यूपी में बच्चों की 'रहस्यमय बीमारी' का रहस्य खुला, अब तक 100 से ज़्यादा बच्चों की मौत: ग्राउंड रिपोर्ट

शिवानी

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    • Author, समीरात्मज मिश्र,
    • पदनाम, फ़िरोजाबाद से, बीबीसी हिंदी के लिए

फ़िरोज़ाबाद के कौशल्यानगर मोहल्ले की रहने वाली 12 वर्षीया शिवानी को चार दिन पहले तेज़ बुख़ार हुआ. घर वाले फ़िरोज़ाबाद के सरकारी अस्पताल ले गए लेकिन एक सितंबर को उनकी मृत्यु हो गई.

दो दिन बाद, यानी तीन सितंबर को शिवानी का जन्मदिन था. शिवानी की मां राधा सदमें में हैं कि बेटी जन्मदिन से दो दिन पहले ही उन्हें छोड़कर चली गई.

कौशल्यानगर मोहल्ले में शिवानी की तरह दर्जनों बच्चे तेज़ बुख़ार से पीड़ित हैं. कुछ को फ़िरोज़ाबाद के ज़िला अस्पताल में भर्ती कराया गया है लेकिन ज़्यादातर बच्चे घर में ही डॉक्टरों की बतायी कुछ दवाओं के सहारे ज़िंदा हैं.

फ़िरोज़ाबाद

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राधा की पड़ोसी उषा बताती हैं, "मेरे तीन बच्चे बीमार हैं. तीनों को पिछले कई दिन से बुख़ार आ रहा है. मोहल्ले में ऐसा कोई घर नहीं है जहां बच्चे बीमार न हों. अस्पताल में जगह ही नहीं है. कुछ बच्चों को भर्ती कर लिया गया लेकिन बाक़ी सब यहीं चारपाई पर पड़े हैं. दवाई लाए हैं, वही दे रहे हैं."

कौशल्यानगर फ़िरोज़ाबाद के उन मोहल्लों में से एक है जहां बुख़ार से सबसे ज़्यादा पीड़ित लोग हैं. पीड़ित लोगों में ज़्यादातर बच्चे ही हैं, हालांकि कुछ वयस्क भी बुख़ार से पीड़ित हैं और तीन वयस्कों की अब तक मौत हो चुकी है. जबकि मरने वाले बच्चों की संख्या पचास तक पहुंच चुकी है.

हालांकि अनाधिकारिक तौर पर मृतकों की संख्या इससे कहीं ज़्यादा बताई जा रही है. इसकी वजह यह है कि बहुत से बच्चों की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो गई और सरकारी आंकड़ों में अब तक ये मौतें दर्ज नहीं हो सकी हैं.

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बुख़ार से प्रभावित अन्य मोहल्ले बिहारीपुरम, किशन नगर, आसफ़ाबाद, जैन नगर, सत्यनगर टापा और सुदामानगर हैं.

दो दिन पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुदामानगर का दौरा किया था और अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि साफ़-सफ़ाई का ख़ास ध्यान रखते हुए बीमार लोगों के इलाज की हरसंभव व्यवस्था की जाए.

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सफ़ाई को लेकर नगर निगम सवालों के घेरे में

कौशल्यानगर में राधा के घर तक पहुंचने से पहले घर के पास खुले इलाक़े में कई जगह कूड़े के बड़े-बड़े ढेर लगे हैं, थोड़ी ही दूरी पर खुला नाला है और बारिश का पानी हर तरफ़ जमा हुआ है.

इसी मोहल्ले के रहने वाले रमेश कहते हैं, "कल इस बच्ची की मौत की ख़बर आने के बाद नगर निगम के लोगों ने थोड़ी बहुत साफ़-सफ़ाई की, नहीं तो कोई सुनता ही नहीं. हम लोगों ने कई बार कहा कि कूड़ा यहां से दूर फेंका जाए लेकिन कोई सुनता ही नहीं है. हमने अपने घरों में साफ़-सफ़ाई कर रखी है, अपनी गली की सफ़ाई भी ख़ुद करते हैं लेकिन इतना बड़ा कूड़े का ढेर लगा है, उसी से सारी गंदगी यहां फैली हुई है."

