नवजोत सिद्धू ने क्यों दिया इस्तीफ़ा और क्या ले सकते हैं इसे वापस - प्रेस रिव्यू

कांग्रेस नेतृत्व ने नवजोत सिंह सिद्धू का पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफ़ा मंज़ूर नहीं किया है और स्थानीय नेतृत्व से इम मामले को सुलझाने को कहा है.

सिद्धू ने मंगलवार को ट्विटर पर इस्तीफ़े की घोषणा करके एक बार फिर यह दोहरा दिया कि पंजाब कांग्रेस में अभी भी सब कुछ ठीक नहीं हुआ है.

अंग्रेज़ी अख़बार 'हिंदुस्तान टाइम्स' लिखता है कि सिद्धू अपने प्रधान सलाहकार मोहम्मद मुस्तफ़ा के साथ बीते दो दिनों से पंजाब में राजनीतिक बदलावों पर चर्चा कर रहे थे. उनके इस्तीफ़े ने सबको चौंका दिया है क्योंकि डीजीपी रैंक के पूर्व अधिकारी मुस्तफ़ा के साथ मैराथन बैठक करने के बाद उन्होंने सोमवार को अपना फ़ैसला ले लिया था.

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सिद्धू के इस्तीफ़ा पत्र को एक 'भावुक प्रतिक्रिया' बताते हुए कहा है कि सबकुछ ठीक हो जाएगा.

कांग्रेस विधायक बावा हेनरी का कहना है कि सभी मुद्दों को सुलझा लिया जाएगा. उनका कहना है कि 3-4 मुद्दे हैं जिन पर पार्टी के स्तर पर चर्चाएं हुई हैं जिन्हें पार्टी हाई कमान सुलझा लेगा.

क्यों दिया सिद्धू ने इस्तीफ़ा

दूसरी ओर एक अन्य अंग्रेज़ी अख़बार 'द इंडियन एक्सप्रेस' लिखता है कि चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को 'सकारात्मक प्रतिक्रिया' मिल रही थी और वो नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब सरकार का रिमोट कंट्रोल नहीं बनने देना चाहता था.

अख़बार सूत्रों के हवाले से लिखता है कि यही सिद्धू के अचानक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने का कारण है.

कहा जा रहा है कि हाई कमान चन्नी के साथ खड़ा था जबकि सिद्धू वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियां, मंत्रियों के चुनाव और उन्हें विभाग ख़ुद बांटना चाहते थे.

शीर्ष पदों पर नियुक्ति की उनकी सलाह को नज़रअंदाज़ करने के बाद सिद्धू इससे बेहद 'ख़फ़ा और दुखी' थे.

इंडियन एक्सप्रेस सूत्रों के हवाले से लिखता है कि सिद्धू राणा गुरजीत सिंह को नहीं चाहते थे क्योंकि साल 2018 में रेत खनन मामले के आरोपों के बाद गुरजीत को अमरिंदर सिंह के मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा देना पड़ा था और उनको चन्नी की कैबिनेट में शामिल किया गया था.

इसके अलावा यह भी कहा गया है कि वो एपीएस देओल को एडवोकेट जनरल नियुक्त करने के ख़िलाफ़ थे और दीपिंदर सिंह पटवालिया को इसकी जगह चाहते थे. दोनों ही मामलों में सिद्धू से अलग रुख़ अपनाया गया.

एक पार्टी नेता ने अख़बार से कहा, "वो रिमोट कंट्रोल से सरकार चलाना चाहते थे. लेकिन उनके कुछ सुझावों ने दिखाया कि वो बदले की राजनीति में शामिल हैं जिन्हें वो नहीं चाहते हैं, इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल हैं. कांग्रेस पार्टी बदले की राजनीति में विश्वास नहीं रखती है इसलिए नेतृत्व ने उनके सुझावों को हटा दिया."

दिल्ली सरकार ने स्कूलों में 'देशभक्ति' पाठ्यक्रम को किया शामिल

दिल्ली सरकार ने मंगलवार को भगत सिंह की जयंती पर स्कूलों के लिए अपना 'देशभक्ति' पाठ्यक्रम जारी कर दिया.

'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' अख़बार लिखता है कि इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य नर्सरी से 12वीं कक्षा के छात्रों में देशभक्ति की भावना को पोषित करना है. सरकार का कहना है कि वो इसको कक्षा की गतिविधियों और अपनी परिभाषा के दायरे में यह करना चाहती है.

