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सीडीएस जनरल रावत और वायु सेनाध्यक्ष भदौरिया के खुलेआम बयानों का क्या है मतलब?
- Author, राघवेंद्र राव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत में सेना के तीनों अंगों को मिलाकर 'इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड' बनाने का मसला फिर सुर्ख़ियों में है, और साथ ही यह चर्चा भी छिड़ गई है कि इसको लेकर सामने आ रहे शीर्ष अधिकारियों के सार्वजनिक बयानों के पीछे क्या चल रहा है.
ऐसी चर्चा रही है कि भारतीय वायु सेना इंटीग्रेटेड या एकीकृत थिएटर कमांड स्थापित करने के विचार को लेकर उत्साहित नहीं है. ऐसी स्थिति में चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत के हाल ही में दिए एक बयान ने मामले को और पेचीदा बना दिया है.
जनरल रावत ने वायु सेना को सशस्त्र बलों की 'सहायक शाखा' कहा है, उन्होंने उसकी तुलना तोपखाने और इंजीनियरों से की है, जनरल रावत ने कहा है कि वायु सेना के हवाई रक्षा चार्टर के अनुसार संचालन के समय वह थल सेना के सहायक की भूमिका निभाती है.
वायु सेना की 'सहायक भूमिका' की बात जनरल रावत ने एक सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में कही थी.
दरअसल, सम्मेलन में जनरल रावत से पूछा गया था कि ऐसी धारणा है कि भारतीय वायु सेना 'इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड' की स्थापना को लेकर उत्साहित नहीं है.
जब वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरके एस भदौरिया से जनरल रावत की टिप्पणियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वायु सेना की भूमिका केवल सहायक की नहीं है, और किसी भी एकीकृत युद्ध भूमिका में वायु शक्ति की "बहुत बड़ी भूमिका" होती है.
एयर चीफ़ मार्शल भदौरिया ने साथ ही यह भी कहा कि भारतीय वायु सेना इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड के स्थापना के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी जोड़ा कि इस प्रक्रिया को "ठीक ढंग से पूरा किया जाना चाहिए".
शुरुआत
1999 में कारगिल युद्ध के बाद बनी समीक्षा समिति से लेकर कई अन्य समितियों ने सेना के इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड और चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ के पद की स्थापना के सुझाव दिए थे.
15 अगस्त 2019 को लाल किले से दिए स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में सैन्य व्यवस्था, सैन्य शक्ति और सैन्य संसाधनों के विषय में सुधार पर चल रही चर्चा का ज़िक्र किया था.
मोदी ने कहा था कि भारत की तीनों सेनाओं--थल सेना, नौसेना और वायु सेना--में समन्वय तो है और वे अपने-अपने तरीके से आधुनिकीकरण के लिए भी प्रयास करते हैं लेकिन जिस तरह युद्ध के दायरे और रूप-रंग बदल रहे हैं और जिस तरह की टेक्नोलॉजी की भूमिका बढ़ रही है उसके कारण भारत को भी टुकड़ों में सोचने से काम नहीं चलेगा, देश की पूरी सैन्यशक्ति को एकजुट होकर एक साथ आगे बढ़ना होगा.
प्रधानमंत्री ने कहा था, "ऐसी स्थिति से काम नहीं चलेगा जिसमे तीनों सेनाओं में से एक आगे रहे, दूसरा दो कदम पीछे रहे और तीसरा तीन कदम पीछे रहे. उन्होंने कहा था कि तीनों सेनाओं को एक साथ एक ही ऊंचाई पर आगे बढ़ना चाहिए और दुनिया में बदलते हुए युद्ध और सुरक्षा के माहौल के अनुरूप उनमें अच्छा समन्वय होना चाहिए".
इसी के साथ मोदी ने चीफ ऑफ़ डिफ़ेंस (सीडीएस) का पद बनाने की घोषणा करते हुए कहा था कि इससे तीनों सेनाओं को शीर्ष स्तर पर प्रभावी नेतृत्व मिलेगा.
क्या है इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड?
इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड एक एकीकृत कमांड है जिसके तहत खतरे की गंभीरता के आधार पर सेना, नौसेना और वायु सेना के सभी संसाधनों को बेहतर तालमेल के साथ इस्तेमाल किया जा सके, इसके तहत सेना के सभी अंग एक-दूसरे के संसाधनों का ज़रूरत के मुताबिक इस्तेमाल कर सकते हैं.
