आर्थिक सुधार के मोर्चे पर चीन को पीछे छोड़ सकता है भारत, आईएमएफ़ का अनुमान- प्रेस रिव्यू

आईएमएफ़ यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने आर्थिक विकास दर को लेकर जनवरी के अपने अनुमानों में संशोधन किया है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस, द हिंदू, इकॉनमिक टाइम्स, द मिंट समेत कई अख़बारों ने इस ख़बर को प्रमुखता से अपने पहले पन्ने पर जगह दी है.

आईएमएफ़ ने जनवरी में 2021-22 के दरम्यान भारतीय अर्थव्यवस्था के 7.5 फ़ीसद की दर से आगे बढ़ने का अनुमान लगाया था.

संस्था ने अब 2021-22 के लिए अपने सालाना वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत की आर्थिक वृद्धि दर बढ़कर 12.5 फ़ीसद पर पहुँचने का अनुमान लगाया है.

यह न केवल जनवरी के अनुमानों से काफी बेहतर है बल्कि चीन की तुलना में भी कहीं ज़्यादा है. 2021-22 के दरम्यान इसने चीन की अनुमानित आर्थिक वृद्धि दर को 8.6 फ़ीसद पर रखा है.

जबकि दुनिया की शीर्ष पाँच अर्थव्यवस्थाओं में चीन ही एकमात्र ऐसी आर्थिक शक्ति रही है जिसकी वृद्धि दर कोरोना संक्रमण के दौर में 2020 के दरम्यान भी सकारात्मक रही है.

गीता गोपीनाथ ने क्या सलाह दी?

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा, ''हम अनुमान लगा रहे हैं कि 2021 और 2022 में ग्लोबल इकोनॉमी में अच्छी रिकवरी होगी और ग्लोबल ग्रोथ पहले के अनुमान से बेहतर होगी. ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ 2021 में 6 फ़ीसद और 2022 में 4.4 फ़ीसद रहने की उम्मीद है."

2020 में वैश्विक अर्थव्यवस्था में वृद्धि 3.3 फ़ीसद देखने को मिला था.

गोपीनाथ ने साथ ही वायरस के बढ़ते मामलों का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा है कि महामारी अब तक पूरी तरह से ख़त्म नहीं हुआ है. कई देशों में कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है.

वैक्सीनेशन की कोशिशों की वजह से इस वर्ष के दूसरी छमाही में अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत रिकवरी की ओर ले जाएंगी. दुनिया के कई देशों में इस दौरान अर्थव्यवस्था में रिकवरी देखी जाएगी.

महामारी के एक साल बाद दुनिया के सामने सबसे बड़ा ख़तरा क्या है? इस पर गोपीनाथ ने कहा कोरोना वायरस महामारी अब भी सबसे बड़ा ख़तरा है. अगर इस वायरस के नए वैरिएंट पर वैक्सीन का असर नहीं होता है तो अर्थव्यवस्था में एक बार फिर तेज़ गिरावट हो सकती है. लेकिन दूसरी ओर वैक्सीन असरकारी रहती है और तेज़ी से इसे लोगों तक पहुँचाया जाता है तो इससे अर्थव्यवस्था के मिजाज में सकारात्मक तेज़ी देखने को मिलेगी.

दूसरा जो सबसे बड़ा जोखिम है वो है वित्तीय स्थिति. हमने तेज़ गति से रिकवरी और ब्याज़ दरों को बढ़ते देखा है. अगर ब्याज़ दर और ऊपर की ओर जाते हैं तो इसका विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर नकारात्मक असर पड़ेगा.

नीति निर्माताओं के लिए क्या सुझाव है. इस पर गोपीनाथ ने कहा कि आर्थिक संकट के समय प्रोत्साहन देने वाली नीतियों को जारी रखना पड़ेगा. कई देश बहुत कर्ज़ में डूबे हैं लिहाजा उन्हें बेहतर लक्ष्य के साथ इन प्रोत्साहनों को देना होगा. यहाँ उन्हें अपने देश की आर्थिक स्थिति को मद्देनज़र रखना होगा. उन्हें इस बात का ख़याल रखना होगा कि वो रिकवरी के किस दौर में हैं.

इस दौरान गोपीनाथ ने यह भी कहा कि मॉनिटरी पॉलिसी अकॉमडेटिव (महंगाई की सामान्य दर) रहनी चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा कि फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के लिए सरकार को तेज़ी से कदम उठाने की ज़रूरत होगी.

कोरोना वायरस को लेकर एक बार फिर पाबंदियों का दौर शुरू

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के विभिन्न राज्यों ने कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के मद्देनज़र पाबंदियों को एक बार फिर अमल में लाना शुरू कर दिया है.