सभी छात्र क्लास और उसके बाहर होने वाली गतिविधियों के माध्यम से देशभक्ति के बारे में जान पाएंगे.

11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए यह कक्षा सप्ताह में दो बार तो वहीं छठी से आठवीं कक्षा के छात्रों के लिए यह कक्षा रोज़ाना होगी.

हर कक्षा 40 मिनट की होगी और इसका पाठ्यक्रम और शिक्षकों के लिए हैंडबुक मंगलवार को जारी कर दी गई.

आर्थिक मामलों से जुड़े कुछ बदलाव जो आप पर डालेंगे असर

एक अक्तूबर, 2021 से वित्तीय और बैंकिंग सेवा के कुछ नियमों में बदलाव होने जा रहे हैं. इन बदलावों को लेकर 'अमर उजाला' अख़बार ने एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसका सीधा असर आपके रोज़मर्रा के जीवन पर पड़ सकता है.

अख़बार लिखता है कि एक अक्तूबर से 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पेंशनभोगियों को डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की सुविधा मिलेगी. इसके लिए 30 नवंबर, 2021 तक का समय दिया गया है. प्रमाण पत्र देश के संबंधित डाकघरों के जीवन प्रमाण केंद्रों में जमा करना होगा.

जीवन प्रमाण पत्र पेंशनभोगी के ज़िंदा होने का सबूत होता है. पेंशन जारी रखने के लिए इसे हर साल उस बैंक या वित्तीय संस्थान में जमा करना होता है, जहां पेंशन आती है.

इसके अलावा डेबिट/क्रेडिट कार्ड से होने वाले ऑटो डेबिट के लिए नया नियम लागू हो रहा है. आरबीआई के आदेश के मुताबिक, 1 अक्तूबर, 2021 से बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं को डेबिट/क्रेडिट कार्ड या मोबाइल वॉलेट पर 5,000 से रुपये से ज़्यादा के ऑटो डेबिट के लिए ग्राहकों से एडिशनल फैक्टर ऑथेंटिकेशन की मांग करनी होगी.

इसके तहत, डेबिट/क्रेडिट कार्ड या मोबाइल वॉलेट से होने वाले ऑटो डेबिट तब तक नहीं होंगे, जब तक ग्राहक अपनी मंज़ूरी न दे.

वहीं, दो दिन बाद से तीन बैंकों ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और इलाहाबाद बैंक के पुराने चेकबुक, एमआईसीआर (मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रिकग्निशन) और आईएफ़एस (इंडियन फाइनेंशियल सिस्टम) कोड अमान्य हो जाएंगे.

इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय हो चुका है, जो 1 अप्रैल, 2020 से प्रभावी है. ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का विलय पंजाब नेशनल बैंक में हुआ है. पहले के इन तीनों बैंकों के ग्राहकों को 30 सितंबर तक नए चेकबुक लेने को कहा गया है.

भारत में ट्रेनिंग ले रहे अफ़ग़ान सैनिकों को मिलेगा छह महीने का वीज़ा

देश के विभिन्न सैन्य अकादमियों में प्रशिक्षण ले रहे 180 अफ़ग़ान सैनिकों और कैडेट को उनकी ट्रेनिंग पूरी होने के बाद छह महीने का ई-वीज़ा दिया जाएगा. हालांकि, इनमें से 140 अफ़ग़ान सैनिकों और कैडेट ने कनाडा, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे पश्चिमी देशों के लिए वीज़ा का आवेदन किया है.

'दैनिक जागरण' अख़बार लिखता है कि सूत्रों ने बताया है कि सरकार की तरफ से अफ़ग़ान सैनिकों और कैडेट को वीज़ा का प्रस्ताव दिया जाएगा. अब सैनिकों और कैडेट पर निर्भर करेगा कि वो अपने भविष्य को लेकर क्या फ़ैसला करते हैं.

विदेश में शरण लेने वाले सैनिकों और कैडेट के अलावा कई ऐसे भी हैं जो भारत में ही रहना चाहते हैं और इसके लिए संबंधित एजेंसियों के संपर्क में हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के सत्ता पर कब्ज़ा जमाने के बाद इन सैनिकों और कैडेट का भविष्य अधर में लटक गया है.

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