इस विचार के पीछे का मुख्य भाव यह है कि जहां एक ओर भारतीय सशस्त्र बल अपने कर्तव्यों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं और संकट की स्थितियों के दौरान अपनी-अपनी भूमिका निभा रहे हैं, वहीं वे शायद और भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं अगर उनके बीच अधिक सामंजस्य और समन्वय हो.
पिछले कई सालों से भारत में एकीकृत कमान बनाने की बात चल रही थी पर इसे गति तब मिली जब जनवरी 2020 में जनरल बिपिन रावत को सीडीएस नियुक्त किया गया.
सीडीएस बनने पर रावत की मुख्य ज़िम्मेदारियों में तीनों सेवाओं के संचालन, रसद, परिवहन, प्रशिक्षण, सहायता सेवाओं, संचार, मरम्मत और रखरखाव में तालमेल लाना और बुनियादी ढांचे का सही उपयोग सुनिश्चित कर सेवाओं के बीच संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देना था.
इस प्रस्ताव के अंतर्गत चार से पांच थिएटर कमांड बनाने पर विचार किया जा रहा है और हर कमांड का नेतृत्व एक तीन-सितारा अधिकारी को सौंपने की बात की जा रही है. योजना के तहत हर थिएटर कमांड के पास तीनों बलों के संसाधन होंगे और इन्हें इस्तेमाल करने का अधिकार थिएटर के कमांडर के पास होगा.
ऐसा माना जा रहा है कि सभी थिएटर कमांडों का नियंत्रण अंततः सीडीएस के अधीन आ जाएगा और सेना प्रमुखों की मुख्य ज़िम्मेदारी अपने बलों को बढ़ाने, प्रशिक्षण देने और बनाए रखने की होगी.
पहले चरण में एयर डिफेंस कमांड और मैरीटाइम थिएटर कमांड की स्थापना का प्रस्ताव है. एयर डिफेंस या वायु रक्षा कमान तीनों सेवाओं के वायु रक्षा संसाधनों को नियंत्रित करेगा और साथ ही सैन्य संपत्तियों को हवाई दुश्मनों से बचाने की ज़िम्मेदारी भी इसी की होगी. इसी तरह मैरीटाइम थिएटर कमांड का काम भारत को समुद्री खतरों से बचाना होगा और इस कमांड में थल और वायु सेना भी शामिल होंगे.
आने वाले समय में पश्चिमी, उत्तरी और पूर्वी मोर्चों को सुरक्षा देने के लिए तीन और एकीकृत डिफेंस कमांड बनाए जाने की योजना है.
एकीकृत थिएटर कमांड का बड़ा फायदा यह माना जा रहा है कि इनमें संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग और तीनों सेवाओं के बीच समन्वय बढ़ेगा. उदाहरण के तौर पर जानकार कहते हैं कि भले ही वायु रक्षा की ज़िम्मेदारी वायु सेना की है लेकिन सेना के तीनों अंगो के पास मिसाइल जैसे वायु रक्षा उपकरण मौजूद हैं. अब अगर एक एकीकृत वायु रक्षा कमांड स्थापित कर दी जाए तो वायु रक्षा से जुड़ी सभी सम्पत्तियाँ एक ही कमांड के नियंत्रण में आ जाएँगी जिससे संकट की स्थिति में बिना समय गंवाए त्वरित कार्रवाई करने में आसानी होगी.
चुनौतियाँ और दिक्कतें
ऐसी चर्चा है कि वायु सेना इस प्रस्ताव की रूपरेखा से संतुष्ट नहीं है, एयर मार्शल भदौरिया के इस प्रक्रिया को "ठीक ढंग से" पूरा करने की बात कहने से इस धारणा को और बल मिला है.
जानकारों के अनुसार वायु सेना इस बात से चिंतित है कि इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड बन जाने के बाद वो अपनी वायु संपत्तियों का नियंत्रण खो देगी. साथ ही वायु सेना की एक चिंता यह भी है कि थिएटर कमांड बन जाने से उसकी सारी संपत्ति कई जगह थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बंट जाएगी.
इन्हीं मतभेदों को सुलझाने के लिए जून में तीनों सेनाओं के उप-प्रमुखों की एक समिति का गठन किया गया.
