एयरफ़ोर्स की महिला अधिकारी ने रेप मामले में 'टू फ़िंगर टेस्ट' का लगाया आरोप

    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

भारतीय वायुसेना की एक महिला अधिकारी के साथ 'टू फ़िंगर टेस्ट' का मामला काफ़ी विवादित हो गया है. यह टेस्ट भारत में प्रतिबंधित है.

तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित एयर फ़ोर्स एडमिनिस्ट्रेटिव कॉलेज में अपने एक सहकर्मी पर उस महिला ने यौन हमले का आरोप लगाया है. महिला ने इसकी शिकायत भारतीय वायु सेना में की थी.

उस महिला ने कोयंबटूर पुलिस में एफ़आईआर दर्ज कराई है. अपनी शिकायत में कहा है कि सीनियर अधिकारियों ने यौन हमले की शिकायत दर्ज नहीं कराने का दबाव डाला और इसके लिए उन्हें धमकी के साथ प्रताड़ाना दी गई.

लेकिन जब महिला ने एफ़आईआर दर्ज कराने का फ़ैसला किया तो उसे आगे चलकर एहसास हुआ कि कई नियमों का उल्लंघन किया गया है.

एफ़आईआर में उस महिला ने कहा है, ''मुझे एयरफ़ोर्स अस्पताल जाकर वहाँ एक ग्रुप कैप्टन से मिलने के लिए कहा गया. वहीं पर मेरी मेडिकल जाँच हुई. इस दौरान जब दो डॉक्टरों से मिली तो वे ख़ुद ही मेडिकल जाँच को लेकर कन्फ़्यूज़ दिखे.''

एफ़आईआर में महिला ने कहा है, ''डॉक्टरों ने मुझसे अतीत में यौन संबंध को लेकर भी सवाल किए, बाद में मुझे पता चला कि उन्हें ऐसे सवाल करने का कोई हक़ नहीं था. उसके बाद उन्होंने मेरी मेडिकल जाँच की. उन्होंने मेरे शरीर और मेरे प्राइवेट पार्ट की जाँच की. उन्होंने मेरे वजाइना में फ़िंगर डालकर स्वैब लिए. बाद में मुझे पता चला कि रेप की जाँच के लिए टू फ़िंगर टेस्ट नहीं किया जाता है. इस तरह की जाँच से मैं और विचलित हो गई थी. ऐसा लगा कि अमितेश हरमुख (रेप अभियुक्त) के रेप के भयावह प्रताड़ना का सामना फिर से करना पड़ा.''

फ़िंगर टेस्ट पर क़ानून

इस महिला अधिकारी के अनुसार, 10 सितंबर को बास्केटबॉल खेलते वक़्त वो टखने से ज़ख़्मी हो गई थीं और उसी दिन उन पर यौन हमला हुआ था. अपनी एफ़आईआर में उन्होंने पूरे वाक़ये को विस्तार से बताया है.

पाँच साल पहले दो सितंबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने टू फ़िंगर टेस्ट को लेकर फ़ैसला सुनाया था. इस बेंच में जस्टिस बीएस चौहान और एफ़एमआई. कलिफ़ुल्ला थे. जजों ने अपने फ़ैसले में कहा था, ''टू फ़िंगर टेस्ट और इसकी व्याख्या रेप पीड़िता की निजता, शारीरिक और मानसिक गरिमा के अधिकार का उल्लंघन करता है. अगर रिपोर्ट में यौन संबंध की पुष्टि भी होती है तब भी ये पता नहीं चलता है कि संबंध सहमति से था या रेप किया गया था.''

कोर्ट ने कहा था कि ऐसी कोई मेडिकल प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए, जो क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक हो. अदालत ने कहा था कि लैंगिक अपराध से निपटने के दौरान पीड़िता की सेहत को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.

उस बेंच ने कहा था, ''व्यवस्था की ज़िम्मेदारी है कि यौन अपराध से पीड़ित महिलाओं के साथ संवेदनशीलता के साथ पेश आए. उनकी सुरक्षा के लिए हर उपाय होने चाहिए और उनकी निजता के साथ कुछ भी ग़ैर-क़ानूनी या एकतरफ़ा न किया जाए.''

