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तालिबान ने क़तर से भारत के लिए भेजा पैग़ाम, ''रिश्ते पहले की तरह बने रहें'' -प्रेस रिव्यू
तालिबान नेतृत्व के एक सदस्य ने क़तर में कहा है कि भारत 'इस उपमहाद्वीप के लिए बेहद महत्वपूर्ण है' और उनका समूह चाहता है कि भारत के साथ अफ़ग़ानिस्तान के 'सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनीतिक, व्यापारिक संबंध अतीत की तरह' बने रहें.
इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ तालिबान के इस बयान को भारत के लिए अहम माना जा रहा है.
अख़बार लिखता है कि तालिबान के दोहा कार्यालय के उप प्रमुख शेर मोहम्मद अब्बास स्तानेकज़ई की ओर से पश्तो ज़ुबान में जारी किए गए इस वीडियो मैसेज को अपने संगठन के सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर शनिवार को शेयर किया गया. ये वीडियो अफ़ग़ानिस्तान के मिल्ली टेलीविज़न चैनल पर भी प्रसारित हुआ है.
तालिबान की ओर से ये संकेत इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान का उस पर गहरा असर रहा है. पाकिस्तान ने भारत-अफ़ग़ानिस्तान संबंधों को अपने ख़िलाफ़ माना है.
15 अगस्त को काबुल पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद भारत को लेकर तालिबान के किसी सीनियर लीडर की ओर से ये पहला स्पष्ट बयान है जिसमें तफ़सील से बातें कही गई हैं.
रविवार को भारत की अध्यक्षता वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बयान के एक हिस्से से तालिबान का नाम हटा दिया गया था.
शेर मोहम्मद अब्बास स्तानेकज़ई अस्सी के दशक में देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री अकादमी से ट्रेनिंग ले चुके हैं.
वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत-चीन की गतिविधियां हुईं तेज़
भारत और चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर कई बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं पर अपना काम तेज़ कर दिया है.
कोलकाता से छपने वाले टेलीग्राफ़ अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार पूर्वी लद्दाख में दोनों पक्षों के बीच जारी विवाद के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास सड़कों, पुलों और सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है.
पिछले साल मई के महीने में दोनों देशों के बीच सीमा विवाद ने गंभीर रूप ले लिया था. लेकिन उसके बाद इस विवाद को कम करने के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर की बातचीत भी हुई. अब तक सैन्य स्तर की बातचीत के 12 राउंड हो चुके हैं.
गृह मंत्रालय के लिए काम कर रहे एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि लद्दाख में हालात तेज़ी से बदल रहे हैं.
उन्होंने टेलीग्राफ़ अख़बार से कहा, "लद्दाख में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई झड़प ने हमें चीन के साथ अपनी सीमा रणनीति पर फिर से सोचने के लिए मजबूर कर दिया. हम ने सरहदी इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़ी परियोजनाओं का काम तेज़ कर दिया है ताकि भारतीय इलाकों में चीनी घुसपैठ का जवाब दिया जा सके."
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि बुनियादी ढांचा विकास की परियोजनाओं का काम तेज़ करने का एक मक़सद ये भी है कि घुसपैठ और आमने-सामने की झड़पों का अंदाज़ा पहले से लगाया जा सके और सैनिकों की बेहतर तैनाती सुनिश्चित की जा सके.
'अफ़ग़ानिस्तान में बदलते सत्ता समीकरण भारत के लिए चुनौती'
चेन्नई से निकलने वाले अख़बार 'डेक्कन क्रॉनिकल' की रिपोर्ट के मुताबिक़ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में सत्ता के समीकरणों में आया बदलाव भारत के लिए एक प्रमुख चुनौती है.
उन्होंने कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा रणनीति पर फिर से ग़ौर करने की ज़रूरत है.
राजनाथ सिंह तमिलनाडु के वेलिंगटन में डिफ़ेंस सर्विसेज़ स्टाफ़ कॉलेज में संबोधन कर रहे थे.
उन्होंने कहा, "अफ़ग़ानिस्तान में बदलते समीकरण हमारे लिए चुनौती हैं... इन हालातों ने हमें अपनी रणनीति पर फिर से सोचने के लिए विवश कर दिया है. हम अपनी रणनीति बदल रहे हैं और क्वॉड का अस्तित्व में आना, इस रणनीति का हिस्सा है."
राजनाथ सिंह ने बताया कि रक्षा मंत्रालय युद्ध के समय जल्द फ़ैसले लेने के लिए इंटीग्रेडेट बैटल ग्रुप्स (आईबीजी) के गठन पर गंभीरता से विचार कर रहा है.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ संघर्ष विराम कामयाब रहा है और ऐसा सिर्फ़ भारत के सशक्त होने की वजह से हुआ है. भारत ने चरमपंथ के प्रति अपना रवैया बदला है और अब हम इसका फ़ौरन जवाब दे रहे हैं.
'कोरोना महामारी की तीसरी लहर कम ख़तरनाक होने की संभावना'
'भारत में कोरोना महामारी की तीसरी लहर सितंबर और अक्टूबर में कभी भी आ सकती है', ऐसे अनुमानों पर इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने कहा है कि दूसरी लहर की तुलना में इसके कम ख़तरनाक होने की संभावना है.
अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में आईसीएमआर के महामारी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर समीरन पंडा के हवाले से कहा है कि पूरे देश में महामारी की तीसरी लहर के बारे में कोई भी भविष्यवाणी नहीं कर सकता है.
उन्होंने कहा कि अगर ज़िलों और राज्यों से मिल रहे डेटा के आधार पर इस तरह के अनुमान लगाए जाएं तो बात समझ में आती है. अगर राज्य बिना सोचे विचारे पाबंदियां हटाएंगे या फिर जनता के स्तर पर कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया जाएगा तो एक नया वैरिएंट है जो संक्रमण के मामलों को बढ़ा सकता है.
हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि महामारी की लहर में जो बातें मायने रखती हैं, वो कुदरती तौर पर कम हो रही हैं.
उन्होंने कहा, "उन ज़िलों में जहां दूसरी लहर के दौरान संक्रमण के मामले कम थे, इस बार केस बढ़ सकते हैं और जहां पिछली बार संक्रमण के ज़्यादा मामले रिपोर्ट हुए थे, वहां मुमकिन है कि संक्रमण के केस पहले की तरह न बढ़ें."
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