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गोरखपुर यूनिवर्सिटी कैंपस में दलित लड़की का शव, क्या कहना है परिवार का
- Author, पुनीत श्रीवास्तव और धीरेंद्र गोपाल
- पदनाम, गोरखपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय कैंपस में बीएससी तृतीय वर्ष की छात्रा प्रियंका की संदिग्ध मौत के तीन दिनों के बाद प्रशासन और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में छात्रा का अंतिम संस्कार किया गया.
छात्रा के अंतिम संस्कार के वक़्त एसएसपी सहित पुलिस के कई अधिकारी भी मौजूद रहे.
प्रियंका के पिता विनोद कुमार ने बताया कि उन्होंने बेटी का अंतिम संस्कार कराने से पहले प्रशासन से निष्पक्ष जाँच कराने, क्षतिपूर्ति, दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने और परिवार को सुरक्षा मुहैया कराने की माँग की थी.
उनके मुताबिक़ प्रशासन ने उनकी माँगों को मानने का आश्वासन दिया है, इसके बाद ही उन्होंने बेटी का अंतिम संस्कार किया.
हालाँकि प्रशासन की ओर से अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि क्षतिपूर्ति या नौकरी की मांगों को किस तरह पूरा किया जाएगा, लेकिन मामले की दोबारा जाँच कराई जा रही है.
गोरखपुर के एसएसपी दिनेश कुमार पी. ने बताया, "परिवार की सारी आशंकाओं पर हम जाँच करा रहे हैं. परिवार की आशंका के आधार पर मिली तहरीर के मुताबिक़ हत्या का केस दर्ज किया गया है. लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में आत्महत्या ही आया है. परिवार के अनुरोध पर पाँच डॉक्टर्स के पैनल से पोस्टमॉर्टम के वीडियो का परीक्षण कराया जाएगा. उन्होंने बताया कि सीएमओ डॉक्टर सुधाकर पांडेय ने पाँच डॉक्टर्स का पैनल गठित कर दिया है."
पुलिस ने प्रियंका के पिता विनोद की तहरीर पर गृह विज्ञान विभाग की एचओडी सहित अन्य लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है.
युवती के पिता विनोद कुमार बेटी को न्याय दिलाने और अभियुक्तों को सज़ा दिलाने के लिए कसम खाते हुए रो पड़ते हैं. उनका कहना है कि उनकी बेटी ने आत्महत्या नहीं की है. उनके अनुसार उनकी बेटी की हत्या हुई है.
शहर के पादरी बाज़ार पुलिस चौकी के पास शिवपुर सहबाजगंज मलिन बस्ती सोमवार को पुलिस की छावनी बनी हुई थी. दो दिनों से मलिन बस्ती में गाड़ियों के आने जाने का सिलसिला चल रहा था. लोगों से अधिक सड़क पर पुलिसवाले थे.
घर पर पसरा मातम
प्रियंका का अंतिम संस्कार कर सब लौट आए थे. दिन के क़रीब डेढ़ बजे घर पर अन्य कर्मकांड चल रहा था. घर पर रिश्तेदार और पड़ोसियों का आना जाना लगा था. माँ घर में रो-बिलख रहीं थीं. घर के लोग और पास पड़ोस की कुछ महिलाएँ उनको संभालने में लगीं थीं.
सिक्योरिटी गार्ड का काम करने वाले दलित परिवार के विनोद के चार बच्चों में सबसे छोटी प्रियंका घर की सबसे मेधावी बेटी थीं. विनोद कुमार कहते हैं कि बीएससी गृह विज्ञान की छात्रा उनकी बेटी के नंबर प्रथम श्रेणी के रहे हैं. वो कहते हैं, "उसकी पढ़ाई के लिए अपने ख़र्च में कटौती करता था ताकि उसको कोई कमी नहीं हो."
प्रियंका के भाई मनीष बताते हैं कि शनिवार की सुबह क़रीब साढ़े आठ बजे वह घर से प्रियंका को लेकर विश्वविद्यालय में परीक्षा दिलाने के लिए ले गए थे. मनीष के अनुसार यूनिवर्सिटी गेट पर अपनी बहन को छोड़कर वह लौट आए थे.
