You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
त्रिपुरा: सांप्रदायिक हिंसा के बाद पुलिस की कार्रवाई पर उठते सवाल
- Author, पिनाकी दास
- पदनाम, अगरतला से, बीबीसी हिंदी के लिए
त्रिपुरा एक बार फिर सुर्खियों में है, इस बार पुलिस के उठाए कदम के कारण. पुलिस ने बड़ी संख्या में सोशल मीडिया यूज़र्स पर यूएपीए क़ानून के तहत मामला दर्ज किया है.
आरोप है कि इन लोगों ने कथित तौर पर 'फ़र्जी फोटो और जानकारियां ऑनलाइन अपलोड कीं जिनके कारण सांप्रदायिक तनाव बढ़ने का ख़तरा था.
त्रिपुरा में अल्पसंख्यक मुसलमानों पर हमले की कोई नई घटना सामने नहीं आई है लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर कई भड़काऊ बातें लिखी गईं जिसके ख़िलाफ पुलिस ने सख़्त कदम उठाए हैं.
इसके साथ ही राज्य भर से चार लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है.
त्रिपुरा पुलिस के कार्यकारी पीआरओ, एडिशनल एसपी ज्योतिस्मान चौधरी ने बताया, "हालात पिछले नौ दिनों से पूरी तरह से काबू में हैं, एक भी वाकया नहीं हुआ है, सिवाय कुछ सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर सांप्रदायिकता भड़काने की कोशिश के, लेकिन लोगों ने इनके बहकावे में नहीं आकर अपनी परिपक्वता का परिचय दिया है."
"हमने गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत 101 सोशल मीडिया अकाउंट पोस्ट पर कड़ी कार्रवाई की है, इसमें 68 ट्विटर, 31 फ़ेसबुक और दो यूट्यूब अकाउंट शामिल हैं. हमने इन प्लेटफ़ॉर्म से कहा है कि वो अकाउंट चलाने वालों की जानकारी दें और आपत्तिजनक और फ़र्जी पोस्ट को हटाने के लिए कदम उठाएं."
पुलिस ने भेजा नोटिस
चौधरी ने बताया कि अगरतला पुलिस ने आईपीसी की धारा 153ए, 153बी, 469, 471, 503, 504, 120B 153ए, 153बी, 469, 471, 503, 504, 120बी के तहत और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की धारा 13 के तहत मामला दर्ज किया है.
उन्होंने बताया कि पुलिस ने अंसार इंदौरी और मुकेश नाम के दो लोगों को नोटिस भेजा है.
पुलिस का दावा है कि उनके सोशल मीडिया हैंडल पर किसी दूसरी घटना की तस्वीरें या वीडियो के साथ भ्रामक बातें लिखी गई हैं, जिससे इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैल सकता है.
ध्यान देने वाली बात है कि ये दोनों शख्स 'लॉयर्स ऑफ़ डेमोक्रेसी' के सदस्य हैं और सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की चार लोगों की फ़ैक्ट फ़ाइंडिंग टीम का हिस्सा भी थे जो हाल ही में राज्य की यात्रा पर आए थे.
रिपोर्ट में उठाए गए थे कई सवाल
तीन दिनों के अपने दौरे के दौरान उन्होंने पीड़ितों से बात की थी और सांप्रदायिक हिंसा से प्रभावित जगहों पर भी गए थे. उन्होंने अपनी रिपोर्ट अगरतला प्रेस क्लब में मीडिया के सामने रखी थी और दिल्ली प्रेस क्लब में भी पेश किया था.
उन्होंने हिंसा को लेकर कहा था कि त्रिपुरा में "मुस्लिम परिवार और उनके धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाया गया और पानीसागर में वीएचपी और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की अगुआई में 5000 लोगों ने पैगंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ नारे लगाए. सबकुछ पुलिस के सामने हो रहा था."
एडवोकेट अंसार इंदौरी की टीम ने कहा, "पानीसागर में वीएचपी की रैली रोवा बाज़ार गई जहां कई अल्पसंख्यकों के दुकान जलाए गए और लूट-पाट की गई और एक जेसीबी मशीन के साथ एक भीड़ ने मस्जिद को नुकसान पहुंचाया.
उन्होंने सवाल उठाए, "भीड़ के साथ जेसीबी मशीन क्यों लाई गई थी, क्या मकसद था?"
पुलिस पर लगे अरोप
उन्होंने कहा, "पुलिस अपनी ताकत का ग़लत इस्तेमाल कर रही है और जो सही में दोषी हैं उनपर कार्रवाई न कर उनके ख़िलाफ़ कदम उठा रही है जो ज़मीनी हकीकत सामने ला रहे हैं."
सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की जांच टीम और मानवाधिकार संगठन की संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा गया, "मुस्लिमों के ख़िलाफ़ हिंसा के बाद जिस तरीके से हालात बिगड़े हैं, ये दिखाता है कि अगर सरकार चाहती तो भयानक हिंसा को होने से रोका जा सकता था."
जांच टीम में एडवोकेट एहतेशाम हाशमी (सुप्रीम कोर्ट में वकील) लॉयर्स फ़ॉर डेमोक्रेसी के एडवोकेट अमित श्रीवास्तव, नेशनस कॉनफ़ेडेरेशन ऑफ़ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइज़ेशन के एडवोकेट अंसार इंदौरी और पीयूसीएल के एडवोकेट मुकेश कुमार शामिल थे.
पुलिस ने नोटिस भेजकर सभी अभियुक्तों को 10 नवंबर तक पूछताछ के लिए दक्षिण अगरतला पुलिस स्टेशन में पेश होने के लिए कहा है.
क्या है यूएपीए?
साल 2008 में 26/11 हमलों के बाद यूएपीए में संशोधन कर बेल नहीं देने का प्रावधान लाया गया था.
कई मामलों में इस कानून के तहत बिना चार्जशीट के छह महीने तक जेल में रखा जा सकता है और अगर आरोप पहली नज़र में सही दिखते हैं तो बेल नहीं दी जा सकती.
इस बीच त्रिपुरा हाईकोर्ट ने 26 अक्तूबर को हुई हिंसा के मामले में स्वत: संज्ञान लिया है.
कोर्ट ने राज्य सरकार को 10 नवंबर से पहले एफिडेविट दायर कर ये बताने को कहा कि उन्होंने हिंसा की रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए और सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ने से रोकने के लिए उनके पास क्या प्लान है.
ये भी पढ़ें:
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)