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यूपी पंचायत चुनाव: अयोध्या, काशी, मथुरा में बीजेपी को बड़ा झटका - प्रेस रिव्यू
उत्तर प्रदेश में हुए पंचायत चुनाव के परिणाम आ चुके हैं और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को अयोध्या, काशी और मथुरा में बड़ा झटका लगा है.
राम की नगरी कही जाने वाली अयोध्या में सत्तारुढ़ बीजेपी को झटका लगा है.
अंग्रेज़ी समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, अयोध्या की 40 ज़िला पंचायत की सीटों में बीजेपी को सिर्फ़ 8 सीटें मिली हैं. वहीं, विपक्षी दल समाजवादी पार्टी का दावा है कि उसके समर्थन वाले 22 उम्मीदवारों ने ज़िला पंचायत की सीटें जीतने में सफलता पाई है. बहुजन समाज पार्टी का कहना है कि अयोध्या ज़िला पंचायत की उसने चार सीटें जीती हैं.
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी में भी बीजेपी के खाते में 40 में से केवल 8 सीटें आ सकीं. सपा को 14 और बीएसपी को 5 सीटें मिलीं.
वहीं मथुरा में मायावती की पार्टी बीएसपी को 12 और अजीत सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोक दल को 9 सीटें मिलीं. बीजेपी के खाते में 8 सीटें आईं. सपा को केवल एक सीट मिली.
बीजेपी का दावा है कि उसने पूरे राज्य में सफलता पाई है जबकि पार्टी की अयोध्या इकाई का कहना है कि उसने उम्मीद के मुताबिक़ सफलता नहीं पाई है.
बीजेपी के ज़िला अध्यक्ष दिवाकर सिंह ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "परिणाम निराशाजनक हैं. अयोध्या ज़िले की हर विधानसभा सीट पर बीजेपी विधायक होने के बावजूद हम 40 ज़िला पंचायत सीटों में से सिर्फ़ 8 जीतने में सफल हुए हैं."
बीजेपी के सोहावल उप-ज़िला में भी परिणाम बुरे रहे हैं. यह वही जगह है जहां पर सुप्रीम कोर्ट के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के 2019 के फ़ैसले के बाद मस्जिद के लिए पांच एकड़ ज़मीन दी गई है.
समाजवादी पार्टी का दावा है कि उसने यहां की चार ज़िला पंचायत सीटों में से तीन पर जीत दर्ज की है और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है.
परिणामों पर टिप्पणी करते हुए सपा नेता अवधेश प्रसाद का कहना है कि ग्रामीण इलाक़ों के लोगों की बीजेपी सरकार से बहुत शिकायतें हैं. उनका कहना था कि आवारा पशुओं की समस्या काफ़ी बड़ी है जिसके कारण कई किसानों ने आत्महत्या तक की है.
कोरोनाः यूपी में महिला ई-रिक्शा से घर लाई पति का शव
उत्तर प्रदेश के फ़िरोज़ाबाद में एक 65 वर्षीय महिला के पति की मृत्यु कोविड-19 के कारण हो गई थी जिसके बाद उन्हें अपने पति के शव को ई-रिक्शा से लाना पड़ा.
महिला के बेटे का आरोप है कि उनके पिता को अस्पताल में बेड और इलाज नहीं मिल सका और शव को घर पर लाने के लिए एंबुलेंस वाले अतिरिक्त पैसे मांग रहे थे.
अमर उजाला अख़बार के मुताबिक़, महिला ई-रिक्शा पर पीछे बैठी हुई थीं और उन्होंने अपने पति के शव को पकड़कर रखा था जबकि उनके हाथ भी बांध रखे थे ताकि शव कहीं गिरे न.
महिला का कहना है कि उनके पति कई दिनों से बीमार थे और रविवार को ज़्यादा बीमार होने के बाद वो उन्हें फ़िरोज़ाबाद के ट्रॉमा सेंटर लेकर गई थीं जहां उनकी मौत हो गई. इसके बाद उन्हें शव को इस तरह से लाना पड़ा
उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण के 2.85 लाख सक्रिय मामले हैं. मंगलवार को बीते 24 घंटों में 30,000 नए मामलों का पता चला था और 285 मौतें हुई थीं.
कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश के आगरा से एक दिल तोड़ने वाली तस्वीर सामने आई थी जिसमें एक महिला अपने कोविड पॉज़िटिव पति को ऑटोरिक्शा में सीपीआर दे रही थी. उनकी अस्पताल के दरवाज़े पर ही मौत हो गई थी.
