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छत्तीसगढ़ में क्या कोरोना मरीज़ों को कोई परेशानी नहीं हो रही है?
- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से बीबीसी हिंदी के लिए
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग जैसे शहरों में आधी-आधी रात तक एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक धक्के खाते मरीज़ और उनके परिजन. राजधानी रायपुर के अस्पताल के बाहर दिन-दिन भर बेड की उम्मीद में थरथराते, कांपते-हांफते और एक-एक सांस के लिए तड़पते, दम तोड़ते कोरोना संक्रमितों की दिल दहला देने वाले दृश्य क्या झूठे हैं?
कम से कम राज्य सरकार का तो यही दावा है.
शुक्रवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में कोरोना से संबंधित एक याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दावा किया कि राज्य में सुविधाओं की कोई कमी नहीं है. राज्य के सरकारी अस्पतालों में 1,947 ऑक्सीजन बेड, 113 एचडीयू बेड, 143 आईसीयू बेड और 227 वेंटिलेटर बेड खाली पड़े हुए हैं.
सरकार की ओर से कहा गया कि शुक्रवार को भी रायपुर में 112 वेंटिलेटर खाली हैं और ऑक्सीजन सुविधा वाले 693 बेड खाली हैं.
जिस समय राज्य सरकार, बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में राज्य में उपलब्ध सुविधाओं का जिक्र कर रही थी, उसी समय बिलाईगढ़ के विवेक प्रकाश अपने भाई के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए राजधानी रायपुर में परेशान थे.
उनके बड़े भाई ओम प्रकाश चौहान रायपुर में राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर अस्पताल में लैब टेक्निशियन थे.
विवेक कहते हैं, "भाई कोरोना से बीमार पड़े तो सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए जगह नहीं मिली. एक निजी अस्पताल में इलाज करवाना पड़ा. फिर जब वेंटिलेटर की ज़रूरत पड़ी तो भाई को एक एंबुलेंस में ले कर इसी आंबेडकर अस्पताल में पहुंचे, जहां भाई काम करता था. लेकिन कई घंटे तक भाई को अस्पताल में कहीं जगह नहीं मिली और भाई की एंबुलेंस में ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई."
सुविधाओं की हक़ीकत
राज्य सरकार ने शुक्रवार को जब हाईकोर्ट में आंकड़े पेश किये, उस दिन रायपुर के आंबेडकर अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं से संबंधित दस्तावेज़ दूसरा ही हाल बता रहे हैं.
रात आठ बजे से दस बजे के बीच के जो दस्तावेज़ बीबीसी के पास उपलब्ध हैं, उसके अनुसार राज्य के इस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के पेइंग वार्ड-1 में कुल 11 ऑक्सीजन बेड उपलब्ध थे. इसमें से कोई भी खाली नहीं था. इसी तरह पेइंग वार्ड-2 में कुल 13 ऑक्सीजन बेड थे, जिनमें कोई भी बेड खाली नहीं था. पेइंग वार्ड 3 में 18 ऑक्सीजन सुविधा वाले बेड में कोई बेड खाली नहीं था.
आईसीयू 2 कैथलेब के सभी 18 बिस्तरों में मरीज थे. इस आईसीयू में दो वेंटिलेटर उपलब्ध हैं, लेकिन वो 'नॉन फंक्शनल' थे. कोविड आईसीयू के सभी 30 बिस्तरों में मरीज़ थे.
वार्ड 21 के सभी 10 ऑक्सीजन सुविधा वाले बिस्तरों में मरीज़ भर्ती थे. वार्ड 22 में ऑक्सीजन सुविधा वाले सभी 16 बिस्तर भरे हुए थे. इसी तरह वार्ड 23 के ऑक्सीजन सुविधा वाले सभी 17 बिस्तर में कोरोना के संक्रमित भर्ती थे. वार्ड 24 के ऑक्सीजन सुविधा वाले 16 बिस्तरों में से सभी 16 में मरीज़ भर्ती थे. वार्ड 25 के 10 ऑक्सीजन सुविधा वाले बिस्तरों में कोई भी जगह खाली नहीं थी.
दूसरे वार्ड और अस्पतालों के हाल भी लगभग ऐसे ही मिले. कई जगह मरीज़ों की लंबी कतार मिली तो कहीं साफ-साफ कहा गया कि अस्पताल में अभी मरीज़ों की 'वेटिंग' चल रही है.
यहां तक कि राज्य सरकार ने कोरोना अस्पतालों में बिस्तरों की उपलब्धता को लेकर जो वेबसाइट बनाई है, उसके अनुसार भी पूरे रायपुर के किसी भी सरकारी अस्पताल में एक भी वेंटिलेटर वाला बिस्तर उपलब्ध नहीं है.
