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एनडीए की परीक्षा में पहली बार इस साल से ही बैठेंगी लड़कियां, पर सामने हैं ये चुनौतियां
- Author, सुशीला सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को साफ़ किया कि नेशनल डिफ़ेंस एकेडमी या एनडीए में महिलाओं के प्रवेश को अगले साल तक टाला नहीं जा सकता.
कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश को निरस्त करने से इनकार किया और कहा कि एनडीए में महिलाओं की प्रवेश परीक्षा इसी साल नवंबर महीने में होनी चाहिए. इससे पहले अगस्त महीने में कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा था कि महिलाएं एनडीए की परीक्षा दे सकती हैं.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए यूपीएससी ने अपनी वेबसाइट upsconline.nic.in पर ऑनलाइन अर्ज़ियों के आवेदन मंगवाने का फैसला किया है. अब महिला उम्मीदवार 24.09.2021 से 08.10.2021 तक इसके लिए आवेदन भेज सकती हैं.
लेकिन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या कहा गया था और कोर्ट के आदेश पर विभिन्न पक्षों का क्या कहना है ये जानना बेहद ज़रूरी है.
सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर जनहित याचिका डालने वाले वकील, कुश कालरा का कहना था कि लड़कियों को 12वीं के बाद एनडीए में जाने का मौक़ा नहीं मिलता था जो संविधान में उन्हें दिए गए अधिकारों का उल्लंघन है. ये चलन छह दशक से ज़्यादा समय से चला आ रहा है और यहां केवल पुरुषों को ही प्रवेश दिया जाता है.
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सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार ने क्या कहा था?
बीबीसी से बातचीत में कुश कालरा ने कहा, "ये सीधे तौर पर संविधान में दिए गए अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) अनुच्छेद 15 (लैंगिक भेदभाव), अनुच्छेद 16 का उल्लंघन है, जो ये कहता है कि राज्य के अधीन किसी पद पर नियोजन या नियुक्ति से संबंधित विषयों में सभी नागरिकों के लिए अवसर की समता होगी और उनमें भेदभाव नहीं हो सकता. ये अनुच्छेद 19(1) में दिए गए अधिकारों का भी उल्लंघन करता है. इन सभी मानदंडों को देखा जाए तो ये महिलाओं के मौलिक अधिकारों का हनन करता है इसलिए मैंने इसी साल मार्च में इस मुद्दे पर याचिका डाली थी."
इस याचिका पर कोर्ट ने नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों, रक्षा मंत्रालय से जवाब मांगा था लेकिन इसी बीच एनडीए परीक्षा के लिए विज्ञापन जारी हो गए जिसमें केवल पुरुषों के प्रवेश के लिए प्रावधान था.
इस पर रोक लगाने के लिए कुश कालरा ने फिर एक याचिका डाली.
वे बताते हैं, "जब कोर्ट में एक याचिका इसी मामले पर लंबित है तो भर्ती के लिए कैसे विज्ञापन दिए जा सकते हैं. पहले परीक्षा सितंबर में होनी थी लेकिन अब उसे 14 नवंबर कर दिया गया है और कोर्ट का कहना है कि इसकी व्यवस्था की जाए कि महिलाएं भी परीक्षा दे सकें."
इस पर डिपार्टमेंट ऑफ़ मिलिट्री अफ़ेयर्स और रक्षा मंत्रालय की तरफ से हलफ़नामा दायर किया गया. इसमें बताया गया कि एनडीए की प्रवेश परीक्षा साल में दो बार होती है और मई में इसकी (पहली) परीक्षा के लिए नोटिफ़िकेशन जारी किया जाता है. हलफ़नामे में सरकार ने महिलाओं को इस परीक्षा में शामिल करने के लिए कोर्ट से मई 2022 तक का समय मांगा.
सरकार की ओर से कहा गया था कि महिलाओं को शामिल करने के लिए ज़रूरी तैयारियां मई 2022 तक हो पाएंगी, उसी दौरान यूपीएससी (सिविल सेवा) को प्रवेश परीक्षा के लिए अधिसूचना भी देनी होगी.
