लद्दाख पर राहुल गांधी के बयान के बाद रक्षा मंत्रालय ने कहा- भारत ने कोई क्षेत्र चीन को नहीं दिया

लद्दाख

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों के बाद शुक्रवार को रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी करके कहा है कि भारत ने चीन को कोई भी क्षेत्र नहीं दिया है और अभी भी कई मतभेद हल किए जा रहे हैं.

राहुल गांधी ने शुक्रवार को सुबह प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके लद्दाख में भारत और चीन की सेनाओं के बीच डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया को लेकर हुए समझौते पर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि चीन के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मत्था टेक दिया है.

कांग्रेस नेता का तर्क था कि लद्दाख में पैंगोंग झील पर भारतीय ज़मीन फ़िंगर-4 तक है जबकि चीन को अब फ़िंगर 4 से 3 तक का हिस्सा दे दिया गया है.

उनके इस बयान के बाद रक्षा मंत्रालय ने अपना बयान जारी किया है.

राहुल गांधी

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रक्षा मंत्रालय ने क्या कहा है?

मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि मीडिया और सोशल मीडिया पर पैंगोंग त्सो में डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया पर भ्रामक और ग़लत सूचनाएं फैलाने का संज्ञान रक्षा मंत्रालय ने लिया है.

इसमें कहा गया है, "रक्षा मंत्रालय दोहराता है कि तथ्यात्मक स्थिति को संसद के दोनों सदनों में रक्षा मंत्री द्वारा बताया जा चुका है. हालांकि, यह ज़रूरी है कि मीडिया और सोशल मीडिया में जो भ्रामक सूचनाएं फैलाई जा रही हैं उसका जवाब दिया जाए."

मंत्रालय ने इसके बाद अपने बयान में कहा है कि फ़िंगर-4 तक भारतीय क्षेत्र होने का जो दावा किया गया है वो ग़लत है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय का कहना है, "भारतीय क्षेत्र भारत के नक़्शे के अनुरूप है जिसमें 43,000 स्क्वेयर किलोमीटर का क्षेत्र भी शामिल है जिस पर 1962 से चीन का अवैध क़ब्ज़ा है. यहां तक कि भारत के हिसाब से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को फ़िंगर-8 तक माना जाता है न कि फ़िंगर-4 तक. इसी वजह से भारत लगातार फ़िंगर-8 तक पेट्रोलिंग करने का अधिकार बनाए रखना चाहता है और चीन के साथ वर्तमान सहमति में भी यह शामिल है."

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रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे के दोनों तरफ़ स्थाई पोस्ट स्थापित हैं. भारत की ओर धन सिंह थापा चौकी है जो फ़िंगर-3 के क़रीब है और फ़िंगर-8 के पूर्व में चीन है.

रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि "हालिया समझौता दोनों पक्षों को अपनी सेनाओं को आगे तैनात करने से रोकता है और अब स्थाई चौकियों पर तैनाती होगी. भारत ने समझौते के तहत कोई क्षेत्र नहीं सौंपा है. इसके विपरीत एलएसी का अनुपालन और उसका सम्मान बरक़रार रखा गया है और यथास्थिति में किसी भी एकतरफ़ा परिवर्तन को रोका गया है."

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रक्षा मंत्रालय ने कहा है, "रक्षा मंत्री के बयान से यह भी साफ़ हो गया है कि उन्होंने और दूसरे विवादों के बारे में भी बताया है जिसमें हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और डेपसांग भी शामिल है. इन विवादों को पैंगोंग त्सो में डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया पूरी होने के 48 घंटों के बाद उठाया जाएगा."

"पूर्वी लद्दाख सेक्टर में हमारे राष्ट्रीय हित और क्षेत्र की प्रभावी सुरक्षा इसलिए हो पाई है क्योंकि सरकार ने सैन्य बलों की क्षमता में पूर्ण विश्वास जताया है. जो लोग हमारे सैन्य कर्मियों के बलिदान के कारण हासिल हुई उपलब्धियों पर संदेह करते हैं, वे वास्तव में उनका अपमान कर रहे हैं."

राजनाथ सिंह ने संसद में दिया था बयान

राजनाथ सिंह

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केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह संसद के दोनों सदनों में भारत की स्थिति को स्पष्ट कर चुके हैं.

उन्होंने सदन में कहा था, "मुझे सदन को यह बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि हमारे दृढ़ इरादे और टिकाऊ बातचीत के फलस्वरूप चीन के साथ पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिणी तट पर सेना के पीछे हटने का समझौता हो गया है."

राजनाथ सिंह ने संसद में कहा था, ''चीन अपनी सेना की टुकड़ियों को उत्तरी तट में फ़िंगर 8 के पूरब की दिशा की तरफ़ रखेगा. इसी तरह भारत भी अपनी सेना की टुकड़ियों को फ़िंगर-3 के पास अपनी स्थायी चौकी धन सिंह थापा पोस्ट पर रखेगा."

राजनाथ सिंह ने कहा था, "इसी तरह की कार्रवाई दक्षिणी तटीय इलाक़े में भी दोनों पक्षों द्वारा की जाएगी. ये क़दम आपसी समझौते के तहत बढ़ाए जाएंगे और जो भी निर्माण आदि दोनों पक्षों द्वारा अप्रैल 2020 से उत्तरी और दक्षिणी तट पर किया गया है उन्‍हें हटा दिया जाएगा और पुरानी स्थिति बना दी जाएगी.''

BBC ISWOTY

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