रमेश के मुताबिक, उस दिन वहां सफ़ाई हुई थी, लेकिन देखने पर ऐसा नहीं लग रहा था कि कोई सफ़ाई हुई है. यानी सफ़ाई के बाद भी स्थिति ऐसी थी जैसे सफ़ाई न हुई हो. हालांकि नगर निगम के अधिकारी लगातार यह दावा कर रहे हैं कि सभी इलाक़ों में सफ़ाई की जा रही है और दवा का छिड़काव हो रहा है लेकिन इन इलाक़ों के लोगों की मानें तो ये दावे सिर्फ़ कागज़ी हैं या फिर कुछ चुनिंदा जगहों पर छिड़काव इत्यादि करके खानापूर्ति की जा रही है.

सुदामा नगर में अब तक बुख़ार से दस से ज़्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है. यहां गलियों में सन्नाटा छाया हुआ है. ऐसा शायद ही कोई घर हो जहां कोई बुख़ार से पीड़ित न हो. संजय के छह साल के बेटे की भी बुख़ार से मौत हो गई थी.

संजय रोते हुए बताने लगे, "24 अगस्त को बच्चे को बुख़ार आया था. प्राइवेट डॉक्टर को दिखाकर दवा लाए. बुखार ठीक हो गया लेकिन रात में फिर तेज़ बुख़ार आया. हम लोग बच्चे को लेकर आगरा गए लेकिन 28 अगस्त को उसकी मौत हो गई."

फ़िरोज़ाबाद

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आस पड़ोस के ज़िलों में कितना असर

बुख़ार से न सिर्फ़ फ़िरोज़ाबाद ज़िला प्रभावित है बल्कि मथुरा, मैनपुरी, सहारनपुर, एटा, इटावा के अलावा कानपुर, फ़र्रुख़ाबाद और मेरठ में भी यह तेज़ी से फैल रहा है. मथुरा में बुख़ार से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें 12 बच्चे शामिल हैं.

राज्य भर के सरकारी अस्पतालों में डेंगू से पीड़ित पांच सौ से ज़्यादा बच्चों का इलाज चल रहा है. ज़्यादातर जगहों पर अस्पतालों में बिस्तर की कमी है और बच्चों के परिजन उन्हें लेकर इधर-उधर भटक रहे हैं.

फ़िरोज़ाबाद ज़िले में ज़िला चिकित्सालय को ही मेडिकल कॉलेज बना दिया गया है. कोविड की तीसरी लहर को देखते हुए बच्चों के वॉर्ड को कोविड वॉर्ड के रूप में रिज़र्व रखा गया था लेकिन बेड की कमी के चलते इस वॉर्ड में भी अब बच्चों को भर्ती किया गया है.

प्राचार्य डॉक्टर संगीता अनेजा

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मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉक्टर संगीता अनेजा कहती हैं कि मौजूदा समय में उनके यहां 320 बच्चे भर्ती हैं जबकि 45 बच्चों को इलाज के बाद घर वापस भेज दिया गया है.

बीबीसी से बातचीत में डॉक्टर संगीता अनेजा कहती हैं, "18 अगस्त से ये मामले आने शुरू हुए लेकिन 22 अगस्त के बाद संख्या तेज़ी से बढ़ने लगी. हमने कुछ सैंपल्स की जांच यहां की है और फिर लखनऊ में भी भेजे गए. ज़्यादातर मामले डेंगू के पाए गए हैं. सभी मामलों में कोरोना जांच भी की जा रही है लेकिन राहत की बात है कि अब तक कोई भी बीमार बच्चा कोविड पॉज़िटिव नहीं पाया गया है. हमने अपने हॉस्पिटल में हर तरह की सुविधा मुहैया कराई है और स्टाफ़ की संख्या भी बढ़ा दी गई है."

डॉक्टर संगीता अनेजा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के रिसेप्शन के सामने ही अपने डॉक्टर साथियों के साथ बैठ रही हैं और लगातार वॉर्डों का दौरा भी कर रही हैं.