आगरा में ही एक व्यक्ति को अपने पिता के शव को कार के ऊपर रखकर लाना पड़ा था क्योंकि कोई एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी.
'ऑक्सीजन की कमी से मरीज़ों की जा रही जान नरसंहार से कम नहीं'
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ऑक्सीजन की कमी से हुई कोविड-19 मरीज़ों की मौत से जुड़ी ख़बरों पर संज्ञान लेते हुए लखनऊ और मेरठ के ज़िलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इनकी 48 घंटों के भीतर तथ्यात्मक जांच करें.
हिंदुस्तान अख़बार के अनुसार, अदालत ने दोनों ज़िलाधिकारियों से कहा है कि वे मामले की अगली सुनवाई पर अपनी जांच रिपोर्ट पेश करें और अदालत में ऑनलाइन उपस्थित रहें.
साथ ही हाई कोर्ट ने सख़्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि इससे मरीज़ों की जान जा रही है और 'यह नरसंहार से कम नहीं है.'
जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अजित कुमार की पीठ ने राज्य में संक्रमण के प्रसार और क्वारंटीन सेंटर की स्थिति संबंधी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया.
अदालत ने कहा, ''हमें यह देखकर दुख हो रहा है कि अस्पतालों को ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं होने से कोविड मरीज़ों की जान जा रही है. यह एक आपराधिक कृत्य है और यह उन लोगों द्वारा नरसंहार से कम नहीं है जिन्हें तरल मेडिकल ऑक्सीजन की ख़रीद एवं आपूर्ति सुनिश्चित करने का काम सौंपा गया है."
5जी ट्रायल को सरकार ने दी मंज़ूरी, चीनी कंपनियां नहीं हैं शामिल
दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम सर्विस प्रोइवाडर्स (टीएसपी) कंपनियों को 5जी तकनीक के ट्रायल की अनुमति दे दी है.
द हिंदू अख़बार के मुताबिक़, इसके साथ ही ख़्वावे और ज़ेडटीई जैसी चीनी कंपनियां भारत में 5जी की रेस से बाहर हो गई हैं.
संचार प्रोद्यौगिकी मंत्रालय के बयान के अनुसार, "भारती एयरटेल लिमिटेड, रिलायंस जियो इन्फ़ोकॉम लिमिटेड, वोडाफ़ोन आइडिया लिमिटेड और एमटीएनल टीएसपी आवेदनकर्ता हैं. इन टीएसपी कंपनियों ने मूल उपकरण निर्माताओं और टेकनॉलोजी प्रोवाइडर्स एरिकसन, नोकिया, सैमसंग और सी-डॉट से क़रार किया है."
इसके साथ ही रिलायंस जियो इन्फ़ोकॉम लिमिटेड अपनी स्वदेशी तकनीक के साथ भी ट्रायल करेगी.
इन ट्रायल की अवधि छह महीने होगी जिसमें दो महीने उपकरणों की ख़रीद और उसको स्थापित करने के भी शामिल हैं.
टीकाकरण की दर गिरी, निजी अस्पतालों में वैक्सीन की कमी
वैक्सीन निर्माताओं से सप्लाई के लिए कोई क़रार न होने के कारण कोरोना वायरस के लिए रोज़ाना होने वाले टीकाकरण में गिरावट दर्ज की जा रही है.
अंग्रेज़ी अख़बार द टाइम्स ऑफ़ इंडिया लिखता है कि मैक्स हेल्थयेयर, फ़ॉर्टिस और अपोलो जैसे बड़े अस्पतालों ने ही वैक्सीन निर्माताओं से क़रार किया हुआ है लेकिन उनके पास भी सीमित स्टॉक ही है और वो अपने कुछ सेंटर्स पर ही टीकाकरण की सुविधा दे रहे हैं.
सोमवार और मंगलवार को निजी अस्पतालों के सिर्फ़ 2,000 केंद्रों ने ही टीकाकरण किया जबकि शनिवार-रविवार को 1,000 केंद्रों पर यह टीकाकरण हुआ.
1 मई से पहले 5,000 निजी केंद्रों पर टीकाकरण की सुविधा दी जा रही थी.
इससे साफ़ पता चलता है कि केंद्र की नई नीति के कारण निजी केंद्रों के पास वैक्सीन नहीं पहुंच पाई है क्योंकि राज्यों और निजी क्षेत्र को यह वैक्सीन ख़ुद ही निर्माताओं से ख़रीदनी होगी.
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