अहमदनगर अस्पताल में लगी आग से बचे लोगों की आपबीती और उठते सवाल

    • Author, राहुल गायकवाड़
    • पदनाम, अहमदनगर से, बीबीसी मराठी के लिए

"सुबह-सुबह सफ़ाई का काम शुरू हुआ था. इसलिए हम वार्ड से दूर एक पेड़ के नीचे बैठे थे. तभी कुछ लोग आग-आग चिल्लाने लगे. हम आईसीयू वार्ड में भागे."अहमदनगर ज़िला अस्पताल में लगी आग में बाल-बाल बचे लक्ष्मण सावलकर के बेटे बाला साहेब सावलकर ने इस हादसे के बारे में बताया.

शनिवार की सुबह करीब 10 बजे अहमदनगर ज़िला अस्पताल के कोविड आईसीयू वार्ड में आग लगी, जिसमें अब तक 11 मरीज़ों की मौत हो चुकी है.माना जा रहा है कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी. जब आग लगी उस वक्त आईसीयू में 17 मरीज़ भर्ती थे.लक्ष्मण सावलकर का इलाज भी आईसीयू में ही चल रहा था, लेकिन उन्हें तुरंत दूसरे वार्ड में ले जाया गया जिसकी वजह से उनकी जान बच गई है. हालांकि, उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई जिसके चलते परिवार वालों ने उन्हें दूसरे अस्पताल में ले जाने का फ़ैसला किया है.एंबुलेंस का इंतज़ार कर रहे बालासाहेब सावलकर अपने पिता की सेहत को लेकर बहुत परेशान हैं. वह अपना सारा सामान लेकर अस्पताल की लॉबी में खड़े होकर एंबुलेंस का इंतज़ार कर रहे हैं. बाला साहेब ने ही शनिवार की सुबह फ़ोन करके बीबीसी मराठी को अस्पताल में आग लगने की जानकारी दी थी.

इससे पहले ऐसा कुछ नहीं देखा थाबाला साहेब सावलकर ने बताया, "अहमदनगर ज़िले में बोधेगांव में हमारा घर है. हम सब खेती करते हैं. मेरे पिता भी हम सबका हाथ बंटाने के लिए खेतों में काम करते थे. हमें तो यह भी नहीं मालूम है कि उन्हें कोविड कैसे हो गया.""हमने 12 दिन पहले उनको यहां भर्ती कराया था. पहले तो उन्हें जनरल वार्ड में ही रखा गया था लेकिन उनकी सेहत बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया. जब आग लगी तब मैं अस्पताल में ही था. सुबह-सुबह सफ़ाई का काम शुरू हुआ था, तो हम कुछ दूरी पर पेड़ के नीचे बैठे थे. तभी सब चिल्लाए आग-आग और हम आईसीयू वार्ड की तरफ़ भागे. सिस्टर और डॉक्टरों ने उन्हें बाहर निकाल कर दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया."

आईसीयू वार्ड में आग लगने के बाद जिस वार्ड में मरीज़ शिफ़्ट किए गए वहां काम करने वाली एक नर्स ने पहचान छुपाने की शर्त पर बताया, "जब मैं वार्ड में आई तो घबराहट का माहौल था. मरीज़ों को आईसीयू से इस वार्ड में लाया गया था इसलिए उनका ऑक्सीजन लेवल जांचने के लिए उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया. हम तब से काम कर रहे हैं जब से कोरोना महामारी शुरू हुई है लेकिन पहली बार ऐसी भयानक घटना देखी है."

नई इमारत में लगी आगज़िला अस्पताल की जिस इमारत में आग लगी है, वह एक साल पहले ही तैयार हुई है. यहां के आईसीयू वार्ड को कोरोना की दूसरी लहर के दौरान शुरू किया गया था. यहां मौजूद सभी उपकरण और व्यवस्थाएं अत्याधुनिक थीं. यही वजह है कि एक साल के अंदर इमारत में लगी आग को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं.अहमदनगर के ज़िलाधिकारी राजेंद्र भोसले ने मीडिया को बताया कि इमारत अग्निशमन के लिहाज से कितनी उपयुक्त थी, इसका ऑडिट कर लिया गया है.इस आग में अब तक 11 मरीजों की मौत हुई हैं, जिनमें छह पुरुष और पांच महिलाएं शामिल हैं. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने हादसे में मृतक के परिवार वालों को राज्य सरकार की ओर से पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है.इस हादसे के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉ. भारती पवार ने भी ज़िला अस्पताल का निरीक्षण किया. वहीं, दूसरी ओर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने हादसे की वजहों का पता लगाने के लिए गहन जांच के आदेश दिए हैं.

अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद डॉ. भारती पवार ने बीबीसी मराठी को बताया, "आईसीयू में 17 मरीज़ों का इलाज़ चल रहा था. इनमें 11 लोगों की मौत हुई है. बाक़ी छह मरीज़ों का इलाज चल रहा है. हम पीड़ितों के रिश्तेदारों से मिलने गए थे."भारती पवार ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. वहीं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने भी इस घटना की जांच के आदेश दिए हैं.अहमदनगर ज़िले के प्रभारी मंत्री हसन मुशरिफ ने प्रेस कांफ्रेंस करके बताया कि संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति इस हादसे की जांच करके पता लगाएगी कि किन लापरवाहियों की वजह से मरीज़ों की मौत हुई है और समिति जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. स्थानीय पुलिस सीसीटीवी फुटेज की जांच भी कर रही है.

हसन मुशरिफ़ ने यह भी कहा है कि इस मामले में मुक़दमा दर्ज किया जाएगा और लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी.राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार, दोनों की तरफ़ से हादसे के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की बात कही जा रही है.

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