योगी सरकार का दावा, यूपी में कम हुए अपराध पर क्या सुरक्षित हैं महिलाएं?

    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

पांच मार्च को गोरखपुर में एक कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कह रहे थे कि सरकार ने संगठित अपराध को पूरी तरह ख़त्म कर दिया है और यदि कहीं भी कोई अपराधी समाज के सुरक्षित माहौल में बाधा डालता है तो उसको कुचलने के लिए प्रशासन को खुली छूट दी गई है.

इससे तीन दिन पहले यानी दो मार्च की रात को गोरखपुर में ही घर लौट रही एक युवती से कुछ लोगों ने गैंगरेप किया.

युवती की शिकायत के बावजूद पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. रेप का वीडियो वायरल हो गया तब बड़े अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद तीन मार्च को एफ़आईआर दर्ज हुई.

पिछले हफ़्ते कानपुर के सजेती में नाबालिग लड़की से कथित गैंगरेप के बाद पीड़ित लड़की के पिता की उस वक़्त एक ट्रक से कुचलकर मौत हो गई जब वो अस्पताल में मौजूद अपनी बेटी को देखने के लिए जा रहे थे.

उस वक़्त अस्पताल में बेटी की मेडिकल जांच हो रही थी. पीड़ित लड़की के परिजनों का आरोप है कि पिता की मौत दुर्घटना नहीं बल्कि सुनियोजित षडयंत्र है.

सरकार का मिशन शक्ति अभियान

तीन दिन पहले ही प्रयागराज में बीजेपी नेता और उनके भाई पर गैंगरेप का आरोप लगाने वाली एक युवती के भाई की पुणे में संदिग्ध मौत हो गई.

पीड़ित लड़की का आरोप है कि उसके भाई की हत्या की गई है क्योंकि अभियुक्तों ने कुछ दिन पहले ही धमकी दी थी कि यदि ज़मानत अर्ज़ी का विरोध किया तो भाई की हत्या करा दी जाएगी.

बीजेपी नेता और उनके भाई इस मामले में अभी जेल में हैं. यानी पिछले एक हफ़्ते की ही बात करें तो महिलाओं के साथ रेप और हत्या जैसी क़रीब एक दर्जन घटनाएं सामने आ चुकी हैं.

यह स्थिति तब है जबकि उत्तर प्रदेश में महिलाओं के साथ होने वाले अपराध पर लगाम लगाने की यूपी सरकार तमाम कोशिशें कर रही है और अपराध कम होने का दावा भी कर रही है.

यूपी में पिछले साल 17 अक्तूबर को राज्य सरकार ने महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के मक़सद से मिशन शक्ति अभियान की शुरुआत की थी.

ज़मीनी सच्चाई

शारदीय नवरात्रि से लेकर बासंतिक नवरात्रि तक महिला सुरक्षा को लेकर जागरूकता के साथ-साथ महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले अपराध को रोकने के लिए भी तमाम क़दम उठाने का लक्ष्य रखा गया था.

अभियान के छह महीने पूरे होने में अब महज़ एक महीना बचा है और सरकार इसकी सफलता का दावा भी कर रही है लेकिन ज़मीनी सच्चाई इससे अलग है.

महिलाओं के साथ न सिर्फ़ रेप और हत्या की कई घटनाएं हुई हैं बल्कि ज़्यादातर मामलों में यह बात भी सामने आई है कि शुरुआती दौर में पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज करने में हीला-हवाली की.

कानपुर में रेप पीड़ित नाबालिग लड़की के पिता की मौत के बाद परिजनों ने ये आरोप भी लगाए हैं कि घटना से एक दिन पहले लड़की के पिता से लड़की के सामने ही जिस तरह से कथित तौर पर अपमानजनक तरीक़े से पूछताछ हुई, उससे भी पिता आहत थे.

पुलिस ने इस मामले में मुख्य अभियुक्त समेत चार लोगों को गिरफ़्तार किया है और पीड़ित लड़की के पिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में दो पुलिस उप निरीक्षकों और एक सिपाही को गुरुवार को निलंबित कर दिया गया.

इस मामले में मुख्य अभियुक्त पीड़ित लड़की के ही गांव का रहने वाला है और उसके पिता पुलिस विभाग में दारोगा हैं.

मुख्य अभियुक्त के पिता और उप निरीक्षक देवेंद्र यादव को भी निलंबित कर दिया गया है.

देवेंद्र यादव को जालौन जिले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे के समय वीआईपी ड्यूटी पर भेजा गया था और उसके बाद से ही वह लापता हैं.

राज्य के अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी कहते हैं कि मिशन शक्ति अभियान के दौरान अब तक क़रीब साढ़े तीन हज़ार अपराधियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हुई है.

अवनीश अवस्थी के मुताबिक, "मिशन शक्ति अभि‍यान के दौरान 17 अक्तूबर 2020 से 3 मार्च 2021 तक राज्य में सात अपराधियों को फांसी के अलावा महिला और बाल अपराध के 435 अभियुक्तों को आजीवन कारावास, 394 को 10 वर्ष से अधिक कठोर कारावास तथा 1108 अभियुक्तों को इससे कम की सज़ा कराई गई. इसके अलावा 1,503 असामाजिक तत्वों को को जिलाबदर भी कराया जा चुका है."

अपराध की घटनाओं मे कमी आई

लेकिन राज्य सरकार की इतनी सक्रियता और ताबड़तोड़ कार्रवाइयों के बावजूद अपराध की घटनाओं में किसी तरह की कोई कमी नहीं दिख रही है.

