मोदी से मिलने के बाद उमर अब्दुल्लाह और महबूबा मुफ़्ती का तेवर कैसा रहा?- प्रेस रिव्यू

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आज भारत के तमाम अख़बारों के पहले पन्ने की लीड ख़बर जम्मू-कश्मीर के नेताओं की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक की है.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने भी इसे ही लीड ख़बर बनाई है. हिन्दू की इस ख़बर का शीर्षक है- प्रधानमंत्री ने परिसीमन और लोकतंत्र का समर्थन किया.
अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि जम्मू-कश्मीर की मुख्यधारा की आठ पार्टियों के 14 नेताओं के साथ बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनकी सरकार जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र की जड़ों को मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध है.
प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से परिसीमन की प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की. परिसीमन के बाद वहाँ चुनाव कराने की बात हो रही है.
अख़बार के अनुसार इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे को बहाल करने की प्रतिबद्धता दोहराई है.
द हिन्दू ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि मोदी ने बैठक में कहा- दिल्ली की दूरी कम होनी चाहिए और दिल की भी.
अनुच्छेद 370 पर ज़ोर नहीं

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इस बैठक में सभी पार्टियों ने जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे का मुद्दा उठाया. अनुच्छेद 370 का भी मुद्दा उठा लेकिन ज़्यादातर पार्टियों ने इस मामले में क़ानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं भी दाखिल की गई हैं. यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है.
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस ने पहले पन्ने पर पीएम मोदी और जम्मू-कश्मीर के नेताओं की बैठक की ख़बर के साथ एक विश्लेषण भी छापा है.
इस विश्लेषण में लिखा है, ''इससे पहले एक प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर पर 23 जनवरी, 2004 को बैठक की थी और उसकी भी चर्चा इसी तरह हुई थी. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कश्मीर के अलगाववादी नेताओं से मुलाक़ात की थी. तत्कालीन उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने एक दिन पहले इन नेताओं की मेज़बानी की थी.''
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''इस बैठक के नौ महीने पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने श्रीनगर में इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत वाला भाषण दिया था. वाजपेयी और मोदी की इस बैठक में बड़ा फ़र्क़ यह है कि अब जम्मू-कश्मीर में मुख्यधारा के नेता हाशिए पर हैं और प्रधानमंत्री से इनकी बैठक को जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस करने के मामले में अहम माना जा रहा है. लेकिन इससे दिल्ली और श्रीनगर के बीच क्या कुछ बदलेगा?''
इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है, ''जम्मू-कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्री 221 से 436 दिनों तक जेल में रहे. भरोसे का भारी अभाव है लेकिन उन्हें पता है कि बातचीत के अलावा कोई विकल्प नहीं है. इस बैठक से इन नेताओं को स्पेस मिली है कि वे अपने क्षेत्रों के बारे में बात कर सकें.''
प्रक्रिया की शुरुआत

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गुरुवार को बैठक में शामिल होने के बाद जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ़्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ बैठक एक प्रक्रिया की शुरुआत है.
उमर अब्दुल्लाह ने कहा, ''दिल्ली और श्रीनगर के बीच भरोसा टूटा है. इस भरोसे को जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री की ओर से क़दम उठाने की ज़रूरत है. यह केंद्र की ज़िम्मेदारी है कि भरोसे को बहाल करे.''
उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि पाँच अगस्त, 2019 को जो कुछ भी किया गया वो अस्वीकार्य है. अब्दुल्लाह ने कहा, ''लोग जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश के तौर पर पंसद नहीं कर रहे हैं. लोग चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले और उसके कैडर को बहाल किया जाए.''
नेशनल कॉन्फ्रेंस और गुपकार गठबंधन के प्रमुख डॉ फ़ारूक़ अब्दुल्लाह ने कहा कि भरोसे की बहाली सबसे ज़रूरी है और पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना नई दिल्ली की ओर से इस दिशा में पहला क़दम होगा.
गुपकार गठबंधन के सभी नेताओं ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को भी बहाल करने की बात दोहराई.
महबूबा ने एक बात के लिए की पीएम मोदी की तारीफ़

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जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने बैठक के बाद कहा कि चीन और पाकिस्तान से संवाद के लिए वे प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ़ करती हैं. मुफ़्ती ने कहा कि भारत को कश्मीर में शांति के लिए भी पाकिस्तान से बात करनी चाहिए.
महबूबा मुफ़्ती ने कहा, ''हमलोग जम्मू-कश्मीर की ज़मीन, नौकरियाँ और खनिज संपदा की भी सुरक्षा चाहते हैं. यहाँ हर तरह के डर का माहौल ख़त्म होना चाहिए. मैं राजनीतिक क़ैदियों को भी रिहा करने की मांग करती हूँ.
कश्मीर की पीपल्स कॉन्फ़्रेंस (पीसी) और जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी ने भी बैठक के दौरान जम्मू-कश्मीर की ज़मीन और नौकरियों की सुरक्षा की मांग की. इन पार्टियों ने कहा कि बैठक बहुत ही अच्छे माहौल में हुई.
हालाँकि इन पार्टियों ने अनुच्छेद 370 पर कोई बात नहीं और कहा कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है.
द हिन्दू के अनुसार पीपल्स कॉन्फ़्रेंस के नेता मुज़फ़्फ़र हुसैन ने कहा, ''मैंने प्रधानमंत्री को सलाह दी कि अनुच्छेद 371 के तहत 54ए को यहाँ लागू करना चाहिए ताकि जॉब और ज़मीन को स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षित रखा जा सके. सभी पार्टियों ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग की. प्रधानमंत्री ने कहा कि परिसीमन के बाद चुनाव होगा और पूर्ण राज्य का दर्जा भी बहाल किया जाएगा. उसके बाद अन्य मुद्दों का समाधान होगा.''
मुकुल रॉय को लेकर ममता और बीजेपी में टकराव

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भारतीय जनता पार्टी के बीच का टकराव हर दिन दिया नया रूप लेता दिख रहा है. बीजेपी और ममता बनर्जी की सरकार के बीच का हालिया विवाद बंगाल विधानसभा की लोक लेखा समिति यानी पीएसी के अध्यक्ष पद को लेकर है.
बीजेपी से तृणमूल कांग्रेस में वापसी करने वाले और बीजेपी के टिकट पर विधायक बने मुकुल रॉय ने लोक लेखा समिति के अध्यक्ष के लिए नामांकन किया है.
दैनिक जागरण ने इस ख़बर चौथे पन्ने पर प्रमुखता से जगह दी है. अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''बीजेपी ने समिति के सदस्य के लिए अपने छह विधायकों, तो तृणमूल कांग्रेस ने 14 विधायकों के नाम दिए. टीएमसी लोक लेखा समिति के अध्यक्ष पद पर मुकुल रॉय को लाना चाहती है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को कहा कि वे इस पद के लिए मुकल रॉय का समर्थन करेंगी.''
मुकुल रॉय के नामांकन पर ममता ने कहा कि इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है. पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने मुकुल रॉय के नामांकन का विरोध किया है. उनका कहना है कि रॉय जब विधायक ही नहीं रहेंगे तो लोक लेखा समिति के अध्यक्ष कैसे बन सकते हैं. अधिकारी ने कहा कि वे पहले विधानसभा अध्यक्ष के फ़ैसले का इंतज़ार करेंगे और यहाँ से निराशा हुई तो कोर्ट का रुख़ करेंगे.''
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