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COP26: पीएम मोदी का जलवायु परिवर्तन पर 'बड़ा' एलान- भारत 2070 तक हासिल कर लेगा नेट ज़ीरो लक्ष्य
भारत ने कहा है कि वो वर्ष 2070 तक कार्बन उत्सर्जन को नेट ज़ीरो करने के लक्ष्य को हासिल कर लेगा. हालाँकि, ग्लासगो में जलवायु परिवर्तन पर शिखर सम्मेलन में देशों से अपेक्षा की जा रही थी कि वो इस लक्ष्य को 2050 तक पूरा कर लें.
मगर इसके बावजूद सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री के इस संकल्प को बड़ी बात माना जा रहा है क्योंकि भारत ने पहली बार नेट ज़ीरो के लक्ष्य को लेकर कोई निश्चित बात की है.
नेट ज़ीरो का मतलब होता है कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को पूरी तरह से ख़त्म कर देना जिससे कि धरती के वायुमंडल को गर्म करनेवाली ग्रीनहाउस गैसों में इस वजह से और वृद्धि नहीं हो पाएगी.
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार्बन उत्सर्जक देश है, पहले नंबर पर चीन है, फिर अमेरिका. यूरोपीय संघ को एक साथ लेने पर भारत की गिनती चौथे नंबर पर होती है.
लेकिन, जनसंख्या के हिसाब से भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन दुनिया के अमीर देशों के मुक़ाबले काफ़ी कम है.
वर्ष 2019 में भारत ने प्रति व्यक्ति के हिसाब से 1.9 टन उत्सर्जन किया था. वहीं इस वर्ष अमेरिका के लिए ये आँकड़ा 15.5 टन और रूस के लिए 12.5 टन था.
चीन ने वर्ष 2060 तक इस लक्ष्य को हासिल करने का एलान किया हुआ है. अमेरिका और यूरोपीय संघ इसे 2050 तक हासिल कर लेना चाहते हैं.
पीएम मोदी का 'पंचामृत' मंत्र
प्रधानमंत्री मोदी ने ये अहम एलान सोमवार 1 नवंबर को ग्लासगो में जलवायु परिवर्तन पर शिखर सम्मेलन के पहले दिन किया जिसके लिए 120 से ज़्यादा नेता एकत्र हुए हैं.
मोदी ने ग्लासगो में अपने भाषण में कहा कि ' मैं भारत की ओर से, इस चुनौती से निपटने के लिए पाँच अमृत तत्व रखना चाहता हूं, पंचामृत की सौगात देना चाहता हूं'.
मोदी ने कहा, "पहला- भारत, 2030 तक अपनी जीवाश्म रहित ऊर्जा क्षमता को 500 गीगावाट तक पहुंचाएगा."
"दूसरा- भारत, 2030 तक अपनी 50 प्रतिशत ऊर्जा ज़रूरतें, रीन्यूएबल एनर्जी से पूरी करेगा.
"तीसरा- भारत अब से लेकर 2030 तक के कुल प्रोजेक्टेड कार्बन एमिशन में एक अरब टन की कमी करेगा."
"चौथा- 2030 तक भारत, अपनी अर्थव्यवस्था की कार्बन इंटेन्सिटी को 45 प्रतिशत से भी कम करेगा."
"और पाँचवाँ- वर्ष 2070 तक भारत, नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करेगा."
बड़ा एलान- विश्लेषण
मैट मैक्ग्रा, बीबीसी पर्यावरण संवाददाता
भारत के प्रधानमंत्री ने दुनिया भर के शीर्ष नेताओं के सामने अपने भाषण में ज़्यादातर समय ये समझाने में व्यतीत किया कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सबसे बड़ा समाधान जीवन शैली में बदलाव है.
मगर उन्होंने सबसे बड़ी बात सबसे अंत में कही.
जलवायु के लिए पाँच अमृत की बात करते हुए, पीएम मोदी ने एलान किया कि उनका देश नेट ज़ीरो के लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा - 2070 तक.
ये दुनिया के तीसरे सबसे बड़े उत्सर्जक देश की ओर से लिया गया एक बड़ा क़दम है, जो अभी भी अपनी बिजली ज़रूरत का आधे से ज़्यादा अंश कोयले से हासिल करता है.
हालाँकि, उसने जो समयसीमा घोषित की है वो वैज्ञानिकों के इस शताब्दी के मध्य (2050) तक के सुझाए लक्ष्य से अलग है जिसे वो स्थिति को ख़तरनाक होने से बचने के लिए ज़रूरी बताते हैं.
मगर मोटे तौर पर इसका स्वागत हुआ है.
COP26 सम्मेलन
दो सप्ताह के सम्मेलन के पहले दिन जिन नेताओं ने भाषण दिए उनमें मेज़बान ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस शामिल थे.
राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने में हर एक दिन की देरी से इसके असर को रोकने की क़ीमत बढ़ती जा रही है.
उन्होंने कहा,"हममें से कोई भी उन बुरे हालातों से अपने आपको नहीं बचा पाएगा, अगर हम इस मौके का फायदा नहीं उठा सके."
हालाँकि, उन्होंने साथ ही प्रतिनिधियों से कहा कि ग्लोबल वॉर्मिंग से निपटने की लड़ाई विश्व के लिए अभूतपूर्व अवसर भी लेकर आया है.
वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनिओ गुटेरेस ने कहा कि जीवाश्म ईंधन की हमारी लत मानवता को विनाश की ओर धकेल रही है.
उन्होंने कहा कि, "अब या तो हम इसे रोक दें या ये हमें रोक दे. अब ये कहने का वक़्त आ गया है कि अब बहुत हो चुका है, खुद को कार्बन से मारने का दौर अब बहुत चल गया, प्रकृति को शौचालय की तरह इस्तेमाल करना बहुत हुआ, बहुत हुआ गहरे और गहरे माइनिंग एवं ड्रिलिंग करते जाना, हम अपनी ही कब्रें खोद रहे हैं."
प्रधानमंत्री मोदी ने अपना भाषण गुटेरेस के भाषण के बाद दिया.
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले रहे हैं.
पेरिस समझौते में तय लक्ष्य
जलवायु परिवर्तन पर इससे पहले एक बड़ा लक्ष्य 2015 में पेरिस में हुए 21वें जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में हुआ था.
तब वहाँ आए 196 देशों ने श्विक औसत तापमान की वृद्धि को दो डिग्री से नीचे तक सीमित करने का लक्ष्य तय किया था.
हालाँकि,अब तक प्रस्तुत की गई जलवायु योजनाओं के विश्लेषण से पता चलता है कि वास्तव में कार्बन उत्सर्जन 2030 तक 16% बढ़ सकता है, जिससे औद्योगिक क्रांति से पहले के तापमान की तुलना में तापमान 2.7 सेंटीग्रेड बढ़ सकता है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि तब से दुनिया पहले ही 1.1 डिग्री गर्म हो चुकी है और अगर पेरिस समझौते में तय किये गए लक्ष्य को पाना है तो 2030 तक वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में 45% की कटौती करने की आवश्यकता है.
इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) की हालिया रिपोर्ट ने यहां तक चेतावनी दी है कि तापमान में वृद्धि के कारण पृथ्वी की कुछ जलवायु प्रणालियां पहले से ही ख़तरनाक तौर पर असंतुलित हो चुकी हैं.
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