मुकेश अंबानी के घर की सुरक्षा मामले में गिरफ़्तार प्रदीप शर्मा कौन हैं?

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नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी एनआईए ने मुंबई पुलिस के पूर्व अधिकारी प्रदीप शर्मा को गिरफ़्तार कर लिया है.
भारत की राष्ट्रीय प्रसारण सेवा ने अपने ट्वीट में बताया है कि शर्मा को उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया की सुरक्षा में कथित सेंध और मनसुख हीरेन की मौत से जुड़े मामले में गिरफ़्तार किया गया है.
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समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ दोपहर में हुई गिरफ़्तारी के पहले एनआईए ने गुरुवार सुबह छह बजे प्रदीप शर्मा के मुंबई के अंधेरी इलाक़े स्थित घर पर छापे की कार्रवाई की थी. इसके पहले अप्रैल महीने में एनआईए ने उनसे लगातार दो दिन पूछताछ की थी.
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भारतीय जनता पार्टी इस मामले में लगातार महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी शिवसेना पर सवाल उठाती रही है. प्रदीप शर्मा के घर गुरुवार को छापे की कार्रवाई शुरू होने के बाद बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने शिव सेना पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
सोमैया ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया. इनमें उन्होंने कहा, " अभी मनसुख हीरेन हत्याकांड में प्रदीप शर्मा जो शिवसेना के उपनेता और उम्मीदवार हैं, उनके घर पर एनआईए की टीम पहुंची है. इसके पहले शिव सेना के प्रवक्ता सचिन वाझे गिरफ़्तार किए गए थे. "
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हालांकि शिव सेना सांसद संजय राउत ने इस मामले में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. राउत ने कहा कि उन्हें छापे के बारे में कोई जानकारी नहीं है.
क्या है मामला?
उद्योगपति मुकेश अंबानी का घर एंटिलिया मुंबई के पॉश पेडर रोड इलाक़े में है. इस साल फरवरी महीने के आखिरी हफ़्ते में अंबानी के घर के बाहर एक स्कॉर्पियो गाड़ी में जिलेटिन की छड़ मिली थी.
इसके कुछ दिन बाद स्कॉर्पियो के मालिक बताए गए मनसुख हीरेन का शव ठाणे से बरामद किया गया. लेकिन बाद में मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि कार के मालिक मनसुख नहीं थे. ये मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है.
इसे लेकर पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाझे समेत कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है.
इस मामले में जांच की शुरुआत महाराष्ट्र पुलिस ने की. बाद में जांच एटीएस को सौंपी गई और फिर एनआईए ने जांच का ज़िम्मा संभाल लिया.

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कौन हैं प्रदीप शर्मा ?
प्रदीप शर्मा महाराष्ट्र पुलिस के चर्चित अधिकारी रहे हैं. वो 'एऩकाउंटर स्पेशलिस्ट' के तौर पर पहचाने जाते थे और कई विवादों में भी घिरे रहेथे.
पुलिस सेवा से रिटायर होने के बाद प्रदीप शर्मा ने राजनीतिक पारी शुरू की. उन्होंने शिवसेना के टिकट पर नालासोपारा सीट से विधानसभा चुनाव भी लड़ा.
शर्मा का परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आगरा से जुड़ा था. उनके पिता उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र आए और धुले ज़िले में बसे. शर्मा के पिता अध्यापक थे.
प्रदीप शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश मे हुआ लेकिन उनका बचपन महाराष्ट्र में बीता. उन्होंने अपनी पढ़ाई भी धुले में पूरी की और उसके बाद महाराष्ट्र पुलिस से जुड़ गए.
पुलिस सेवा के प्रति अपने आकर्षक का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया था, " जब हम धुले में रहते थे तब वहां हमारे पड़ोस में एक इंस्पेक्टर रहते थे. उनका नाम पगार था. हम उन्हें देखते थे. वो वर्दी पहनकर बाइक पर सवार होते थे. ये कह सकते हैं कि मेरे पुलिस सेवा से जुड़ने की एक वजह वो थे."
महाराष्ट्र पुलिस का 1983 बैच काफी चर्चित रहा. इस बैच में प्रफुल्ल भोंसले, विजय सालस्कर, रविंद्र आंग्रे और असलम मोमिन शामिल थे. ये सभी 'एनकाउंट स्पेशलिस्ट' के रूप में चर्चित हुए. प्रदीप शर्मा भी उसी बैच से थे.
नासिक पुलिस ट्रेनिंग स्कूल से प्रशिक्षण लेने के बाद ये सभी अधिकारी 1984 में पुलिस सेवा का हिस्सा बने.
प्रदीप शर्मा की पहली तैनाती मुंबई के माहिम पुलिस स्टेशन में सब इंस्पेक्टर के तौर पर हुई. इसके बाद उनका तबादला स्पेशल ब्रांच में हो गया. इसके बाद उन्होंने कई दूसरे अहम पदों की ज़िम्मेदारी संभाली.

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विवादों से नाता
एक वक्त मीडिया में प्रदीप शर्मा और विजय सालस्कर के बीच हुए कथित विवाद की खूब चर्चा हुई थी. विजय सालस्कर की 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए हमले में मौत हो गई थी. शर्मा ने इस मामले में टीवी-9 मराठी को जानकारी दी थी.
प्रदीप शर्मा के मुताबिक, " विजय सालस्कर मेरे करीबी दोस्त थे. 1983 में पुलिस ट्रेनिंग के दौरान हम एक ही दस्ते में थे. ट्रेनिंग के दौरान सरनेम के पहले अक्षर के आधार पर दस्ते तैयार किए जाते हैं. उनका सरनेम सालस्कर और मेरा शर्मा है. हम कई साल तक साथ रहे. क्राइम ब्रांच में हमने साथ में काम किया. कई बड़े ऑपरेशन में हम साथ रहे."
उन्होंने इंटरव्यू में कहा, " मैं आज भी विजय सालस्कर को एक ऐसे अधिकारी के तौर पर याद करता हूं जिनका सूचना तंत्र सबसे व्यापक था. ये मेरे नेटवर्क से सौ गुना बड़ा था. मीडिया में जो कुछ आया, हमारे बीच वैसा कुछ नहीं था. हमारी तकरार सिर्फ़ ख़बर को लेकर थी"
प्रदीप शर्मा को साल 2009 में रामनारायण गुप्ता उर्फ़ लखन भैया की हत्या के मामले में गिरफ़्तार किया गया था. उनके साथ कुल 13 पुलिस अधिकारी गिरफ़्तार किए गए थे. हालांकि, ठाणे सेंट्रल जेल में चार साल बिताने के बाद साल 2013 में उन्हें रिहा कर दिया गया था.
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