असम चुनाव: कितनी पार्टियां उतर रही हैं सियासी मैदान में

2021 में अन्य राज्यों के साथ-साथ पूर्वोत्तर के सबसे बड़े राज्य असम में भी विधानसभा चुनाव होने हैं. शनिवार 27 मार्च को चुनाव के पहले दौर में असम में 47 सीटों पर मतदान होने वाला है.

असम में मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 31 मई को ख़त्म होने वाला है और उस तारीख़ तक पूर्वोत्तर राज्य में चुनाव की प्रक्रिया को पूरा करना होगा.

असम में 27 मार्च, 1 अप्रैल और 6 अप्रैल को तीन चरणों में मतदान होना है. चुनाव के नतीजे 2 मई को जारी किए जाएंगे. यहां 126 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए चुनाव होना है. इनमें से आठ अनुसूचित जाति और 16 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं.

पहले चरण में असम में 12 जिलों की 47 विधानसभा क्षेत्र में मतदान कराए जाने हैं. ये जिले हैं - सोनितपुर, बिस्वनाथ, नौगांव, गोलाघाट, जोरहाट, माजुली, शिवसागर, चराईदेव, लखीमपुर, धेमाजी, डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया.

इन 47 सीटों में से 39 पर बीजेपी ने अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं जबकि 10 सीटों पर उसकी सहयोगी असम गण परिषद के उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं.

वहीं कांग्रेस ने 43 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं जबकि उसकी सहयोगी एआईयूडीएफ़, आरजेडी, आंचलिक गण मोर्चा (निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर) और सीपीआई एमएल ने एक-एक सीट पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं.

41 सीटों पर असम जातीय परिषद चुनाव लड़ रही है जबकि राएजोर दल ने 19 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन देने का फ़ैसला किया है.

पहले चरण में जिन सीटों पर होगी नज़र

माना जा रहा है पहले चरण में माजुली की सीट बेहद महत्पूर्ण होगी जहां से बीजेपी नेता और मौजूदा मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनावाल चुनाव लड़ रहे हैं. उनके ख़िलाफ कांग्रेस ने राजीब लोचन पेगु को उतारा है.

2016 में इस सीट पर सर्बानंद सोनावाल को जीत हासिल हुई थी. लेकिन इससे पहले 2001, 2006 और 2011 में ये सीट कांग्रेस ने राजीब लोचन पेगु के खाते में गई थी.

जोरहाट सीट पर भी मुक़ाबला बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद की जा रही है. यहां से असम विधानसभा के स्पीकर और बीजेपी नेता हितेंद्र नाथ गोस्वामी चुनावी मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस की तरफ से उन्हें टक्कर दे रहे हैं, राणा गोस्वामी.

हितेंद्र नाथ गोस्वामी इस सीट से साल 1991, 1996 और 2001 में विधायक चुने गए थे. हालांकि उस वक्त वो असम गण परिषद में थे. इसके बाद 2006 और 2011 में ये सीट कांग्रेस के राणा गोस्वामी के खाते में गई थी. बीते विधानसभा चुनावों में एक बार फिर हितेंद्र नाथ गोस्वामी इस सीट से जीते, लेकिन इस बार उन्होंने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था.

दिलचस्प मुक़ाबला शिवसागर के अमिगुरी विधानसभा भेत्र में भी देखने को मिल सकता है. साल 1991 से इस सीट पर या तो कांग्रेस के अंजन दत्ता या फिर असम गण परिषद के प्रदीप हज़ारिका का कब्ज़ा रहा है. बीते चुनावों में यहां से प्रदीप हज़ारिका को जीत मिली थी. इस बार कांग्रेस ने उनके ख़िलाफ़ अंजन दत्ता की बेटी अंकिता दत्ता को मैदान में उतारा है.

गोलाघाट सीट पर बीते चार चुनावों में कांग्रेस की अजंता नियोग को जीत मिलती रही है. लेकिन 2020 दिसंबर में कांग्रेस का दामन छोड़ अजंता नियोग बीजेपी में शामिल हो गई थी. इस बार वो गोलाघाट से बीजेपी के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रही है.

कौन-सी पार्टियां मैदान में हैं?

बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन में क्षेत्रीय असम गण परिषद (एजीपी) और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) शामिल है.