हालांकि बीमार बच्चों के अस्पातल आने का सिलसिला भी जारी है. जिस वक़्त वो हमसे ये बात कर रही थीं, उसी वक़्त कुछ बच्चों के परिजन इस बात को लेकर नाराज़ हो रहे थे कि सुबह से वो बुख़ार से पीड़ित बच्चों को लेकर इधर से उधर घूम रहे हैं लेकिन कोई देखने वाला नहीं है.

स्वास्थ्य विभाग में संयुक्त निदेशक डॉक्टर अवधेश यादव

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ज़िले में तीन डॉक्टरों का निलंबन

इस बीच, फ़िरोज़ाबाद में ज़िलाधिकारी चंद्रविजय सिंह ने लापरवाही बरतने के आरोप में तीन डॉक्टरों को निलंबित कर दिया है. वहीं, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर का 11 सदस्यीय दल भी फ़िरोज़ाबाद पहुंच गया है जो बुख़ार के कारणों का पता लगा रहा है.

आईसीएमआर की टीम ने विभिन्न क्षेत्रों से लार्वा एकत्र किए हैं जिनकी जांच की जा रही है. टीम के सदस्य क्षेत्र में घूम कर बुखार से पीड़ित लोगों से बातचीत कर रहे है और उनके लक्षणों के आधार पर उनके नमूने लेकर कर उसके कारणों का भी पता लगा रहे हैं.

बीमारी के प्रसार को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा को आगरा और फ़िरोज़ाबाद ज़िलों में ही कैंप करने के निर्देश दिए हैं.

लखनऊ से आई स्वास्थ्य विभाग की पांच सदस्यीय टीम के लीडर और स्वास्थ्य विभाग में संयुक्त निदेशक डॉक्टर अवधेश यादव कहते हैं कि यह बात लगभग स्पष्ट हो गई है कि बुख़ार की वजह डेंगू ही है, इसलिए इसे रहस्यमयी बुख़ार नहीं कहा जाना चाहिए.

फ़िरोज़ाबाद

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बीबीसी से बातचीत में डॉक्टर यादव कहते हैं कि अभी तक ज़्यादातर मामले शहरी क्षेत्र की मलिन बस्तियों से सामने आ रहे थे लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्रों से भी आने लगे हैं.

डॉक्टर यादव कहते हैं, "यहां से जब पहले दिन 49 सैंपल्स लखनऊ के केजीएमयू में भेजे गए तो 43 में डेंगू की पुष्टि हुई जबकि दो में डेंगू के साथ ही स्क्रबटाइफ़स भी पाया गया. इसके अलावा मेडिकल कॉलेज की ओर से 118 सैंपल्स की जांच की गई जिनमें 79 में डेंगू के मामले पाए गए. इसलिए यह अब स्पष्ट हो गया है कि बुख़ार की वजह डेंगू ही है और इस पर नियंत्रण पानी को कोशिश हो रही है."

हालांकि कुछ अन्य जानकारों का कहना है कि डेंगू बुख़ार सिर्फ़ बच्चों को ही प्रभावित नहीं करता है बल्कि बड़ों को भी अपनी चपेट में लेता है.

आशंका यह भी जताई जा रही है कि बुख़ार की वजह मानसून के मौसम में पूर्वांचल के इलाक़ों में होने वाली जापानी इंसेफ़ेलाइटिस या एक्यूट इंसेफ़ेलाइटिस सिंड्रोम जैसी बीमारी भी हो सकती है. स्क्रबटाइफ़स के मामले पुष्ट होने के बाद इस आशंका को और बल मिला है लेकिन डॉक्टर अवधेश यादव इसे ख़ारिज करते हैं. स्क्रबटाइफ़स के कई मामले मथुरा से भी मिले हैं.

डॉक्टर यादव कहते हैं, "इंसेफ़ेलाइटिस का मुख्य लक्षण यह होता है कि यह बच्चों के दिमाग़ पर असर करता है और वो अजीबो-ग़रीब हरकतें करने लगता है या उसे झटके आने लगते हैं. लेकिन यहां जो भी बच्चे बुख़ार से पीड़ित हैं उनमें इस तरह के लक्षण नहीं दिखे हैं. बच्चों में इसलिए यह ज़्यादा असर कर रहा है क्योंकि बच्चों का प्रतिरक्षा तंत्र उतना मज़बूत नहीं होता जितना कि वयस्कों का."

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