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असमः बीजेपी जीती, पर क्या मुख्यमंत्री का मामला उलझा - प्रेस रिव्यू
अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार अनुसार असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बड़ी जीत मिली है लेकिन इसके साथ ही उसके लिए परेशानी भी बढ़ गई है.
अख़बार के मुताबिक़ कि बीजेपी के सामने अब सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि वो मुख्यमंत्री के पद के लिए किसे चुने.
अख़बार लिखता है कि जिन राज्यों में बीजेपी को फिर से सत्ता में आने का भरोसा होता है वहां वो मुख्यमंत्री के पद के चेहरे का एलान पहले की कर देती है. लेकिन असम के मामले में पार्टी ने सर्बानंद सोनोवाल को मुख्यमंत्री पद के अपने उम्मीदवार के रूप में पेश नहीं किया था, बल्कि उसने कहा था कि संसदीय बोर्ड इस पर विचार करेगा.
लेकिन अब पार्टी के सामने मुश्किल ये है कि वो सोनोवाल को चुने जिन्होंने एक बार फिर जीत हासिल करने में मदद की या फिर हिमन्त बिस्व सरमा को जो हाल के सालों में प्रदेश में पार्टी नया और मज़बूत चेहरा बन कर उभरे हैं.
अख़बार लिखता है कि एक तरफ जहां हिमंत बिस्वा सरमा को पूर्वोत्तर भारत में पार्टी की रीढ़ की हड्डी और पूर्वोत्तर से जुड़े मामलों में गृह मंत्री अमित शाह का करीबी माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ अपनी साफ-सुथरी छवि के लिए जाने जाने वाले सोनोवाल असम में बीजेपी की पहली सरकार में मुख्यमंत्री रह चुके हैं.
वहीं द हिंदू में छपी एक ख़बर के अनुसार रविवार को विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस नेता और राज्यसभा सदस्य रिपुन बोरा ने असम प्रदेश कांग्रेस समिति अध्यक्ष के पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.
वो गोहपुर सीट से 29,294 वोटों से हार गए हैं. इस सीट से बीजेपी के उत्पल बोरा को जीत मिली है.
चुनाव के नतीजे आने के बाद उन्होंने अपना इस्तीफ़ा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गंधी को सौंप दिया. इस्तीफ़े में उन्होंने लिखा कि बीजेपी और आरएसएस की "विभाजनकारी और सांप्रदायिक राजनीति" से मुक़ाबला नहीं कर पाने के कारण वो दुखी हैं.
अख़बार लिखता है कि चुनावी नतीजों के आने से पहले रिपुन बोरा ने कहा था कि कांग्रेस महाजोट (गठबंधन) 126 सीटों में से 76 सीटों पर जीत हासिल करेगा. उन्होंने ये भी कहा था कि अगर महागठबंधन जीत जाती है तो उसकी तरफ से मुख्यमंत्री पद के लिए वो उचित उम्मीदवार होंगे.
फ्री कोरोना वैक्सीन मुहिम शुरू करे सरकार, 13 विपक्षी पार्टी के नेताओं की अपील
रविवार को 13 विपश्क्षा पार्टियों के नेताओं ने केंद्र सरकार से अपील की कि वो कोरोना संक्रमण के मामलों में अभूतपूर्व उछाल को देखते हुए वो पूरे देश में मुफ्त कोरोना वैक्सीन मुहिम शुरू करे.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक और ख़बर के अनुसार इन नेताओं ने एक साझा बयान जारी करते हुए सरकार से कहा कि देश के सभी अस्पताल बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित मरीज़ों के इलाज में जुटे हैं, ऐसे में सरकार अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति की व्यवस्था करे.
बयान में कहा गया है "पूरे देश में कोरोना महामारी की स्थिति बेकाबू हो चुकी है. हम केंद्र सरकार से अपील करते हैं कि वो सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को निर्बाध ऑक्सीजन सप्लाई सुनिश्चित करे."
"साथ ही ये अपील करते हैं कि सरकार जल्द से जल्द देश में मुफ्त में कोरोना वैक्सीन लगाने की मुहिम शुरू करे."
विपक्षी नेताओं ने कहा कि सरकार के पास टीकाकरण अभियान के लिए 35,000 करोड़ का बजट है, इसका इस्तेमाल कोरोना वैक्सीनेशन में किया जाना चाहिए.
इस बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, जेडीएस प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, एनसीपी नेता शरद पवार, शिव सेना प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, झारखंड मुक्ति मोर्चा और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन, बीएसपी प्रमुख मायावती, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फ़ारुख़ अबदुल्ला, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, कम्युनिस्ट पार्टी के डी राजा और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सीताराम येचुरी शामिल हैं.
18 से 44 साल की उम्र वालों के लिए चाहिए 122 करोड़ वैक्सीन
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर किए हलफनामे में बताया है कि 18 से 44 साल की उम्र के लागों के कोरोना टीकाकरण के लिए वैक्सीन की 122 करोड़ डोज़ की ज़रूरत होगी.
अख़बार जनसत्ता के अनुसार अख़बार लिखता है कि सरकार की टीकाकरण सरकार की पहली प्राथमिकता है और सरकार कोशिश कर रही है उपलब्ध संसाधनों की मदद से टीकों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए कम से कम वक्त में सौ फीसद लोगों को कोरोना का टीका दे.
दायर किए हलफनामे में सरकार ने मना कि देश में कोवैक्सीन और कोविशील्ड टीके सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं, इस कारण वैज्ञानिक तरीके से टीकाकरण को प्राथमिकता देना सरकार के लिए ज़रूरी हो गया है.
सरकार ने कहा कि रूस में बनी स्पुतनिक-V वैक्सीन के सीमित उपयोग के लिए सरकार पहले ही लाइसेंस दे चुकी है.
केंद्रस सरकार ने कहा कि अनुमान के अनुसार स्थानीय रूप से निर्मित स्पुतनिक-V वैक्सीन की उपलब्धता जुलाई से शुरू होगी. और उम्मीद है कि जुलाई में 40 लाख लोगों के लिए 80 लाख और अगस्त में 80 लाख लोगों के लिए 1 करोड़ 60 लाख वैक्सीन के डोज़ उपलब्ध बनाए जा सकेंगे.
हरियाणा में एक सप्ताह का लॉकडाउन
हरियाणा सरकार ने राज्य में 3 मई से 9 मई तक एक सप्ताह का संपूर्ण लॉकडाउन लगाने का फ़ैसला लिया है.
हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने कहा है कि कोरोना की चेन तोड़ने के लिए लॉकडाउन लगाने का फ़ैसला किया.
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी.
सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत लॉकडाउन से जुड़ा आदेश जारी कर दिया है. आदेश में कहा गया है. आदेश में कहा गया है कि लॉकडाउन के दौरान नागरिक सड़क पर या सार्वजनिक स्थान पर न निकलें और घरों में रहें.
इससे पहले सरकार ने नौ जिलों में शुक्रवार रात 10 बजे से लेकर सोमवार सवेरे 5 बजे तक सप्ताहांत लॉकडाउन लगाया था.
रविवार को हरियाणा में कोरोना संक्रमण के13,588 नए मामले दर्ज किए गए थे, वहीं कोरोना से प्रदेश में 125 मौतें हुई थीं.
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