अपराध भी जघन्य तरीक़े से हो रहे हैं. यानी अपराधियों में कोई ख़ौफ़ हो, यह भी नहीं दिख रहा है. पिछले एक हफ़्ते की ही बात करें तो कानपुर की घटना के अलावा उन्नाव में स्कूल की एक छात्रा से स्कूल टीचर ने ही रेप किया.

दो दिन पहले ही फ़तेहपुर और चित्रकूट में महिलाओं के अधजले शव मिले हैं. आशंका जताई जा रही है कि इन्हें हत्या के बाद फेंक दिया गया होगा.

पीलीभीत में बस के ड्राइवर ने एक दलित महिला से पिछले साल दिसंबर में रेप किया था. पीड़ित महिला पुलिस थाने का चक्कर लगाती रही लेकिन एफ़आईआर नहीं लिखी गई. रविवार को पुलिस अधीक्षक के कहने पर एफ़आईआर दर्ज की गई.

बलिया में एक मठ के महंत और उनके दो शिष्यों पर एक नाबालिग लड़की ने पिछले कई साल दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है.

लगातार शिकायतों के बाद पुलिस ने कोई एफ़आईआर नहीं दर्ज की. बाद में कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने 3 जनवरी 2021 को पॉक्सो एक्ट के तहत एफ़आईआर दर्ज की गई लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी अभियुक्तों की गिरफ़्तारी नहीं हो सकी है.

महिला दिवस के मौक़े पर सरकार का फ़ैसला

ये सभी घटनाएं तब हो रही थीं जब राज्य में मिशन शक्ति अभियान के तहत कई क़दम उठाए जा रहे थे और सरकार इसके दूसरे चरण की तैयारी कर रही थी.

महिला दिवस के मौक़े पर सरकार ने फ़ैसला किया है कि महिला अपराधों की विवेचना में तेजी लाने के लिए हर ज़िले में रिपोर्टिंग पुलिस चौकी खोली जाएगी जो ज़िले के एडिशनल पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में काम करेगी.

हालांकि इन घटनाओं के बावजूद राज्य सरकार का दावा है कि राज्य में अपराध कम हुए हैं. विधानसभा में आंकड़ों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ये बातें पिछले दिनों कहीं.

अभियोजन विभाग के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आशुतोष पांडेय कहते हैं कि यूपी में महिला अपराधों के मामले में सज़ा दिलाने के मामले में सबसे ऊपर है.

उनके मुताबिक, राज्य में क़रीब 55 फ़ीसद ऐसे अपराधी हैं, जिन्हें अपराध के बाद अब तक सज़ा मिल चुकी है.

एडीजी आशुतोष पांडेय कहते हैं कि ऐसा इसलिए भी हुआ है, क्योंकि तकनीक के ज़रिए अभियोजन की प्रक्रिया को तेज़ किया गया है.

एनसीआरबी के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार महिलाओं के प्रति हिंसा के मामले में अभी भी पहला स्थान उत्तर प्रदेश का ही है. साल 2019 में देश भर में महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले कुल अपराधों में क़रीब 15 फ़ीसद अपराध यूपी में हुए हैं. हालांकि महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश का आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से कम रहा है. साल 2019 में इस मामले में देश का कुल औसत 62.4 फ़ीसद दर्ज किया गया जबकि उत्‍तर प्रदेश में यह 55.4 फ़ीसद ही रहा.

एंटी रोमियो स्कॉड

सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर कहती हैं कि मिशन शक्ति की सफलता का दावा किया जा रहा है लेकिन रोज़ाना होने वाले अपराध भी तो सामने दिख रहे हैं.

उनके मुताबिक, "हैरान करने वाली बात यह है कि ज़्यादातर मामले ऐसे सामने आ रहे हैं जहां पीड़ित की शिकायत ही पुलिस नहीं दर्ज कर रही है. पीड़ित को अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं या फिर अदालत की शरण लेनी पड़ रही है, तब एफ़आईआर दर्ज हो रही है. इन सबके बावजूद, अपराध की इतनी घटनाएं हो रही हैं. एंटी-रोमियो स्क्वाड भी लाया गया था, अब कहीं नहीं दिख रहा है. जो जघन्य घटनाएं लगातार हो रही हैं, उन्हें देखकर तो नहीं लगता कि अपराधियों में किसी तरह का भय हो."

महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए यूपी सरकार और पुलिस इससे पहले भी कई अभियान चला चुकी है लेकिन महिला सुरक्षा को लेकर सरकार अक्सर विपक्ष के निशाने पर रहती है. पिछले दिनों सरकार ने 'ऑपरेशन दुराचारी' नामक अभियान चलाने की भी बात कही थी जिसके तहत महिलाओं और बच्चियों के साथ दुष्कर्म या अन्य अपराध करने वालों के पोस्टर चौराहों पर लगाने की बात कही गई थी.

यही नहीं, यूपी में बीजेपी सरकार ने सत्ता में आते ही महिला सुरक्षा को लेकर एंटी रोमियो स्क्वाड्स का गठन किया था लेकिन न तो अपराधों में कमी आई और न ही एंटी रोमियो स्क्वाड्स की सक्रियता कभी ज़मीन पर दिखी. बल्कि यह एंटी रोमियो स्क्वाड अपनी विवादास्पद कार्रवाइयों को लेकर ही ज़्यादा चर्चा में रहा.

पिछले साल हाथरस, बलरामपुर, आज़मगढ़ जैसी कई जगहों पर लगातार बलात्कार और हत्या की कई घटनाओं के बाद यूपी सरकार ने मिशन-शक्ति अभियान की शुरुआत की थी लेकिन यह अभियान भी अपराधियों में भय पैदा करने में बहुत सफल नहीं रहा.

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