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असम: सीटों की क़ुर्बानियां देंगे, बीजेपी को हटाना लक्ष्य: बदरुद्दीन अजमल - प्रेस रिव्यू
लोकसभा सांसद और एआईयूडीएफ़ के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने इंडियन एक्सप्रेस अख़बार से कहा है कि आगामी असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी को राज्य की सत्ता से बाहर करने के लिए वो कांग्रेस के साथ गठबंधन करेंगे और इसके लिए 'क़ुर्बानियां' देने को तैयार हैं.
असम के बंगाली मूल के मुसलमानों में एआईयूडीएफ़ की अच्छी पकड़ समझी जाती है. धुबरी संसदीय सीट से तीन बार से सांसद अजमल पर बीजेपी लगातार ज़ुबानी हमले कर रही है.
राज्य के वरिष्ठ मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल में इत्र व्यवसायी अजमल को असम का 'दुश्मन' कहा था.
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए अजमल ने कहा, "हिमंत बिस्वा सरमा का यह बेहद गंदा फ़ॉर्मूला है. असम के लोगों को बाँटने का फ़ॉर्मूला. उन्हें अपने काम पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए लेकिन दुर्भाग्य से उन्होंने बीते पाँच सालों में कोई अच्छा काम नहीं किया है और इसीलिए वे मेरा नाम ले रहे हैं."
उन्होंने कहा, "बीजेपी को समझ जाना चाहिए कि जनता बेवकूफ़ नहीं है. यह ऐसा कहने जैसा है कि शेर आ जाएगा, शेर आ जाएगा लेकिन बदरुद्दीन अजमल शेर नहीं है. बदरुद्दीन अजमल एक आम इंसान है."
कांग्रेस और एआईयूडीएफ़ ने राज्य में गठबंधन का फ़ैसला किया है लेकिन मीडिया लगातार सवाल कर रहा है कि दोनों पार्टियां अल्पसंख्यक बहुल इलाक़ों में सीट का बँटवारा कैसे करेंगी.
इस पर अजमल कहते हैं, "कांग्रेस-एआईयूडीएफ़ गठबंधन बहुत अच्छा प्रदर्शन करेगा. सीटों के बँटवारे में हम क़ुर्बानी देने के लिए तैयार हैं. यह क़ुर्बानी इसलिए दी जा रही है क्योंकि बीजेपी को सत्ता से हटाना हमारा इकलौता मक़सद है."
कोविशील्ड को असुरक्षित घोषित करने की याचिका पर नोटिस
कोरोना वायरस की वैक्सीन कोविशील्ड के विपरीत असर होने पर मद्रास हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार, एस्ट्राज़ेनेका को नोटिस जारी किया है.
द हिंदू के अनुसार, क्लीनिकल ट्रायल के दौरान कोविशील्ड वैक्सीन लेने वाले वॉलंटियर में इसके ग़लत लक्षण दिखाई देने के बाद इस वैक्सीन पर रोक लगाने के लिए एक रिट पिटीशन दायर की गई थी जिसके बाद मद्रास हाई कोर्ट ने यह नोटिस जारी किए हैं.
यह नोटिस केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया, आईसीएमआर के महानिदेशक को जारी किए गए हैं और 26 मार्च तक इसका जवाब मांगा गया है.
जस्टिस अब्दुल क़ुद्दूस ने सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया, एस्ट्राज़ेनेका यूके और श्री रामचंद्र इंस्टिट्यूट ऑफ़ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च के एथिक्स कमिटी चेयरमैन को भी यह नोटिस जारी किए हैं.
आसिफ़ रियाज़ नामक बिज़नेस कंसल्टेंट ने यह याचिका दायर की है और साथ ही पाँच करोड़ रुपये का मुआवज़ा भी मांगा है. उनका तर्क है कि वैक्सीन लेने के बाद उनमें विपरीत असर पाया गया जिसके बाद उनको आर्थिक और स्वास्थ्य का नुक़सान हुआ है.
टूलकिट मामला: दिल्ली हाई कोर्ट ने टीवी चैनलों को दी नसीहत
दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि लीक जानकारियां जांच को प्रभावित कर सकती हैं और उसे फैलाना नहीं जा सकता.
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट ने टीवी चैनलों पर टूलकिट मामले पर रिपोर्टिंग करने से रोकने से इनकार कर दिया है. इस मामले में बेंगलुरु की पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि को गिरफ़्तार किया जा चुका है.
हाई कोर्ट की बेंच ने पत्रकारों और समाचार संस्थानों को अपने सूत्रों को सार्वजनिक करने के मामले में राहत दी साथ ही कहा कि उन्हें किसी ख़बर की सत्यता को परखना चाहिए और उसे सनसनीख़ेज़ नहीं बनाना चाहिए.
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह ने कहा कि दिल्ली पुलिस इस मामले में 1 अप्रैल 2020 के ऑफ़िस मेमोरेंडम के निर्देशानुसार तब तक जांच को लेकर प्रेस कॉन्फ़्रेंस पर रोक लगा सकती है जब तक कि 22 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि के अधिकारों का उल्लंघन न हो.
रवि ने गुरुवार को अपने वकील अभिनव सीकरी के ज़रिए दिल्ली हाई कोर्ट से मांग की थी कि वो पुलिस को टूलकिट मामले में ख़बरें लीक करने से रोके.
'लॉकर तोड़ने से पहले उपभोक्ता को बैंक लिखित में सूचित करे'
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि बैंक बिना लिखित नोटिस के लॉकर होल्डर्स के लॉकर को नहीं तोड़ सकते हैं.
द इकोनॉमिक टाइम्स की ख़बर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बैंक लॉकर में रखी किसी भी चीज़ की ज़िम्मेदारी से इनकार नहीं कर सकते हैं.
देश के शीर्ष न्यायालय ने कहा कि बिना क़ानूनी प्रक्रिया के लॉकर को तोड़कर खोलना बैंक की ओर से घोर लापरवाही समझी जाएगी.
जस्टिस मोहन एम. शांतनागौदर और जस्टिस विनीत सरन की खंडपीठ ने आरबीआई को सभी बैंकों के लिए लॉकर प्रबंधन के लिए एक जैसे क़ानून छह महीने में बनाने का भी आदेश दिया.
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