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जनरल बिपिन रावत का रूस में बना हेलिकॉप्टर क्रैश कैसे हुआ?- प्रेस रिव्यू
आज भारत के तमाम अख़बारों में चीफ़ ऑफ डिफेंस स्टाफ़ जनरल बिपिन रावत की हेलिकॉप्टर क्रैश में मौत की ख़बर अहम सुर्खियां हैं.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने एक ख़बर लगाई है कि जनरल रावत के लिए तमिलनाडु पुलिस ने ज़ेड प्लस सिक्यॉरिटी की व्यवस्था कर रखी थी.
जनरल रावत बुधवार को सुलुर एयर बेस से अपनी पत्नी समेत सेना के 14 लोगों के साथ भारतीय वायु सेना के Mi-17V5 हेलिकॉप्टर से तमिलनाडु के वेलिंगटन में डिफेंस सर्विस स्टाफ़ कॉलेज के लिए रवाना हुए थे.
द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार, कोयम्बटूर सिटी पुलिस ने जनरल रावत की सुरक्षा में ज़ेड प्लस सिक्यॉरिटी की व्यवस्था कर रखी थी. जनरल रावत इस कॉलेज के कैडेट को संबोधित करने वाले थे. अख़बार से एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया, ''हमें जनरल रावत के काफ़िले के सड़क मार्ग की सुरक्षा का इंतज़ाम करने के लिए भी कहा गया था.''
जहाँ पर जनरल रावत का हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ वहाँ से 10 किलोमीटर की दूरी पर बने वेलिंगटन में हेलिपैड था. यहीं हेलिकॉप्टर को लैंड करना था. हेलिपैड पर तमिलनाडु पुलिस का महकमा तैनात था. हेलिकॉप्टर को गिरते हुए देखने वाला एक चश्मदीद और दुर्घटनास्थल पर पहुँचने वाले एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मौसम साफ़ था और बादल नहीं थे.
अख़बार से एक चश्मदीद ने कहा, ''मैंने देखा कि हेलिकॉप्टर बहुत कम ऊंचाई पर उड़ रहा था. अचनाक से यह मुड़ा और एक कटहल के पेड़ से टकरा गया. इसके बाद तेज़ धमाका हुआ. जब हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ तब मौसम साफ़ था.''
द हिन्दू ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि हेलिकॉप्टर इतनी कम ऊंचाई पर क्यों उड़ रहा था? क्या पायलट को एयर ट्रैफिक कंट्रोल या आर्मी कंट्रोल से मौसम को लेकर कोई अलर्ट था? तमिलनाडु पुलिस के अधिकारियों ने अख़बार से कहा है कि पूरे मामले की जाँच की जा रही है.
क्रैश की ख़बर मिलते ही तमिलनाडु वेस्ट ज़ोन के आईजी आर सुधाकर कोयम्बटूर से दुर्घटनास्थल पर पहुँचे. निलगिरी ज़िले में माओवादी विरोधी अभियान में लगे स्पेशल टास्क फ़ोर्स को भी घटनास्थल पर जाने के लिए कहा गया था.
जो हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ, उसे भारतीय वायुसेना में काफ़ी भरोसेमंद और सुरक्षित माना जाता है. रूस में बना Mi-17V5 का इस्तेमाल भारतीय वायुसेना में ऊंची उड़ान वाले अभियान और राहत बचाव कार्य में आम बात है. प्लानेट-एक्स एयरोस्पेस सर्विसेज लीमिटेड के निदेशक और सीईओ ने द हिन्दू से कहा, ''Mi-17V बहुत ही विश्वसनीय चॉपर है. उत्तराखंड जैसे राज्यों में ऊंचाई पर राहत बचाव कार्य के लिए इसका इस्तेमाल अक्सर होता है. वेलिंगटन जाने के लिए जनरल रावत ने जिस हेलिकॉप्टर का चुनाव किया था, वो बिल्कुल सही था.''
अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि दो सितंबर, 2001 को आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी का हेलिकॉप्टटर क्रैश कुरनूल के पर्वतीय इलाक़े हुए में हुआ था. तब मौसम ख़राब था फिर भी पालयट को उड़ान भरने के लिए दबाव डाला गया था. इस मामले में कोई भी जाँच रिपोर्ट सामने नहीं आई. बाक़ी के सभी दुर्घटनाओं में जाँच को लेकर यही चलन है. अख़बार ने लिखा है कि पूर्व की दुर्घटनाओं से कोई सबक़ नहीं लिया गया है.
अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''MI-17 का इंजन बहुत मज़बूत है. इसका डाउनवॉश भी बहुत प्रभावी है. अगर पायलट कम ऊंचाई पर उड़ान भर रहा है तो डाउनवॉश के पेड़ों पर चक्कर मारने की पूरी संभावना होती है. इस स्थिति में पायलट को देखने में समस्या होती है. यहाँ तक कि इस स्थिति में अनुभवी पयलट भी धोखा खा जाता है.''
''हेलिकॉप्टर आधुनिक एवियोनिक्स से लैस है. हालाँकि जब कम विजिबिलिटी और बादलों के नीचे होने की स्थिति में लैंडिंग मुश्किल होती है. जिस तरह से पेड़ टूटे हैं, उनकी तस्वीर देख लगता है कि रोटर्स क्षतिग्रस्त हुआ था. कम ऊंचाई वाली उड़ान में जब गति धीमी हो जाती है तो उसे फिर से तेज़ करना बहुत मुश्किल होता है. यह हेलिकॉप्टर फुल अथॉरिटी डिज़िटल इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल से लैस था. अगर पायलट इंजन पर ज़्यादा ज़ोर भी डालता तो FADEC इसे रोक देता. इस मामले में आंतरिक सैन्य जाँच होगी और हमें इसकी पूरी कहानी कभी पता नहीं चलेगी.''
अग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस ने भी जिस MI-17 V5 हेलिकॉप्टर पर जनरल रावत सवार थे, उसके बारे में एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, यह हेलिकॉप्टर दुनिया भर में प्रचलित है. इसमें डिज़िटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और एक कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर भी होता है.
अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''जनरल रावत का जो हेलिकॉप्टर क्रैश किया वो 2008 में 80 MI-17 V5 खेप का हिस्सा था. एविएशन एक्सपर्ट अंगद सिंह ने अख़बार से बताया है कि 80 हेलिकॉप्टर के ऑर्डर को बाद में बढ़ाकर 150 कर दिया गया था.
सटीक और साहसिक फ़ैसले
हिन्दी अख़बार दैनिक जागरण ने जनरल रावत के निधन पर पहले पन्ने के बॉटम में एक रिपोर्ट लगाई है- साहसिक और सटीक फ़ैसलों के पर्याय थे जनरल रावत. इस रिपोर्ट में अख़बार ने लिखा है, ''जनरल रावत एक ऐसा नाम जो सख़्त और सटीक फ़ैसले लेने के लिए विख्यात था. देश का पहला चीफ़ ऑफ डिफेंस स्टाफ़ बनने से पहले जनरल रावत थल सेना प्रमुख थे. उन्होंने इस पद पर रहते हुए कई अहम फ़ैसले किए और उन्हें अंजाम तक पहुँचाया.''
अख़बार ने लिखा है, ''अपने 40 साल के चमकदार करियर में जनरल रावत ने गर्व और शौर्य से सेना में कमिशन पाने से लेकर देश का पहला सीडीएस बनने का सुनहरा सफ़र कई मील के पत्थर स्थापित करते हुए किया. उनकी प्रतिभा का कायल हर कोई था. पूर्वोत्तर में भारत को उग्रवाद से मुक्ति दिलाने में जनरल रावत की अहम भूमिका थी. पाकिस्तान में आतंकवादियों के ठिकानों को ध्वस्त करने में भी जनरल रावत की अग्रणी भूमिका थी.''
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