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कोरोनाः चुनाव आयोग ने झाड़ा पल्ला, कहा गाइडलाइन लागू कराना हमारी ज़िम्मेदारी नहीं - प्रेस रिव्यू
निर्वाचन आयोग ने अपने एक बयान में कहा है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कोविड-19 के लिए जारी दिशा-निर्देश को लागू कराने की ज़िम्मेदारी राज्य के अधिकारियों की थी.
द हिंदू अख़बार की ख़बर के अनुसार, निर्वाचन आयोग का यह बयान मद्रास हाईकोर्ट की उस टिप्पणी के बाद आया है जिसमें कोविड-19 महामारी के दौरान चुनावी रैलियों को इजाज़त देने के लिए मद्रास हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना की थी.
सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस संजीब बनर्जी ने चुनाव आयोग की तरफ से पेश हुए वकील से कहा कि, "कोरोना की दूसरी लहर के लिए केवल और केवल चुनाव आयोग ज़िम्मेदार है."
चुनाव आयोग से नाराज़ चीफ़ जस्टिस संजीब बनर्जी ने यहां तक कहा था कि "चुनाव आयोग के अधिकारियों पर हत्या का आरोप लगाया जाना चाहिए."
जस्टिस बनर्जी ने कहा कि कोर्ट से स्पष्ट आदेश के बावजूद आयोग चुनाव प्रचार के दौरान फेसमास्क और सैनिटाइज़र के इस्तेमाल और सोशल डिस्टेन्सिंग के नियमों को पूरी तरह लागू नहीं कर पाया.
कोरोना संक्रमण से फिलहाल राहत नहीं, जुलाई के बाद ही कम होने शुरू होंगे मामले
दैनिक हिंदुस्तान में प्रकाशित ख़बर के अनुसार, कोरोना महामारी के कारण पैदा हुए हालात सुधरने और सबकुछ सामान्य होने में जुलाई तक का वक़्त लग सकता है.
आईआईटी कानपुर के प्रोफ़ेसर मनिंदर अग्रवाल के हवाले से अख़बार ने लिखा है कि कई राज्यों में जहां दूसरी लहर का पीक पहले सप्ताह में ही आ जाएगा और मध्य तक उसमें गिरावट आने लगेगी लेकिन स्थिति सामान्य होने में जुलाई तक का समय लग जाएगा.
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े देखें तो 12 राज्यों में संक्रमण पिछले पीक को पार कर चुका है. इसमें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, तमिलनाडु, बिहार और तेलंगाना, झारखंड हैं. जानकारों का कहना है कि इन राज्यों में जल्दी ही दूसरी लहर का पीक आ सकता है.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शवों के अंतिम संस्कार पर मांगा जवाब
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपनी एक टिप्पणी में कहा है कि कोविड-19 के कारण जान गंवाने वालों के शव घंटों तक नहीं रखे जा सकते हैं. इसके साथ ही अदालत ने महाराष्ट्र सरकार और बीएमसी से राज्य और मुंबई महानगर में श्मशानों की स्थिति के बारे में अदालत को सूचित करने का निर्देश भी दिया है.
जनसत्ता अख़बार की ख़बर के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और जस्टिस जीएस कुलकर्णी की पीठ ने कहा कि कई श्मशानों में शवों के अंतिम संस्कार के लिए लोगों को घंटों-घंटों का इंतज़ार करना पड़ रहा है.
अदालत ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार और अन्य नगर ईकाईयों को इस समस्या का तुरंत हल निकालने को कहा है. अदालत ने कहा अगर श्मशान में जगह नहीं है तो अस्पतालों से शव नहीं निकाले जाने चाहिए.
अदालत ने अपनी टिप्पणी में उस घटना का भी ज़िक्र किया जिसमें कोविड19 संक्रमण के कारण जान गंवाने वाले 22 लोगों को एक ही एंबुलेंस से श्मशान पहुंचाया गया.
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