बिहार: नालंदा में एक ही परिवार के पांच लोगों की भूमि विवाद में हत्या

    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, पटना से बीबीसी हिंदी के लिए

बिहार के नालंदा में एक ही परिवार के पांच लोगों की भूमि विवाद हत्या में कर दी गई जबकि तीन लोग घायल हैं. राजगीर के छबिलापुर थाना क्षेत्र के लोदीपुर गांव में हुई इस घटना के बाद सन्नाटा पसरा है.

स्थानीय पत्रकार राजीव लोचन के मुताबिक, "पूरे गांव में जगह-जगह पर ख़ून के निशान हैं. परिवार की औरतों की चीख़ रह-रहकर सुनाई दे रही है. गांव वाले बहुत गुस्से में थे और पुलिस को लाश भी उठाने नहीं दे रहे थे."

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल ये पूरा मामला भमि विवाद से जुड़ा है. यदुनंदन यादव और उनके तीन भाइयों का भूमि विवाद महेन्द्र यादव के परिवार से चल रहा था. ये सभी एक ही परिवार से आते है. स्थानीय भाषा में इन संबंधों को 'गोतियारा' कहा जाता है.

50 बीघा खेती की ज़मीन के लिए चल रहे इस विवाद में यदुनंदन यादव, पिंटू यादव, मधेश यादव, धीरेन्द्र यादव, शिवेन्द्र यादव की मौत हो गई है जबकि परशुराम यादव, बिन्दा यादव और मंटू यादव घायल हैं.

यदुनंदन यादव के 26 साल के बेटे मल्लू यादव ने बीबीसी हिंदी को फ़ोन पर बताया, "ज़मीन का विवाद तक़रीबन 10 साल से चल रहा है. 17 अप्रैल 2021 को छबिलापुर थाना में दोनों पार्टियों ने बॉन्ड भरा था कि जब तक न्यायालय इस मामले में फ़ैसला नहीं देती, खेत की जुताई नहीं होगी. लेकिन इसके बावजूद दूसरी पार्टी के लोग सुबह से खेत जुतवाने लगे जिसके बाद हम लोगों ने पुलिस को ख़बर की."

पुलिस पर गुस्सा - लाश उठाने नहीं दे रहे थे ग्रामीण

वो दावा करते हैं, "पुलिस को फ़ोन किया गया तो स्थानीय थानेदार ने कहा कि 'हम 24 घंटे तक नहीं आएंगे चाहे जो हो जाए.' इसके बाद हम लोग खेत जुताई का विरोध करने पहुंचे तो महेन्द्र यादव और उनके परिवार के लोगों ने 25 से 30 बाहरी हथियारबंद लोगों को बुला कर हम लोगों पर गोलियां चलवाई जिसमें मेरे घर के पांच लोगों की मौत हो गई और तीन लोग घायल हैं. अभी लाशें पोस्टमार्टम के लिए गई हुई हैं. घायलों का इलाज चल रहा है."

वहीं छबिलापुर थानाध्यक्ष विनोद कुमार ने इन सभी आरोपों से इनकार करते हुए बीबीसी हिंदी से कहा, "उनके घर मृत्यु हुई है तो वो कुछ भी आरोप लगा सकते हैं, लेकिन मुझे जैसे ही घटना की सूचना मिली, मैं पांच मिनट के अंदर अपने थाने से निकल गया."

लेकिन थानाध्यक्ष को क्या कोई फ़ोन आया था और उन्हें घटना की सूचना किस समय मिली, इसका वो कोई स्पष्ट उत्तर देने से बचते रहे.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "ऐसा कैसे हो सकता है कि कोई फ़ोन करे और हम ये कहें कि हम नहीं आएंगे. बाक़ी घटना के बारे में जब पता चला तो हम घड़ी देखकर थाने से नहीं निकले थे." कई बार पूछने पर वो कहते हैं,"दोपहर का 12 या 1 बज रहा होगा."

घायलों का इलाज कहां चल रहा है, ये पूछने पर मल्लू यादव कहते हैं, "मालूम नहीं, अभी मेरा दिमाग़ काम नहीं कर रहा है."

इस घटना के बाद लोदीपुर गांव और आस पास के गांव वाले आक्रोश में हैं. स्थानीय पत्रकार राजीव लोचन ने बीबीसी हिंदी को बताया, "जब हम लोग पहुंचे तो देखा ग्रामीण बड़ी संख्या में खेतों की तरफ़ लाशों को देखने जा रहे थे. एसपी, डीएसपी, बीडीओ सहित अन्य अधिकारियों ने कैंप किया हुआ था. ग्रामीणों में बहुत गुस्सा था और उनकी मांग थी कि स्थानीय थानाध्यक्ष पर भी प्राथमिकी दर्ज की जाए क्योंकि उन्हें सूचना दी गई, लेकिन वो फिर भी नहीं आए."

दो को हिरासत में लिया गया, बाक़ी फ़रार

इस घटना के बाद हिंसा करने के अभियुक्त फ़रार हो गए. लोदीपुर गांव में दोनों ही गुटों के घर अगल-बगल हैं.

नालंदा पुलिस अधीक्षक हरि प्रसाद ने बताया, "ये दो गुटों के बीच भूमि विवाद से जुड़ा मामला है जिसमें मारपीट और फ़ायरिंग हुई है. दोनों गुट गोतिया (संबंधी) हैं. इसमें एक गुट पांच लोगों की हत्या हुई है और अब तक दो अभियुक्तों को हिरासत में लिया गया है. आगे की कार्रवाई की जा रही है."

अभियुक्तों की संख्या कितनी हैं, यह पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "अभी हम यह बताने की स्थिति में नहीं हैं. प्राथमिकी का अभी फ़ाइनल ड्राफ्ट नहीं हुआ है."

नालंदा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह ज़िला भी है.

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