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कानपुर: दवाइयों और ऑक्सीजन की क़िल्लत, श्मशान घाटों पर लंबा इंतज़ार
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
कानपुर में गुरुवार को सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कोरोना संक्रमण से मरने वालों की संख्या तीन थी जबकि एक स्थानीय अख़बार ने दावा किया कि उस दिन शहर के विभिन्न श्मशान घाटों पर 476 शव जले, जिनमें बड़ी संख्या में उन लोगों के शव थे जिनकी मौत कोरोना संक्रमण से हुई.
सरकारी आंकड़ों में अगले दिन यानी शुक्रवार को भी कोरोना संक्रमण से मृतकों की संख्या 6 बताई गई जबकि श्मशान घाटों की स्थिति यह है कि वहां रात दिन चिताएं जल रही हैं और ज़्यादातर मौतें कोरोना संक्रमण की वजह से बताई जा रही हैं.
कानपुर के अस्पतालों में वैसे ही कोरोना मरीज़ों के लिए जगह की किल्लत है जैसे राज्य के अन्य शहरों में और ऑक्सीजन के लिए वैसे ही हाहाकार मचा हुआ है जैसे पूरे देश में.
यहां तक कि होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों को भी दवाइयां और ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही हैं और लोग होम आइसोलेशन में भी मर रहे हैं.
क्या कहते हैं परिजन
अरमापुर इलाक़े में रहने वाले प्रवीण शुक्ल पिछले तीन दिन से अपनी बीमार मां को भर्ती कराने के लिए अस्पतालों के चक्कर लगा रहे थे.
उनकी मां की पॉज़िटिव कोविड रिपोर्ट 20 अप्रैल को आई थी. हालांकि टेस्ट कराने के बाद से ही वो होम आइसोलेशन में थीं लेकिन 21 अप्रैल से तबीयत ख़राब होने लगी तो परिजन अस्पताल में बेड तलाशने लगे.
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प्रवीण शुक्ल बताते हैं, "21 तारीख को ऑक्सीजन लेवल कम होने लगा तो हम लोगों ने डॉक्टरों से सलाह ली. डॉक्टरों ने भर्ती कराने को कहा. कम से कम एक दर्जन अस्पताल के हमने तीन दिन चक्कर लगाए. हैलट अस्पताल भी गए, लेकिन कहीं बेड नहीं मिला. तमाम ग्रुप्स में भी मेसेज दिया था लेकिन कहीं से इंतज़ाम नहीं हो पाया. आज सुबह मेरी माताजी का देहांत हो गया."
प्रवीण शुक्ल जिस वक़्त हमसे बात कर रहे थे, उस वक़्त भी एक अन्य संघर्ष में व्यस्त थे.
वो कहने लगे, "माफ़ी चाहता हूं. अभी आपसे ज़्यादा बात नहीं कर पाऊंगा क्योंकि दो घंटे से माता जी के शव को ले जाने के लिए हम एंबुलेंस बुलाने का प्रयास कर रहे हैं. अब तक नहीं मिल पाई."
प्रवीण शुक्ल इस तरह संघर्ष करने वाले अकेले नहीं हैं बल्कि पूरे कानपुर में लगभग 20 दिनों से ऐसे ही हालात बने हुए हैं.
ज़िला जज को नहीं मिला बेड, वीर अब्दुल हमीद के बेटे ने तोड़ा दम
कोरोना संक्रमण की रफ़्तार लगातार बढ़ रही है, संक्रमण से मौतों की संख्या बढ़ रही है और अस्पतालों में जगह की कमी के कारण मरीज़ भर्ती नहीं हो पा रहे हैं और यदि भर्ती हो भी रहे हैं तो उन्हें इस वक़्त की सबसे ज़रूरी चीज़ यानी ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है.
बुधवार को कानपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे कानपुर के कोरोना संक्रमित ज़िला जज को भी अस्पताल में जगह नहीं मिल पाई. उनके साथ कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अनिल मिश्र भी थे.
दोनों लोग अस्पताल में परेशान होते रहे लेकिन न तो कोई डॉक्टर और न ही अस्पताल का कोई अन्य कर्मचारी उनसे बात करने को तैयार हुआ.
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अस्पताल की अव्यवस्था और नियमों की धज्जियां उड़ाते देखकर सीएमओ डॉक्टर अनिल मिश्र ने पनकी थाने में अस्पताल के मालिक, डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराई है.
शुक्रवार को 1965 के भारत-पाक युद्ध के हीरो रहे परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद के 61 वर्षीय बेटे अली हसन की कानपुर के लाला लाजपत राय अस्पताल यानी हैलट अस्पताल में मौत हो गई.
परिजनों का आरोप है कि हसन अली की मौत अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते हुई. हसन अली के बेटे सलीम अली ने स्थानीय मीडिया को बताया कि उनके पिता पिछले कई दिनों से बीमार थे और उन्हें बुधवार को हैलट अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
सलीम अली के मुताबिक, "अस्पताल में एडमिट करने के बाद उन्हें ऑक्सीजन पर रखा गया लेकिन चार घंटे बाद उनके स्वास्थ्य को स्थिर बताते हुए ऑक्सीजन की सुविधा हटा ली गई. हम लोगों के अनुरोध करने के बावजूद उनका कोरोना टेस्ट नहीं कराया गया और आख़िरकार उनकी मौत हो गई."