टू फ़िंगर टेस्ट पहले ये जानने के लिए किया जाता था कि महिला वर्जिन है या नहीं. बाद में कहा गया कि हाइमन केवल यौन संबंध के दौरान ही नहीं बल्कि साइकिल चलाने और खेल की अन्य गतिविधियों में शामिल होने से भी टूट सकता है.

बीबीसी हिन्दी से चेन्नई की वकील सुधा रामालिंगम ने कहा कि टू फ़िंगर टेस्ट साबित हो चुका है कि अवैज्ञानिक है.

महिला की शिकायत

अपनी शिकायत में उस महिला अधिकारी ने कहा है, ''रेप की जाँच और रेप में बस यही फ़र्क़ था कि एक के बारे में मुझे ठीक से पता नहीं था और रेप के दौरान मैं होश में नहीं थी.'' पीड़ित महिला का कहना है कि रेप की जाँच और रेप में बहुत फ़र्क़ नहीं है.

''जिस बिस्तर पर रेप हुआ उसकी बेडशीट भी हमने सौंपी. अस्पताल के डॉक्टरों को उस कमरे से बिस्तर लाने को भी कहा, जिस पर सीमेन के दाग़ थे.''

महिला अधिकारी ने कहा है, ''टखने में चोट के बाद कुछ पेनकिलर्स ली थीं. दवाई खाने के बाद शाम में मैं अपने सहकर्मियों के साथ बैठी थी. उसी दौरान मैंने ड्रिंक मंगवाई.''

पीड़ित महिला का कहना है कि जब दूसरी ड्रिंक मंगवाई तो अभियुक्त ही उसके लिए ड्रिंक लेकर आया और पैसे भी उसी ने दिए. इसके बाद महिला की तबीयत बिगड़ी गई और उल्टियां हुईं. महिला का कहना है कि उसके दोस्तों ने उसे कमरे में पहुँचाया और लिटा दिया.

महिला ने अपनी एफ़आईआर में कहा है, ''जब मैं सो रही थी तो अमितेश मेरे कमरे में आया और उसने कई बार जगाने की कोशिश की. मैंने उससे कहा कि तेज़ नींद आ रही है और मुझे सोने दे. वो वहाँ से चला जाए.''

पीड़ित महिला ने कहा है, ''जिस महिला दोस्त ने उसे कमरे तक पहुँचाया था, उसने मुझसे पूछा कि क्या मैंने अमितेश को रूम में आने की इजाज़त दी थी और मेरे अंडरगार्मेंट्स क्यों उतरे हुए थे. मेरी उस सहमकर्मी ने ये भी कहा कि जब वो कमरे में आई तो उसने अभियुक्त को मेरे बिस्तर पर देखा था. अगले दिन महिला सहकर्मियों ने बिस्तर पर सीमेन के दाग़ देखे. मैंने अभियुक्त से पूछा तो उसने माफ़ी मांगी.''

अभियुक्त की गिरफ़्तारी

फ़्लाइट लेफ्टिनेंट अमितेश हरमुख को कोयंबटूर में 26 सितंबर को महिला पुलिसकर्मियों ने गिरफ़्तार किया था. गिरफ़्तारी के दौरान एयरफ़ोर्स के अधिकारियों ने नियमों को लेकर सवाल उठाए कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में दख़लअंदाज़ी है.

एयरफ़ोर्स के अधिकारियों ने कहा कि ऐसे मामलों में आर्म्ड फ़ोर्सेज के लिए अलग से नियम होते हैं. लेकिन पुलिस अपने रुख़ से नहीं डिगी और कहा कि उनके यहाँ शिकायत आई है तो वे ज़रूरी क़दम उठाएंगी.

बीबीसी हिन्दी से एक डिफ़ेंस प्रवक्ता ने कहा कि मामले की जाँच चल रही है, इसलिए कोई टिप्पणी उचित नहीं होगी. उन्होंने कहा कि एयरफ़ोर्स ने मामले की जाँच शुरू कर दी है. हरमुख के वकील एन सुंदरवदिवेलु ने बीबीसी से कहा कि कोर्ट ने अभियुक्त को एयरफ़ोर्स को सौंपने के लिए कहा है ताकि कोर्ट मार्शल शुरू हो सके. उन्होंने कहा कि एडिशनल महिला कोर्ट जज एन तिलागेश्वरी ने आदेश दिया है कि पुलिस इस मामले की जाँच नहीं करेगी.''

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