एक अन्य मसला यह है कि इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड के ढाँचे में कौन किसे रिपोर्ट करेगा, कर्मियों और मशीनरी की ऑपरेशनल कमांड सेना प्रमुख के हाथ में होगी या थिएटर कमांडर के?
पिछले साल अक्टूबर में सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने कहा था कि रक्षा सुधारों की प्रक्रिया में अगला तार्किक कदम युद्ध और शांति के दौरान तीनों सेनाओं की क्षमताओं के तालमेल के लिए एकीकृत थिएटर कमांड का गठन था. साथ ही, उन्होंने यह भी कहा था कि यह एक सोची-समझी और विचारशील प्रक्रिया होगी जिसके फलने-फूलने में कई साल लगेंगे.
जनरल नरवणे ने साथ ही यह भी कहा था कि इस प्रक्रिया में "मिड-कोर्स करेक्शन" यानी चलती हुई प्रक्रिया के दौरान सुधारों की ज़रूरत पड़ सकती है.
वर्तमान स्थिति क्या है?
फिलहाल भारत में 17 सैन्य कमांड हैं. इनमें से थल और वायु सेना की सात कमांड हैं और नौसेना की तीन कमांड हैं. साथ ही दो त्रिसेवा कमांड भी हैं- अंडमान और निकोबार कमांड (एएनसी) जिसका नेतृत्व तीनों सेनाओं के अधिकारी करते हैं और स्ट्रैटेजिक फोर्स कमांड जो भारत की परमाणु संपत्ति के लिए जिम्मेदार है.
क्या कहते हैं सीडीएस बिपिन रावत?
सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने हाल ही में इंडिया टुडे टीवी को एक साक्षात्कार में कहा कि नए सुधारों में कुछ बाधाएं हैं लेकिन तीनों सेवाएं इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सहमत हैं. उन्होंने कहा कि ये बाधाएं भी जरूरी हैं क्योंकि इनसे हमें एहसास होता है कि और अधिक चर्चाओं की आवश्यकता है.
जनरल रावत ने कहा कि वे और अधिक चर्चाओं के साथ इस योजना को आगे बढ़ा रहे हैं और तीनों सेनाओं के बीच एकता लाने के लिए निर्धारित समय सीमा के अनुरूप थिएटर कमांड बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है.
विशेषज्ञों की राय
भारतीय वायु सेना के सेवानिवृत्त एयर कमोडोर और रणनीतिक मामलों के समीक्षक प्रशांत दीक्षित कहते हैं कि इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड के प्रस्ताव को गहन आत्मनिरीक्षण के साथ देखने की जरूरत है, इसका एक बहुत ही लागत बनाम लाभ के नज़रिए से गंभीर विश्लेषण किया जाना चाहिए.
वे पूछते हैं, "जब हमारे संसाधन इतने कम हैं तो हमें थिएटर कमांड की आवश्यकता क्यों है जबकि इन संसाधनों को विभिन्न स्थानों पर वितरित करके समय पड़ने पर उनकी मोर्चाबंदी करना बेहद मुश्किल होगा?"
दीक्षित के अनुसार भारत के पास ऑपरेशन पराक्रम का अनुभव है "जहां सेना को संगठित करने में ही छह महीने लग गए". वे कहते हैं, "थिएटर कमांड में भारतीय वायु सेना के संचालन पर मुझे यह कहते हुए दुख हो रहा है कि यह व्यर्थ है. भारतीय वायु सेना के पास ऐसे संसाधन नहीं हैं जो पूरे थिएटर कमांड में वितरित किए जा सकें."
उनका कहना है कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वायु शक्ति के पास पहुंच है और यह एक विलक्षण लाभ है. 'गगनशक्ति' अभ्यास का उदाहरण देते हुए दीक्षित कहते हैं कि उस अभ्यास ने ये साबित कर दिया कि भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान सुदूर-पूर्व से उड़न भरकर भारतीय प्रायद्वीप को पार कर लक्षद्वीप में निर्धारित लक्ष्यों को निशाना बना सकते हैं.