अस्पताल ने चुप्पी साधी
हैलट अस्पताल के अधिकारी इस मामले में आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं लेकिन नाम न छापने की शर्त पर एक डॉक्टर कहते हैं, "ऑक्सीजन जब ख़त्म हो जा रही है तो कहां से आएगी? ऐसा कई मरीज़ों के साथ हो चुका है. यह मामला वीर अब्दुल हमीद से जुड़ा था लोगों को पता चल गया, अन्यथा इसी अस्पताल में कितने लोग ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ चुके हैं."
ऑक्सीजन की कमी से न सिर्फ़ कोविड मरीज़, बल्कि अन्य नॉन कोविड मरीज़ों को भी दिक़्क़त हो रही है.
शुक्लागंज की 78 वर्षीया भगवान देवी को सांस की समस्या बढ़ने के बाद उनके परिजन हैलट अस्पताल लेकर आए. परिजनों को ख़ुद ऑक्सीजन की व्यवस्था करने के लिए कहा गया. परिजन कई घंटे घूमते रहे, लेकिन ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल सका और आख़िरकार भगवान देवी की मौत हो गई.
कानपुर मंडल के आयुक्त राजशेखर कहते हैं कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर कोविड अस्पतालों में समय पर और ज़रूरत के हिसाब से ऑक्सीजन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव क़दम उठाए जा रहे हैं. बीबीसी से बातचीत में राजशेखर कहते हैं, "शासन की ओर से निर्देश हैं कि बढ़ती हुई ऑक्सीजन की मांग को देखते हुए चिह्नित अस्पतालों में ज़रूरत के हिसाब से ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं."
"ज़िला चिकित्सालय कानपुर में 500 लीटर प्रति मिनट क्षमता का ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट स्वीकृत किया गया है और उससे सम्बन्धित सभी जनरेटर और दूसरे उपकरण अस्पताल परिसर में पहुंच चुके हैं. 29 अप्रैल तक प्लांट शुरू हो जाएगा."
आयुक्त राजशेखर के मुताबिक़, इसके अलावा भी एक प्लांट लगाने की कोशिश की जा रही है जिसके बाद ऑक्सीजन की आपूर्ति ज़रूरत को पूरा कर सकेगी.
होम आइसोलेशन के मरीज़ भी कर रहे संघर्ष
कानपुर में स्थानीय पत्रकार प्रवीण मोहता कहते हैं कि न सिर्फ़ गंभीर मरीज़ और अस्पताल में भर्ती मरीज़ ही ऑक्सीजन और दवाइयों के लिए संघर्ष कर रहे हैं बल्कि होम आइसोलेशन में रह रहे मरीज़ों को भी इनकी कमी का सामना करना पड़ रहा है.
उनके मुताबिक़, बाज़ारों में तमाम दवाइयों और होम आइसोलेशन में काम आने वाले उपकरणों की भी कमी पड़ गई है.
कानपुर में मेडिकल उपकरणों के विक्रेता नवीन कुमार कहते हैं, "होम आइसोलेशन में ज़रूरी ऑक्सीजन किट लोगों को नहीं मिल पा रही है. घर में भी ऑक्सीजन लेने के लिए सिलिंडर के अलावा घड़ी, नॉब और रेगुलेटर की ज़रूरत होती है. ऑक्सीजन मास्क जो फ्लोमीटर से कनेक्ट होकर मरीज़ को लगाया जाता है."
"ये ज़्यादातर सामान या तो महाराष्ट्र या फिर दिल्ली से मंगाए जाते हैं और यहां का सारा स्टॉक अब ख़त्म हो गया है. मांग बढ़ गई है और उन जगहों से चीज़ें मिल नहीं रही हैं. विटामिन सी तक की किल्लत है."
श्मशान में 24 घंटे जलती चिंताएं
कोरोना संक्रमण की भयावहता का मंज़र अस्पतालों के अलावा श्मशान घाटों पर भी देखा जा सकता है.
कोरोना संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार भगवत घाट और भैरव घाट पर किया जा रहा है और इन दोनों जगहों पर हालात ये हैं कि देर रात तक शव जलते रहते हैं.
भैरोघाट पर शवदाह गृह के एक कर्मचारी सुनील बताते हैं कि गुरुवार को यहां 60 से भी ज़्यादा शवों का दाह संस्कार किया गया और ज़्यादातर कोरोना संक्रमित थे.
मौतों के आंकड़े और श्मशान घाटों पर हो रहे अंतिम संस्कार के बारे में ज़िला प्रशासन का कोई भी अधिकारी बात करने को तैयार नहीं है.
इन सबके बीच कानपुर में कोविड टेस्ट भी काफ़ी कम हो गए हैं. ख़ुद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अनिल मिश्र कहते हैं, "टेस्ट की संख्या यहां दस हज़ार के ऊपर हो गई थी लेकिन मुख्यमंत्री के साथ वीसी में यह तय हुआ कि यह छह हज़ार तक ही रहना चाहिए. तीन हज़ार आरटीपीसीआर और तीन हज़ार एंटीजन टेस्ट हो रहे हैं. इसकी वजह से रिपोर्ट में जो देरी हो रही थी, वो अब नहीं होगी."
कानपुर यूपी के सर्वाधिक संक्रमित पांच ज़िलों में से एक है. शुक्रवार को यहां रिकॉर्ड 2250 नए संक्रमित मिले जबकि मरने वालों की संख्या छह बताई गई.
हालांकि मरने वालों की संख्या इससे कहीं ज़्यादा बताई जा रही है. संक्रमित मरीज़ों की मौतें कोविड अस्पतालों के अलावा होम आइसोलेशन में भी हो रही हैं जो कई बार सरकरी आंकड़ों में दर्ज भी नहीं हो पा रही हैं.
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