पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मौतों ने क्यों बढ़ाई योगी आदित्यनाथ सरकार की चिंता?

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- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क़रीब छह ज़िलों में वायरल बुख़ार ने पिछले क़रीब एक हफ़्ते से क़हर बरपाना शुरू कर दिया है.
फ़िरोज़ाबाद के अलावा मथुरा, कासगंज, आगरा, एटा और मैनपुरी में अब तक बुख़ार से क़रीब 50 लोगों की मौतें हो चुकी हैं जिनमें ज़्यादातर बच्चे हैं. सबसे ज़्यादा 40 लोगों की मौत फ़िरोज़ाबाद में हुई है. फ़िरोज़ाबाद में मरने वालों में 32 बच्चे शामिल हैं.
इन सभी मामलों में तेज़ बुखार के साथ प्लेटलेट्स की संख्या में अचानक गिरावट के लक्षण देखे जा रहे हैं. फ़िरोज़ाबाद की मुख्य चिकित्सा अधिकारी नीता कुलश्रेष्ठ ने बीबीसी को बताया, "हमने मेडिकल कॉलेज और ज़िला अस्पताल में व्यवस्था कर रखी है. मरीज़ों की संख्या काफ़ी ज़्यादा है और बहुत ही जल्दी इस बीमारी में मौत हो रही है, ख़ासकर बच्चों की. जिन इलाक़ों में ज़्यादा मामले आ रहे हैं वहां कैंप लगाकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं. ज़रूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल में शिफ़्ट कर रहे हैं."
डॉक्टर नीता कुलश्रेष्ठ ने बताया कि बड़ी संख्या में लोग बीमारी से ठीक भी हो चुके हैं, लेकिन वायरस को ख़त्म होने में कम से कम दो हफ़्ते का समय लग रहा है जबकि सामान्य बुखार चार से पांच दिनों में ठीक हो जाता है. सीएमओ नीता कुलश्रेष्ठ का यह भी कहना है कि मरने वालों में अब तक कोई भी व्यक्ति कोरोना पॉज़िटिव नहीं है.
फ़िरोज़ाबाद के अलावा मथुरा में भी अब तक बुखार से नौ लोगों की मौत हो चुकी है जबकि कासगंज में तीन लोग बुख़ार की वजह से अपनी जान गँवा चुके हैं. मरीजों की बढ़ती संख्या की वजह से सरकारी अस्पतालों में बिस्तरों की भी कमी होने लगी है. फ़िरोज़ाबाद के ज़िला अस्पताल में वायरल बुखार से पीड़ित 100 से ज़्यादा बच्चों का इलाज किया जा रहा है. यही हाल आगरा और मथुरा के ज़िला अस्पतालों का भी है.

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योगी आदित्यनाथ पहुंचे फ़िरोजाबाद
स्थिति की जानकारी लेने सोमवार को फ़िरोज़ाबाद पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉक्टरों को निर्देश दिए हैं कि मेडिकल एजूकेशन और सर्विलांस टीम से तत्काल चांज कराई जाए ताकि पता चले कि यह बीमारी डेंगू है या फिर कुछ और. फ़िरोज़ाबाद में मेडिकल कॉलेज के बाद मुख्यमंत्री योगी सुदामा नगर भी गए जहां सबसे ज़्यादा इस बीमारी से पीड़ित लोग हैं.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मीडिया से बातचीत में कहा, "निर्देश दिए गए हैं कि सभी अस्पतालों और निजी क्लीनिकों पर वायरल बुखार और अन्य संक्रामक बीमारियों की दवा उपलब्ध होनी चाहिए. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सफ़ाई, सैनिटाइज़ेशन और फ़ॉगिंग का काम सक्रियता से किया जाए और जलभराव को रोकने के लिए व्यापक व्यवस्था की जाए."

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डॉक्टरों का कहना है कि बुखार से पीड़ित लोगों में डेंगू, मलेरिया के अलावा जापानी इंसेफ़ेलाइटिस जैसे लक्षण भी दिख रहे हैं. वहीं, फ़िरोज़ाबाद के ज़िलाधिकारी चंद्र विजय सिंह इन अफ़वाहों को ख़ारिज किया है कि बच्चों की मौतों की वजह कोरोना की तीसरी लहर है. प्रशासन का दावा है कि बच्चों समेत अब तक जिन लोगों की भी मौत हुई है, उनमें कोई भी कोरोना संक्रमित नहीं था.

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अफ़वाह
ज़िलाधिकारी चंद्र विजय सिंह ने कहा, "लोग यह अफ़वाह उड़ा रहे हैं कि बच्चों की मौतों की वजह कोरोना की तीसरी लहर है, लेकिन ये बिल्कुल ग़लत है. बारिश के बाद जलभराव होने से डेंगू और तरह-तरह के मच्छर पनप गए हैं. यही वजह है कि ज़्यादातर बच्चे ही इसकी चपेट में हैं. लोगों से अपील है कि इस अफ़वाह पर ध्यान न दें कि ये कोरोना की तीसरी लहर है."
फ़िरोज़ाबाद का ज़्यादातर इलाक़ा वायरल बुखार, डेंगू और मलेरिया की चपेट में आ गया है. सैकड़ों की संख्या में बच्चे बुखार से प्रभावित हो रहे हैं. अस्पतालों में बच्चों का वॉर्ड भर जाने के बाद कोविड-19 के लिए बनाए गए आइसोलेशन वॉर्ड में भी अब बुखार पीड़ित बच्चों को भर्ती कर दिया गया है.
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