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यूपी टीईटी : किसी की टूटी उम्मीद तो किसी को सदमा, चिंता में लाखों युवा
- Author, अनंत झणाणे
- पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए
उत्तर प्रदेश की शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी का व्हाट्सएप पर पेपर लीक हो जाने से लाखों आवेदकों में मायूसी है.
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दावा किया गया है कि यह परीक्षा जल्दी आयोजित करा ली जाएगी लेकिन आवेदकों को यह चिंता सता रही है कि विधानसभा चुनाव होने की वजह से परीक्षा और आगे तक स्थगित हो सकती है.
उत्तर प्रदेश के ढाई हज़ार से ज़्यादा सेंटर में दो पाली में टीईटी की परीक्षा रविवार को होने वाली थी लेकिन सुबह 10 बजे परीक्षा शुरू होते ही पेपर लीक होने की ख़बर आयी. प्रदेश के 75 ज़िलों में पेपर लीक होने की ख़बर फैलते-फैलते देर हो गयी थी और पहली पाली में काफ़ी सारे छात्रों ने पेपर पूरा भी कर लिया था.
32 किमी. दूर आकर पहली बार दी परीक्षा
पश्चिम उत्तर प्रदेश में 21 साल की कुमारी संजना किशोर अपने घर से 32 किलोमीटर दूर फ़िरोज़ाबाद के सिरसागंज में अपना पेपर देने गयी थीं. फ़िरोज़ाबाद में यूपी-टीईटी की परीक्षा रद्द होने की ख़बर पहुँचते-पहुँचते देर हो गयी. जब तक सूचना आयी तब तक पहली पाली में कई सारे छात्र अपनी परीक्षा दे चुके थे.
संजना कहती हैं, "मैंने पहली बार यह परीक्षा दी है. मैं इस चीज़ को लेकर सदमे में हूँ. अगर हम लोग यूपी टीईटी का इम्तेहान दे देते तो फिर हम लोग सेंट्रल टीईटी (CTET) के इम्तेहान की तैयारी शुरू कर सकते थे."
उत्तर प्रदेश के बाहर शिक्षक की नौकरी के लिए सीटीईटी की परीक्षा पास कर पात्रता हासिल करनी पड़ती है. वहीं, यूपी में टीईटी और सीटीईटी में पास होने वाले आवेदकों को बाद में सुपर टीईटी की परीक्षा देनी पड़ती है.
जब सरकार प्राथमिक और जूनियर स्कूल में शिक्षकों की भर्ती के लिए वेकेंसी निकालती है तो सुपर टीईटी में सफल होने वाले अभ्यर्थियों का मेरिट के आधार पर चयन होता है और उनकी सरकारी शिक्षक के पद पर नियुक्ति होती है.
यह एक स्थायी सरकारी नौकरी होती है जिसमें शुरुआती वेतन 40 हज़ार से अधिक होता है. यही वजह है कि लाखों लोग इस परीक्षा में अपनी किस्मत आज़माते हैं.
संजना भी उन लाखों परीक्षार्थियों में से एक हैं. परीक्षा तो रद्द हो गयी लेकिन उनके लिए सेंटर पहुंचना आसान नहीं था. वह विकलांग हैं और दूसरों की मदद से परीक्षा सेंटर तक पहुंच पाईं.
संजना कहती हैं, "मैं सुबह सात बजे घर से निकली थी. आप विश्वास नहीं करेंगे कि मैं एक पैर में 16 प्रतिशत हैंडीकैप हूँ और मुझे सेंटर तक पहुँचने में बहुत तकलीफ़ हुई थी."
कोरोना ने कराया था लंबा इंतज़ार
शिक्षक की नौकरी के लिए युवतियां भी उत्साहित होती हैं और बड़ी संख्या में आवेदन करती हैं. 25 साल की आकांक्षा बाजपेई का कहना है की वो उत्तर प्रदेश के हरदोई में अपने परीक्षा सेंटर में पहुँचकर पेपर के आधे सवालों के जवाब भी दे चुकी थीं.
आकांक्षा कहती हैं, "ख़बर आयी की परीक्षा रद्द की जा रही है. मेरे साथ पहली बार ऐसा हुआ है कि मैं कोई एग्ज़ाम लिखने गयी हूँ और वो निरस्त कर दिया गया है. 2019 में भी मैंने यही परीक्षा दी थी. इस बार दोबारा दे रही थी क्योंकि 2020 में कोरोना की वजह से यह परीक्षा नहीं हो पाई थी. काफ़ी ख़राब लगा की पेपर निरस्त हो गया. एक साल के बाद हम यह परीक्षा दे रहे थे तो हमारी पूरी तैयारी थी."