वायु सेना के सेवानिवृत एयर मार्शल पीके बरबोरा कहते हैं कि वायु सेना के मुख्य सिद्धांत हैं इसका लचीलापन, तेज़ प्रतिक्रिया, मारक क्षमता और वायु रक्षा. वे कहते हैं, "वायु सेना राष्ट्रीय वायु रक्षा के लिए जिम्मेदार है. तो इन सिद्धांतों के आधार पर वायु सेना के पास विभिन्न कमानों को देने के लिए संपत्ति नहीं है. अचानक से भारतीय वायुसेना प्रत्येक थिएटर के लक्ष्य के लिए एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित नहीं हो सकती है. पश्चिमी देशों के कई सेना प्रमुख स्पष्ट रूप से कह चुके हैं कि हवाई संपत्ति को विभाजित नहीं किया जा सकता है."
एयर मार्शल (रिटायर्ड) बरबोरा कहते हैं, "यदि आप इस तरह से हवाई संपत्ति को तोड़ते हैं तो आप रक्षा की राष्ट्रीय क्षमता को कमजोर कर रहे हैं. भारतीय वायु सेना सहायक भुजा नहीं है. यह राष्ट्रीय रक्षा की एक संपत्ति है जिसका उपयोग राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए अन्य दो सेवाओं के संयोजन में किया जाना चाहिए.
एयर मार्शल (रिटा.) बरबोरा 1948, 1965 और 1971 के युद्धों का उदहारण देते हुए कहते हैं कि भारतीय वायु सेना ने हर बार सेना के अन्य अंगों के साथ उत्कृष्ट संयुक्त कौशल का प्रदर्शन किया. वे कहते हैं, "1971 में अगर भारतीय वायु सेना मज़बूत नहीं होती तो पाकिस्तानी सेना और वायु सेना ने वास्तव में आत्मसमर्पण नहीं किया होता और वो लड़ाई और लंबी चलती."
उनका मानना है कि इस पूरे मामले में जल्दबाज़ी करने की कोशिश हो रही है.
इस पूरी योजना पर एयर कमोडोर (रिटा.) दीक्षित कहते हैं कि उन्हें नहीं लगता कि यह बदलाव जरूरी है. वे कहते हैं, "सिर्फ इसलिए कि अमेरिका ने ऐसा किया, हमें ऐसा करने की जरूरत नहीं है."
उनके अनुसार यह वायु शक्ति को समझने की बात है. वे कहते हैं कि अगर हम शक्ति के प्रयोग या युद्ध के सिद्धांतों के बारे में सोचें तो लचीलेपन और पहुंच का अधिक महत्त्व है. "यह एक हवाई मंच है और यह कई भूमिकाएं निभा सकता है. ऐसी नहीं है की वायु सेना को लग रहा है कि उसके रुतबे में कोई कमी आ जाएगी. बात सिर्फ वायु शक्ति के प्रयोग की हो रही है."
एयर कमोडोर (रिटा.) दीक्षित का मानना है कि भारतीय वायु सेना जितनी बड़ी सेना को यह कहना कि वो कुछ जहाज़ एक जगह खड़े कर दे और कुछ जहाज़ कहीं और, ये सबकी मिलकियत अलग-अलग होगी ये एक पिछड़ी हुई विचारधारा है.
वे कहते हैं, "लोकतंत्रों में इस तरह के विवाद उठ चुके हैं. यह नई चीज़ नहीं है. यह टर्फ वार लगेगा क्योंकि एक ऐसी बात उठाई गई है जिसमें एक फ्रंटलाइन कॉम्बैट सर्विस का अस्तित्व नीचा दिखाने का प्रयत्न किया जा रहा है. मुझे आश्चर्य इस बात का है कि तीनों सेनाओं में काफी बुद्धिजीवी लोग हैं और उनके होने के बावजूद इस तरह की बात सीडीएस के स्तर पर उठाई जा रही है. ये हास्यासपद है."
एयर कमोडोर (रिटा.) दीक्षित का कहना है कि भारतीय वायु सेना संसाधनों के मौजूदा प्रबंधन के साथ कहीं भी पहुंच सकती है. "लेकिन एवेक्स, हवा में ईंधन भरने वाले विमान और लड़ाकू विमानों की कम संख्या के कारण हमें अपने संसाधनों को और कम नहीं करना चाहिए और वायु सेना को उसी तरह से संचालित करना चाहिए जैसे वह वर्षों से कर रही है."
लेकिन दूसरी तरफ़ ऐसे लोगों की तादाद भी कम नहीं है जो इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड को आधुनिकीकरण और विकास से जोड़कर देखते हैं और उनका कहना है कि इस योजना को जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए.
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