प्रियंका के पिता विनोद कुमार के अनुसार क़रीब 12 बजे चौकी प्रभारी का फ़ोन उनके पास आया. चौकी प्रभारी ने उन्हें प्रियंका का शव यूनिवर्सिटी के गृह विज्ञान विभाग के स्टोर रूम में मिलने की सूचना दी.
ख़ुद को किसी तरह संभालते हुए परिजन विवि कैंपस पहुँचे. वहाँ वह हैरान रह गए.
प्रियंका के परिजन आत्महत्या की बात मानने को तैयार नहीं. उनका कहना है कि ये सही नहीं है. पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन भले इस मामले को आत्महत्या के तौर पर देख रहा हो, लेकिन प्रियंका के परिवार इस थ्योरी को ख़ारिज करते हुए बेटी की हत्या की आशंका जताते हैं.
वो कहते हैं कि उनकी बेटी की घड़ी ग़ायब है. वो आत्महत्या की बात पर कई सवाल उठाते हैं.
प्रियंका के पिता ने यह भी कहा कि उनकी बेटी की चप्पलें कुछ दूरी पर पड़ी थीं. विनोद कुमार का शक और गहरा हो गया जब उन्होंने बेटी के कपड़े धूल से सने देखे. उनका दावा है कि, "इससे साफ़ लगता है कि उसकी हत्या कर इसे आत्महत्या दिखाने की साज़िश की गई है."
युवती के पिता के अनुसार उनकी बेटी के सिर पर चोट के निशान थे. रविवार को बीजेपी के नगर विधायक डॉ.राधामोहन दास अग्रवाल पीड़ित परिवार के घर पहुँचे. परिजन ने अपनी आशंका उनको ज़ाहिर करते हुए न्याय की माँग कर दी. विधायक ने उन्हें यक़ीन दिलाया कि इस मामले में निष्पक्ष जाँच होगी.
विभागाध्यक्ष जाँच में पूरे सहयोग को तैयार
गृह विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. दिव्यारानी सिंह इस मामले में किसी प्रकार की साज़िश से साफ़ इनकार करती हैं. उनका कहना है कि जब छात्राओं ने शोर मचाया तो वह और अन्य स्टाफ़ मौक़े पर पहुँचे.
उनके अनुसार यूनिवर्सिटी प्रशासन को तत्काल बताया गया, पुलिस बुलाई गई. उन्होंने कहा कि पुलिस मामले की जाँच कर रही है, उसका पूरा सहयोग जाँच में किया जाएगा.
विश्वविद्यालय कराएगा न्यायिक जाँच
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की ओर से जारी बयान में चार सदस्यीय न्यायिक जाँच कमेटी के गठन के बारे में जानकारी दी गई है.
कमेटी में पूर्व न्यायाधीश, विश्वविद्यालय कार्यपरिषद के एक सदस्य और दो वरिष्ठ अधिकारियों की कमेटी पूरे मामले की जाँच कर रिपोर्ट देगी.
विपक्षी दलों ने की जाँच की माँग
पीडि़ता के घर समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को पहुँचा. समाजवादी पार्टी गोरखपुर के पूर्व ज़िलाध्यक्ष नगीना प्रसाद साहनी का कहना है कि साक्ष्यों से प्रतीत हो रहा है कि छात्रा ने आत्महत्या नहीं की है. उनका कहना था कि सपा दलित छात्रा को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन करेगी.
कांग्रेस ने भी छात्रा को न्याय दिलाने के लिए उच्चस्तरीय जाँच की माँग की है. कई संगठनों ने सोमवार को विश्वविद्यालय के गेट पर प्रदर्शन की कोशिश की, लेकिन पुलिस बल ने सबको खदेड़ दिया. विश्वविद्यालय गेट और आसपास भारी फ़ोर्स तैनात किया गया है.
आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुजर रहे हैं तो भारत सरकार के जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.
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