देश के लगभग सभी अख़बारों में इस ख़बर को भी प्रमुखता दी गई है. मंगलवार से दिल्ली में 30 अप्रैल तक के लिए रात्रि कर्फ़्यू लगा दिया गया है तो पंजाब में भी 10 अप्रैल तक रात्रि कर्फ़्यू और अन्य प्रतिबंधों की वापसी हुई है. इसी प्रकार झारखंड में स्कूल, जिम, पार्क को बंद करने का आदेश दिया गया है और पाबंदियों की एक फेहरिस्त जारी की गई है जो 30 अप्रैल तक के लिए लागू रहेंगी. उधर महाराष्ट्र में सोमवार से ही रात्रि कर्फ़्यू लगाया जा चुका है.

दूसरी तरफ़ द हिंदू अख़बार के मुताबिक इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार से रात्रि कर्फ़्यू लगाने की संभावना को तलाशने के लिए कहा है. चीफ़ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह निर्देश जारी किया.

मंगलवार को ही केंद्र सरकार ने कहा कि संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए अगले चार हफ़्ते बेहद अहम साबित होंगे.

नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने प्रेस वार्ता में कहा कि देश में महामारी की स्थिति और ख़राब हुई है. उन्होंने कहा कि इससे बचाव के लिए नियमों का सख्ती से पालन करना होगा, लड़ने के तरीके वही हैं जो पहले से बताए गए हैं.

उन्होंने कहा कि दूसरी लहर को काबू में लाने के लिए जनभागीदारी महत्वपूर्ण है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगले चार हफ़्ते बहुत अहम रहने वाले हैं, इस दौरान पूरे देश को एकजुट होकर इस महामारी से लड़ने के प्रयास करने होंगे.

इस बीच 43 लाख से अधिक वैक्सीन देकर जहाँ एक दिन में रिकॉर्ड लोगों को वैक्सीनेशन देने का आंकड़ा पाया गया वहीं मंगलवार को 1,13,940 नए मामलों के साथ बीते तीन दिनों में दूसरी बार संक्रमण के नए मामलों ने भी एक लाख के आंकड़े को पार किया.

इसमें सर्वाधिक 55,469 नए मामले महाराष्ट्र में दर्ज़ किए गए. इसके बाद छत्तीसगढ़ (9,927), कर्नाटक (6,150), उत्तर प्रदेश (5,928), दिल्ली में (5,100), मध्य प्रदेश (3,722), तमिलनाडु (3,645), केरल (3,502), गुजरात (2,280), पंजाब (2,924), राजस्थान (2,236), हरियाणा (2,099) पश्चिम बंगाल (2,058), आंध्र प्रदेश (1,941), तेलंगाना (1,498), बिहार (1,080), उत्तराखंड (791), ओडिशा (588), जम्मू-कश्मीर (561), हिमाचल प्रदेश (428), गोवा (387), चंडीगढ़ (319), पुदुचेरी (237) और असम में (70) नए मामले दर्ज़ किए गए हैं.

मोइन पर तस्लीमा नसरीन के ट्वीट से क्यों भड़के जोफ़्रा आर्चर?

मंगलवार को इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ जोफ़्रा आर्चर ने बांग्लादेश की लेखिका तस्लीमा नसरीन की एक ट्वीट पर जो प्रतिक्रिया दी उसे द हिंदू अख़बार ने अपने स्पोर्ट्स के पन्ने पर जगह दी है.

बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने अपनी एक ट्वीट में मोइन अली पर आपत्तिजनक टिप्पणी की. उन्होंने लिखा कि अगर मोइन इंग्लैंड के लिए क्रिकेट नहीं खेल रहे होते तो सीरिया जाकर इस्लामिक स्टेट के साथ हो गए होते.

तस्लीमा नसरीन के इसी ट्वीट पर जोफ़्रा आर्चर ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने ट्विटर पर तसलीमा नसरीन को लिखा, "क्या आप ठीक हैं? मुझे तो नहीं लगता कि आप ठीक हैं?"

जोफ़्रा के साथ साथ कई अन्य लोगों ने भी बांग्लादेश की इस लेखिका के ट्वीट की आलोचना की तो तस्लीमा ने एक और ट्वीट किया. इस बार उन्होंने लिखा, "नफ़रत करने वालों को पता होना चाहिए कि मोइन पर किया गया ट्वीट एक व्यंग्य था. लेकिन उन्होंने मुझे अपमानित करने के लिए इसे एक मुद्दा बना लिया क्योंकि मैं मुस्लिम समाज को धर्मनिरपेक्ष बनाने की कोशिश करती हूँ और इस्लामिक कट्टरता का विरोध करती हूँ. मानवता का यह सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि महिला समर्थक वामपंथी, महिला विरोधी इस्लामिक रूढ़िवाद का समर्थन करते हैं."

जोफ़्रा ने इस ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा, "व्यंग्य? इस पर कोई नहीं हंस रहा, आप भी नहीं. आप कम से कम यह कर सकती हैं कि इस ट्वीट को डिलीट कर दें."

इसके बाद तस्लीमा ने अपने पहले ट्वीट को डिलीट कर दिया.

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