12वीं पास करके युवा प्रशिक्षण संस्थान नेशनल डिफ़ेंस एकेडमी में साढ़े 16 से साढ़े 19 की उम्र में कड़ी चयन प्रक्रिया से गुज़र कर प्रवेश पाते हैं. इन युवाओं का मेडिकली फिट होना अनिवार्य माना जाता है.
इस हलफ़नामे में कहा गया था कि जहां एनडीए में प्रवेश को लेकर पुरुष कैडेट के लिए पूरी प्रकिया और मेडिकल मानक बने हुए हैं वहीं महिला कैडेट को लेकर ये प्रक्रिया जारी है और महिला कैडेट के एकेडमी में प्रवेश से पहले इसे पूरा किया जाना है.
इसमें कहा गया कि डायरेक्टोरेट जनरल आर्म्ड फ़ोर्सेज मेडिकल सर्विसेज़ और तीन डिफ़ेंस सर्विसेज़ नौ सेना, थल सेना और वायु सेना की विशेषज्ञों की टीम महिलाओं के लिए ज़रूरी मानक तैयार करेगी. ये तीनों सेनाएं अपने कामकाज और ऑपरेशनल ज़रूरतों के आधार पर युवाओं की उम्र और प्रशिक्षण जैसे मुद्दों और मानकों का निर्धारण करती हैं.
हलफ़नामे में ये भी कहा गया था कि किस क्षेत्र में और किस अनुपात में महिलाओं को लिया जाए ये देखा जाना है. प्रवेश के लिए जो मानक हैं वो फिलहाल महिला उम्मीदवारों के लिए नहीं है.
वहीं इस मामले में शिक्षा को लेकर पाठ्यक्रम तय है लेकिन प्रशिक्षण के लिए जिन चरणों से पुरुषों को गुज़रना पड़ता है, जैसे- फ़ीजिकल और मिलिट्री ट्रेनिंग, खेल और अन्य एक्टीविटीज़ जो एक ऑफ़िसर कैडेट को एक प्रतिस्पर्धी ऑफ़िसर और सैनिक बनाने के लिए तैयार करती हैं, वो फिलहाल महिला उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध नहीं है. इन्हें अभी तैयार करना बाकी है.
इस विषय पर आकलन करने की ज़रूरत है और इनकी ऑपरेशनलन तैयारी के लिए विशेषज्ञों के इनपुट की ज़रूरत है.
लेकिन गांव-कस्बों तक कैसे पहुंचेगी जानकारी
जब मैंने इस पर वकील कुश कालरा से सवाल पूछा कि क्या तैयारी और भर्ती के लिए इश्तेहार और सूचना उम्मीदवारों तक पहुंचाने के लिए समय कम नहीं है?
तो उन्होंने इस बात को माना कि तैयारी नहीं है लेकिन कोर्ट कह रहा है कि शुरुआत होनी चाहिए और उन्होंने इस संबंध में मंत्रालय और यूपीएससी को समन्वय स्थापित कर काम करने को कहा है.
इस सवाल पर रिटायर्ड कर्नल पुनीत सहगल कहते हैं, "एनडीए में भर्ती के लिए नोटिफ़िकेशन पहले आ जाती हैं और दोनों परीक्षाओं की तारीख़ भी दे दी जाती है और बड़े शहरों की अलग बात है लेकिन गांवों, देहात में ये सूचना पहुंचने में वक़्त तो लगता है वहां अब ये नई सूचना क्या समय से पहुंच पाएंगी क्योंकि अभी तो लोगों को पता भी नहीं होगा कि ऐसा हुआ है."
वहीं कुश कालरा कहते हैं कि मान लीजिए अगर कोई लड़की केवल इसी साल परीक्षा दे सकती है तो कम से कम उन्हें मौक़ा तो मिल पाएगा.
अनुभव का मिलेगा मौक़ा
चंडीगढ़ स्थित डीसीजी डिफ़ेंस एकेडमी भावी छात्रों को एनडीए और कंबाइंड डिफ़ेंस सर्विस या सीडीएस में प्रवेश कराने के लिए प्रशिक्षण देती है.
