चीन की कंपनियों के निवेश को लेकर भारत ने दी सफ़ाई: प्रेस रिव्यू

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर में कहा गया है कि भारत सरकार ने साफ़ किया है कि चीन की किसी भी कंपनी को निवेश के लिए मंज़ूरी देने के प्रस्ताव पर विचार नहीं हो रहा है.

ये ख़बर ऐसे समय आई है जब भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव वाली कई जगहों में से एक पैंगॉन्ग झील पर दोनों देशों के सैनिक पीछे हटे हैं, जिससे तनाव पहले की तुलना में कम हुआ है.

ख़बर के मुताबिक, भारत ने उन ख़बरों को एकदम ख़ारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि भारत ने चीन के 45 निवेश प्रस्तावों को मंज़ूरी दे दी है.

ख़बर में एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है, ''ये रिपोर्ट तथ्यात्मक रूप से ग़लत है. सरकार ने चीन के निवेश को किसी भी स्तर पर मंज़ूरी नहीं दी है.''

उन्होंने कहा कि सरकार ने हांगकांग के तीन निवेश प्रस्तावों को अवश्य मंज़ूरी दी है जिनमें दो कंपनियां जापान की हैं जबकि तीसरी अनिवासी भारतीय समूह (एनआरआई) है.

केंद्र ने दी 13,700 करोड़ के हथियारों को ख़रीदने के लिए मंज़ूरी

दैनिक जागरण में छपी ख़बर के मुताबिक, सरकार ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा ख़रीद परिषद की बैठक में 13,700 करोड़ रूपये की लागत वाले विभिन्न हथियारों और उपकरणों को ख़रीदने की मंज़ूरी दी गई है.

ख़बर में कहा गया है कि इनमें स्वदेश निर्मित 118 मार्क-1ए अर्जुन टैंकों के साथ 820 बख़्तरबंद वाहन शामिल हैं.

रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सभी ख़रीद प्रस्तावों का डिज़ाइन, विकास और उत्पादन भारत में ही किया जाएगा.

शव नहीं मिले लेकिन डेथ सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक, उत्तराखंड सरकार ने एक आदेश जारी किया है जिसमें चमोली ज़िले में अचानक आई बाढ़ में लापता हुए 134 लोगों के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के लिए कहा गया है.

अधिकारियों का कहना है कि लापता 134 लोगों के बारे में आशंका यही है कि उनमें से कोई जीवित नहीं बचा है. हालांकि उनके शव अभी तक नहीं मिले हैं, लेकिन उन्हें मृत ही माना जाएगा.

अधिकारियों का कहना है कि लापता लोगों को मृत घोषित करने से पीड़ित परिवारों को मुआवज़ा देने की प्रक्रिया में तेज़ी आएगी.

राज्य के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार का कहना है कि मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के बाद भी लापता लोगों के लिए तलाशी अभियान जारी रहेगा.

चमोली ज़िले में ग्लेशियर टूटने से धौलीगंगा नदी में अचानक बाढ़ आ गई थी. इससे ऋषिगंगा प्रोजेक्ट को बड़ा नुकसान पहुँचा है. आपदा की वजह से कम से कम 65 लोग मारे गए हैं.

कोरोना के 75 प्रतिशत नए मामले सिर्फ दो राज्यों में

जनसत्ता में छपी ख़बर के मुताबिक, भारत के सिर्फ दो राज्यों में कोरोना संक्रमण के 75 प्रतिशत मामले सामने आ रहे हैं. ये दो राज्य केरल और महाराष्ट्र हैं.

ख़बर में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण के हवाले से कहा गया है कि भारत में कोरोना वायरस के कुल सक्रिय मामलों में से 38 प्रतिशत केरल में और 37 प्रतिशत मामले महाराष्ट्र में हैं.

ख़बर में नीति आयोग सदस्य वीके पॉल के हवाले से बताया गया है कि भारत में ब्रिटेन वाले कोरोना वैरियंट के अब तक 187 मामले सामने आए हैं. इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका और ब्राज़ील वाले कोरोना वैरियंट के क्रमश: छह और एक मामले का पता चला है.

इस बीच बढ़ते कोरोना संक्रमण के मद्देनज़र कर्नाटक ने केरल से लगने वाली अपनी सीमाओं को बंद कर दिया है. केरल के लोगों के आने-जाने पर कर्नाटक सरकार की नई पाबंदी के विरोध में केरल ने केंद्र सरकार से दख़ल देने का अनुरोध किया है.

केरल ने इस तथ्य की ओर प्रधानमंत्री मोदी का ध्यान खींचा है कि दो राज्यों के बीच आवागमन पर रोक लगाना, केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के ख़िलाफ़ है.

हिन्दू महिला पिता के परिवार को दे सकती है अपनी संपत्ति

हिंदुस्तान में छपी ख़बर के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फ़ैसले में व्यवस्था दी है कि हिन्दू महिला के पिता की ओर से आए लोगों को उसकी संपत्ति में उत्तराधिकारी माना जा सकता है. ऐसे परिजनों को परिवार से बाहर का व्यक्ति नहीं माना जा सकता, जो हिन्दू उत्तराधिकार क़ानून की धारा 15.1 डी के दायरे में आएंगे और संपत्ति के हक़दार होंगे.

ख़बर के मुताबिक, ''जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने कहा कि धारा 13.1 डी को पढ़ने से साफ़ ज़ाहिर है कि पिता के उत्तराधिकारियों को उत्तराधिकारी माना गया है, जो संपत्ति को ले सकते हैं. लेकिन जब महिला के पिता की ओर से आए उत्तराधिकारियों को शामिल किया जाता है, जो संपत्ति को हासिल कर सकते हैं तो ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता है कि वे परिवार के लिए अजनबी हैं और महिला के परिवार के सदस्य नहीं हैं.

ख़बर में कहा गया है कि ''सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दू उत्तराधिकार कानून की धारा 15.1 डी की व्याख्या की और कहा कि हिन्दू महिला के पिता की ओर से आए परिजन अजनबी नहीं हैं, वे भी परिवार का हिस्सा हैं. क़ानून में आए शब्द परिवार को संकीर्ण अर्थ नहीं दिया जा सकता, इसे विस्तारित अर्थ में देखना होगा, जिसमें हिन्दू महिला के परिजन भी शामिल होंगे.''

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