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उत्तर प्रदेश: योगी आदित्यनाथ ने बताया समाजवादी पार्टी का एजेंट तो बोले ओवैसी...
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) का ज़िक्र करते हुए समाजवादी पार्टी और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता असदुद्दीन ओवैसी पर हमला किया है.
योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को आरोप लगाया कि ओवैसी और समाजवादी पार्टी के बीच गठजोड़ है और वो समाजवादी पार्टी के इशारे पर ही बयान दे रहे हैं.
योगी आदित्यनाथ ने कहा, "हर व्यक्ति जानता है कि ओवैसी समाजवादी पार्टी के एजेंट बनकर भावनाओं को भड़काने का कार्य कर रहे हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश आज जिस दिशा में आगे बढ़ चुका है, अब दंगा नहीं दंगा मुक्त प्रदेश के रूप में उत्तर प्रदेश की पहचान है."
इसे लेकर लोकसभा सांसद और एआईएमआईएम नेता ओवैसी ने भी जवाबी हमला किया. ओवैसी ने कहा, "मैं सिर्फ़ उनका एजेंट हूँ जिन्होंने मुल्क को आज़ादी दिलाई और भारतीयों की नागरिकता को मज़हब से परे रखा."
योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को बीजेपी के बूथ अध्यक्ष सम्मेलन के मंच से अपने विरोधियों पर निशाना साधा. कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी मौजूद थे. योगी आदित्यनाथ ने पहले की सरकारों पर माफियाओं को सरक्षण देने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश में अब माफियाओं की सरपरस्त सरकार नहीं, माफियाओं की छाती पर बुलडोजर चलाने वाली सरकार आज प्रदेश के अंदर कार्य कर रही है. "
इसके जवाब में ओवैसी ने ट्विटर पर लिखा, "बुल्डोज़र नहीं, थार चलाई थी. जिसे रौंदा गया था वो दंगाई या माफिया नहीं, लखीमपुर_खीरी के किसान थे. रौंदने वाले का बाप अभी भी मंत्री है."
ओवैसी ने अपने इस ट्वीट में लखीमपुर खीरी में अक्टूबर में हुई घटना का ज़िक्र किया. जिसमें कथित तौर पर गाड़ी चढ़ाए जाने से विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे चार किसानों की मौत हो गई थी. गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे अशीष मिश्र इस मामले में मुख्य अभियुक्त हैं. किसान नेता लगातार अजय मिश्र के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.
दूसरी तरफ जेपी नड्डा ने पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का ज़िक्र किया और उनके निशाने पर भी समाजवादी पार्टी और बाकी विरोधी थे. जिन्ना का ज़िक्र उत्तर प्रदेश की राजनीति में बीते कुछ वक्त से लगातार हो रहा है.
लेकिन, सीएए को उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुद्दा बनाने की कोशिश हाल में शुरू हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन कृषि क़ानूनों को वापस लेने का एलान किया और उसके बाद यूपी के बाराबंकी में हुई एक रैली में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने सीएए वापसी के लिए आंदोलन करने की चेतावनी दी.
योगी आदित्यनाथ की चेतावनी
योगी आदित्यनाथ ने इसे लेकर मंगलवार को कहा, "प्रदेश में 2017 के पहले हर तीसरे चौथे दिन दंगे होते थे. आज यहां पर मैं चेतावनी दूंगा, उस व्यक्ति (असदुद्दीन ओवैसी) को जो यहां पर सिटिज़नशिप अमेंडमेंट एक्ट के नाम पर फिर से भावनाओं को भड़काने का कार्य कर रहा है. "
ओवैसी ने कहा था, "हम मोदी जी और बीजेपी को बताना चाहेंगे कि जिस तरह से आपने तमाम किसानों के लिए ये तीन कृषि क़ानूनों को वापस लिए. हम आपसे इस बात की डिमांड करते हैं कि CAA क़ानून को भी वापस लिया जाए."
ओवैसी ने रैली में मौजूद लोगों से सवाल किया, "क्या आपको मंज़ूर है कि CAA क़ानून वापस लिया जाए. अगर है मंज़ूर तो कहो मंज़ूर. ताकि मालूम हो जाए मोदी जी को वरना बोलेंगे मैं ही तपस्या किया था भाई."
उन्होंने आगे कहा, "CAA का क़ानून वापस लेना चाहिए. क्योंकि वो संविधान के ख़िलाफ़ है. हम मुतालिबा (मांग) करते हैं कि CAA क़ानून को भी वापस लिया जाए. हमसे मीडिया वाले पूछ रहे हैं कि अगर नहीं करे तो क्या करेंगे अगर अगर NPR और NRC का क़ानून बनाएंगे तो हम दोबारा रोड पर निकलेंगे. यहीं पर भी शाहीन बाग बनेगा."
दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए के विरोध में महिलाओं ने लंबे समय तक धरना दिया था. बाद में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए ये धरना ख़त्म कराया गया था.
भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भी शाहीन बाग को मुद्दा बनाने की कोशिश की थी.
तब गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी एक रैली में कहा था - "मित्रों, बटन दबाओ तो इतने ग़ुस्से में दबाना कि बटन यहां दबे और करंट शाहीन बाग में लगे."
