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सिंघु बॉर्डर से ग्राउंड रिपोर्टः शुक्रवार सवेरे हुई हत्या के बाद अब तक क्या-क्या हुआ
- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
सिंघु बॉर्डर पर निहंग सिखों के समूह पंथ अकाली निरबैर खालसा के गुरुद्वारे के बाहर पत्रकारों की भीड़ है. शुक्रवार सुबह इसी गुरुद्वारे के बाहर पंजाब के तरनतारन ज़िले के रहने वाले दलित सिख लखबीर सिंह की हत्या कर शव बैरीकेड से लटका दिया गया था.
निहंग सिखों का दावा है कि लखबीर सिंह ने इसी गुरुद्वारे में रखे सिखों के पवित्र ग्रंथ की बेअदबी की और इस दौरान उसे पकड़ लिया गया और बाद में उसे कृत्य की सज़ा दे दी गई.
यहां मौजूद निहंग और उनके जत्थेदार इसे निहंगों का किया गया ''सौदा" बताते रहे.
इस गुरुद्वारे के ज़िम्मेदार और दल में शामिल निहंगों के जत्थेदार बलविंदर सिंह बारी-बारी से पत्रकारों को इंटरव्यू देते हुए घटना पर ''गर्व महसूस'' करते हुए कहते हैं कि यदि पहले इस तरह का दंड दिया गया होता तो पवित्र ग्रंथ की बेअदबी की घटनाएं रुक जातीं.
शुक्रवार देर शाम निहंग सिख सरबजीत सिंह ने घटना की ज़िम्मेदारी लेते आत्मसमर्पण कर दिया.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "मुझे इस घटना पर कोई अफसोस नहीं है. जो किया है मैंने किया है और बिलकुल सही किया है."
शुक्रवार को क्या हुआ था?
भगवंत सिंह का दावा है कि सबसे पहले उन्होंने ही लखबीर सिंह को पवित्र ग्रंथ की बेअदबी करते हुए देखा था.
बीबीसी से भगवंत सिंह कहते हैं कि उन्होंने लखबीर को पकड़ा और फिर भीड़ इकट्ठा हो गई.
भगवंत सिंह कहते हैं, "सुबह के तीन बजे होंगे. हम स्नान करके अपनी दस्तार सजा रहे थे. तभी मैंने देखा कि गुरुद्वारे के पर्दे खुले थे और रूमाला नीचे किया हुआ था. उसने ग्रंथ की पोथी के ऊपर रखा रूमाला उठा दिया था. दो माचिस भी वहां रखी थी, शायद उसका इरादा आग लगाने का भी रहा हो."
मूलरूप से तरनतारन ज़िले के चीमा कलां गांव के रहने वाले लखबीर सिंह कुछ दिन पहले ही इस गुरुद्वारे में आए थे और यहां सेवा भी कर रहे थे.
भगवंत सिंह कहते हैं, "वो हमारा विश्वास हासिल करके हमारे दल में शामिल हो गया था. हो सकता है उसने नशा भी किया हो. हमें लगता है कि वो किसी योजना के तहत यहां आया था."
भगवंत सिंह और घटना के अन्य चश्मदीदों के मुताबिक़ लखबीर को किसान आंदोलन के मंच के पास ले जाया गया था. हंगामा होने पर भारी भीड़ इकट्ठा हो गई थी. यहीं पहले लखबीर से पूछताछ की गई और उसके बयान मोबाइल पर रिकॉर्ड किए गए. घटना के कई वीडियो में घायल लखबीर ज़मीन पर पड़े हुए हैं और निहंग सिख पूछताछ कर रहे हैं.
जो निहंग इस वीडियो में दिख रहे हैं उनमें बुड्ढा दल के जत्थेदार अमान सिंह भी थे. बीबीसी से बात करते हुए अमान सिंह ने कहा कि जो हुआ उसका उन्हें अफसोस नहीं है.
अमान सिंह कहते हैं, "गुरु साहब की बेअदबी हुई है. वही सारी सृष्टि के गुरु हैं. सजा भी उन्होंने दी है. हमारे सिंहों ने दी है."
अमान सिंह कहते हैं, "यदि दुष्ट पापी गीता या क़ुरान की बेअदबी करता तब भी उसके यही सज़ा दी जाती. जो राजनीतिक लोग हैं वो अपनी राजनीति करें लेकिन गुरु से दूर होकर करें."
वहीं घटना के एक चश्मदीद के दावे के मुताबिक़ लखबीर सिंह से पूछताछ की गई, फिर उनका हाथ काट दिया गया और फिर पूछताछ की गई. बाद में उन्हें पंथ निरबैर के गुरुद्वारे के बाहर बैरीकेड पर टांग दिया गया."
