अफ़ग़ानिस्तान ने भारत को सच्चा दोस्त और मोदी को समझदार नेता बताया- प्रेस रिव्यू

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अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने कहा है कि "तालिबान ने तो छोटी-छोटी लड़ाइयाँ जीती हैं, हम जंग जीतेंगे."
उनका कहना है कि अफ़ग़ान नेशनल फ़ोर्स जल्द ही तालिबान पर भारी पड़ेगी. हालांकि, उन्होंने इस बात से इनकार नहीं किया कि तालिबान लड़ाकों ने पिछले कुछ वक़्त में तेज़ी से बढ़त बनाई है.
अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिन्दू' में छपे एक इंटरव्यू में ग़नी ने कहा कि वे पाकिस्तान और दोहा में मौजूद तालिबान नेताओं, दोनों से बातचीत जारी रखेंगे.
इससे पहले, अपने एक तल्ख भाषण में राष्ट्रपति अशरफ़ गनी ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया था कि वो जिहादियों को रोक पाने में असमर्थ रहा है. साथ ही पाकिस्तान ने तालिबान पर बातचीत के लिए पर्याप्त दबाव नहीं डाला.
अख़बार को दिए इंटरव्यू में ग़नी ने कहा, "कुछ लड़ाइयाँ जीतना, युद्ध जीतना नहीं है. उन्होंने (तालिबान) कुछ लड़ाइयाँ ज़रूर जीत ली हैं, लेकिन ये युद्ध हम ही जीतेंगे और इसे लेकर हम दृढ़ हैं."
अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान सीमा के पास स्थित 'स्पिन बोल्डक-चमन क्रॉसिंग' पर तालिबान के कब्ज़ा कर लेने के सवाल पर ग़नी ने ये जवाब दिया. इसी क्षेत्र में पुलित्ज़र पुरस्कार विजेता भारतीय फ़ोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीक़ी मारे गए थे.

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गनी ने सिद्दीक़ी की मौत पर दुख व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि युद्ध जीतने के लिए संभव है कि हमें एक पुनर्संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता हो, लेकिन अफ़ग़ान सरकार का बड़ा लक्ष्य अफ़ग़ानिस्तान में एक राजनीतिक समझौता करना है.
उन्होंने इस बात पर बहुत ज़ोर दिया कि वे अल्जीरिया, इराक़, सीरिया, लेबनान और यमन जैसे हालात अफ़ग़ानिस्तान में नहीं होने देना चाहते, जहाँ आज भी संघर्ष जारी है.
उधर अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ती हिंसा के बीच तालिबान के साथ बातचीत करने के लिए अफ़ग़ानिस्तान नेतृत्व की 10 सदस्यीय एक टीम शुक्रवार दोपहर काबुल से दोहा के लिए रवाना हो गई.
इस दस सदस्यीय दल में राष्ट्रीय सुलह के लिए उच्च परिषद के प्रमुख अब्दुल्ला अब्दुल्ला, पूर्व उपाध्यक्ष मोहम्मद क़रीम ख़लीली, अता मोहम्मद नूर, मुख्य वार्ताकार मासूम स्टेनकज़ई, सलाम रहीमी, फ़ातिमा गिलानी और शांति मामलों के मंत्री सादात मंसूर नादेरी शामिल हैं.

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ये पूछे जाने पर क्या वे पश्चिमी देशों द्वारा मझधार में छोड़े जाने जैसा महसूस करते हैं? क्योंकि अचानक अमेरिकी सेना के पीछे हटने के बाद, ब्रितानी सरकार की ओर से भी उम्मीद के विपरीत बयान सुनने को मिले. तो उन्होंने कहा, "नहीं, नहीं, मैं ऐसा महसूस नहीं करता. हमारी उनसे बात होती है. हम संपर्क में हैं."
इस इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्होंने मौजूदा स्थिति में भारत से सैन्य मदद की माँग नहीं की है. उन्होंने कहा कि "भारत अफ़ग़ानिस्तान के विकास में सच्चा भागीदार है. वो हमारा सच्चा दोस्त है. मेरे पीएम मोदी से भी अच्छे संबंध हैं, जो एक समझदार शासक हैं. उन्होंने हमारे सामने ऐसी कोई बात नहीं रखी जिससे हमारे हितों को किसी तरह का ख़तरा हो. भारत के साथ हमारा व्यापार संतुलित है. भारत के सहयोग से हमारे यहाँ कई योजनाएं चल रही हैं."
उन्होंने कहा, "तालिबान को हराना अब हमारा काम है. अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान को टक्कर देने के लिए अंतरराष्ट्रीय बल प्रयोग की अवधि अब समाप्त हो चुकी है."
अंत में उन्होंने कहा कि "मैं चाहता हूँ कि भारत और पाकिस्तान के बीच भी संबंध बेहतर हों, वो किसी नतीजे तक पहुँचें क्योंकि हमें मिलकर ही एशिया के भविष्य को बदलना है. हालांकि, जब-जब भारत और पाकिस्तान के बीच कहा-सुनी होती है, तो कुछ बातें अफ़ग़ानिस्तान को भी सुननी पड़ती हैं."
रविशंकर प्रसाद का मंत्रालय बदलने के पीछे कांग्रेस ने बताया ये कारण