सरकार का दावा गलतः विपक्ष
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक कहते हैं, "किसी अस्पताल में कोरोना मरीज़ को भर्ती कराना युद्ध लड़ने जैसा हो गया है. हाईकोर्ट में झूठे आंकड़े पेश करना और बात है और धरातल पर सच्चाई कुछ और है. कहीं भी ऑक्सीजन की सुविधा वाले बिस्तर उपलब्ध नहीं हैं. ऑक्सीजन की कमी के कारण मरीज़ तड़प-तड़प कर अस्पताल के सामने दम तोड़ रहे हैं. यही हाल वेंटिलेटर का है."
राज्य सरकार का दावा है कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में 514 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं.
लेकिन इस दावे की हक़ीक़त ये है कि कई ज़िलों में एक भी वेंटिलेटर चालू नहीं है.
राजधानी रायपुर से 128 किलोमीटर दूर कबीरधाम ज़िले में पिछले 24 घंटे में 444 नये कोरोना संक्रमित मिले हैं और 8 लोगों की मौत हुई है. पिछले कुछ दिनों में कबीरधाम में 119 से अधिक लोगों की मौत कोरोना से हो चुकी है. लेकिन इस पूरे ज़िले में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है.
ऐसा नहीं है कि सरकारी आंकड़ों में यहां वेंटिलेटर नहीं हैं. राज्य सरकार के आंकड़ों में कबीरधाम के ज़िला अस्पताल में 7 वेंटिलेटर बेड उपलब्ध हैं. यह सच भी है कि सरकार ने ज़िला अस्पताल को 7 वेंटिलेटर बेड उपलब्ध भी करवाये हैं लेकिन आज तक इन वेंटिलेटर बेड को चालू ही नहीं किया गया क्योंकि वेंटिलेटर बेड के लिए प्रशिक्षित एक भी स्टॉफ पूरे ज़िले में नहीं है.
ज़िले के कलक्टर रमेश शर्मा का कहना है कि उन्होंने रायपुर के चिकित्सा महाविद्यालय से अनुरोध किया है कि वे कबीरधाम ज़िले के स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दें. इसके अलावा अनुबंध के आधार पर वेंटिलेटर बेड के लिए प्रशिक्षित लोगों की नियुक्ति का विज्ञापन जारी के निर्देश भी ज़िले के चिकित्सा अधिकारी को दिया गया है.
साल 2018 बनाम वर्ष 2021
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का आरोप है कि सरकार ने कोरोना को गंभीरता से नहीं लिया. जब समय निकल चुका है तो अब दावे किये जा रहे हैं. राज्य में कोरोना पीड़ितों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भी भटकना पड़ रहा है.
रमन सिंह कहते हैं, "हिंदुस्तान का सबसे बड़ा स्टील प्लांट - भिलाई स्टील प्लांट, जिसके पास है, उसके बाद भी छत्तीसगढ़ के मरीज़ बिना ऑक्सीजन के मर रहे हैं. ये व्यवस्था की चूक है."
रमन सिंह का आरोप है कि कोरोना संक्रमितों को न ऑक्सीजन बेड मिल रहे हैं और ना ही वेंटिलेटर. इन्हीं मुद्दों को लेकर शनिवार को भाजपा नेताओं ने राज्य भर में अपने घरों के सामने धरना दिया.
लेकिन राज्य के स्वास्थ्य मंत्री का दावा है कि राज्य में व्यवस्थाएं पहले की तुलना में बेहतर हुई हैं.
उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा, "मैं यह नहीं कहूंगा कि हमारे पास सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं. अभी बहुत-सी कमियां हो सकती हैं लेकिन आपको देखना होगा कि दिसंबर 2018 में जब 15 सालों के बाद हमारी सरकार आई, तब सुविधाओं का क्या हाल था और इन सवा दो सालों में हम कहां खड़े हैं."
सिंहदेव बताते हैं कि 2018 में पूरे राज्य में 279 आईसीयू बिस्तर की सुविधाएं थीं. 14 ज़िलों में तो एक भी आईसीयू बिस्तर उपलब्ध नहीं था. आज की तारीख़ में राज्य में 729 आईसीयू बिस्तर की सुविधाएं उपलब्ध हैं. इस दौरान कोरोना के लिए 464 आईसीयू बिस्तर की सुविधाएं दी गईं. दिसंबर 2018 तक राज्य में एक भी एचडीयू बिस्तर की सुविधाएं नहीं थीं लेकिन नई सरकार के आने के बाद 477 और कोरोना के लिए 449 एचडीयू बिस्तर किए गये.
