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गुजरात: कोई 10वीं पास तो कोई सिर्फ़ चौथी, भूपेंद्र पटेल के नए मंत्रियों की शिक्षा पर चर्चा
- Author, जयदीप वसंत
- पदनाम, बीबीसी गुजराती के लिए
बीते गुरुवार को गुजरात के नवनियुक्त मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल के मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण समारोह संपन्न हुआ.
उनके कैबिनेट के सभी मंत्रियों की आय, शिक्षा और उन पर चल रहे क़ानूनी मामलों पर नजर डालें कुछ बातें हैं जो आपका ध्यान खींच सकती हैं.
शपथ ग्रहण समारोह के बाद सोशल मीडिया में मंत्रियों की शैक्षणिक योग्यता पर कई लोगों ने चर्चा की और 'गुजरात मॉडल' पर सवाल उठाए.
भाजपा से भी कइयों ने स्वीकार किया की कुछ मंत्री कम पढ़े लिखे हैं, लेकिन कहा की इसकी वजह से राज्य के प्रशासन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
नए मंत्रियों में से 52 फ़ीसदी मंत्री 30 से 50 साल की उम्र के हैं. कहा जाए तो नया मंत्रीमंडल अपेक्षाकृत युवा ज़रूर है, लेकिन 52 फीसदी मंत्री कक्षा 12 से कम पढ़ाई वाले हैं.
चौथी क्लास से पीएचडी तक
मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल की सरकार में 15 मंत्री ऐसे हैं, जो ग्रेजुएट नहीं हैं, यानी मंत्रीमंडल के 60 फ़ीसदी मंत्रियों ने कभी कॉलेज नहीं देखा. वहीं, मुख्यमंत्री पटेल ने ख़ुद सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है.
मंत्रिमंडल के 11 सदस्यों ने कक्षा 8 से 12 के बीच की ही पढ़ाई की है.
कैबिनेट मंत्री बने लिंबड़ी से किरीट सिंह राणा, गणदेवी से नरेश पटेल और असारवा से प्रदीप परमार ने कक्षा 10 तक की पढ़ाई की है.
वहीं, तीन बड़े मंत्रियों की शैक्षणिक योग्यता एसएससी यानी 10 कक्षा से भी कम है.
सूरत के मजूरा विधानसभा से विधायक और गृह राज्य मंत्री बने हर्ष सांघवी और कपराड़ा सीट से विधायक जीतूभाई चौधरी ने नौवीं क्लास पास की है.
राज्य मंत्रियों में से ओलपाड से मुकेश पटेल ने कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई की है, वहीं राजकोट से अरविंद रैयाणी ने नवीं कक्षा तक की पढ़ाई की है और महुवा से आर सी मकवाना और कतारगाम से विनुभाई मोरडिया ने 10वीं कक्षा से कम की पढ़ाई की है.
निमिषाबहेन सुथार और कीर्तिसिंह वाघेला ने कॉलेज में सिर्फ़ एक साल पढ़ाई की है.
राज्य के पशुपालन और गौ-संवर्धन मंत्री देवाभाई मालम सबसे कम पढ़े-लिखे हैं. उन्होंने केवल कक्षा चार तक की ही पढ़ाई की है. वे केशोद विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं.
कैबिनेट मंत्रियों में से सबसे अधिक पढ़ाई की है महिसागर के संतरामपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक प्रोफ़ेसर कुबेर डिंडोर ने. उन्होंने हिंदी भाषा में मास्टर डिग्री की पढ़ाई की है और पीएचडी भी किया हैं.
वरिष्ठ पत्रकार अजय नायक का कहना है, "भूपेन्द्र पटेल सरकार के मंत्रियों की शैक्षिक योग्यता पर चर्चा करते समय, पूर्व मुख्यमंत्रियों शंकरसिंह वाघेला, दिलीप पारिख, चिमनभाई पटेल या छबीलदास मेहता या अमरसिंह चौधरी के मंत्रिमंडलों की तरफ भी ध्यान देना चाहिए."
वो कहते हैं कि मंत्रियों की पढ़ाई से अधिक ज़रूरी होती है अफ़सरों से काम कराने की उनकी क्षमता.
अजय नायक के मुताबिक़, "भाजपा और कांग्रेस मंत्रिमंडल के डेटा निकालें तब जा कर तुलनात्मक तरीके से इसकी समीक्षा की जा सकती है. मंत्री भले ही कम पढ़े-लिखे हों, उनके पास अधिकारियों और सरकारी तंत्र से काम करवाने की और अपनी सरकार की योजनाओं को लागू कराने की क्षमता होनी चाहिए."
क्या कहते हैं भाजपा-कांग्रेस के प्रतिनिधि?
गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता जयराज सिंह परमार के कहा, ''जब तक पढ़े-लिखे और सेवाभाव से प्रेरित लोग राजनीति में आगे नहीं आएंगे, तब तक ऐसी ही स्थिति बनी रहेगी.''