बीबीसी के सहयोगी पत्रकार रविंद्र सिंह रॉबिन ने जानकारी दी है कि शनिवार को अमृतसर रूरल के एसएसपी राकेश कौशल ने बताया है कि पुलिस ने इस मामले में अमृतसर के क़रीब से एक और निहंग नारायण सिंह को गिरफ्तार किया है.
नारायण सिंह का कहना है कि वो उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने लखबीर सिंह की हत्या की थी
सदमे में किसान
घटना के बाद जहां निहंग सिख अपना समर्थन जाहिर कर रहे थे वहीं प्रदर्शन स्थल पर मौजूद किसान अफ़सोस जाहिर कर रहे थे. हालांकि कई लोग जिनसे हमने बात करनी चाही वो कैमरे पर आने के लिए तैयार नहीं हुए.
सिंघू बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा का मंच उस स्थान से क़रीब दो सौ मीटर दूर है जहां मृतक को लटकाया गया था. शुक्रवार को घटना के बाद भी यहां विरोध प्रदर्शन चल रहे थे और मंच का संचालन हो रहा था. मंच से सरकार विरोधी नारेबाज़ी की जा रही थी.
संयुक्त किसान मोर्चा ने घटना की निंदा करते हुए अपने आप को इससे पूरी तरह अलग कर लिया है और निहंग सिखों से प्रदर्शन स्थल छोड़ने के लिए कहा है.
किसान मोर्चा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बलविंदर सिंह ने कहा, "वो संबंध नहीं रखते तो ना रखे, लेकिन हमारा संबंध सारी जनता से है, जहां कुछ गलत होगा वहां हम होंगे. हमें बनाया ही रक्षा करने के लिए गया है."
वो कहते हैं, "अगर मोर्चे के लिए हमको यहां से जाना पड़ेगा तो हम चले जाएंगे, हम मोर्चा नहीं फेल होने देंगे. हमें मोर्चे के लिए जो भी न्यौछावर करना होगा कर देंगे."
पुलिस का रवैया
घटनास्थल हरयाणा के सोनीपत जिले के कोंडली थानाक्षेत्र में पड़ता है जो राजधानी दिल्ली से बिलकुल सटा है. हरियाणा पुलिस का दल कई बार मौक़ा-ए-वारदात पर मुआयना करने आया लेकिन उन्होंने ना तो किसी से पूछताछ की और ना ही वो निहंग सिखों के कैंप में दाखिल हुए.
हरियाणा पुलिस के शीर्ष अधिकारी दिन भर कोंडली थाने में ही कैंप करते रहे. यहां मीडिया को दिए बयान में रोहतक रेंज के आईजी संदीप खिरवार ने कहा, "हमने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और घटना के पीछे अभियुक्तों को जल्द से जल्द गिरफ़्तार कर लेंगे."
उन्होंने कहा, "हमारे पास अभियुक्तों के बारे में जानकारी है. पुलिस को घटना के बारे में पांच बजे के करीब जानकारी दी गई थी. कुछ संदिग्धों को हमने पहाना है और जल्द ही उन्हें गिरफ़्तार कर लिया जाएगा."
शुक्रवार देर शाम निहंग सिख सरबजीत सिंह ने घटना की ज़िम्मेदारी लेते हुए आत्मसमर्पण कर दिया.
सोनीपत पुलिस ने मीडिया को दिए बयान में उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की. आत्मसमर्पण से ठीक पहले सरबजीत ने कहा, "जो किया मैंने किया, किसी और ने कुछ नहीं किया. दुष्ट को मारने का कोई अफसोस नहीं है."
आत्मसमर्पण करने से पहले सिंघू बॉर्डर पर मौजूद निहंग सिखों ने सरबजीत सिंह का सम्मान किया. आत्मसमर्पण के वक्त जत्थेदार अमान सिंह ने बीबीसी से कहा, "हमें किसानों के साथ लड़ते हुए दस महीने हो गए हैं. किसी दुष्ट ने हमारे गुरू के अपमान की कोशिश की. हमने उसका सौदा कर दिया."
एक और जत्थेदार राजा राज सिंह ने कहा, "हमें सरबजीत पर मान है. जब तक मोर्चा हल नहीं होता है तब तक हम यहीं डटे रहेंगे. हम सरबजीत को इज्जत के साथ प्रशासन के हवाले कर रहे हैं."
वहीं किसान मोर्चा को चेतावनी देते हए अमान सिंह ने कहा, "जो राजनीति करनी है तो गुरू़ से दूर रहकर करिए. हम बिलकुल साफ करना चाहते हैं कि आजतक हम किसान नेताओं के ख़िलाफ़ नहीं बोले हैं, सोच समझकर अपना बयान दो. जो हुआ है गुरु साहब के हुक्म से हुआ है."
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