योगी सरकार ने अभ्यर्थियों से परीक्षा को एक महीने में फिर से करवाने का वादा किया है. आकांक्षा बाजपेयी का कहना है, "इसमें एक इंसान की बात नहीं है. लाखों लोगों ने इस परीक्षा का फॉर्म भरा था. बहुत लोगों का भविष्य इसके साथ जुड़ा हुआ है. अब इसमें देरी हो रही है तो फिर पता नहीं आगे की शिक्षक भर्ती की वेकेंसी कब तक आएगी."
परीक्षा के लिए लिया उधार
28 साल के नवलेश कुमार यादव उत्तर प्रदेश के जौनपुर ज़िले के एक किसान परिवार से हैं. योगी सरकार की एसटीएफ़ यह दावे करती है कि उन्होंने सॉल्वर गिरोह का भंडाफोड़ कर अभ्यर्थियों के भविष्य को बचाया है, तो उसके बारे में नवलेश का कहना है, "मैं सरकार से कहना चाहता हूँ कि मेरी माँ ने पड़ोसी से पैसे मांग कर हमें 1200 रुपये का फॉर्म भरवा कर यहाँ परीक्षा में भेजा है. आज हम अपनी माँ को किस मुँह से कहें कि पेपर रद्द हो गया है."
बात करते हुए नवलेश यादव भावुक हो जाते हैं और अपने परिवार की माली हालत के बारे में बताते हुए कहते हैं, "हम लोग मामूली से किसान हैं. नमक रोटी खाते हैं. हम अपनी माँ से बोले की हम टीईटी पास कर लेंगे तो उसके बाद वेकेंसी आएगी. जब वो आएगी तो फिर दिन रात मेहनत करके हम लोग अपनी नमक रोटी का कष्ट दूर करेंगे. यह सरकार हमारे भविषय से खिलवाड़ कर रही है."
रोते-रोते नवलेश कुमार कहते हैं, "अगर एक महीने में आचार संहिता लग जाएगा तो हम लोग कहाँ जायेंगे?"
'दो बच्चों की माँ हूँ'
प्रयागराज से 32 साल की मुक्ता कुशवाहा परीक्षा देने के लिए लखनऊ आयी थीं. वो दो बच्चियों की माँ हैं और परिवार के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को अच्छे से समझती हैं.
फ़िलहाल मुक्ता एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका हैं. लेकिन सरकारी नौकरी का अलग सहारा होता है. मुक्ता कहती हैं, "हमें उम्मीद थी कि अगर इस परीक्षा को पास करेंगे और नयी भर्ती आएगी तो हमारा भविष्य उज्जवल हो जाएगा. एक महिला के लिए किसी तरह की तैयारी करना आसान नहीं होता है. हम गृहणियां घर, परिवार, गाँव से जूझ कर, अलग से समय निकाल कर इसकी तैयारी करती हैं. दिन भर काम करते हैं, बच्चे सँभालते हैं, रात में पढ़ते हैं. यह जो पेपर लीक हुआ है, योगी सरकार ने हमारे सपनों को तोड़ दिया है."
राज्य सरकार ने इस पूरे मामले में तत्काल प्रभाव से कार्रवाई का दावा किया है. अब तक कई ज़िलों से 29 लोगों को पेपर लीक मामले में गिरफ़्तार किया गया है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह आश्वासन दिया है कि पेपर लीक मामले में आरोपियों की संपत्ति ज़प्त की जाएगी और उनके घरों पर बुलडोज़र चलाए जाएंगे, गैंगस्टर एक्ट के तहत करवाई होगी.
लेकिन इसके बावजूद मुक्ता कुशवाहा जैसे आवेदक इन दावों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. वो पूछती हैं, "जो लोग पकड़े गए हैं वो छोटी मछलियां हैं? वो बड़े लोग कहाँ हैं जिनके स्तर से पेपर लीक होता है? आज जब हमने इतनी मेहनत कर रखी थी तो उस समय इस भर्ती को निरस्त करना कहीं न कहीं सरकार के तंत्र की नाकामी है."
चुनावी माहौल का असर
32 साल के अजय कुमार बाराबंकी में ट्यूशन पढ़ाने का काम करते हैं. योगी सरकार बार-बार कह रही है कि टीईटी की परीक्षा सिर्फ़ स्थगित हुई है, रद्द नहीं.