12वीं पास कर चुकीं पलक शर्मा इस इंस्टीट्यूट से प्रशिक्षण ले रही हैं. वो कहती हैं कि उनका सपना एयरफ़ोर्स में ऑफ़िसर बनने का है. हालांकि उनके घर में कोई डिफ़ेंस में नहीं है.
बीबीसी से बातचीत में वो कहती हैं, "मेरी तैयारी पूरी तो नहीं है लेकिन मैं परीक्षा ज़रूर दूंगी. इससे कम से कम मुझे अनुभव मिलेगा तो इस बार नहीं तो अगली बार तो होगा."
प्रियंका शर्मा डीसीजी डिफ़ेंस एकेडमी दिल्ली और चंडीगढ़ दोनों की ब्रांच चलाती हैं और बताती हैं कि सीडीएस और एयरफ़ोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट कोर्स में कुल 50 लड़कियां प्रशिक्षण ले रही हैं और एनडीए के लिए उनका पहला बैच अभी शुरू हुआ है जिसमें चंडीगढ़ और दिल्ली की मिलाकर कुल नौ लड़कियां हैं.
वे कहती हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल शुरुआत करके अच्छा फ़ैसला लिया है क्योंकि कभी ना कभी तो शुरुआत होनी ही थी.
आगे बताती हैं, "शुरुआत में दिक्कत आ सकती है लेकिन फिर चीज़े संभल जाएगीं. जिन लड़कियों के 12वीं में अच्छे अंक आए हैं, जिनका बेस अच्छा है, स्मार्ट हैं उन लड़कियों को क्रैश कोर्स से भी मदद मिल सकती है. सीडीएस में हम परीक्षा के लिए तैयारी और ट्रेनिंग एक साथ कराते हैं लेकिन एनडीए के लिए इस बार ये एक साथ नहीं हो पाएगा लेकिन नतीजा आते-आते लड़कियों की ट्रेनिंग भी हो जाएगी."
वो दावा करती हैं कि अगले बैच में लड़कियों का लिखित और फिज़िकल में बहुत अच्छा प्रदर्शन होगा क्योंकि उन्हें समय भी ज़्यादा मिलेगा.
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि महिलाओं को इसी साल परीक्षा मैं बैठने दिया जाए.
कोर्ट ने कहा, "हम भावी महिला उम्मीदवारों को उम्मीद देकर मना नहीं करना चाहते. प्रक्रिया शुरू कीजिए. ये एक परिवर्तन का चरण है और इस साल बेहतर सुविधाएं संभव नहीं हैं लेकिन अगले साल वो बेहतर होंगी. डिफ़ेंस फ़ोर्सेज ने ये बड़ा फ़ैसला लिया है और इसकी शुरुआत इसी साल होनी चाहिए. आप महिलाओं के लिए कम सीटों से शुरुआत कर सकते हैं और अगले साल इन सीटों को बढ़ा सकते हैं."
साथ ही जब तैयारियों को लेकर आशंका व्यक्त की गई तो कोर्ट का कहना था, "आपात स्थितियों से निपटना आर्मड फ़ोर्सेज के काम का हिस्सा है. अगर ऐसी 'इमरजेंसी' है तो आप इससे निपट लेंगे. एक बड़े जेंडर इंटररेस्ट या लाभ के लिए इसे आगे नहीं टाला जा सकता."
सुप्रीम कोर्ट में मौजूद एक और वकील का कहना था कि सुनवाई के दौरान ये कहा गया कि जब कॉम्बैट यानी लड़ाई में महिलाओं को भेजा जा रहा है तो उसके लिए मानदंड तो पहले से ही हैं.
वकील कहते हैं कि यहां ये देखा जाना चाहिए आर्मड फ़ोर्सेज जैसे नौसेना, वायु सेना और थल सेना में जो महिलाओं की भर्ती होती है वो कॉलेज करने के बाद होती है जिनके अलग-अलग मानदंड होते हैं लेकिन एनडीए में आने वाली लड़कियों की उम्र साढ़े 16 से साढ़े 19 होगी. साथ ही भर्ती के लिए दिए जाने वाले विज्ञापन में भी मानदंड देने होंगे, सीटों के बारे में बताना होगा.
