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सोनिया और राहुल गाँधी से बिना मिले लौटे अमरिंदर सिंह- प्रेस रिव्यू
पंजाब में अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रहा है. मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को लेकर कांग्रेस आलाकमान की नाराज़गी भी बढ़ती जा रही है. इसी से जुड़ी एक रिपोर्ट इंडियन एक्सप्रेस ने पहले पन्ने पर प्रकाशित की है.
अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस हाई कमान ने बुधवार को अमरिंदर सिंह को निर्देश दिया कि पार्टी ने घोषणापत्र में जो 18 वादे किए थे, उन्हें समयसीमा के भीतर पूरा करें.
पंजाब पर मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की तीन सदस्यीय समिति ने कहा है कि अमरिंदर सिंह के प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरे नवजोत सिंह सिद्धू को बातचीत के लिए नई दिल्ली बुलाया जाएगा.
अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार अमरिंदर सिंह पिछले दो दिनों से दिल्ली में थे. उन्हें पार्टी प्रमुख सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी मिले बिना ही वापस जाना पड़ा. अख़बार का कहना है कि कांग्रेस हाईकमान सिद्धू से विवादों को लेकर ख़ुश नहीं है.
सिद्धू का मामला अमरिंदर सिंह ने भी समिति के सामने उठाया था. अमरिंदर सिंह ने कहा है कि सिद्धू के बयानों से पार्टी को नुक़सान हो सकता है. पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव है और कांग्रेस के भीतर घमासान मचा हुआ है.
अमरिंदर सिंह से खड़गे के नेतृत्व वाली समिति ने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह से विस्तार में चर्चा की थी. समिति ने मुख्यमंत्री से कहा है कि वे 2017 के चुनावी वादों को हर हाल में समयसीमा के भीतर पूरा करें.
इन वादों में बरगारी में गुरु ग्रंथ साहिब के पन्ने फाड़ने वालों को सज़ा दिलाना भी शामिल है. ड्रग रैकेट के साथ ट्रांसपोर्ट और रेत माफ़िया के ख़िलाफ़ ठोस कार्रवाई के वादे भी हैं. इसके अलावा शहरी घरों को 200 यूनिट तक फ़्री बिजली, अनुसूचित जाति के बच्चों को स्कॉलरशिप और दलितों के क़र्ज़ माफ़ी जैसे वादे भी हैं.
अख़बार से पंजाब में कांग्रेस के प्रभारी हरीश रावत ने कहा, ''पार्टी ने मुख्यमंत्री से 18 वादों के बारे में पूछा है. मुख्यमंत्री प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर इन वादों के बारे में बताएंगे.'' पार्टी सूत्रों का कहना है कि अमरिंदर सिंह से
वादे पूरे करने करे बारे में पूछा गया है. इसके अलावा बुधवार को राहुल गाँधी ने पंजाब कांग्रेस प्रमुख सुनील झाखड़, सांसद मनीष तिवारी, राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा और पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल से मुलाक़ात की है. सुनील झाखड़ ने कहा है कि पार्टी पंजाब को गंभीरता से ले रही है और जल्दी एकजुटता दिखेगी.
असम में क्या वाक़ई जनसंख्या विस्फोट की स्थिति है?
अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े एक सिविल सोसाइटी ग्रुप ने कहा है कि सरकारी योजनाओं के फ़ायदे के लिए दो बच्चों की नीति अपनाने वाले असम को अपने विकास के लक्ष्यों को पाने में मुश्किल होगी.
अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार एडवोकेटिंग रिप्रोडक्टिव चॉइस (एआरसी) ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह मान लिया जाए कि देश में जनसंख्या विस्फोट की स्थिति है.
2019-2020 के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे ने स्पष्ट कर दिया है कि महिला और पुरुष बिना किसी जनसंख्या नियंत्रण नीति के छोटा परिवार चाहते हैं.
एआरसी 115 संगठनों का गठबंधन है, जो गर्भनिरोधक के चुनाव के अधिकार के साथ स्वास्थ्य को लेकर काम करता है. असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 19 जून को कहा था कि चाय बागान मज़दूरों, अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को छोड़कर, जिनके दो से ज़्यादा बच्चे होंगे उन्हें क्रमशः राज्य सरकार की योजनाओं से वंचित किया जाएगा.
असम में जनसंख्या नियंत्रण नीति के तहत 2018 में असम पंचायत एक्ट, 1994 में संशोधन किया गया था. इस संशोधन के तहत पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अधिकतम दो बच्चे, न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और घरों में शौचालय का होना अनिवार्य कर दिया गया था. अब एक बार फिर से बीजेपी की सरकार ने एक नया क़दम उठाया है.
एआरसी का कहना है, ''असम में कुल प्रजनन दर 1.9 है जो कि राष्ट्रीय औसत दर 2.2 से भी कम है. NFHS-5 के डेटा के अनुसार असम में 15 से-49 साल की 77 फ़ीसदी विवाहित महिलाएं और 63 फ़ीसदी पुरुष ज़्यादा बच्चे नहीं चाहते हैं. ये पहले से ही परिवार बड़ा होने से रोकने के क़दम उठा रहे हैं. 80 फ़ीसदी से ज़्यादा महिलाएं और 79 फ़ीसदी पुरुष मानते हैं कि दो या उससे कम बच्चा ही परिवार का आदर्श आकार है. अभी असम में 11 फ़ीसदी विवाहित महिलाएं ही परिवार नियोजन से दूर हैं.
एआरसी ने कहा कि असम से बाहर जिन राज्यों में प्रजनन दर ज़्यादा है, वहाँ दो बच्चे वाली नीति के बारे में कुछ भी पता नहीं है. असम में बीजेपी के नेता वहाँ की जनसांख्यिकी परिवर्तन की बात करते हैं. असम में 40 फ़ीसदी मुसलमानों की आबादी है.
तेजस्वी ने चिराग को महागठबंधन में आने का न्योता दिया
दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बेटे और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने दिवंगत नेता रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान को महागठबंधन में आने का न्योता दिया है.
अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''क़रीब दो महीने बाद दिल्ली से पटना लौटे बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने लोक जनशक्ति पार्टी में चिराग गुट के प्रमुख चिराग पासवान को महागठबंधन में आने का न्योता दिया है. चिराग भाई को तय करना है कि भाजपा के साथ रहेंगे या बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ने जो संविधान लिखा है उसके साथ रहेंगे.''
अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार पटना हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए तेजस्वी ने एलजेपी में टूट के लिए जेडीयू को ज़िम्मेदार ठहराया. तेजस्वी ने कहा कि हर कोई जानता है कि तोड़फोड़ का मास्टरमाइंड कौन है. तेजस्वी ने कहा कि एलजेपी को 2005 और 2010 में भी तोड़ने का प्रयास किया गया था, ऐसे में चिराग को तय करना है कि वे किसके साथ रहना चाहते हैं.''
तेजस्वी ने रामविलास पासवान और लालू प्रसाद के संबंधों का ज़िक्र करते हुए कहा कि 2010 में एलजेपी का जब एक भी विधायक और सांसद नहीं था तो भी आरजेडी ने उन्हें राज्यसभा सांसद बनाया था.
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