You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
यूपी में गोद में बच्ची लिए शख़्स पर डंडे बरसाने वाला इंस्पेक्टर निलंबित
- Author, अनंत झणाणे
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए
उत्तर प्रदेश में कानपुर की पुलिस ने गोद में बच्ची को लिए एक व्यक्ति की पिटाई का वीडियो वायरल होने के बाद उसमें नज़र आने वाले इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया है.
इस वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा था और इसे लेकर प्रदेश की क़ानून व्यवस्था को निशाना बनाया जा रहा था.
बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने इस घटना का वीडियो ट्वीट करते हुए शुक्रवार को लिखा - "सशक्त क़ानून व्यवस्था वो है जहां कमज़ोर से कमज़ोर व्यक्ति को न्याय मिल सके. यह नहीं कि न्याय मांगने वालों को न्याय के स्थान पर इस बर्बरता का सामना करना पड़े, यह बहुत कष्टदायक है. भयभीत समाज क़ानून के राज का उदाहरण नहीं है. सशक्त क़ानून व्यवस्था वो है जहां क़ानून का भय हो, पुलिस का नहीं."
इस घटना को लेकर शुक्रवार को पुलिस ने भी जानकारी दी है. कानपुर रेंज के आईजी प्रशांत कुमार ने भी शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया कि मामले में लिप्त एसएचओ को निलंबित कर दिया गया है और उनके ख़िलाफ़ विभागीय जाँच के आदेश जारी कर दिए गए हैं.
प्रशांत कुमार ने बताया,"वहाँ एक मेडिकल कॉलेज बन रहा है जिसका एक कैंपस ज़िला अस्पताल परिसर में ही है, तो उसकी वजह से वहाँ धूल-मिट्टी उड़ा करती है, बड़ी गाड़ियाँ आती हैं, तो उसको लेकर अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने गेट बंद करवा दिया जिसकी वजह से ओपीडी प्रभावित हुआ और पुलिस को बुलाया गया.
"इसी कार्रवाई में हमारे इंस्पेक्टर ने लाठियाँ मारनी शुरू कर दीं, वो उनको कदापि नहीं करना चाहिए था, समझा-बुझाकर लोगों को हटाना चाहिए था, विशेष कर जब हाथ में बच्ची हो. ऐसी घटना संवेदनहीनता को दर्शाती है. तो इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया गया है और विभागीय जाँच शुरू हो गई है."
क्या है मामला
ये घटना कानपुर के अकबरपुर इलाक़े की है. वहाँ के सरकारी अस्पताल में कर्मचारियों ने एक स्थानीय मुद्दे को लेकर हड़ताल कर दी थी.
गुरुवार को पुलिस ने इस हड़ताल को ख़त्म करवाने की कोशिश की और इस दौरान बात बढ़ने पर उन्होंने बलप्रयोग किया. उन्होंने हड़ताल की अगुआई कर रहे रजनीश शुक्ला नाम के एक व्यक्ति को पकड़ कर जीप में बिठा लिया.
इसके बाद पुलिस ने वहाँ मौजूद एक और व्यक्ति पर लाठियाँ चलाईं जिसके हाथ में एक बच्ची थी.
इस व्यक्ति का नाम पुनीत शुक्ला है और वो रजनीश शुक्ला के भाई हैं. उनकी गोद में मौजूद बच्ची रजनीश शुक्ला की बेटी थी जिसकी उम्र तीन साल बताई जा रही है.
वीडियो में दिखता है कि पुलिस पुनीत शुक्ला पर लाठियाँ बरसा रही है और डरी हुई बच्ची लगातार रो रही है.
लाठियां खाते हुए पुनीत कह रहे हैं, "अरे लग जाएगी बच्ची को".
बाद में एक पुलिसकर्मी ने बच्ची को उनसे अलग करने की कोशिश की थी. उसका विरोध करते हुए पुनीत उसे छुड़ाते हुए गिड़गिड़ाकर कहते हैं, "मेरा बच्चा है! मेरा बच्चा है! कोई नहीं साहब, इसकी माँ भी नहीं है साहब."
यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है.
बच्ची को बचाने का प्रयास किया- पुलिस
पुलिस ने इस मामले में इंस्पेक्टर के ख़िलाफ़ कार्रवाई तो की है मगर साथ ही अस्पताल में पुलिस की कारवाई को सिर्फ़ हल्का बल प्रयोग बताया है और कहा है कि उन्होंने बच्ची को बचाने की कोशिश की.
कानपुर देहात के एसपी केशव प्रसाद चौधरी ने कहा, "कानपुर देहात में एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है जिसका नाम रजनीश शुक्ला है. रजनीश ने अपने 100-150 साथियों के साथ ज़िला अस्पताल की ओपीडी बंद कर दी थी और डॉक्टरों और मरीज़ों के साथ अभद्र व्यवहार करना शुरू कर दिया था. ऐसी स्थिति में सीएमओ ने सूचित किया और पुलिस मौक़े पर पहुँची.
"पुलिस के समझाने पर भी वो नहीं माने और उन्होंने चौकी इंचार्ज और उनके कुछ सिपाहियों को कमरे में बंद कर दिया. रजनीश शुक्ला ने और उग्र होते हुए थाना अध्यक्ष के अंगूठे को दांत से काट लिया था. पूरे अस्पताल में अराजकता का माहौल बन गया था. ऐसी स्थिति में हल्का बल प्रयोग करते हुए उपद्रवियों को हटाया गया. "
एसपी केशव प्रसाद चौधरी ने रजनीश शुक्ला के भाई के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाई का भी बचाव किया.
उन्होंने कहा,"वीडियो में दिख रहा व्यक्ति रजनीश शुक्ल का भाई है और वो भीड़ में जा रहे लोगों को उकसाने का काम कर रहा था. और साथ ही वो अभद्र व्यवहार कर रहा था. मौक़े से हटाने के लिए पुलिस द्वारा न्यूनतम बल का प्रयोग किया गया और बच्चे की सुरक्षा का भी प्रयास किया गया था."
हालाँकि, पुनीत शुक्ला ने समाचार चैनल आज तक पर अपना पक्ष रखते हुए घटना के संबंध में बताया है कि पुलिस ने उनके ऊपर लाठियाँ बरसानी शुरू कर दीं जब वो उन्हें अपने भैया को ले जाता देख अपनी भतीजी को गोद में लिए उनके पास जाने की कोशिश कर रहे थे.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)