चचाजान और अब्बाजान का ज़िक्र
योगी आदित्यनाथ ने 'चचाजान और अब्बाजान' के संबोधनों को लेकर शुरू हुई बहस को भी ताज़ा करने की कोशिश की.
उत्तर प्रदेश के सीएम ने मंगलवार के कार्यक्रम में कहा, "मैं इस अवसर पर चाचा जान और अब्बाजान के इन अनुयायियों से कहूंगा वो सावधान होकर सुन लें अगर प्रदेश की भावनाओं को भड़काकर के माहौल खराब करोगे तो फिर सख्ती के साथ सरकार निपटना भी जानती है."
योगी आदित्यनाथ समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव का ज़िक्र करते हुए "अब्बाजान" शब्द का इस्तेमाल करते रहे हैं.
जबकि किसान नेता राकेश टिकैत ने ओवैसी को बीजेपी का 'चचाजान' बताया था. टिकैत ने आरोप लगाया था कि 'बीजेपी और ओवैसी के बीच सांठगांठ है.' इस तरह के आरोप दूसरी विपक्षी पार्टियां भी लगाती रही हैं.
टिकैत ने ये बयान तब दिया था जब योगी आदित्यनाथ ने ओवैसी को 'बड़ा नेता' बताया था. कुछ महीने पहले ओवैसी ने चुनौती दी थी कि वो योगी आदित्यनाथ को दोबारा यूपी का सीएम नहीं बनने देंगे.
इस पर योगी आदित्यनाथ ने कहा था, "ओवैसी जी देश के बड़े नेता हैं और देश के अंदर प्रचार में जाते हैं. उनका अपना एक जनाधार है. अगर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को चैलेंज किया है तो भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता उनका चैलेंज स्वीकार करता है. भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी. (इसमें) कोई संदेह नहीं होना चाहिए."
योगी का आरोप
जिन्ना का ज़िक्र क्यों?
वहीं, भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी का नाम लिए बिना आरोप लगाया कि ये पार्टियां सिर्फ परिवार के बारे में सोचती हैं. उन्होंने पाकिस्तान से संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का ज़िक्र भी किया और इसे लेकर समाजवादी पार्टी को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की.
नड्डा ने कहा, "हम राष्ट्रवाद में विश्वास करते हैं. वो परिवारवाद में विश्वास करते हैं. हम सबका साथ में विश्वास करते हैं. वो वोटबैंक पर विश्वास करते हैं. हम राष्ट्रभक्त तिलक पटेल और गांधी को याद करते हैं और उनको आज भी जिन्ना याद आता है."
उन्होंने आगे कहा, "आज़ाद भारत में हम कैसे नेता देख रहे हैं. पटेल ने देश को जोड़ा. और देश को खंडित करने का काम जिन्ना ने किया, जो लोग जिन्ना को याद करते हैं उन्हें चुनाव में मुंह तोड़ जवाब देना ये राष्ट्रवादी ताक़तों का काम होता है ये हमको याद रखना चाहिए."
कुछ दिन पहले समजावादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जिन्ना का ज़िक्र स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर किया था. उनके इस बयान को लेकर काफी विवाद हुआ था.
अखिलेश यादव ने कहा, "सरदार पटेल जी, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, (मोहम्मद अली) जिन्ना एक ही संस्था में पढ़कर के बैरिस्टर बनकर आए थे. एक ही जगह पर पढ़ाई लिखाई की उन्होंने. वो बैरिस्टर बने. उन्होंने आज़ादी दिलाई. संघर्ष करना पड़ा हो तो वो पीछे नहीं हटे."
इसके बाद समजावादी पार्टी की सहयोगी सुलेहदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश का समर्थन करते हुए कहा "अगर जिन्ना को भारत का पहला प्रधानमंत्री बनाया गया होता तो देश का विभाजन नहीं होता."
राजभर की पार्टी ने अगले विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी के साथ गठजोड़ किया है.
भारतीय जनता पार्टी और दूसरे दलों ने आरोप लगाया है कि चुनाव को देखते हुए जिन्ना का ज़िक्र 'तुष्टिकरण' के लिए किया जा रहा है. वहीं, विरोधी दलों और कई राजनीति विश्लेषकों की राय ये भी है कि ऐसे बयानों का फायदा बीजेपी को मिल सकता है. बीजेपी नेता इन्हें लगातार मुद्दा बनाने की कोशिश में जुट सकते हैं.
अखिलेश यादव का दावा
इस बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को एक बार फिर दावा किया कि उत्तर प्रदेश में अगली सरकार समाजवादी पार्टी की बनेगी.
उन्होंने पार्टी नेता रामगोपाल यादव की किताब 'राजनीति के उस पार' के विमोचन के मौके पर कहा, " राजनीति में उस पार क्या है, तो समय जो बता रहा है, वो है समाजवादी पार्टी सरकार."
इस बीच राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख जयंत सिंह ने अखिलेश यादव के साथ तस्वीर ट्विटर पर पोस्ट की है और लिखा है, "बढ़ते कदम."दोनों दलों के बीच गठजोड़ की बातचीत जारी है. अखिलेश यादव ने भी जयंत से मुलाक़ात की जानकारी ट्विटर पर दी है और एक तस्वीर पोस्ट की है.
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