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भारत नेट पर कैग (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार के कारण ही रवि शंकर प्रसाद को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से हटाया गया है. द हिन्दू ने इस ख़बर को प्रमुखता से छापा है.
कैग ने अपनी शुरुआती जाँच में कहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार का भारतनेट प्रोजेक्ट, जिसके तहत छह लाख गाँवों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ा जाना है, वित्तीय अनियमितताओं के कारण विफल रहा.
शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इसके लिए एक स्वतंत्र, उच्च-स्तरीय और समयबद्ध जाँच की माँग की.
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94 पन्नों की रिपोर्ट में, कैग ने कहा कि मंत्रालय ने सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) को रख-रखाव के लिए भारी भुगतान किया लेकिन बावजूद इसके अलग-अलग सर्किलों में केबल और अन्य बुनियादी ढांचों का सही रखरखाव नहीं पाया गया.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके कारण ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तरों पर सेवा की गुणवत्ता ख़राब हुई है. रिपोर्ट में कई ऐसे उदाहरण भी दिये गए हैं जिनमें काम सिर्फ़ कागज़ों तक ही सीमित रह गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि मंत्रालय के तहत सीएससी को जुलाई 2019 और दिसंबर 2020 के बीच 386.42 करोड़ रुपये और 116.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था.
यह व्यवस्था एक त्रि-पक्षीय समझौते का हिस्सा है जिसके तहत यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (USOF), भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड और CSCs के बीच ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क, टेलीकॉम उपकरण और वाई-फ़ाई एक्सेस पॉइंट के संचालन और रखरखाव के लिए जुलाई 2019 में मंज़ूरी दी गई थी.

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पंजाब में सिद्धू संभाल सकते हैं कांग्रेस की कमान
पंजाब में कांग्रेस कमिटी के राज्य प्रभारी हरीश रावत और मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की बैठक के बाद पंजाब के पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बनने का रास्ता लगभग साफ़ हो गया है. इस खबर को इंडियन एक्सप्रेस ने ख़ास तवज्जो दी है.
अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने इस बैठक के बाद कहा कि वह पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के फ़ैसले के अनुरूप ही चलेंगे.
पंजाब में साल 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं और विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और सिद्धू के बीच सत्ता संघर्ष की ख़बरें काफ़ी समय से आ रही थीं. दोनों नेताओं के बीच के मतभेद दूर करने के लिए हरीश रावत शनिवार को दिल्ली से चंडीगढ़ पहुंचे थे.
बैठक के बाद हरीश रावत ने ट्वीट किया, "मैं अभी-अभी @capt_amarinderji से मिलकर दिल्ली लौटा हूं. मुझे खुशी है कि कई बातें जिन पर बाहर चर्चा की जा रही है, वो पूरी तरह से निराधार साबित हुई हैं. कैप्टन साहब ने फिर से अपनी बात दोहराई है कि पंजाब में अध्यक्ष पद के संबंध में जो भी निर्णय कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष का होगा, वो उन्हें मंज़ूर होगा."
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नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट लोगों के साथ: चीफ़ जस्टिस रमन्ना
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) नाथुलापति वेंकट रमन्ना ने शनिवार को कहा कि सर्वोच्च न्यायालय लोगों की नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उनके साथ खड़ा रहेगा. यह ख़बर आज कई अख़बारों के पहले पन्ने पर है.
सीजेई ने यह बयान तब दिया जब न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ ने इस बात को लेकर चिंता ज़ाहिर की कि बहुसंख्य (मेजॉरिटी) प्रवृत्ति या फिर नागरिक, धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंध भारत के संवैधानिक गणराज्य के स्वरूप को प्रभावित करेगा.
न्यायाधीश ने कहा, "हमारी स्वतंत्रता के लिए ख़तरा न केवल वो लोग है जिन्हें शासन करने का काम सौंपा गया है बल्कि यह ख़तरा लोगों की असहिष्णुता से भी पैदा हो सकता है."

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कोविड-19 के कारण उत्तर प्रदेश ने रद्द की काँवड़ यात्रा
उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने शनिवार को घोषणा की कि उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा को रद्द कर दिया गया है. पहले राज्य सरकार ने इसके लिए अनुमति दे दी थी. राज्य के इस क़दम पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया था और ये बदला हुआ फ़ैसला उसके कुछ दिनों बाद आया है.
उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (सूचना) नवनीत सहगल ने कहा, 'सरकार की अपील पर कांवड़ संघों ने यात्रा रद्द कर दी है. उन्होंने कहा, हालांकि इस बार प्रतीकात्मक कांवड़ यात्रा ही थी.
कोर्ट ने कहा था कि वह यूपी सरकार को इस बात की अनुमति नहीं दे सकती है कि वो कोविड19 के इस दौर में कांवड़ यात्रा के लिए मंज़ूरी दे.
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