वकील के अनुसार अदालत का कहना था कि इसमें टेन्टेटिव या संभावित मानदंड तय कर दिए जाए जिस पर मुकदमेबाज़ी होने पर भी चर्चा हुई क्योंकि विज्ञापन में शर्त दी जाती है और बाद में उम्मीदवारों ने कहा कि ये ज्यादा सख़्त है तो इस पर कोर्ट का कहना था कि इस पर आप चिंता न करें जो लिटीगेशन होंगे उसे हम देखेंगे.
इन वकील का कहना था पहले महिलाएं शॉर्ट सर्विस कमीशन में आईं फिर धीरे-धीरे उसका दायरा बढ़ाया गया तो छह महीने अगर रूक कर ही प्रक्रिया शुरू होती तो क्या ही बदल जाता.
भारतीय सेना से रिटायर्ड हुए कर्नल पुनीत सहगल मानते हैं कि तीनों सेनाओं में लैंगिक समानता लाने के लिए ये एक सकारात्मक कदम है लेकिन शुरुआत में आने वाली दिक्कतों से भी इनकार नहीं किया जा सकता है.
सेना में स्टॉफ़ सिलेक्शन बोर्ड का हिस्सा रह चुके कर्नल पुनीत सहगल युवा उम्मीदवारों को सेना में भर्ती देने की ट्रेनिंग भी देते हैं.
क्या हो सकती हैं चुनौतियां?
रिटायर्ड कर्नल पुनीत सहगल कहते हैं जब स्कूलों में वो लेक्चर के लिए जाते थे तो कई बच्चियां उन से पूछती थीं कि क्या वे 12वीं के बाद आर्मड फ़ोर्सेज में जा सकती हैं तो ऐसे में बेशक भावी उम्मीदवारों के लिए ये दरवाज़ा भी खुल जाएगा.
लेकिन वे मानते हैं कि ढांचागत सुविधाएं जैसे कमरे या बाथरूम जैसी सुविधाओं का प्रबंधन किया जा सकता है लेकिन कैडर प्लैनिंग एक लंबी योजना के अंतर्गत आता है. यहां देखना होगा कि सीटें कहां खाली हैं, उसके मानदंड क्या होंगे ये योजना पहले ही बन जाती हैं. अब उसे हटा कर नए सिरे से सोचने में समय तो चाहिए. जिसका ज़िक्र हलफ़नामे में भी किया गया है जो कि बिल्कुल जायज़ है.
उनके अनुसार, "ऐसे में अगर ये योजनाबद्ध तरीक़े से किया जाएगा तो सीटें भी ज़्यादा होंगी और बेहतर भी होगा इस मामले में आपातकालीन स्थिति नहीं है लेकिन शुरुआत करने की ही बात है तो पहले बैच में प्रशिक्षण या ढांचागत चुनौतियां या मुश्किलें आ सकती हैं जिनका समाधान भी निकालना होगा लेकिन फिर चीज़ें सामान्य होती जाएगी."
एनडीए के लिए प्रक्रिया
एनडीए में प्रवेश पाने से पहले एक उम्मीदवार को परीक्षाओं के कई चरणों से गुज़रना पड़ता है जिसमें लिखित परीक्षा में 12वीं तक पढ़े विषयों और सामान्य ज्ञान के बारे में पूछा जाता है.
इस स्तर पर पास करने वाले उम्मीदवारों को स्टाफ सेलेक्शन बोर्ड की परीक्षा और साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है. ये पांच दिन की प्रक्रिया होती है. इसके बाद चयनित छात्रों की लिस्ट जारी होती है.
एनडीए में चयन होने के बाद तीन साल की ट्रेनिंग होती है और फिर कैडेट थल सेना, जल सेना और वायु सेना के लिए स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग के लिए बनी एकेडमी में भेजे जाते हैं.
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