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों की मानें तो राज्य के अस्पतालों में दिसंबर 2018 तक 1,242 ऑक्सीजन सुविधा वाले बिस्तर उपलब्ध थे. लेकिन अब इनकी संख्या 7,042 और कोविड के लिए ऐसे 4,361 बिस्तरों की संख्या बढ़ाई गई है. अस्पतालों में 204 वेंटिलेटर सुविधा वाले बिस्तरों की संख्या आज 593 तक जा पहुंची है. कोरोना के लिए 526 वेंटिलेटर सुविधा वाले बिस्तर मुहैय्या कराये गये हैं.
टीएस सिंहदेव कहते हैं, "पिछले 15 सालों में अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या 15,001 थी, आज यह संख्या लगभग दोगुनी 29,667 तक पहुंच गई है. कोरोना के लिए 13,964 बिस्तर उपलब्ध कराये गये हैं. लेकिन मैं फिर कहूंगा, हम इन सुविधाओं का निरंतर विस्तार करना चाहते हैं ताकि स्थितियां और बेहतर हों."
लेकिन विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक का कहना है कि कोरोना की पहली लहर को देखते हुए जो तैयारी राज्य सरकार को करनी चाहिए थी, उसने उन पर ध्यान ही नहीं दिया. अगर स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होतीं तो राज्य कोरोना के मामले में देश में दूसरे नंबर पर नहीं पहुंचता.
कोरोना की प्राथमिकता पर सवाल
धरमलाल कौशिक का आरोप है कि जब राज्य सरकार को कोरोना पर ध्यान देना था, तब सरकार ने इसकी अनदेखी की. अब वह समय निकल चुका है.
धरमलाल कौशिक ने बीबीसी से कहा, "राज्य में कोरोना की स्थिति 1 मार्च से ही समझ में आने लगी थी. लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ को नहीं, असम को अपनी प्राथमिकता में रखा. उन्हें राज्य की सुध लेने की फुर्सत ही नहीं मिली. वे असम चुनाव में व्यस्त रहे."
असल में असम चुनाव में कांग्रेस पार्टी की कमान राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सौंपी गई थी और चुनाव के दौरान उनकी उपस्थिति राज्य में कम ही रही.
इस साल 22 फरवरी को छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र शुरु हुआ लेकिन 24 दिनों का बजट सत्र 12 दिन पहले, 10 मार्च को ही समाप्त कर दिया गया. इसके तीन दिन बाद ही मुख्यमंत्री असम में चुनाव प्रचार के लिए रवाना हो गये.
मार्च महीने में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ट्वीटर हैंडल से लगभग 215 ट्वीट और रिट्वीट किये गये हैं. इनमें से केवल 6 ट्वीट ऐसे हैं, जिनमें कोरोना का ज़िक्र है.
कोरोना से संबंधित पहले दो ट्वीट 8 मार्च के हैं, जिस दिन उन्होंने अपने दो मंत्रियों टीएस सिंहदेव और जय सिंह अग्रवाल के कोरोना ग्रस्त होने की सूचना देते हुए उन्हें स्वस्थ होने की शुभकामना दी है. इसके बाद 21 मार्च को एक ट्वीट में कोरोना के कारण राज्य के स्कूलों को बंद किए जाने की सूचना साझा की गई है.
इसी तरह 28 और 29 मार्च को होली की शुभकामना के साथ कोरोना को देखते हुए सुरक्षित होली मनाने की अपील के ट्वीट किये गये हैं. वहीं 28 मार्च को एक अन्य ट्वीट में कोरोना को लेकर एक बैठक किये जाने की सूचना साझा की गई.
लेकिन इस दौरान यह देखना दिलचस्प है कि लगभग 215 ट्वीट में से मुख्यमंत्री के 108 ट्वीट, असम के चुनाव प्रचार को लेकर हैं.
हालांकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस आरोप को हास्यास्पद बताते हैं कि उन्होंने छत्तीसगढ़ में कोरोना से लड़ने के बजाय असम के चुनाव को प्राथमिकता दी.
भूपेश बघेल का कहना है कि जब असम में चुनाव थे, उस समय मैं कुछ दिनो के लिए प्रचार के लिये ज़रूर गया था लेकिन उस समय छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण की दर काफ़ी कम थी.
भूपेश बघेल ने बीबीसी से कहा, "भारतीय जनता पार्टी को इस संबंध में मुझसे प्रश्न पूछने से पहले यह जवाब ज़रूर देना चाहिए कि जब अप्रैल माह में देश में कोरोना संक्रमण चरम पर है, तब देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री बंगाल चुनाव प्रचार में क्यों लगे रहे? पूरा देश इस समय प्रधानमंत्री से जितने सवाल कर रहा है, उनके जवाब तो ले लीजिए. हम तो सीमित संसाधनों में भी अपने राज्य में बेहतर से बेहतर करने की कोशिश कर रहे है."
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