के सामने चिपका हुआ था. आज सुबह 5:30 बजे से ही टीवी देख रहे हैं. हरनाज़ की मां दुआ मांगने गुरुद्वारे भी चली गई थीं."

हालांकि, बेटी की जीत के लिए दुआएं मांगने वालीं और हौसला बढ़ाने वालीं रविंदर कौर उनके साथ प्रतियोगिता में इसराइल नहीं जा पाईं.

रविंदर कौर कहती हैं, "सारे मुझसे यही पूछ रहे थे कि मैं हरनाज़ के साथ वहां हूं या नहीं. आप गए क्यों नहीं? यहां से भी हम उसको अपना सपोर्ट और आशीर्वाद दे सकते हैं. आज तक मैं किसी पीजेंट में नहीं गई तो मुझे इसका डर भी था. थोड़ा मज़ाकिया बात है लेकिन मैंने अभी तक जिसे भी वोटिंग की है वो हारे ही हैं."

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हरनाज़ के प्रतियोगिता जीतने के बाद अपनी मां से बात हुई.

रविंदर कौर ने बताया, "मेरा फ़ोन मीडिया से बातचीत में व्यस्त होंने के कारण वो मौसी के ज़रिए मुझसे बात कर रही है. उसने बताया कि आज मुझे अलग रूम मिला है. मैं बहुत ज़्यादा खुश हूं. मैं बहुत डरी हुई थी और मैं बहुत रोई हूं.

उन्होंने कहा कि हरनाज़ को ये नहीं लगता कि उसने कोई क्राउन जीता है, उसे लगता है कि ये एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है.

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