अजय कुमार कहते हैं, "यह परीक्षा आगे कब होगी इसके बारे में अभी कुछ कह नहीं सकते. लेकिन आप देखिए कि एक अभ्यर्थी इतने दिन से इसकी तैयारी कर रहा है. इसमें 21 लाख से ज़्यादा परीक्षार्थी बैठते हैं. अगर यह टीईटी हो जाता है तो चुनाव से पहले नयी वेकेंसी आने की उम्मीद थी. जो अब उम्मीद धूमिल होती जा रही है."
शिक्षक की नौकरी
28 साल के सुबोध कुमार औरैया के रहने वाले हैं. वो बेरोज़गार हैं और पक्की सरकारी नौकरी की तलाश में हैं. छोटे-मोटे काम करके सुबोध महीने में तीन से चार हज़ार कमा लेते हैं लेकिन उससे ज़्यादा दिन गुज़ारा नहीं चलेगा.
उत्तर प्रदेश सरकार तमाम सरकारी नौकरियों के लिए सालाना प्रवेश परीक्षाएं करवाती है तो फिर सुबोध जैसे लाखों लोगों को टीईटी की परीक्षा का सबसे ज़्यादा इंतज़ार क्यों था और उसके लीक होने की वजह से कितनी निराशा हो रही है?
सुबोध कहते हैं, "हमारे लिए टीईटी की पात्रता हासिल करना बहुत ज़रूरी था. लोगों को निराशा और हताशा इसलिए हो रही है कि यह एक सम्मानजनक नौकरी है. आप किसी भी नौकरी से तुलना कर लीजिए, शिक्षकों की अलग मर्यादा होती है, ज़्यादा सम्मान मिलता है. हम लोग एक सम्मानित नौकरी के लिए प्रयास कर रहे थे."
सुबोध के मुताबिक़ परीक्षा का रद्द होना शायद सरकार के लिए फ़ायदेमंद साबित होगा क्योंकि, "अब सरकार के पास जल्दी नौकरी न देने का एक बहाना हो गया. 15 दिसंबर से एक जनवरी के बीच में चुनाव की आचार संहिता लग सकती है. अगर लग जाती है तो फिर कहाँ से होगी भर्ती?"
कैसी रही है उत्तर प्रदेश पुलिस की करवाई
इस पेपर लीक की जांच उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ़) कर रही है. जांच में फ़िलहाल अभ्यर्थियों के पैसे लेकर पेपर आउट करने, पेपर हल करने वालों को बैठाने और अन्य तरीकों से नक़ल कराने वाले एक गिरोह के सदस्यों, सॉल्वरों और आवेदकों समेत 29 लोगों की प्रदेश के अलग अलग ज़िलों से गिरफ्तारियां की हैं.
प्रयागराज से अभ्यर्थी विजय यादव का कहना है कि पुलिस जो करवाई कर रही है वो ठीक है, लेकिन "पिछले छह महीने से हम लोग इस परीक्षा की तैयारियां कर रहे थे. राज्य सरकार कहती है कि उसका अपराध के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस है, ऐसा सुनाने में आ रहा है कि एक दिन पहले से ही पेपर वायरल हो रहा है लेकिन गिरफ़्तारी किसकी हो रह रही है? कोई छात्र जिसके पास व्हाट्सएप से किसी ने पेपर शेयर कर दिया है."
प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी, समाजवादी पार्टी का कहना है कि योगी सरकार ने, "हर बार पर्चा आउट कर नौकरी देने के नाम पर मज़ाक़ किया. यूपी में प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन के नाम पर बीजेपी सरकार ने सिर्फ युवाओं के सपनों, भविष्य से खिलवाड़ किया!"
अब सभी अभ्यार्थियों को इस बात का इंतज़ार है कि क्या अपने वादे के मुताबिक़ योगी सरकार यूपी-टीईटी की परीक्षा एक महीने में करवाने जा रही है, या फिर चुनाव की वजह से यह एक बार फिर स्थगित हो सकती है.
रविवार शाम देवरिया पुलिस ने "आपन देवरिया" नाम का फेसबुक पेज चलाने वाले एक शख्स प्रिंस यादव को गिरफ़्तार किया. ट्विटर पर यूपी पुलिस फैक्ट चेक नाम के ट्विटर हैंडल के मुताबिक इस फेसबुक पेज से एक फोटो शेयर किया गया जिसमे लोग खुले आसमान के नीचे सोते हुए दिखाए गए और कैप्शन में उन्हें UP-TET का छात्र बताया गया. उत्तर प्रदेश पुलिस के मुताबिक यह तस्वीर भ्रामक है और फेसबुक पेज चलाने वाले प्रिंस यादव को पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 151 के तहत गिरफ़्तार कर जेल भेजा.
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