उन्होंने कहा, "भाजपा अशिक्षित उम्मीदवारों को मैदान में उतारती है वह उम्मीदवार जीत भी जाता है, इससे प्रदेश का चुनावी माहौल बिगड़ रहा है. चुनावों में शिक्षा की बजाय जातिवाद पर ज़ोर दिया जाता है और धार्मिक भावनाएं हावी होती हैं."
परमार के मुताबिक़, "लोकतंत्र के लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अच्छे उम्मीदवार को पसंद नहीं किया जाता, बल्कि ऐसे उम्मीदवार को पसंद किया जाता है जो जीत सकता है."
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लोकप्रतिनिधि शिक्षित नहीं हो ऐसा हो सकता है, पर उसमें समझदारी होनी चाहिए.
आम आदमी पार्टी के नेता इसुदान गढ़वी ने कहा, "दिल्ली में बैठी भाजपा की मोदी सरकार के लिए गुजरात एक तरह की प्रयोगशाला है. मंत्रियों को सूचना दी जाती थी लेकिन वरिष्ठ नेता बात नहीं मानते और दिल्ली को ऐसे मुख्यमंत्री और मंत्री चाहिए जो नेता रबर स्टांप बन कर रहें."
उन्होंने कहा, "इसका परिणाम गुजरात के लोगों को भुगतना होगा. ऐसा हाल रहा तो मंत्रियों से ज़्यादा बाबू लोग मजबूत होंगे, जो दिल्ली के इशारे पर काम करेंगे. एक मंत्री भी कमज़ोर हुआ तो विकास के मामले में राज्य पीछे चला जाता है. यहां तो पूरा मंत्रिमंडल ही नया और अनुभवहीन है."
इस मुद्दे पर भाजपा के प्रवक्ता यमल व्यास ने कहा, "विभिन्न मामलों को ध्यान में रखते हुए पार्टी विधायकों में से ही किसी को मंत्री बनाती है. वही सभी प्रकार की संवैधानिक और क़ानूनी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं."
उन्होंने कहा, "जिन मंत्रियों की हम बात कर रहे हैं, वे 50 से 60 साल के बीच के हैं. जब वे पढ़ रहे थे तब यहां कांग्रेस का शासन था. सिर्फ शहरी क्षेत्रों में शैक्षिक ढांचा था, ग्रामीण क्षेत्रों में सिर्फ नाम के शिक्षक और स्कूल थे. उस जमाने में शिक्षा प्राप्त करना कठिन था."
यमल व्यास कहते हैं कि जिन विधायकों को मंत्रि बनाया गया है वे दो-तीन बार विधायक रहे हैं और प्रदेश की व्यवस्था से वाकिफ़ हैं इसलिए यहां व्यवस्था अच्छी चलेगी.
28% मंत्रियों पर दर्ज हैं अपराधिक मामले
भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुधार के लिए काम करने वाली स्वतंत्र संस्था एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफ़ॉर्म्स (एडीआर) ने नए मंत्रिमंडल के सदस्यों की योग्यता का विश्लेषण किया है.
एडीआर के अनुसार भूपेन्द्र पटेल कैबिनेट के 25 में से सात मंत्रियों के ख़िलाफ़ अपराधिक मामले दर्ज हैं. ये कुल कैबिनेट सदस्यों का 28 फ़ीसदी है. इनमें से तीन यानी 12 फ़ीसदी पर गंभीर आरोप लगे हैं.
18 मंत्रियों पर कर्ज़ है, जिनमें से अहमदाबाद के निकोल के विधायक जगदीश पांचाल ने खुद पर सबसे ज़्यादा कर्ज़ दिखाया है. उन्होंने अपने हलफनामे में 3.13 करोड़ रुपये का कर्ज घोषित किया है.
गुजरात कैबिनेट के 78 फ़ीसदी यानी 19 मंत्री करोड़पति हैं और उनकी औसत संपत्ति तीन करोड़ 95 लाख रुपये है. सबसे अमीर मंत्री हैं विसनगर के ऋषिकेश पटेल जिनके पास संपत्ति 14 करोड़ 95 लाख रुपये की संपत्ति है.
महमदाबाद सीट से विधायक अर्जुन सिंह चौहाण के पास सबसे कम संपत्ति है. उनके हलफनामे के अनुसार उनके पास 12 लाख 57 हज़ार रुपये की संपत्ति है.
भूपेंद्र पटेल के नए मंत्रिमंडल का उम्र के हिसाब से विश्लेषण करें तो 52 फ़ीसदी सदस्यों की उम्र 31 से 50 साल के बीच है, जबकि 48 फ़ीसदी सदस्यों की उम्र 51 से 70 साल के बीच है.
पटेल सरकार में दो महिला मंत्रियों मनीषाबेन वकील और निमिषाबेन सुथार को जगह दी गई है. वहीं पिछली रुपाणी सरकार में एकमात्र महिला मंत्री थी.
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