लाडली मीडिया अवॉर्ड्स- बीबीसी की दो महिला पत्रकारों को तीन पुरस्कार

लैंगिक समानता के क्षेत्र में काम करने वाली प्रतिष्ठित संस्था पापुलेशन फ़र्स्ट ने 19 नवंबर को लाडली मीडिया अवॉर्ड्स की घोषणा की थी. इसमें बीबीसी की दो पत्रकारों को तीन पुरस्कार मिले हैं.

बीबीसी की दो महिला पत्रकारों को उनकी स्टोरी के लिए लाडली मीडिया अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.

वंदना

बीबीसी में भारतीय भाषाओं की टीवी एडिटर वंदना को इलेक्ट्रॉनिक-फ़ीचर (हिंदी) श्रेणी में विनेश फ़ोगाट पर उनकी स्टोरी के लिए उन्हें सम्मानित किया गया है.

रेसलिंग में भारत का नाम रोशन करने वाली विनेश फ़ोगाट की ये कहानी उनके संघर्ष को बयां करती है.

पितृसत्तामक समाज में अपनी पहचान बनाने के रास्ते में आने वाली परेशानियों को वंदना ने विनेश फ़ोगाट की कहानी के माध्यम से बताने की कोशिश की है.

बीबीसी की शूट-एडिट नेहा शर्मा ने वंदना की इस कहानी को अपने कैमरे से क़ैद किया था और बेहतरीन एडिटिंग ने इसे एक अवॉर्ड-वीनिंग स्टोरी बनाया.

वंदना को दूसरा पुरस्कार उनकी एक अलग स्टोरी के लिए मिला है जो पीरियड्स और उसे लेकर असहज समाज पर चर्चा करती है कि कैसे अब भी हम खुलकर इस मुद्दे पर बात करने से झिझकते हैं.

उनकी ये कहानी ख़ासतौर पर महिला खिलाड़ियों की परेशानियों को केंद्रित करती है. वंदना की इस कहानी को शूट किया था प्रेम भूमिनाथन ने और उन्होंने ही इसे एडिट भी किया.

अनघा पाठक

बीबीसी मराठी सेवा की संवाददाता अनघा पाठक को मराठी भाषा में वेब फ़ीचर श्रेणी में उनकी कहानी के लिए लाडली मीडिया अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.

अनघा की कहानी महाराष्ट्र की एक ऐसी जीवट महिला की कहानी है, जिसने किसी के आगे झुकना स्वीकार नहीं किया.

यह कहानी सुनंदा मंडले की है, जिन्होंने अकेले बिना किसी सहारे और बिना स्कूली शिक्षा के अपनी ज़मीन के लिए लड़ाई लड़ी.

अनघा की इस कहानी को कैमरे और एडिटिंग से मुकम्मल बनाया नितिन नगरकर, निलेश भोसले ने.

इस वर्ष 10 भाषाओं के 98 विजेताओं को लाडली मीडिया सम्मान से नवाज़ा गया. यह अवॉर्ड जेंडर सेंसिटिविटी के क्षेत्र में काम करने वाले पत्रकारों को हर साल दिया जाता है. पुरस्कार के लिए 900 एंट्रीज़ मिली थीं.

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