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सुप्रीम कोर्ट ने रेप अभियुक्त से पूछा, पीड़िता से शादी करोगे?
सुप्रीम कोर्ट में एक अजीबोग़रीब मामला देखने को मिला.
इसमें एक महिला ने महाराष्ट्र राज्य सरकार के एक कर्मचारी पर शादी के झूठे वादे के बहाने बलात्कार करने का आरोप लगाया था. इसकी सुनवाई के दौरान सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय ने अभियुक्त से पूछा कि क्या वो पीड़िता से शादी कर सकता है और अधिकारियों से उसे अगले चार सप्ताह तक गिरफ़्तार नहीं करने का निर्देश दिया.
चीफ़ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे की अगुवाई वाली सर्वोच्च न्यायालय की तीन जजों की बेंच ने अभियुक्त से पूछा, "अगर आप (पीड़िता से) शादी करना चाहते हैं, तो हम आपकी मदद कर सकते हैं. अगर ऐसा नहीं करते हैं तो आपकी नौकरी चली जाएगी, आप जेल जाएंगे. आपने लड़की के साथ छेड़खानी की, उनके साथ बलात्कार किया है."
चीफ़ जस्टिस बोबडे महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिक प्रोडक्शन कंपनी (एमएसइपीसी) में बतौर टेक्नीशियन कार्यरत अभियुक्त मोहित सुभाष चव्हाण की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे. अभियुक्त पर स्कूली छात्रा ने बलात्कार का आरोप लगाया है.
याचिकाकर्ता के वकील ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की कि उनके मुवक्किल की नौकरी जा सकती है. उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि "कृपया माइलॉर्ड इस पर विचार करें और हमें राहत दें."
सुप्रीट कोर्ट कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार सुचित्र मोहंथी के अनुसार, याचिकाकर्ता ने अदालत को यह भी बताया कि पीड़िता जब पुलिस के पास गईं तो उनकी (अभियुक्त की) माँ ने उन्हें शादी की पेशकश भी की थी. लेकिन पीड़िता ने शादी से इनकार कर दिया.
सुनवाई के दौरान चीफ़ जस्टिस ने वकील से कहा, "छोटी लड़की के साथ छेड़खानी और बलात्कार करने से पहले आपको सोचना चाहिए था. आप जानते हैं कि आप एक सरकारी कर्मचारी हैं."
शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही शादी के झूठे वादे पर एक महिला से बलात्कार करने के अभियुक्त को गिरफ़्तारी से चार हफ़्ते की अंतरिम राहत दे दी.
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