कांग्रेस पार्टी के महागठबंधन में मुस्लिम मतदाताओं की पार्टी के तौर पर उभरी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ़), बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (बीपीएफ़), आंचलिक गण मोर्चा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम) शामिल हैं.

बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (बीपीएफ़) हाल ही में बीजेपी पर साझेदारों के साथ सही बर्ताव नहीं करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस के पाले में चली गई है.

वहीं, इस चुनाव में तीसरी शक्ति के तौर पर रायजोर दल (आरडी) और असम जातीय परिषद (एजेपी) का गठबंधन मैदान में है. ये दोनों पार्टियां 2019 के नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध प्रदर्शन के दौरान उभरी हैं.

असम में कितने वोटर हैं?

चुनाव आयोग के मुताबिक़, 2021 के असम विधान सभा चुनाव के लिए इस बार 2,31,86,362 मतदाता वोट करेंगे. इनमें से 1,17,42,661 पुरुष और 1,14,43,259 महिला और 442 थर्ड जेंडर मतदाता हैं. कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए इस बार चुनाव आयोग ने मतदान का समय एक घंटा बढ़ा दिया है.

असम में कितने चरण में चुनाव होगा?

असम में तीन चरणों में 27 मार्च, एक अप्रैल और छह अप्रैल को मतदान होना है. इस साल असम में कुल 33,530 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं. जो 2016 के चुनाव से 34.71 बढ़ाए गए हैं.

चुनाव में जीत कैसे तय होगी?

असम में सरकार बनाने के लिए कुल 126 सीटों की आधी से एक ज़्यादा यानी 64 सीटों की ज़रूरत होगी. असम विधान सभा चुनाव में जीत का जादुई आंकड़ा है 64.

चुनाव के प्रमुख मुद्दे क्या हैं?

असम के चुनाव में एनआरसी-सीएए प्रमुख मुद्दा है. कहा जा रहा है कि असम चुनाव में बीजेपी हिंदुत्व पर फ़ोकस करने के साथ-साथ विकासवादी राजनीति का दावा भी कर रही है जबकि उसके सामने दोनों गठबंधन नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध पर चुनाव लड़ रहे हैं.

दूसरा मुद्दा है, ज़मीन के पट्टे का. कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में दावा किया है कि उसकी सरकार बनने पर सरकारी स्वामित्व वाली ज़मीन के भूमिहीनों को 'ज़मीन का पट्टा' दिया जाएगा.

इससे पहले जनवरी में असम पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक लाख से ज़्यादा लोगों को भूमि आवंटन प्रमाण पत्र दिए थे. उन्होंने कहा था कि पिछली सरकारों ने भूमिहीनों को ज़मीन देने में कोई रुचि नहीं दिखाई. उन्होंने दावा किया कि बीजेपी सरकार में सवा दो लाख परिवारों को ज़मीन के पट्टे दिए गए और अब एक लाख परिवार और जुड़ गए हैं.

मज़दूरों की दिहाड़ी का मुद्दा भी असम चुनाव में प्रमुख बना हुआ है. वहां चाय मज़दूरों को क़रीब 167 रुपये दिहाड़ी मिलती है और वो आधारभूत सुविधाएं ना मिलने की भी बात करते हैं. जिसे बढ़ाने की मांग उठती रही है.

देश के अन्य कई राज्यों में काम करने वाले चाय मज़दूरों की तुलना में भी असम के चाय श्रमिकों की दिहाड़ी सबसे कम है.

असम की एक जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चाय मज़दूरों की सुविधाओं को बढ़ाने और उनके जीवन को आसान बनाने की बात कही थी. वहीं केंद्र सरकार ने इस बार देश के बजट में चाय बागानों में काम करने वाले मज़दूरों के लिए एक हज़ार करोड़ रुपये की विशेष योजना की घोषणा की है.

वहीं कांग्रेस ने घोषणापत्र में दावा किया है कि वो जीती तो चाय मज़दूरों की दैनिक मज़दूरी को बढ़ाकर 365 रुपये कर देगी.

असम चुनाव में महंगाई और रोज़गार के मुद्दे की गूंज भी सुनाई दे रही है.

असम के पिछले चुनाव में क्या हुआ था?

असम विधान सभा के लिए पिछली बार 2016 में चुनाव हुआ था. इसमें बीजेपी को 60, कांग्रेस को 26, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट को 13, असम गण परिषद को 14, बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट को 12 और निर्दलीय को एक सीट मिली थी.

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