राहुल गाँधी ने कहा- आपातकाल बिल्कुल ग़लत था

इमेज स्रोत, Getty Images
कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने मंगलवार को जाने-माने अर्थशास्त्री प्रोफ़ेसर कौशिक बासु के साथ बातचीत में कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी का आपातकाल लगाने का फ़ैसला एक भूल थी.
राहुल ने कहा कि 1975 से 77 के बीच 21 महीने के आपातकाल के दौरान जो कुछ भी हुआ वो ग़लत था.
राहुल गाँधी ने ये भी कहा कि आपातकाल के दौरान संवैधानिक अधिकार और नागरिक आज़ादी निलंबित कर दी गई थी, प्रेस को प्रतिबंधित कर दिया गया था और बड़ी संख्या में विपक्षी नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया था. लेकिन ये सारी चीज़ें आज के माहौल से बिल्कुल अलग थी.
राहुल गाँधी ने प्रोफ़ेसर बासु से कहा, ''मैं मानता हूँ कि वो एक भूल थी. पूरी तरह से ग़लत फ़ैसला था. और मेरी दादी (इंदिरा गाँधी) ने भी ऐसा कहा था. लेकिन तब कांग्रेस ने भारत के संस्थानिक ढाँचा पर कब्जा करने की कोशिश नहीं की थी. सच कहें तो यह क्षमता भी नहीं है. कांग्रेस की विचारधारा हमें ऐसा करने की अनुमति भी नहीं देती है.''
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 1
सत्ताधारी बीजेपी के जो नेता आपाताकाल में जेल में बंद कर दिए गए थे, वे इस मामले को लेकर हमेशा से कांग्रेस को घेरते रहे हैं. ख़ास करके तब जब कांग्रेस बीजेपी पर अभिव्यक्ति की आज़ादी और असहमति के अधिकार को लेकर सवाल उठाती है.
पिछले साल जून महीने में गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और नेहरू-गाँधी परिवार पर हमला बोलते हुए कहा था कि एक परिवार के सत्ता के लालच ने रातोरात पूरे मुल्क को एक जेल में तब्दील कर दिया था.
राहुल गाँधी ने मंगलवार को कहा कि आपातकाल और आज जो कुछ हो रहा है, उसमें मूलभूत अंतर है. राहुल ने कहा, ''आरएसएस संस्थानों में अपने लोगों को भर रहा है. अगर हमने बीजेपी को चुनाव में हरा भी दिया तब भी हम संस्थानिक ढाँचा में बैठे उनके लोगों से मुक्त नहीं हो पाएंगे.''
राहुल ने कहा, ''आधुनिक लोकतांत्रिक प्रणाली संस्थानिक संतुलन के कारण है. संस्थान स्वतंत्र रूप से काम करते हैं. संस्थानों की स्वतंत्रता पर भारत का सबसे बड़ा संगठन, जिसे आरएसएस कहा जाता है, वो हमला कर रहा है. यह सुनियोजित तरीक़े से किया जा रहा है. हम ये नहीं कहेंगे कि लोकतंत्र कमज़ोर किया जा रहा है बल्कि उसे नष्ट किया जा रहा है.''
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 2
राहुल गाँधी ने कौशिक बासु से बातचीत के दौरान मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से हुई एक बात को साझा किया. राहुल ने कहा, ''जब कमलनाथ मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने बताया कि उनकी सरकार के वरिष्ठ नौकरशाह उनके आदेशों को नहीं मानते हैं क्योंकि वे सभी आरएसएस से जुड़े हैं. इसलिए अभी जो कुछ हो रहा है वो आपातकाल से बिल्कुल अलग है.''
राहुल गाँधी ने कांग्रेस के भीतर आंतरिक लोकतंत्र पर भी बोला. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा और पश्चिम बंगाल कांग्रेस के प्रमुख अधीर रंजन चौधरी के बीच हुई विधानसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर कहासुनी हुई है. आनंद शर्मा जी-23 के हिस्सा हैं और इस समूह के ज़्यादातर नेता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से नाराज़ चल रहे हैं.
राहुल गाँधी ने कहा, ''मैं पहला व्यक्ति हूँ जिसने पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक चुनाव की बात कही. दिलचस्प है कि इस तरह के सवाल दूसरी पार्टियों में नहीं उठते हैं. बीजेपी, बीएसपी और समाजवादी पार्टी में आतंरिक लोकतंत्र की बात कोई नहीं उठाता. मैंने यूथ कांग्रेस में चुनाव कराया और पार्टी के भीतर भी इसकी वकालत की.''

इमेज स्रोत, Getty Images
राहुल गाँधी ने कहा कि भारत का लोकतंत्र गंभीर संकट से जूझ रहा है. राहुल ने कहा, ''एक लोकतंत्र उसके इंस्टिट्युशन की स्वतंत्रता से चलता है लेकिन भारत की वर्तमान व्यवस्था में इस स्वतंत्रता पर हमला किया जा रहा है. आरएसएस भारत के सभी इंस्टिट्युशन पर हमला कर रहा है. न्यायपालिका, निर्वाचन आयोग, नौकरशाही और प्रेस में आरएसएस अपने लोगों को बैठा रहा है. एक नेता के तौर पर मैं अपना काम तभी कर सकता हूँ जब मुझे इन संस्थानों की मदद मिलेगी. अगर मुझे न्यायपालिका, चुनाव आयोग और अन्य संस्थानों से मदद मिलेगी तभी अपना काम कर पाऊंगा. नहीं तो संभव नहीं है. संसद में बहस नहीं होने दी जा रही है.''
राहुल ने कौशिक बासु से कहा, ''मिस्र में होस्नी मुबारक 97 फ़ीसदी वोट से चुनाव जीतते थे. मेरे लिए यह हैरान करने वाला होता था कि ये कैसे संभव है. मैं इसे जानना चाहता था. मुझे लगता था कि पोलिंग बूथ से इनकी मिलीभगत रहती होगी. संयोग से मिस्र में मैं एक कॉन्फ़्रेंस में गया. मुझे आमंत्रित किया गया था. मैंने देखा कि राजनीतिक कॉन्फ़्रेंस में वहां के जज बैठे हुए हैं. मुझे लगा कि ये जज क्यों बैठे हुए हैं. मिस्र में सरकार के सामने कोई इंस्टिट्युशन नहीं था. भारत में भी अब यही हो रहा है. पुदुचेरी में राज्यपाल कोई काम नहीं होने देती थी क्योंकि वो आरएसएस की थी. मणिपुर में भी ऐसा ही हो रहा है.''
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














